कोरोना वैक्सीन का उत्पादन अभी कुछ हफ़्तों तक नहीं बढ़ पायेगा - प्रेस रिव्यू

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भारत में कई राज्यों से कोरोना वैक्सीन की कमी की ख़बरें आने के बावजूद अभी कंपनियों को इसका उत्पादन बढ़ाने में हफ़्तों का वक्त लग सकता है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि अभी अगले कुछ हफ़्तों तक भारत में वैक्सीन का उत्पादन सीमित रहेगा. हालाँकि इसके बाद उत्पादन में तेज़ी आने के आसार हैं.
पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया की महीने में वैक्सीन के छह-सात करोड़ डोज़ उत्पादन की क्षमता है. अख़बार के अनुसार, अगले महीने से यह वैक्सीन के मासिक उत्पादन का लक्ष्य 10 करोड़ खुराकों तक बढ़ा सकता है.
ठीक इसी तरह भारत बायोटेक भी अपनी वैक्सीन उत्पादन क्षमता को दोगुना से अधिक करने पर विचार कर रहा है.
पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने केंद्र से वैक्सीन की कमी की शिकायत की थी. हालाँकि केंद्र सरकार का कहना है कि देश में वैक्सीन की कोई कमी नहीं है और कुछ राज्य वैक्सीन को लेकर राजनीति कर रहे हैं.
भारत में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र सरकार ने पिछले महीने वैक्सीन निर्यात पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी थी.

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अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने विश्व हिंदू परिषद् के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार का इंटरव्यू प्रकाशित किया है.
इंटरव्यू में आलोक कुमार ने कहा कि फ़िलहाल वीएचपी का पूरा ध्यान अयोध्या के राम मंदिर निर्माण पर है. उन्होंने कहा, "साल 2024 तक मंदिर बन जाएगा और रामलला गर्भगृह में विराजमान हो जाएंगे. इसके बाद ही हम किसी और काम पर अपना ध्यान लगाएंगे."
हरिद्वार में शुक्रवार को विश्व हिंदू परिषद् के मार्गदर्शक मण्डल की बैठक हुई थी. इस बैठक में काशी की ज्ञानवापी मस्जिद पर कोई बात नहीं हुई.

हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में विस्तृत सर्वे की इजाज़त दी थी.
बैठक में ज्ञानवापी मस्जिद के बारे में चर्चा ना होने का कारण पूछे जाने पर आलोक कुमार ने कहा कि वीएचपी राम मंदिर बन जाने के बाद इस मुद्दे को देखेगी.
कई साल पहले विश्व हिंदू परिषद् ने नारा दिया था, 'अयोध्या तो बस झाँकी है, काशी-मथुरा बाकी हैं.' हालाँकि, अभी वीएचपी का कहना है कि काशी और मथुरा के मसले राम मंदिर बनने के बाद ही देखे जाएंगे.

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अगले महीने से शुरू हो सकता है चाबहार बंदरगाह
जनसत्ता अख़बार में ख़बर है कि भारत ने थोड़े ठहराव के बाद इस साल की शुरुआत से ही चाबहार बंदरगाह पर काम तेज़ कर दिया है.
अख़बार लिखता है कि समरिक रूप से महत्वपूर्ण इस ईरानी बंदरगाह का संचालन अगले महीने तक शुरू होने की संभावना है. यह बात अमेरिकी संसद की एक रिपोर्ट में कही गई है.
अख़बार के अनुसार अमेरिकी संसद की इस नई रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2015 में भारत, ईरान के चाबहार बंदरगाह और रेलवे लाइव बिछाने के काम में मदद के लिए तैयार हो गया था.
इस रेलवे लाइन से भारत को पाकिस्तान से गुज़रे बिना अफ़गानिस्तान से बिना किसी बाधा के व्यापार करने में मदद मिलेगी.
क़रीब 100 पन्नों की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मई 2016 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईरान गए और उन्होंने वहाँ बंदरगाह और उससे जुड़े बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए 50 करोड़ डॉलर निवेश करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए.
हालाँकि ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर अपने कड़े प्रतिबंधों से भारत की अफग़ानिस्तान पुर्ननिर्माण परियोजना को छूट दे रखी थी लेकिन भारत ने साल 2020 तक इस पर काम रोक दिया था.

महाराष्ट्र: वर्जिनिटी टेस्ट के बाद तलाक़ का दबाव
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में शादी के बाद 'वर्जिनिटी टेस्ट' में फ़ेल होने के बाद दो बहनों पर अब तलाक़ का दबाव बनाया जा रहा है.
यह ख़बरद इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में छपी है. ख़बर के अनुसार, दोनों बहनों के पति पंचायत के ज़रिए उन पर तलाक़ का दबाव बना रहे हैं.
पुलिस ने इस मामले में दोनों के पतियों, सास और पंचायत के कुछ सदस्यों पर केस दर्ज किया है.
दोनों बहनों ने गुरुवार शाम को इस मामले में एफ़आईआर दर्ज कराई थी. शिकायत के अनुसार दोनों बहनें और उनके पति कोल्हापुर के कंजरभाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं.
पुलिस के मुताबिक़ एक महिला के पति सेना में हैं और दूसरी बहन का पति प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं.
शिकायत के मुताबिक़ दोनों बहनों को शादी के बाद उनकी 'परंपरा के मुताबिक़' अलग-अलग कमरों में 'वर्जिनिटी टेस्ट' के लिए ले जाया गया. इस दौरान दोनों पुरुषों को सफेद चादरें दी गईं और इस्तेमाल करने को कहा गया.
शिकायत में एक महिला ने कहा है कि उस पर अतीत में किसी अन्य पुरुष के साथ रिश्ता रखने का आरोप लगाया गया जबकि उसकी बहन 'वर्जिनिटी टेस्ट में पास हो गई.' दोनों बहनों का आरोप है कि इसके बाद उनके साथ शारीरिक और मानसिक हिंसा की गई और तलाक़ की धमकी देते हुए घर छोड़ने पर मजबूर किया गया.
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