कोरोना वायरस के दौर में मुंबई पुलिस के किस आदेश पर बरपा है हंगामा?

मुंबई पुलिस

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    • Author, मयूरेश कोण्णूर
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी मराठी संवाददाता

सोशल मीडिया पर कोविड-19 से जुड़ी भ्रामक जानकारी फैलाने को लेकर मुंबई पुलिस के नए आदेश पर महाराष्ट्र में सियासत तेज़ हो गई है.

बीजेपी ने प्रदेश की शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी सरकार की आलोचना की है और कहा है कि कोरोना वायरस फैलने से रोकने में नाकाम रही प्रदेश सरकार अपनी आलोचना नहीं बर्दाश्त कर पा रही.

इस आदेश को मीडिया और अभिव्यक्ति की आज़ादी के ख़िलाफ़ कदम भी कहा जा रहा है.

इधर, मुंबई पुलिस स्पष्ट किया है इसका उद्देश्य किसी को सरकार की आलोचना करने से रोकना नहीं है बल्कि भ्रामक जानकारियां फैलने से रोकना है.

मुंबई पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी डीसीपी प्रणय अशोक ने मई 23 को एक आदेश जारी कर कहा था, "ये देखने में आया है कि व्हाट्सऐप, ट्विटर, फ़ेसबुक, टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिय प्लेटफॉर्म और इंटरनेट मैसेजिंग के ज़रिए भ्रामक जानकारी, ग़लत जानकारी, वीडियो और तस्वीरें शेयर की जा रही हैं."

"इस तरह की जानकारी से आम जनता में डर और कंफ्यूज़न फैलता है, कोविड-19 महामारी रोकने के काम में लगे सरकारी कर्मचारियों के प्रति लोगों के मन में अविश्वास पैदा होता है और समुदायों के बीच भी आपसी भेदभाव बढ़ता है."

पुलिस के अनुसार ये निषेधाज्ञा आदेश 25 मई से 8 जून तक लागू रहेगी.

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आदेश में क्या कहा गया है?

आदेश के अनुसार इसका उद्देश्य कोविड-19 को लेकर लोगों के मन में डर और कंफ्यूज़न फैलने से रोकना है लेकिन ऐसा देखा जा रहा है कि राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता इससे खासे नाराज़ हैं.

आदेश के अनुसार, "कोई भी व्यक्ति ऐसी जानकारी शेयर न करे जिससे सरकारी कर्मचारियों में लोगों भरासा कम हो या फिर कोविड-19 महामारी को रोकने के उनके काम में बाधा पैदा हो, और न ही ऐसी जानकरी शेयर करे जिससे किसी की जान को ख़तरा हो या समाज में अशांति फैले."

आदेश के अनुसार इस तरह की भ्रामक जानकारी के लिए सोशल मीडिया ग्रूप के ऐडमिन को ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा. और इस आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय दंड संहिता की दारा 188 के तहत सज़ा भी दी जा सकती है.

मुंबेई समेत महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में कोरोनो वायरस संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था इस चुनौती का सामना करने में संघर्षरत है. इस बीच सोशल मीडिया पर विपक्ष, आम आदमी और मीडिया सरकार की आलोचना कर रहे हैं.

मुंबई में कोरोना वायरस

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बीजेपी ने कहा है कि महाराष्ट्र में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है और मुंबई पुलिस का आदेश सरकार की आलोचना करने वालों को चुप कराने की कोशिश है.

प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष और विधायक मंगलप्रभात लोढ़ा ने बॉम्बे हाईकोर्ट में ये कहते हुए एक याचिका दायर की है कि ये आदेश असंवैधानिक है

वहीं बीजेपी नेता किरित सोमैय्या ने कहा है कि आदेश का उद्देश्य भ्रामक जानकारियों को फैलने से रोकना हो सकता है लेकिन इसका इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंदियों के आवाज़ को दबाने के लिए भी किया जा सकता है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "मुझे डर है कि महाराष्ट्र में राजनेताओं के इशारे पर इस आदेश का इस्तेमाल आलोचकों की आवाज़ दबाने के लिए किया जा सकता है."

कुछ दिन पहले किरित सोमैय्या ने ट्विटर पर एक वीडियो साझा किया और दावा किया था कि ये कोविड-19 से जुड़ा वीडियो है. सोशल मीडिया पर ही मुंबई पुलिस ने उनकी ग़लती दुरुस्त करते हुए कहा था कि ये वीडियो पुराना है और कोविड-19 से इसका कोई नाता नहीं. बाद में ये ट्वीट डिलीट कर दिया गया था.

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दक्षिण और पूर्वी एशिया में भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले सबसे अधिक हैं. . .

आदेश पर राजनीतिक हलचल

इस मुद्दे पर राजनीतिक आलोचना और बहस शुरू होने के बाद, मुंबई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वो सरकार की आलोचना पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाना चाहते.

मुंबई पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी डीसीपी प्रणय अशोक ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है, "इस आदेश का उद्देश्य किसी को सरकार की आलोचना करने से रोकना नहीं है. इसका उद्देश्य सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही ऐसी भ्रामक जानकारी को रोकना है जिससे सरकारी काम के प्रति लोगों का भरोसा कम न हो."

समाचार एजेंसी एएनआई ने मुंबई पुलिस पीआरओ डीसीपी प्रणय अशोक के हवाले से कहा, "यह आदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकार की आलोचना पर प्रतिबंध लगाने के लिए जारी नहीं किया गया है. इसका उद्देश्य सोशल मीडिया में ग़लत सूचना फैलने पर रोक लगाना है, जो सरकारी कार्यों में सार्वजनिक विश्वास को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है"

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लेकिन राजनीतिक बहस को एक तरफ किया जाए तो क्या ऐसे मुश्किल वक्त में पुलिस के इस आदेश को नागरिकों और मीडिया केअधिकारों का हनन कहा जा सकता है?

वकील और मानव अधिकार कार्यकर्ता असीम सरोदे ने बीबीसी को कहा कि "अगर सोशल मीडिया पर कुछ लोग गैर-ज़िम्मेदाराना व्यवहार कर रहे हों और भ्रामक जानकारियां फैला भी रहे हों तो भी ऐसे विषयों में इंसाफ को दरकिनार नहीं किया जा सकता है."

"ये आदेश सामाजिक व्यवस्था के सामने मौजूद ख़तरे को देखते हुए समाज में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से है और इसलिए ये सही है. लेकिन यहां मुद्दा ये है कि कौन तय करेगा कि सोशल मीडिया पर लिखा कौन सा कमेंट या पोस्ट या फिर कौन सी राय सामाजिक शांति के लिए ख़तरा है. अगर पुलिस को ये तय करने का अधिकार है कि क्या क़ानून के ख़िलाफ़ है और वो कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है तो ये क़ानून की उचित प्रक्रिया की मूल अवधारणा के ख़िलाफ़."

वो कहते हैं कि सरकार पर भरोसा न करना अपने आप में एक अस्पष्ट अवधारणा है. राज्य सरकार के किए ग़लत काम, मीडिया द्वारा सरकारी विभागों के काम का विश्लेषण मौलिक अधिकार के तहत है और इसे किसी सूरत में अपराध नहीं कहा जा सकता.

मुंबई में कोरोना वायरस

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कुछ मीडियाकर्मियों का कहना कि इस आदेश का इस्तेमाल ऐसे मीडिया के ख़िलाफ़ किया जा सकता है जो सरकार की आलोचना करते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार हेमंत देसाई कहते हैं, "पत्रकारों का काम भी सोशल मीडिया पर प्रकाशित होता है. अगर ये जनता के हित में है प्रशासन की आलोचना करना मीडिया का अधिकार है. कोरोना महामारी के दौर में ये ज़रूरी है कि अगर मरीज़ों तक स्वास्थ्य सेवा न पहुंचे तो मीडिया उसकी ख़बर दिखाए. ये सकारात्मक आलोचना है. सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलने से रोकना अगर गंभीर चिंता है तो इसे कोरोना काल तक ही क्यों सीमित रखा जाए? ग़लत जानकारी वाले पोस्ट पर तुरंत एक्शन लिया जाना चाहिए."

इसी साल अप्रैल के महीने में जारी विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक के अनुसार कोरोना महामारी के दौर में दुनिया भर की मीडिया की स्वतंत्रता ख़तरे में है. पेरिस स्थित रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर द्वारा संकलित 180 देशों की इस सूची में देशों की रैंकिंग और कोरोना महामारी को लेकर देशों की प्रतिक्रिया दर्ज की गई है.

इस सूची में बीते साल की तुलना में भारत दो स्थान नीचे खिसक आया है और अब 142वें स्थान पर है.

रिपोर्ट में भारत के बारे में कहा गया है, "यहां प्रेस की आज़ादी का लगातार उल्लंघन होता रहा है. इसमें पत्रकारों के ख़िलाफ़ पुलिस हिंसा, राजनीतिक कार्यकर्ताओं की तरफ से हमले और आपराधिक गुटों या भ्रष्ट स्थानीय अधिकारियों के बदल लेने के नाम पर की जाने वाली घटनाएं शामिल हैं."

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के महासचिव क्रिस्टोफ़ डेलॉयर का कहना है, "इस तरह की महामारी ऑथोरिटेरियन सरकारों को कड़े कदम लागू करने का मौक़ा देता है."

भारत में बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश और गुजरात के साथ-साथ कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ वो जगहें हैं जहां कोरोनो वायरस महामारी से जुड़ी ख़बरें करने के लिए कुछ स्थानीय पत्रकारों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की गई है.

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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