राम मंदिर: मोदी और योगी को घेर रहा विपक्ष, ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने दी सफाई

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राम जन्मभूमि निर्माण के लिए ज़मीन ख़रीद में भ्रष्टाचार के आरोपों को एक बार फिर से ख़ारिज करते हुए 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' के महासचिव चंपत राय ने सोमवार शाम एक और बयान जारी किया.
न्यास महासचिव चंपत राय ने अपने ताज़ा बयान में कहा है कि आरोप लगाने वालों ने "तथ्यों की जानकारी नहीं की. इससे समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है. " उन्होंने एक बार फिर दावा किया है कि ज़मीन 'बाज़ार मूल्य से कम कीमत में ख़रीदी गई है.'

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उन्होंने अपने बयान में बताया है कि जिस ज़मीन को लेकर सवाल उठाया जा रहा है, उस पर 2011 से अलग-अलग समय पर अनुबंध हुआ.
चंपत राय ने कहा है, " खोजबीन करने पर यह भूखंड हमारे उपयोग हेतु अनुकूल पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों से संपर्क किया गया. भूमि का जो मूल्य मांगा गया, उसकी तुलना वर्तमान बाज़ार मूल्य से की गई. अंतिम देय राशि लगभग 1423 रुपये प्रति वर्गफीट तय हुई जो निकट के क्षेत्र के वर्तमान बाज़ार मूल्य से बहुत कम है."
आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने रविवार को मंदिर निर्माण के लिए ज़मीन ख़रीद में बड़ा भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया था. आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और सांसद संजय सिंह ने सोमवार को भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और ट्रस्ट की ओर से दी गई सफ़ाई पर सवाल उठाए थे.
चंपत राय ने जो पहला बयान जारी किया था उस पर सवाल उठाते हुए सिसोदिया ने कहा, "यकीन मानिए कि मैं मान रहा था कि ये पेपर झूठे निकलने चाहिए. ये मेरे दिल से आवाज़ आ रही थी. लेकिन ज़्यादा दुख तब हुआ जब राम जन्मभूमि ट्रस्ट के लोगों ने बक़ायदा प्रेस रिलीज़ जारी करके कहा कि हां हमने ये ट्रांज़ैक्शन किया है. "
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श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने अपने बयान में आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए ख़ारिज कर दिया था. चंपत राय के हस्ताक्षर से जारी विज्ञप्ति में आरोपों को भ्रामक बताया गया था.

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चंपत राय से रविवार को जब पत्रकारों ने आरोपों के बारे में पूछा था तो उन्होंने कहा था कि वो आरोपों की चिंता नहीं करते हैं.
चंपत राय ने कहा, "हम पर आरोप लगते ही रहते हैं. सौ साल से आरोप ही देख रहे हैं हमलोग. हम पर महात्मा गांधी की हत्या का आरोप लगा. आरोप की हम चिंता नहीं करते. "
लेकिन, सोमवार को आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और कई दूसरी राजनीतिक पार्टियों ना सिर्फ़ राम जन्मभूमि ट्रस्ट से तीखे सवाल पूछे. बल्कि इसी बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय जनता पार्टी को भी घेरने की कोशिश की.
कई संत और महंतों ने भी सवाल उठाए. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने इस मामले की जांच कराने की मांग उठाई है.
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राहुल गांधी बोले- राम के नाम पर धोखा अधर्म
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कथित भ्रष्टाचार को अधर्म बताया. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "श्रीराम स्वयं न्याय हैं, सत्य हैं, धर्म हैं- उनके नाम पर धोखा अधर्म है! "
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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी कथित भ्रष्टाचार को 'अधर्म और पाप' बताया है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "करोड़ों लोगों ने आस्था और भक्ति के चलते भगवान के चरणों में चढ़ावा चढ़ाया. उस चंदे का दुरुपयोग अधर्म है, पाप है, उनकी आस्था का अपमान है. "
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कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि कोर्ट आरोपों की जांच अपनी निगरानी में कराए.
अयोध्या का राम मंदिर बरसों से उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति के प्रमुख मुद्दों में रहा है. लेकिन, अर्से बाद विरोधी दल इस मुद्दे के जरिए भारतीय जनता पार्टी पर हमलावर हैं और ये एक ऐसा मुद्दा बनता दिख रहा है जिस पर तमाम अलग-अलग दल एक सुर में बोलते नज़र आ रहे हैं.
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोमवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी की ओर से लगाए गए आरोपों को दोहराया. उन्होंने कहा, "पांच मिनट के अंदर दो करोड़ की ज़मीन साढ़े 18 करोड़ रुपये की हो गई. "
वहीं, पार्टी के सांसद संजय सिंह ने चंपत राय की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, "एक सच को छुपाने के लिए हज़ार झूठ बोलने की कोशिश मत कीजिए चंपत राय जी आपका घोटाला और भ्रष्टाचार पूरी तरह से सामने आ गया है. "

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मोदी-योगी से सवाल
ज़मीन ख़रीद में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सहयोगी भी हमलावर हैं. सुलेहदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने आरोप लगाया है कि मंदिर भाजपा और आरएसएस के लिए व्यापार का जरिया है.
राजभर ने ट्विटर पर लिखा, "मंदिर लोगों के लिए आस्था का केंद्र हो सकता है पर भाजपा/आरएसएस के लिए व्यापार का ज़रिया है. इस ज़मीन घोटाले से करोड़ो भक्तो के आस्था से खिलवाड़ हुआ है. मोदी जी और योगी जी बताए कब होगा इन ट्रस्टी लोगो पर मुकदमा? कब गिरफ्तार कर भेजे जाएंगे ये लोग जेल?"
इन आरोपों के बाद चंपत राय ने नए सिरे से सफाई दी
बीजेपी का पलटवार
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने भी ज़मीन ख़रीद पर सवाल उठाने वालों पर पलटवार किया है.
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने ट्विटर पर लिखा , "जिन राजनीतिक दलों ने दशकों तक कोर्ट में राम जन्मभूमि के निर्णय में अड़ंगा लगाया, तुष्टिकरण के चलते भगवान राम के अस्तित्व को ही नकार दिया, कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं, उनसे ये अपेक्षा भी नहीं करनी चाहिए कि वो मंदिर निर्माण का कार्य बिना किसी दुर्भावना के संपन्न होने देंगे."
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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा कि कुछ लोग 'राम जन्मभूमि को बदनाम करने का कोई मौका नहीं गंवाते हैं.'
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मंदिर निर्माण का रास्ता बना
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तैयार हुआ था. कोर्ट ने अपने एक एतिहासिक फ़ैसले में अर्से से विवाद में रही 2.77 एकड़ की ज़मीन का मालिकाना हक़ हिंदू पक्ष को देने और मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को उपयुक्त स्थान पर पांच एकड़ ज़मीन देने का आदेश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ट्रस्ट का गठन किया गया और ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण के लिए रकम जुटाने के लिए 50 करोड़ लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा था. बीते साल अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में मंदिर की आधारशिला रखी गई थी.
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