‘मेरे कोविड वैक्सीन सर्टिफ़िकेट पर पीएम मोदी की तस्वीर क्यों है?’

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    • Author, गीता पांडे
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, दिल्ली

केरल हाई कोर्ट अगले सप्ताह इस मुद्दे पर सुनवाई करेगा कि कोविड-19 सर्टिफ़िकेट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर होनी चाहिए या नहीं.

पीटर एम नाम के शख़्स का कहना है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के बिना एक नया सर्टिफ़िकेट चाहते हैं. उन्होंने ही सर्टिफ़िकेट पर तस्वीर के ख़िलाफ़ याचिका दायर की है.

उनका कहना है, "यह मेरे मौलिक अधिकारों का हनन करता है."

पीटर एम 62 वर्षीय एक सूचना का अधिकार कार्यकर्ता हैं और भारत की विपक्षी पार्टी कांग्रेस के सदस्य हैं.

वैक्सीन सर्टिफ़िकेट में पीएम मोदी की तस्वीर भी होती है

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कोट्टायम ज़िले में अपने घर से उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, "मेरे सर्टिफ़िकेट पर अपनी तस्वीर डालकर उन्होंने नागरिकों के निजी क्षेत्र में दख़ल दी है. यह असंवैधानिक है और मैं निवेदन करता हूं कि माननीय प्रधानमंत्री इस ग़लत और शर्मनाक हरकत को तुरंत रोकें."

उन्होंने कहा, "यह लोकतंत्र में बिल्कुल अनुचित है और राष्ट्र या किसी व्यक्ति के लिए इसका कोई इस्तेमाल नहीं है."

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी वैक्सीन सर्टिफ़िकेट में व्यक्तिगत जानकारियों के अलावा प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर के साथ-साथ अंग्रेज़ी और एक स्थानीय भाषा में दो संदेश लिखे होते हैं.

अगस्त में स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने संसद में कहा था कि 'बड़े सार्वजनिक हितों' को देखते हुए तस्वीर और बयान को सर्टिफ़िकेट में शामिल किया गया है ताकि लोग टीकाकरण के बाद भी कोविड आधारित व्यवहार का पालन करने को लेकर प्रेरित हों.

भारत एक अरब कोविड वैक्सीन लगाने के क़रीब पहुंच चुका है

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'मेरे सर्टिफ़िकेट में मोदी की तस्वीर क्यों होनी चाहिए?'

हालांकि पीटर एम कहते हैं कि जो लोग वैक्सीन ले चुके हैं वो 'पहले से ही व्यवहार को लेकर आश्वस्त हैं' और सर्टिफ़िकेट पर लिखा हुआ संदेश 'सिर्फ़ उपदेश देने से अधिक कुछ नहीं है.'

"मोदी न ही हमारे पहले प्रधानमंत्री हैं और न ही यह भारत का पहला टीकाकरण कार्यक्रम है. लेकिन कोविड-19 और वैक्सीन कार्यक्रम के ख़िलाफ़ अभियान को ऐसे दिखाया गया है कि यह सिर्फ़ एक आदमी का कार्यक्रम है. यह प्रधानमंत्री का प्रोपेगैंडा टूल है."

पीटर एम ख़ासे ख़फ़ा नज़र आते हैं. वो बताते हैं कि 'सरकारी अस्पताल में मुफ़्त वैक्सीन के कारण अपॉइंटमेंट के लिए लंबी लाइनें थीं इसके कारण उन्होंने भुगतान करके निजी अस्पताल में अपना टीकाककरण कराया."

वो पूछते हैं, "मैंने हर ख़ुराक के लिए 750 रुपये का भुगतान किया तो मेरे सर्टिफ़िकेट पर मिस्टर मोदी की तस्वीर क्यों होनी चाहिए?"

केरल हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को इस पर जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है.

पीएम मोदी को धन्यवाद कहते हुए बैनर भारत के कई शहरों में लगाए गए हैं

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मैंने भारतीय जनता पार्टी के दो प्रवक्ताओं से इस मुद्दे पर टिप्पणी लेनी चाहिए, लेकिन उन्होंने पीटर एम की याचिका पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

वैक्सीन सर्टिफ़िकेट पर तस्वीर का विरोध

वैक्सीन सर्टिफ़िकेट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर होने का उनके कई राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी विरोध कर रहे हैं. कुछ विपक्षी पार्टी शासित राज्यों ने उनके फ़ोटो को हटाकर अपने मुख्यमंत्री की तस्वीर लगा दी है.

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा आरोप लगा चुकी हैं कि प्रधानमंत्री मोदी वैक्सीन का इस्तेमाल 'व्यक्तिगत प्रचार' के लिए कर रहे हैं. वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि पीएम मोदी को लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र पर भी ख़ुद की तस्वीर लगानी चाहिए.

उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पूछा, "मान लीजिए मैं आपकी समर्थक नहीं हूं. मुझे आप पसंद नहीं हैं, लेकिन मुझे यह रखना होगा. क्यों? लोगों की स्वतंत्रता कहां है?"

उन्होंने कहा, "आपने कोविड सर्टिफ़िकेट्स पर अपनी तस्वीर को अनिवार्य कर दिया है. तो अब मृत्यु प्रमाण पत्र पर भी इसे करिए."

इस तस्वीर की वजह से हाल ही में अंतरराष्ट्रीय यात्रा कर रहे भारतीय यात्रियों को समस्या भी हुई थी.

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वाइस न्यूज़ ने हाल में एक रिपोर्ट की थी जिसमें बताया गया था कि पीएम मोदी के चेहरे से अनजान एक इमीग्रेशन अफ़सर ने कई यात्रियों पर जालसाज़ी का आरोप लगा दिया था.

पीटर एम चिंता जताते हुए कहते हैं कि अगर इसे ऐसा ही छोड़ दिया गया तो पीएम मोदी 'अगले चरण में हमारे बच्चों के स्कूल और कॉलेज लीविंग सर्टिफ़िकेट्स पर अपनी तस्वीरें लगा देंगे.'

उनकी चिंता इस कारण भी है क्योंकि पीएम मोदी की तस्वीरें उन जगहों पर भी आ जाती हैं जहां उनके होने का कोई मतलब नहीं है.

तस्वीर के होने को अच्छा बताते हैं समर्थक

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बाद कोर्ट के एक आधिकारिक ईमेल से पीएम मोदी की तस्वीर के साथ मौजूद सरकारी विज्ञापन को हटाने को कहा गया था.

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प्रधानमंत्री मोदी का फ़ोटो खिंचवाने और सेल्फ़ी लेने का प्यार जगज़ाहिर है. सोशल मीडिया पर उनको भारी संख्या में लोग फ़ॉलो करते हैं और देशभर में होने वाली उनकी रैलियों में हज़ारों लोग शामिल होते हैं.

उनके समर्थक कहते हैं कि वैक्सीन सर्टिफ़िकेट पर प्रधानमंत्री की तस्वीर के होने में कुछ भी ग़लत नहीं है और वो देश में सबसे अधिक पहचाना जाने वाला चेहरा हैं.

बिलबोर्ड्स से लेकर गलियों की होर्डिंग्स तक पर पीएम मोदी का चेहरा है जिसमें वो मुस्कुरा रहे हैं. इसके अलावा अधिकतर मंत्रालयों के विज्ञापनों और वेबसाइट पर उनका चेहरा होता है और समाचार पत्र पर आने वाले मंत्रालयों के विज्ञापनों में भी वो छाए रहते हैं.

महिमामंडन की राजनीति

आलोचकों का कहना है कि भारत में कभी कोई ऐसा नेता नहीं रहा जो ख़ुद के गुणगान में इस तरह से शामिल रहा हो. बीजेपी कांग्रेस पार्टी की आलोचना करती रही है कि गांधी-नेहरू ख़ानदान के नाम पर एयरपोर्ट, विश्वविद्यालयों, पुरस्कारों और कल्याणकारी योजनाओं के नाम रखे जाते रहे हैं.

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दलित आइकन और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को ख़ुद की मूर्ति बनवाने के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता सस्ते खाने की कैंटीन, दवाओं और नमक के पैकेटों पर ख़ुद का चेहरा इस्तेमाल करती थीं.

पत्रकार और पीएम मोदी की जीवनी लिखने वाले नीलांजन मुखोपाध्याय कहते हैं, "पीएम मोदी इस आत्म प्रशंसा को अलग स्तर पर लेकर गए हैं."

"वो आरएसएस के सदस्य रहे हैं जो यह सिखाता है कि संगठन व्यक्ति से बड़ा होता है, लेकिन उनके निर्देशन में एक व्यक्ति संगठन से बड़ा बन गया है."

"अगर आप उन्हें बोलता सुनेंगे तो वो कभी यह नहीं कहते कि हमारी सरकार ने यह किया है बल्कि वो इसकी जगह मेरी सरकार या मोदी सरकार कहते हैं. सार्वजनिक भाषणों के दौरान वो 'मैं, मेरा, मेरे द्वारा' का अधिक इस्तेमाल करते हैं. फ़रवरी में उन्होंने अपने नाम पर ही एक स्टेडियम का नाम रख दिया."

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मुखोपाध्याय कहते हैं कि पीएम मोदी ने महामारी को 'ख़ुद के प्रचार के लिए एक बड़े अवसर के तौर पर इस्तेमाल किया है.'

वो कहते हैं, "अब तक कोविड-19 से सुरक्षा के लिए सिर्फ़ वैक्सीन ही एकमात्र उपाय है और उसके सर्टिफ़िकेट पर भी अपनी फ़ोटो लगाकर उन्होंने ख़ुद को लोगों के रक्षक के तौर पर दिखाना चाहते हैं."

"वो देवता के मानवीय चेहरे के रूप में ख़ुद को दिखाना चाहते हैं ताकि वो लोगों का भरोसा हासिल कर सकें और वो फिर उनके लिए वोट में तब्दील हो."

मतदाताओं को प्रभावित करता है ऐसा प्रचार?

इमेज गुरु दिलीप चेरियन कहते हैं कि प्रधानमंत्री की वैक्सीन सर्टिफ़िकेट पर फ़ोटो 'पार्टी के नज़रिए और सरकार के नज़रिए के बीच एक महीन रेखा है."

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वो कहते हैं कि 'सर्टिफ़िकेट का इस्तेमाल वोट हासिल करने के लिए एक हथियार के तौर पर किया जा रहा है."

"यह चुनावी लाभ पाने के तौर पर लगता है, लेकिन इसी तरह से और भी साधन काम कर रहे हैं. जैसे कि वैक्सीन सर्टिफ़िकेट के अलावा सरकारी योजनाओं के दस्तावेज़, इन सभी का संदेश एक ही है."

चेरियन कहते हैं कि 'चेहरे की पहचान' एक बड़ी भूमिका अदा करता है क्योंकि आज पार्टी की पहचान व्यक्ति के साथ जुड़ चुकी है.

"अपनी तस्वीर को लगाने का उद्देश्य व्यक्तिगत वोटरों को अपनी पहचान की याद दिलाना है."

पीटर एम बताते हैं कि पीएम मोदी की तस्वीर वैक्सीन सर्टिफ़िकेट पर होने में आख़िर क्या दिक़्क़त है.

वो कहते हैं, "वो एक राजनेता हैं जो एक पार्टी का नेतृत्व करते हैं, वो चुनाव लड़ते हैं और यह उनके विरोधियों पर एक बढ़त देता है और इसे तुरंत रुकना चाहिए."

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