यूपी चुनाव में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी कितना दम दिखा पाएगी

तिरंगा संकल्प यात्रा में आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया

इमेज स्रोत, Twitter/@AAPUttarPradesh

इमेज कैप्शन, तिरंगा संकल्प यात्रा में आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया
    • Author, अनंत झणाणे
    • पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए

आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में अपने पांव टिकाने की कोशिश में जुटी है. पिछले दिनों पार्टी ने उत्तर प्रदेश के नोएडा और आगरा में 'तिरंगा संकल्प यात्रा' निकालकर पार्टी के चुनावी अभियान को तेज़ी दी है.

राज्यसभा सांसद संजय सिंह और दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया दोनों शहरों में आयोजित तिरंगा यात्रा में न केवल शामिल हुए बल्कि नोएडा में मनीष सिसोदिया ने यूपी की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान भी किया.

इससे पहले लखनऊ में पार्टी 'तिरंगा संकल्प यात्रा' निकाल चुकी है और आगामी 14 सितंबर में इस यात्रा के अयोध्या में भी निकाले जाने की तैयारी हो रही है.

आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इन दिनों यूपी के सभी 75 ज़िलों से लोगों को पार्टी का सदस्य बनाने का अभियान चलाया जा रहा हैं.

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 1

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 2

एक करोड़ सदस्य जोड़ने का लक्ष्य

23 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में पार्टी ने एक महीने में एक करोड़ कार्यकर्ताओं की औपचारिक भर्ती का अपना लक्ष्य बनाया है.

लेकिन सबसे अहम सवाल यही है कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचंड बहुमत वाली भारतीय जनता पार्टी के अलावा राज्य में तीन बड़ी पार्टियां (समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस) पहले से ही मौजूद हैं. इसके अलावा राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तमाम छोटी पार्टियां भी हैं.

आम आदमी पार्टी प्रदेश में लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रही है. पार्टी के सदस्यता अभियान में भी दिखा कि पार्टी के कार्यकर्ता लोगों से सदस्यता फॉर्म भरवा रहे हैं. इसमें कोई भी अपना नाम, पिता का नाम, वोटर आईडी, फोन नंबर, इत्यादि की जानकारी देकर सदस्यता ले सकता है.

जानकारी सही है या ग़लत, इसकी कोई जांच नहीं हो रही है. पर्चा भर लिया गया तो उसकी एक कॉपी नए सदस्यों को दी जाती है. इसके अलावा पार्टी मिस्ड कॉल के ज़रिए और मोबाइल ऐप के माध्यम से और घर-घर जाकर सदस्य बनाने का दावा भी कर रही है.

संजय सिंह लखनऊ के मशहूर अमीनाबाद इलाक़े से सदस्यता अभियान की शुरूआत करते हुए

इमेज स्रोत, sumit kumar

इमेज कैप्शन, संजय सिंह लखनऊ के मशहूर अमीनाबाद इलाक़े से सदस्यता अभियान की शुरूआत करते हुए

एक करोड़ सदस्यों के लक्ष्य वाले अभियान का पहला पड़ाव लखनऊ में घनी मुसलमान आबादी वाला अमीनाबाद इलाक़ा था.

आप सांसद संजय सिंह का काफ़िला नारों के बीच अमीनाबाद पहुंचा. पहले से ही ठसा-ठस अमीनाबाद चौराहे पर एक छोटे-से बूथ पर संजय सिंह छोटा-सा भाषण देकर रवाना हो गए.

भीड़भाड़ वाले इलाक़े से तेज़ी से गुज़रे संजय सिंह के बाद यहां बचे पुराने कांग्रेस समर्थक और बसपा समर्थक के नदीम जायसी.

नदीम जायसी को आम आदमी पार्टी से बड़ी उम्मीद है. वो सदस्यता बूथ लगाकर लोगों को पार्टी से जोड़ने में जुटे थे. हमने उनसे पूछा कि उन्हें पार्टी से क्या उम्मीद है.

उन्होंने कहा, "लोग लगातार आ रहे हैं, पार्टी का सदस्य बनना चाह रहे हैं. वो पार्टी की नीतियों से प्रभावित हैं. उनका भी दिल चाहता कि हमारे यहाँ फ्री में बिजली मिले. वो भी चाहते हैं की हमारे यहाँ शिक्षा फ्री हो और स्टैंडर्ड वाली हो. वो दिल्ली की तरह यहां भी फ्री मेडिकल सुविधा चाहते हैं. अगर दिल्ली में ये सब संभव है तो यूपी में क्यों नहीं है? हमें जाति, धर्म, मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दों में उलझाया जाता है लेकिन पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, भ्रष्टाचार जैसे हमारे मूल मुद्दे हैं ग़ायब हैं."

उत्तर प्रदेश की आबादी में क़रीब 19 प्रतिशत मुसलमान हैं.

मुसलमान वोट को साधने की राणनीति भाजपा को छोड़ कर सारी विपक्षी पार्टियां खुलेआम करती हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही बनता है की कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाने पर केंद्र का समर्थन करने के फ़ैसले के बाद, एनआरसी और सीएए जैसे मुद्दों पर परहेज करने वाली और 2020 के दिल्ली दंगों में हुई हिंसा के बाद क्या उत्तर प्रदेश का मुसलमान केजरीवाल पर भरोसा करेगा?

आप नेता नदीम जायसी

इमेज स्रोत, Sumit Kumar

इमेज कैप्शन, आप नेता नदीम जायसी

नदीम जायसी का जवाब है, "हमसे किसी ने पूछा ही नहीं कि दिल्ली में बिजली फ्री है तो उसमें हिन्दू-मुसलमान, अगड़े-पिछड़े देखे जा रहे हैं या नहीं. अगर दिल्ली में फ्री स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं तो सबको मिल रही हैं. हमें अगर वहां भ्रष्टाचार से मुक्ति मिली है तो उसमें सबको फ़ायदा हो रहा है. हमसे कोई ऐसा नहीं सवाल कर रहा है. और जो इस तरह का सवाल करेगा, हमें उनको समझाना है कि अपने बच्चों के भविष्य के साथ और खिलवाड़ न कीजिए."

नदीम जायसी के इस जवाब में उम्मीद भले हो लेकिन जवाब नहीं है. सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या इस बार विधानसभा चुनावों में मुसलमान उस पार्टी को वोट देंगे जो भाजपा की टक्कर में है और क्या वो उसके प्रत्याशियों को 403 सीटों पर मजबूत चुनौती देने में सक्षम होगी?

यह सवाल आम आदमी पार्टी के सामने भी है और इसका जवाब उसे आने वाले समय में देना होगा कि क्या वो वाक़ई में हर सीट पर टक्कर देने की स्थिति में हैं?

ज़िला पंचायत सदस्य यासीन मोहम्मद

इमेज स्रोत, anant zanane

इमेज कैप्शन, ज़िला पंचायत सदस्य यासीन मोहम्मद

आम आदमी पार्टी का उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में प्रदर्शन?

पिछले दिनों ही उत्तर प्रदेश में ज़िला पंचायत सदस्य के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 3,000 से ज़्यादा उम्मीदवार उतारने का एलान किया था. पार्टी ने बाकायदा उम्मीदवारों की सूची जारी की और नेतृत्व ने दावा किया कि 85 से ज़्यादा आम आदमी पार्टी समर्थित प्रत्याशी ज़िला पंचायत सदस्य चुन कर आए हैं और पार्टी के नाम पर कुल 40 लाख वोट मिले हैं.

पार्टी ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े ज़िले लखीमपुर खीरी से पार्टी समर्थित छह प्रत्याशी विजयी हुए हैं.

आम आदमी पार्टी के समर्थन से जीतने वाले प्रत्याशियों का सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं ने किया प्रचार. इस पोस्ट में यासीन मोहम्मद भी नज़र आ रहे हैं.

इमेज स्रोत, anant zanane

इमेज कैप्शन, आम आदमी पार्टी के समर्थन से जीतने वाले प्रत्याशियों का सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं ने किया प्रचार. इस पोस्ट में यासीन मोहम्मद भी नज़र आ रहे हैं.

आम आदमी पार्टी के इस पोस्टर में ज़िला पंचायत सदस्य यासीन मोहम्मद भी दिखाई देते हैं. लखीमपुर के देवकली गांव के यासीन मोहम्मद 2,500 वोट से ज़िला पंचायत सदस्य चुनाव जीते हैं.

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव किसी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़े जाते हैं और यासीन मोहम्मद ने भी यह चुनाव निर्दलीय लड़ा. लेकिन राजनीतिक जुड़ाव की बात पूछने पर उन्होंने कहा कि वो समाजवादी पार्टी के सदस्य हैं. इसके बावजूद उन्होंने कुछ दिनों पहले हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में उन्होंने किसी और पार्टी के प्रत्याशी को वोट दिया.

हैरानी की बात है कि एक ही शख़्स अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों से कैसे ताल्लुक़ रख सकता है. दरअसल, पंचायत चुनाव स्थानीय चुनाव होता है जिसे बड़ी पार्टियों के कार्यकर्ता लड़ते हैं लेकिन उनकी राजनीतिक पहचान और पार्टी के प्रति वफादारी स्थानीय परिस्थितियां तय करती हैं.

राज्य सरकार और प्रदेश प्रशासन जिस कदर इन चुनावों पर हावी होता है उसमें पार्टी विरोधी प्रत्याशियों के लिए पार्टी का अनुशासन और व्हिप का पालन करना ख़तरों से खाली नहीं होता है.

इस मौक़ापरस्ती और सियासी दावे के माहौल में चुनाव लड़ना और जीत के बड़े-बड़े दावे कर सुर्ख़ियां बटोरना सभी राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम आदमी पार्टी के लिए भी फ़ायदेमंद साबित हुआ. इससे कम से कम यह ज़ाहिर हुआ कि पार्टी का प्रदेश में प्रवेश हो चुका है.

यासीन मोहम्मद से आम आदमी पार्टी से समर्थित होने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि मैंने यह चुनाव "निर्दलीय लड़ा और निर्दलीय ही जीता हैं." बहरहाल, पंचायत चुनाव तो निपट गए और भाजपा ने ऐतिहासिक जीत भी दर्ज की, जिसके आधार पर पार्टी विधानसभा चुनाव में भी जीत के दावे कर रही है.

वीडियो कैप्शन, कोरोना के बीच उत्तर प्रदेश में क्यों जुटी इतनी भीड़?

वैसे चुनाव आने तक राजीनीतिक दलों में काफ़ी इधर-उधर होने की आशंका बनी हुई है. इसे देखते हुए मैंने यासीन से पूछा कि क्या वे आम आदमी पार्टी के साथ जाएंगे. उन्होंने कहा, "अब आम आदमी पार्टी अपना कैंडिडेट उतारेगी तो देखेंगे. उनका सहयोग भी करेंगे. लेकिन, अभी फ़ाइनल नहीं है."

आम आदमी पार्टी भले ही उत्तर प्रदेश में अभी पहुंची है, लेकिन यहां अरविन्द केजरीवाल की लोकप्रियता को यासीन क़बूल करते हैं. वह कहते हैं, "केजरीवाल जो बोलते हैं वो करते भी हैं. यह बात अच्छी लगी. दिल्ली में बिजली और पानी की व्यवस्था की और भी वादे पूरे किए."

यासीन कहते हैं कि पंचायत चुनाव में बड़ी जीत का दावा आंकड़ों पर आधारित है. वो कहते हैं, "जिसको हमने आधिकारिक तौर पर समर्थित प्रत्याशी घोषित किया, उसी को हम अपनी जीत में गिनेंगे. इस गिनती के आधार पर उत्तर प्रदेश में हमारी पार्टी को 40 लाख वोट मिले. कई लोगों ने डर कर दूसरी पार्टी को वोट दिया. इसका मतलब ये नहीं कि किसान और आम लोग उनके साथ हैं."

लखीमपुर खीरी की ग्राम पंचायत कोरैय्या जंगल के प्रधानपति विनय कोरी

इमेज स्रोत, anant zanane

इमेज कैप्शन, लखीमपुर खीरी की ग्राम पंचायत कोरैय्या जंगल के प्रधानपति विनय कोरी.

आम आदमी पार्टी के समर्थन से बने ग्राम प्रधान

यासीन मोहम्मद के गाँव देवकली से लगभग 20 किलोमीटर दूर कौरईया जंगल ग्राम सभा में विनय कोरी के दिल और ज़ुबान दोनों पर आम आदमी पार्टी का नाम है.

विनय की पत्नी राज कुमारी दो मई को प्रधान का चुनाव जीती हैं. वैसे तो विनय, गांव की प्रधान के पति हैं लेकिन गांव के पितृसत्तात्मक ढांचे में वो प्रधान वाली ही हैसियत रखते हैं.

विनय दलित समाज से हैं और आम आदमी पार्टी के बारे में पूछे जाने पर वे जनवरी के उस दिन याद करते हैं जब वो पार्टी के प्रदेश मुख्यालय गए थे. वह कहते हैं, "हम जब लखनऊ गए तो वहां गाँव के लगभग 20-25 लोग हमारे साथ थे. जब उन्होंने वहां देखा कि हम लोगों को इतना मान-सम्मान दिया गया, तो उस मान-सम्मान से बहुत बड़ा फ़र्क़ पड़ा प्रधानी के चुनाव में. हमारी छवि गांव में बनी."

विनय आसपास की ग्राम सभाओं में पार्टी का संगठन खड़ा करने में जुटे हुए हैं. उन्हें भरोसा है कि "जब संगठन मज़बूत होगा तभी पार्टी मज़बूत होगी. तभी हम पार्टी के ऊपर क़ायदे से काम कर पाएंगे."

विनय कोरी की पत्नी राजकुमारी का प्रधानी का चुनाव जीतने का प्रमाण पत्र

इमेज स्रोत, anant zanane

इमेज कैप्शन, विनय कोरी की पत्नी राजकुमारी का प्रधानी का चुनाव जीतने का प्रमाण पत्र

विनय कोरी की सफलता देख प्रेम प्रकाश जैसे कार्यकर्ता भी आम आदमी पार्टी से जुड़ रहे हैं. जब हम प्रेम प्रकाश से लखीमपुर के बाज़ार में मिले तो उन्होंने हमें गर्व से बताया कि सदस्यता अभियान के पहले दिन वो 900 लोगों को सदस्य बना चुके हैं.

उन्होंने भरोसा जताया कि "पार्टी का काम अच्छा है. हम पार्टी से विनय कोरी की वजह से जुड़े हैं. उत्तर प्रदेश में अब विकास होगा और बीजेपी से टक्कर यही पार्टी लेगी."

स्पष्ट रूप से अपनी जाति का प्रमाण देते हुए प्रेम प्रकाश ने बताया कि "चौहान बिरादरी से हूं और इस पार्टी में चौहान यानी ठाकुर लोग भी जुड़ रहे हैं."

जाति से पूर्णतः प्रभावित उत्तर प्रदेश के चुनावों में इस बार वोट क्या जाति के नाम पर ही पड़ेगा? इसके जवाब में प्रेम प्रकाश कहते हैं कि इस बार वोट "केजरीवाल के नाम पर वोट गिरेगा."

लेकिन 403 विधानसभा और 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश के विशाल राजनीतिक कैनवस में कुछ 'समर्थित' ज़िला पंचायत सदस्यों की जीत का दावा और गिने चुने ग्राम प्रधानों की जीत को कितनी बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा सकता है और इसके आधार पर कितनी उम्मीद की जा सकती है?

लखीमपुर खीरी के आम आदमी पार्टी के 35 वर्षीय ज़िलाध्यक्ष वलीम ख़ान ने बताया, "2012 में जिस पार्टी का जन्म हुआ उस पार्टी के सहयोग के बिना उत्तर प्रदेश में कोई सरकार बनने वाली नहीं है. देखिये ज़्यादा उम्मीद तो तब होती जब हम आपसे ये कहते कि हम लोग सरकार बना रहे हैं. हम ये कह रहे हैं कि हमारे बगैर कोई सरकार बनाने वाली नहीं है."

लखीमपुर जिला अध्यक्ष वलीम खान

इमेज स्रोत, anant zanane

इमेज कैप्शन, लखीमपुर जिला अध्यक्ष वलीम खान

मुद्दों पर राजनीति और अयोध्या में आप

आम आदमी पार्टी ने जून महीने में राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण से जुड़ी ज़मीन ख़रीद में मंदिर ट्रस्ट के घोटाले की बात उठाकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में दस्तक दी थी.

छोड़िए X पोस्ट, 3
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 3

आम आदमी पार्टी दिल्ली में एक आंदोलन से निकली थी और उत्तर प्रदेश में उसने यही रास्ता अपनाया.

पार्टी ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने के लिए तहरीर भी दी लेकिन कोई एफ़आईआर दर्ज़ नहीं हुई है.

पार्टी के नेता संजय सिंह ने ट्वीट में दावा किया था "मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के नाम पर इतना बड़ा घोटाला सुनकर आपके पैरों के नीचे ज़मीन खिसक जायेगी."

ये मुद्दा गरमाया और इसके साथ आम आदमी पार्टी भी सुर्ख़ियों में कई दिनों तक दिखी. ऐसा लगने लगा कि राम मंदिर के निर्माण में भ्रष्टाचार आम आदमी पार्टी के लिए आस्था से जुड़े आंदोलन का रूप लेगा. लेकिन यह आंदोलन सड़कों पर नहीं उतरा और सिर्फ़ मीडिया और सोशल मीडिया पर दिखा. इस घोटाले का मुद्दा समाजवादी पार्टी ने भी उठाया लेकिन कुछ दिनों के बाद पार्टी ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली.

छोड़िए X पोस्ट, 4
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 4

अकेले लड़ने की तैयारी?

वैसे तीन जुलाई को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सांसद संजय सिंह के साथ हुई 'शिष्टाचार भेंट' की यह तस्वीर ट्वीट की. तब अटकलें लगने लगीं कि सपा-आप का गठबंधन होने जा रहा है.

इस मुलाक़ात के ठीक दो दिन बाद सीबीआई ने प्रदेश के 13 ज़िलों में 40 ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की. 1,600 करोड़ के गोमती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट में अखिलेश यादव के कार्यकाल के दौरान धांधली और भ्रष्टाचार के आरोप हैं.

छोड़िए X पोस्ट, 5
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 5

उस वक्त सवाल उठा कि क्या भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन से खड़ी हुई आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी सपा के साथ गठबंधन करेगी?

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सभाजीत सिंह भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर रही समाजवादी पार्टी के बारे में कुछ कहने से बचते हैं लेकिन कहते हैं, "अभी गठबंधन को लेकर पार्टी की कोई बातचीत नहीं हुई है. संजय सिंह अखिलेश जी को जन्मदिन की बधाई देने गए. लेकिन गठबंधन को लेकर कुछ बात नहीं हुई. सभी 403 विधानसभाओं में हमारा कार्यक्रम चल रहा हैं."

मनीष सिसोदिया ने कह तो दिया कि उनकी पार्टी राज्य की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, लेकिन राजनीति संभावानाओं का खेल है और हो सकता है कि चुनाव आने तक पार्टी किसी से गठबंधन कर ले.

यही वजह है कि समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सुनील कुमार साजन कहते हैं, "हमारे पार्टी अध्यक्ष ने यह तय किया कि जो दल भाजपा को हराना चाहते हैं और छोटे दल हैं, उन सभी छोटे दलों से बातचीत चल रही है."

अब जबकि आम आदमी पार्टी कह रही है कि वह सभी 403 सीटों पर अपनी दावेदारी पेश करेगी तो समझना चाहिए कि वह खुद को छोटे दल के खांचे में फ़िट नहीं मान रही है.

सीएम अरविंद केजरीवाल

इमेज स्रोत, RAJ K RAJ/HINDUSTAN TIMES VIA GETTY IMAGES

क्या ब्रांड केजरीवाल का कम होगा इस्तेमाल?

2022 में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में भी विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. उत्तराखंड और पंजाब में अरविन्द केजरीवाल खुद सामने आ रहे हैं. कद्दावर नेताओं को वो खुद पार्टी में शामिल कर रहे हैं और मुफ़्त 300 यूनिट बिजली जैसे वादे कर रहे हैं.

लेकिन अब तक केजरीवाल उत्तर प्रदेश नहीं आए हैं. ये भी है कि पंजाब, उत्तराखंड और गोवा जैसे छोटे राज्यों में पार्टी को अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है तो केजरीवाल उन राज्यों के चुनावी दौरे पर हैं.

केजरीवाल पार्टी का 'तुरुप का पत्ता' हैं तो हो सकता है कि उत्तर प्रदेश में पार्टी उनका नपे-तुले तरीके से इस्तेमाल करे ताकि अगर पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक़ न हुआ तो असर केजरीवाल की लोकप्रियता पर न पड़े.

छोड़िए YouTube पोस्ट
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त

ग़ौरतलब है कि 2014 में केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ बनारस से चुनाव लड़ कर 3.7 लाख वोटों से हार चुके हैं, लेकिन हार के बावजूद उन्हें दो लाख वोट मिले थे.

लेकिन यह भी सही है कि पार्टी केजरीवाल को सामने रख कर ही उत्तर प्रदेश में क़दम बढ़ा रही है. पार्टी अपने अभियान में बार-बार केजरीवाल की दिल्ली सरकार को मॉडल सरकार के तौर पर पेश कर रही है.

सभाजीत सिंह बताते हैं कि इसी फरवरी महीने में अरविन्द केजरीवाल ने मेरठ में एक विशाल जनसभा को सम्बोधित किया था.

उन्होंने बताया, "उत्तराखंड जाने से पहले अरविंद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश में महापंचायत की थी. जिस समय किसान आंदोलन चरम पर था, उस दौरान पार्टी ने किसान महापंचायत की थी. उत्तर प्रदेश पर अरविंद केजरीवाल जी की हर समय नज़र है और बराबर रहती हैं. जब-जब पार्टी को ज़रूरत महसूस होगी तब-तब हम उनको आने को कहेंगे."

आम आदमी पार्टी की तिरंगा संकल्प यात्रा

इमेज स्रोत, Twitter/@AAPUttarPradesh

इमेज कैप्शन, आम आदमी पार्टी की तिरंगा संकल्प यात्रा

कैसे पहुँची दिल्ली मॉडल की गूँज उत्तर प्रदेश तक?

अप्रैल, 2020 में जब कोविड महामारी की पहली लहर की मार झेल रहे सैकड़ों लोग शहरों से गांवों की तरफ रवाना हुए तो केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में काम कर रहे मज़दूरों की पांच हज़ार रूपये की मदद की थी.

जो लोग अपने घरों तक पहुंचे, वे इस मदद की चर्चा साथ लेते गए और इसके चलते अरविंद केजरीवाल का नाम उत्तर प्रदेश के ग़रीब लोगों तक भी पहुंचा.

हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता नवीन श्रीवास्तव ने बताया, "आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में पूरी तरह से एक्सपोज़ हो चुकी है, कोरोना काल में उत्तर प्रदेश के लाखों मज़दूर जो दिल्ली में काम करते थे, उनको केजरीवाल ने मुफ़्त भोजन करने का वादा किया. इस वादे के दो दिन बाद उन्होंने डीटीसी की बसों में लोगों को भरकर यूपी बॉर्डर पर छोड़ दिया. इस बात को लोग भूले नहीं हैं."

आम आदमी पार्टी की नज़र भी दलित समुदाय की तरफ़ है. इसकी झलक 2018 में तब दिखी थी जब यूपी में दलितों के सबसे अहम शहर आगरा में आंबेडकर जयंती समारोह में केजरीवाल ने शरीक हो कर जय भीम का नारा लगाया था.

2018 में आंबेडकर जयंती के समारोह में आगरा में आयोजित भीम नगरी में अरविन्द केजरीवाल भाषण देते हुए.

इमेज स्रोत, Youtube/Aam Adami Party

इमेज कैप्शन, 2018 में आंबेडकर जयंती के समारोह में आगरा में आयोजित भीम नगरी में अरविन्द केजरीवाल भाषण देते हुए.

दलित वर्ग भी उत्तर प्रदेश में कुछ हद तक राजनीति की दिशा तय करता रहा है. मायावती की बहुजन समाज पार्टी के अलावा यहं इस बार चंद्रशेखर रावण भी अपनी किस्मत आज़मा सकते हैं. लेकिन आम आदमी पार्टी की नज़र भी इस तबके पर है, शायद यही वजह है की पार्टी ने दिल्ली की राजनीति के दलित चेहरे और कैबिनेट मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को यूपी के चुनाव अभियान में शामिल किया है.

दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को पार्टी ने पंचायत चुनावों का ज़िम्मा सौंपा था. वो और दिल्ली के कई विधायकों को उत्तर प्रदेश में कई ज़िलों की ज़िम्मेदारी दे दी गयी थी. लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में दिल्ली की भयावह स्थिति की वजह से संगठन बनाने वाला काम अधूरा रह गया था.

गौतम कहते हैं कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश का गहरा रिश्ता है, "उत्तर प्रदेश का ऐसा कोई भी ज़िला नहीं है जहाँ के लोग दिल्ली में न रहे हों. तो दिल्ली में रह रहे उत्तर प्रदेश के लोगों की वजह से हमारा काम पहले ही प्रदेश में पहुंच गया है. अभी सदस्यता अभियान चल रहा है. हम लोग गांव-गांव में बैठक का दौर शुरू करेंगे."

आप नेता संजय सिंह

इमेज स्रोत, Twitter/@AAPUttarPradesh

पार्टी के दावे पर कई सवाल

राजेंद्र पाल गौतम को भरोसा है कि कार्यकर्ता चुनाव होते-होते संगठन बना लेंगे. लेकिन केजरीवाल से लोगों को कितना भरोसा मिल पाएगा, इसको लेकर कोई पक्का दावा नहीं किया जा सकता, क्योंकि अभी कहीं भी पार्टी का जनाधार नहीं दिखता है और ना ही पार्टी अब तक यहां कोई बड़ा आंदोलन चला सकी है.

उत्तर प्रदेश की राजनीति पर नज़र रखने वाले वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी बताते हैं, "यूपी बहुत बड़ा राज्य है. उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी के पास दिल्ली के स्तर का कोई संगठन और मिशन नहीं है. काम करने का तरीक़ा बहुत शहरी है, और उत्तर प्रदेश एक बड़ा ग्रामीण राज्य है. अभी यह उत्तर प्रदेश के समाज में मौजूद नहीं है."

दलित मतदाताओं के आम आदमी पार्टी की तरफ़ देखने को बहुजन समाज पार्टी के प्रवक्ता फ़ैज़ान खान ख़ारिज़ करते हुए कहते हैं, "आम आदमी पार्टी जो भी करती है उसे एक इवेंट बना कर पेश किया जा रहा है. दलित समाज इस बार भी बसपा के साथ रहा है और चाहे कोई भी पार्टी उसे लुभाने की कोशिश करे, वह बहनजी के पीछे चट्टान की तरह खड़ा है."

इन सबके साथ जातिगत समीकरणों के आधार पर भी बीजेपी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के पास एक तरह से फिक्स वोट बैंक है. ऐसे किसी वोट बैंक का नहीं होना अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के लिए सबसे बड़ी कमज़ोरी है, हालांकि, यह पार्टी की सबसे बड़ी ताक़त भी बन सकती है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)