बिहार के एक स्कूल में तीन साल तक 'छात्रों' को सैनिटरी नैपकिन देने का मामला क्या है

ये मामला सारण के मांझी प्रखंड के हलखोरी साह उच्च विद्यालय का है

इमेज स्रोत, Anupam

इमेज कैप्शन, ये मामला सारण के मांझी प्रखंड के हलखोरी साह उच्च विद्यालय का है
    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

बिहार के सारण (छपरा) ज़िले में एक अजीबोग़रीब मामला सामने आया है.

यहां के एक स्कूल में नौवीं और दसवीं में पढ़ने वाले छात्रों (लड़कों) को सैनिटरी नेपकिन ख़रीदने के लिए सरकारी मदद देने की कथित गडबड़ी सामने आई है. ये सरकारी मदद उन्हें तीन वित्त वर्षों 2016-17, 2017-18 और 2018-19 के दौरान मिली.

सारण ज़िले के शिक्षा पदाधिकारी अजय कुमार सिंह ने इस संबंध में कहा, "इस मामले की जांच अभी चल रही है. दो तीन दिन में मामला स्पष्ट हो जाएगा. अभी तो ये जांच की जाएगी कि बहुत सारी लाभार्थी छात्राओं के नामों के बीच जो 6-7 लड़कों के नाम हैं, आख़िर उसकी सच्चाई क्या है?"

वहीं ज़िला कार्यक्रम पदाधिकारी राजन कुमार गिरी ने बताया, "सभी पक्षों को 24 जनवरी को बुलाया गया है. यदि और ऐसे मामले संज्ञान में आते हैं, तो जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है."

वीडियो कैप्शन, बिहार में परिवारों को निगलती ज़हरीली शराब

क्या है पूरा मामला?

ये मामला सारण के मांझी प्रखंड के हलखोरी साह उच्च विद्यालय का है. 10वीं कक्षा तक चलने वाले इस स्कूल में साल 2016 से मार्च 2021 तक प्रधानाध्यापक अशोक कुमार राय थे.

मार्च 2021 में जब अशोक कुमार राय रिटायर हुए तो उन्होंने नियम के अनुसार अपना कार्यभार स्कूल के सबसे वरिष्ठ शिक्षक रईसुल अहरार ख़ान को सौंप दिया.

रईसुल अहरार ख़ान ने बताया, "अशोक जी ने जब मुझे चार्ज दिया तो उन्होंने रजिस्टर में सिर्फ़ इतना दर्ज किया कि मैं सेवानिवृत्त हो रहा हूं और वो अपना चार्ज मुझे दे रहे हैं. लेकिन उस वक़्त उन्होंने मुझे वित्त और अभिलेख का (फ़ाइनेंशियल और डॉक्यूमेंट्स) चार्ज नहीं सौपा. बल्कि ये लिखा कि अगली तिथि को ये चार्ज वो मुझे सौंप देंगे."

हलखोरी साह उच्च विद्यालय

इमेज स्रोत, Anupam

ऐसे लड़कों को भी फ़ायदा मिला जिनका नामांकन ही नहीं

रईसुल अहरार के मुताबिक़, तीन माह तक जब उन्हें वित्तीय चार्ज नहीं मिला तो उन्होंने विद्यालय के तीन कोष- छात्र कोष, विकास कोष, समग्र शिक्षा कोष से जुड़े खाते देखे.

उन्होंने कहा, "150 पन्नों के इस स्टेटमेंट में मैंने 10 से 12 ऐसे लड़कों को चिह्नित किया जिन्हें सैनिटरी नैपकिन की राशि मिली. इनमें से कई ऐसे भी हैं जिनका स्कूल में नामांकन तक नहीं हुआ. जिन छात्रों के नाम पर ये राशि दी गई है, उनको ढूंढ पाना मेरे लिए मुश्किल है."

विभाग को लिखे पत्र में रईसुल अहरार ने इस बात का उल्लेख किया है कि अशोक कुमार राय के पांच साल के कार्यकाल के दौरान एक करोड़ की राशि विद्यालय को आवंटित हुई.

उसमें से 53 लाख रुपये छात्र-छात्राओं की कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटित किए गए थे. साल 2016 से 2019 तक का उपयोगिता प्रमाणपत्र पूर्व प्रधानाध्यापक अशोक कुमार राय ने नहीं दिया, जबकि अभी इस खाते में सिर्फ़ 13 लाख रुपये ही बचे हैं.

हलखोरी साह उच्च विद्यालय

इमेज स्रोत, Anupam

जून 2021 से विभाग को 6 पत्र लिखे

रईसुल अहरार ने इस संबंध में ज़िला शिक्षा अधिकारी को पहली चिठ्ठी 16 जून, 2021 को लिखी. इसके बाद भी उन्होंने पांच पत्र विभाग को इस संबंध में लिखे.

लगातार लिखे जा रहे इन पत्रों के चलते सितंबर 2021 में ज़िला कार्यक्रम पदाधिकारी की दो सदस्यीय टीम बनाई गई, लेकिन उसका नतीजा सिफ़र रहा. मामले की जांच जनवरी 2022 में ही शुरू हो पाई, जब स्थानीय मीडिया ने इस मामले को छापा.

ज़िला कार्यक्रम पदाधिकारी राजन कुमार गिरी से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "सितंबर में चुनाव (पंचायत चुनाव) थे."

काफ़ी कोशिशों के बाद भी इस संबंध में पूर्व प्रधानाध्यापक अशोक कुमार राय से बात नहीं हो पाई.

नीतीश कुमार

इमेज स्रोत, Getty Images

सैनिटरी नैपकिन योजना

नीतीश सरकार ने छात्राओं का ड्रॉप आउट रेट घटाने के लिए अपने कार्यकाल में साइकिल, पोशाक, छात्रवृत्ति और सैनिटरी नैपकिन जैसी योजनाएं शुरू कीं. सैनिटरी योजना के तहत 150 रुपये सालाना मिलते हैं. हालांकि सरकार ये जो मदद कर रही है, वो बहुत कम है.

राजधानी पटना से सटे फुलवारी शरीफ़ और पुनपुन के 100 टोलों की बच्चियों के बीच गौरव ग्रामीण नाम की संस्था ने साल 2019 में ग्रुप डिस्कशन कराया था.

संस्था की सचिव प्रतिमा कुमारी के मुताबिक, "उसमें ये बाद स्पष्ट तौर पर सामने आई थी कि ये राशि बहुत कम है और ज़्यादातर छात्राएं सरकार से मिल रही इस राशि का इस्तेमाल अपने स्कूल की पोशाक ख़रीदने में करती हैं. छात्राओं का साफ़ कहना था कि उन्हें पोशाक के लिए भी इतने पैसे सरकार नहीं देती कि वो कायदे के कपड़े ख़रीद सकें."

वीडियो कैप्शन, बिहार की इंदु देवी, जो अपने गीतों से तंज करती हैं

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)