बोर्ड परीक्षा, नया पैटर्न, माता-पिता की उम्मीदें और टेंशन- कैसे करें बच्चे परीक्षा की तैयारी

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    • Author, सुशीला सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

"मेरी दसवीं की बोर्ड परीक्षा है, इस बार नया पैटर्न भी है. माता-पिता बोलते हैं जितना तुम्हें पढ़ना चाहिए उतना तुम पढ़ नहीं रही हो. सिलेबस कम भी हुआ है पर लगता है बहुत पढ़ना है और एमसीक्यू और रिज़निंग के सवाल होंगे तो कठिन लग रहा है."

ये कहना है ईवा रोहिल्ला का जो दिल्ली में केआर मंगलम वर्ल्ड स्कूल में पढ़ती हैं. वो दसवीं कक्षा में हैं.

ईवा रोहिल्ला, छात्र
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दरअसल इस बार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने दसवीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के पैटर्न में बदलाव किए हैं. जिसमें ये तय किया गया है कि दसवीं और 12वीं के छात्रों के लिए परीक्षाएं दो चरणों में होंगी और इसी के आधार पर पाठ्यक्रम को बांट दिया गया.

पहले चरण में बच्चों से मल्टीपल चॉइस या बहुविकल्पीय सवाल (एमसीक्यू) पूछे जाएंगे और दूसरे चरण में लिखित परीक्षा जैसे पहले होती थी उसी पैटर्न पर जारी रहेगी. पहले चरण के लिए नवंबर और दिसंबर में परीक्षाएं हो रही हैं.

बोर्ड परीक्षा और नए पैटर्न को लेकर घबराहट ईवा की आवाज़ में महसूस हो जाती है.

हर्ष अग्रवाल, छात्र
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नया पैटर्न और घबराहट

यही स्थिति 12वीं में पढ़ने वाले हर्ष अग्रवाल की भी है. वे डीपीएस में पढ़ते हैं.

वे कहते हैं, "नए पैटर्न को लेकर एंग्जाइटी है और डर है कि कैसे होगा? पिछली बार दसवीं के बोर्ड में पुराना पैटर्न था तो वैसे ही तैयारी की थी, साथ में ये पता रहता था कि क्या महत्वपूर्ण है, क्या आ सकता है तो तैयारी करना ज़रा आसान था, आप कुछ विषयों की चीज़ें छोड़ भी सकते थे लेकिन अबकी बार एमसीक्यू में चैप्टर के बीच से क्या पूछ लिया जाएगा, पता नहीं."

हर्ष पीसीएम से 12वीं कर रहे हैं. बीबीसी से बातचीत में वे कहते हैं, "मैं वाइडली (विस्तृत तौर पर) हर विषय को पढ़ रहा हूं ताकि कोई टॉपिक न छूटे. हालांकि ये अच्छी बात है कि सिलेबस बांट दिया गया है और फर्स्ट टर्म के लिए समय मिल गया लेकिन सेकंड टर्म सब्जेक्टिव होगा तो समय कम होगा. हालांकि सैंपल पेपर से मदद मिल रही है लेकिन सीबीएसई के इस पैटर्न के प्रश्नपत्र नहीं हैं, ये पहली बार है तो कन्फूज़न भी है."

अशोक गांगूली, पूर्व अध्यक्ष , सीबीएसई

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'बोर्ड का नया पैटर्न बच्चों के हित में'

ईवा और हर्ष की बोर्ड परीक्षा और नए पैटर्न को लेकर एंग्जाइटी समझ आती है लेकिन जानकार मानते हैं ये नया पैटर्न बच्चों के हित में है और उससे घबराने की ज़रूरत नहीं है.

सीबीएसई के पूर्व अध्यक्ष अशोक गांगुली बीबीसी से बातचीत में कहते हैं कि सीबीएसई जो नया मूल्याकंन का पैटर्न लाई है वो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप होने के साथ-साथ बच्चों के हित में भी है.

वे इसका कारण बताते हैं, "पहले जो बच्चे 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में बैठते तो उन्हें पूरे साल के पाठ्यक्रम को पढ़कर परीक्षाएं देनी पड़ती थी. लेकिन अब इसे दो भागों में बांट दिया गया है जो उनके लिए आसान होगा क्योंकि पूरे सिलेबस को ख़त्म करने की टेंशन और जो होड़ लगी रहती थी उसमें कमी आएगी."

सीबीएसई के इस नए पैटर्न की बात करें तो पहले चरण में पूछे जाने वाली परीक्षाओं के लिए छात्रों को 90 मिनट का समय मिलेगा. और दूसरे चरण में होने वाले के लिए दो घंटे मिलेंगे. पहले चरण में एमसीक्यू होंगे तो दूसरे वाले में लिखित में सवालों के जवाब देने होंगे.

नीता अरोड़ा, श्री वेंकटेश्वर इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल

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'नए पैटर्न में नहीं होगी मुश्किल'

श्री वेंकटेश्वर इंटरनैशनल स्कूल की प्रिंसिपल नीता अरोड़ा का कहना है कि स्कूलों में एमसीक्यू के लिए तैयारियां कराई गई हैं ताकि बच्चे पैटर्न समझ सकें.

उनके अनुसार एमसीक्यू में सवाल के चार विकल्प होंगे, उनमें से एक या दो बिल्कुल ग़लत लग सकते हैं. बचे हुए विकल्पों में से कौन सा सही है, समझने के लिए सोचें, तर्क का इस्तेमाल करें, जवाब मिल जाएगा.

"अगर बच्चा शुरू से पढ़ाई कर रहा होगा और विषय को समझ रहा होगा तो किसी भी बच्चे के लिए ये मुश्किल नहीं होना चाहिए."

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साथ ही उदाहरण के तौर पर वे समझाती हैं कि अगर गणित में 50 सवाल पूछे गए हैं तो बच्चों को 40 सवालों के जवाब देने होंगे, एमसीक्यू में तो चार विकल्प मिलेंगे ही, आप वो सवाल भी छोड़ पाएंगे जिसमें आप पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं. इसी तरह हर विषय में भी विकल्प मिलेंगे.

वे बताती हैं कि कोई निगेटिव मार्किंग नहीं होगी तो बच्चों को सभी सवालों के जवाब देने चाहिए और सीबीएसई की वेबसाइट पर जाकर भी बच्चे सैंपल पेपर से मदद ले सकते हैं और तैयारी कर सकते हैं.

साथ ही वे यह भी कहती हैं कि रिवीजन ज़रूर करें और ध्यान से करें. अगर आपको कुछ सुधार करने को दिखता है तो रिवीजन के वक़्त आपके पास ये विकल्प है.

कैसे करें तैयारी?

अशोक गांगुली के अनुसार बच्चों को टाइम-टेबल बनाना चाहिए और बोर्ड द्वारा प्रकाशित सैंपल पेपर का अभ्यास करना चाहिए.

वे सलाह देते हैं कि अगर बच्चे बाज़ार में उपलब्ध सैंपल पेपर से अभ्यास करेंगे तो वो आर्गेनाइज़ होकर नहीं पढ़ पाएंगे और कन्फ्यूज़ हो जाएंगे. इस समय आपको ख़ुद को आर्गेनाइज़ करने की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है.

उनके मुताबिक 90 मिनट में बच्चों को प्रश्नपत्र को हल करने का पर्याप्त समय मिलेगा तो सबसे पहले वे ध्यानपूर्वक और शांति से प्रश्न-पत्र को पढ़ें और पैनिक न करें.

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वे कहते हैं कि बच्चों को प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए 20 मिनट का समय मिलेगा. उन्हें इस समय का सदुपयोग कर के ये फ़ैसला करना होगा कि कौन से सवाल उन्हें आते हैं और किसमें उन्हें दुविधा है. पहले वही सवाल हल करें जिन्हें लेकर वो पूरी तरह से आश्वस्त हैं.

  • कई सवाल करने में कुछ सेकंड लगेंगे तो बाकी बचा समय उसमें लगाएं जहां कैलकुलेशन या गणना करने या सोचने में थोड़ा समय लगेगा.
  • कैलकुलेशन करने के लिए रफ़ शीट दी जाएगी और सभी सवालों को ज़रूर अटेम्प्ट करें.
  • गणित रोज़ पढ़ें लेकिन दूसरे विषयों को रोटेट यानी एक-एक कर पढ़ते रहें.
  • चैप्टर (पाठ) में किसी भी विषय या लाइन से सवाल पूछे जा सकते हैं तो सिलेक्टिव स्टडी से बचें और एक चैप्टर के हर विषय को अच्छी तरह से समझें और याद करें.
  • अगर किसी विषय को लेकर दिक्कतें पेश आ रही हैं तो शिक्षकों, अभिभावकों और दोस्तों से तुरंत मदद लें.

ऊपर दी गई सलाहों के बाद अशोक गांगुली कहते हैं, "इन परीक्षाओं का मूल्याकंन कंप्यूटाराइज़ड होगा तो ग़लतियों की भी संभावना नहीं रहेगी. और दूसरे चरण में भी लंबे सवाल पहले जैसे नहीं होंगे कि जहां बड़े-बड़े निबंध जैसे जवाब लिखने होते थे. अब संभावना है कि शॉर्ट, वेरी शॉर्ट या बस एक पैरा जवाब में लिखना होगा. और इसके लिए दो घंटे का समय मिलेगा."

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मन शांत और स्थिर

गांगुली इस बात पर ज़ोर देते हैं कि बच्चों को मन स्थिर और शांत रखना होगा. अक्सर ये देखा जाता है कि बच्चे परीक्षा से पहले नर्वस होने लगते हैं.

जहां वे दोस्तों के साथ प्रतिस्पर्धा से जूझ रहे होते हैं वहीं सिलेबस को ख़त्म करने की होड़ और अभिभावकों की अपेक्षाएं भी उन पर हावी होती चली जाती हैं.

सेंट स्टीफेंस अस्पताल में सीनियर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट संजिता प्रसाद कहती हैं 100 फ़ीसद अंक पाने का प्रेशर बच्चे और अभिभावकों दोनों पर है. हर अभिभावक चाहते हैं कि उनका बच्चा कामयाब हो 100 फ़ीसद अंक लाए, अच्छे कॉलेज में दाखिला ले.

संजीता प्रसाद
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वे कहती हैं, ''बच्चों के मन में पीयर्स प्रेशर, इंटरनल प्रेशर और पैरेंटल प्रेशर सब एकसाथ चल रहा होता. ऐसे में उन्हें ये सिखाना बहुत ज़रूरी है कि उन्हें इतना समर्थ बनना चाहिए कि वो तनाव झेल सके और उससे बाहर निकल सके."

उनके अनुसार, "बच्चों में अपने लुक्स, कपड़ों और इसके साथ पढ़ाई को लेकर काफ़ी पीयर प्रेशर होता है ऐसे में अभिभावकों की ज़िम्मेदारी होती है कि वो उन्हें मज़बूत बनना सिखाएं. और इसकी शुरुआत बचपन से ही होनी चाहिए."

वे अभिभावकों को सलाह देती हैं कि अगर बच्चा फेल हो जाए या कम नंबर मिले तो ये बताना चाहिए भविष्य ख़त्म नहीं हो जाता. लेकिन अगर बच्चे में काबलियत है तो वो आगे बेहतर कर सकते हैं. ऐसे में आत्मविश्वास ही उनकी पूंजी हो सकती है जिसमें अभिभावकों और शिक्षकों की अहम भूमिका हो सकती है.

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