कोरोना: भारत के सुदूर इलाक़ों में ड्रोन करेंगे वैक्सीन की डिलीवरी

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भारत सरकार के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बीबीसी से बताया है कि भारत में टीकाकरण अभियान में तेज़ी लाने के लिए कमर्शियल ड्रोन सर्विस के माध्यम से कोविड-19 वैक्सीन की डिलीवरी शुरू की गई है.

डॉ. समीरन पांडा ने बताया कि देश के पूर्वोत्तर इलाक़े के पर्वतीय राज्यों में वैक्सीन पहुँचाने के लिए ड्रोन की मदद ली जा रही है.

भारत का लक्ष्य वर्ष 2021 के अंत तक उन सभी नागरिकों का टीकाकरण करना है, जो इसके योग्य हैं. लेकिन जानकारों का कहना है कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अभियान को और तेज़ करने की आवश्यकता है.

भारत अभी तक सरकार द्वारा स्वीकृत तीन तरह की कोरोना वैक्सीन की 92.5 करोड़ खुराक लोगों को दे चुका है.

आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक़ कोविड वैक्सीन लेने की योग्य आबादी में से क़रीब 70 फ़ीसदी को वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ मिल चुकी है.

भारत कोरोना संक्रमण के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है. पहले स्थान पर अमेरिका है. भारत में कोरोना संक्रमण के क़रीब 3.3 करोड़ मामले सामने आ चुके हैं.

कोरोना संक्रमण से होने वाली मौतों के मामले में भी भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है. इस मामले में पहले नंबर पर अमेरिका और दूसरे नंबर पर ब्राज़ील है. भारत में कोरोना के कारण 4 लाख 40 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है.

इस सोमवार को भारत सरकार ने पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में ड्रोन से वैक्सीन की डिलीवरी का पहला परीक्षण भी किया.

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विष्णुपुर से कोरोना वैक्सीन की 10 ख़ुराक़ लेकर एक ड्रोन लोकताल (240 वर्ग किलोमीटर की झील, जो कई द्वीपों से घिरी हुई है) के करांग द्वीप में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए रवाना हुआ. ये ड्रोन सिर्फ़ 12 मिनट में वहाँ पहुँच गया. करांग द्वीप में क़रीब 3500 लोग रहते हैं. नाव और सड़क मार्ग से होते हुए यहाँ तक पहुंचने में आम तौर पर क़रीब चार घंटे का समय लगता है.

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर के प्रमुख वैज्ञानिक और महामारी विज्ञान के प्रमुख डॉ. पांडा के मुताबिक़, ड्रोन से वैक्सीन सप्लाई की ये परीक्षण सफल रहा और करांग द्वीप के दस लोगों ने वैक्सीन ली.

उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि इस परीक्षण के सफल होने से मणिपुर और नगालैंड राज्यों के दूर-दराज़ गाँवों तक वैक्सीन पहुँचाना आसान होगा.

इन इलाक़ों तक पहुँचने के लिए पहाड़ी रास्तों से गुज़रना पड़ता है, कभी-कभी पहाड़ी नदी-नालों को पार करना पड़ता है, जिसमें अक्सर बारह घंटे तक का समय तक लग जाता है.

अंडमान और निकोबार के पूर्वी द्वीपसमूह तक वैक्सीन पहुँचाने के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा, जहाँ नाव से वैक्सीन पहुँचाने में लंबा समय लग रहा था.

डॉ. पांडा कहते हैं, "हम ये सुनिश्चित करने की कोशिश भी कर रहे हैं कि इन दूर-दराज के कम आबादी वाले इलाक़ों के निवासियों का तेज़ी से टीकाकरण हो, ताकि महामारी न फैले. क्योंकि अगर इन इलाक़ों में लोग संक्रमित होते हैं और उन्हें गंभीर बीमारी होती है, तो उनके पास इन इलाक़ों में वेंटिलेटर्स, आईसीयू या ऑक्सीजन की सुविधा नहीं होगी."

सरकार उन ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रही है, जो 4.5 किलोग्राम का भार या वैक्सीन की अधिकतम 900 खुराक ले जा सके और कम से कम 70 किलोमीटर (40 मील) उड़ान भर सके.

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भारत में टीकाकरण अभियान

16 जनवरी से अभी तक भारत में 92.5 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं.

67 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन की पहली डोज़ मिल चुकी है और क़रीब 25.5 करोड़ लोगों ने वैक्सीन की दोनों डोज़ ले ली है.

17 सितंबर को भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 71वाँ जन्मदिन था. इस दिन रिकॉर्ड स्तर पर वैक्सीनेशन हुआ और दो करोड़ से ज़्यादा वैक्सीन की खुराक दी गई.

विशेषज्ञ मानते हैं कि रिकार्डतोड़ वैक्सीन वाले दिन उत्साहवर्धक हैं, लेकिन टीकाकरण दर में और तेज़ी लाए जाने की ज़रूरत है.

उनका आकलन है कि इस साल के अंत तक सभी योग्य लोगों को टीकाकरण देने का लक्ष्य पूरा करने के लिए हर दिन एक करोड़ से ज़्यादा वैक्सीन की खुराक देने की आवश्यकता है.

लेकिन ये इस लोगों में वैक्सीन को लेकर हिचक के स्तर और वैक्सीन की उपलब्धता पर निर्भर करेगा.

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भारत में कोरोना संक्रमण के मामलों में गिरावट आ रही है. पिछले महीने हर दिन संक्रमण के नए मामले 40 हज़ार से नीचे ही रहे. लेकिन डॉक्टरों ने तीसरी लहर को लेकर आशंका जताई है. क्योंकि कोरोना के नए वैरिएंट के ख़रते के बावजूद देश अब पूरी तरह खुल चुका है.

एक ओर जहाँ टीकाकरण अभियान में तेज़ी आई है, डॉक्टर टीकाकरण में जेंडर-गैप को लेकर चिंतित है. सरकारी आँकड़ों के अनुसार पुरुषों की तुलना में 6 फीसदी कम महिलाओं का टीकाकरण हुआ है.

भारत के ग्रामीण इलाक़ों में ये अंतर ख़ास तौर पर है, जहाँ इंटरनेट तक महिलाओं की पहुँच सीमित है. साथ ही उनमें टीकाकरण को लेकर हिचक और डर भी है.

हालाँकि भारत के ग्रामीण इलाक़ों में भी बड़ी संख्या में टीकाकरण हो रहा है, लेकिन शहरी इलाक़ों में आबादी के बड़ा हिस्से को वैक्सीन मिल रही है.

विकासशील दुनिया के ज़्यादातर देशों को वैक्सीन मिलने में परेशानी हुई है. लेकिन दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के रूप में भारत इस संकट का सामना करने की उम्मीद नहीं की थी.

मोदी सरकार ने शुरू में वैक्सीन निर्माताओं को ऑर्डर नहीं दिया और अप्रैल में आई कोरोना की ख़तरनाक दूसरी लहर ने उसे मजबूर किया कि वो अपनी पूरी वयस्क आबादी को जल्द से जल्द वैक्सीन दे. ये आबादी क़रीब एक अरब है.

जून महीने में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि अगस्त से दिसंबर के बीच 1.35 अरब डोज़ उपलब्ध होगी. भारत में सभी वयस्कों के टीकाकरण के लिए लगभग 1.8 अरब ख़ुराक़ की आवश्यकता होगी.

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भारत किस टीके का उपयोग कर रहा है?

भारत में तीन तरह के टीके लगाये जा रहे हैं. ऑक्सफर्ड-एस्ट्राज़ेनेका की कोविशील्ड, भारतीय कंपनी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और रूस में बनी स्पुतनिक वी

भारत ने 18 साल से कम उम्र के लिए भी अपने पहले टीके को मंज़ूरी दे दी है.

कैडिला हेल्थकेयर ने एक अंतरिम अध्ययन में पाया है कि जिन लोगों को तीन-ख़ुराक़ वाली ZyCoV-D वैक्सीन लगी है, उनमें से 66% लोगों में बीमारी के लक्षण नहीं आए. ZyCoV-D कोरोना को रोकने के लिए दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन है.

भारत सरकार ने भारतीय फार्मा कंपनी सिप्ला को मॉडर्ना वैक्सीन आयात करने के अधिकृत किया है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि भारत को इसकी कितनी ख़ुराक़ मिलेगी. मॉडर्ना वैक्सीन को 95 फ़ीसदी कारगर पाया गया है. कई अन्य वैक्सीन भी मंज़ूरी के अलग-अलग चरणों में हैं.

देश में कोरोना वैक्सीन के लिए 70 हज़ार से अधिक सेंटर बनाए गए हैं. ज़्यादातर सेंटर सरकारी हैं, जहाँ वैक्सीन मुफ़्त में दी जा रही है, लेकिन आप पैसे देकर प्राइवेट सेंटर में भी वैक्सीन ले सकते हैं.

सरकार लोक स्वास्थ्य केंद्र, सरकारी क्लिनिक और अस्पतालों में मुफ़्त वैक्सीन के लिए क़रीब पाँच अरब डॉलर ख़र्च कर रही है.

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क्या टीकाकरण के बाद कोई साइड-इफ़ेक्ट होता है?

बहुत से लोगों ने वैक्सीन लेने के बाद बुखार, दर्द की शिकायत की है.

भारत में वैक्सीनेशन के बाद दुष्प्रभाव पर नज़र रखने के लिए 34 साल पुराना निगरानी कार्यक्रम है. जानकारों का कहना है कि इस तरह के मामलों को पारदर्शी रूप में रिपोर्ट करना चाहिए और ऐसा न होने से वैक्सीन को लेकर डर पैदा हो सकता है.

भारत में 17 मई तक हुए टीकाकरण के बाद करीब 23,000 ऐसे मामले सामने आए, जिसमें लोगों ने साइड-इफ़ेक्ट्स की शिकायत की.

ज़्यादातर लोगों ने वैक्सीन लेने के बाद उन्हें चक्कर आने,उल्टी होने, बुखार आने और शरीर में दर्द की शिकायत की. इसके अलावा 700 मामले ऐसे सामने आए जिसमें दुष्प्रभाव बहुत गंभीर था. जून के मध्य तक 488 मौतों की पुष्टि की गई.

लेकिन सरकार का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं कि ये मौतें टीकाकरण के कारण हुईं.

सरकार का दावा है कि वैक्सीन लेने से मौत का ख़तरा कोरोना के कारण होने वाली मौत के ख़तरे की तुलना में नगण्य है.

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