कोरोना संकटः दिल्ली-मुंबई में अस्पतालों की क्या है हालत

कोरोना संकट

इमेज स्रोत, Yogendra Kumar/Hindustan Times via Getty Images

    • Author, गुरप्रीत सैनी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

कोरोना वायरस ने किस कदर देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई को तोड़ कर रख दिया है, इसका अंदाज़ा यहां बढ़ते मामलों से लगाया जा सकता है.

कोरोना के 60 प्रतिशत से ज़्यादा मामले पांच शहरों में हैं जिनमें मुंबई और दिल्ली सबसे आगे हैं.

दिल्ली और पश्चिमी मुंबई के डॉक्टरों ने बीबीसी से कहा कि कोविड-19 के इलाज के लिए आने वाले लोगों में तेज़ बढ़ोतरी हो रही है.

डॉक्टरों को डर है कि क्रिटिकल केयर समेत हॉस्पिटल बेड की कमी हो सकती है.

कोरोना संकट

इमेज स्रोत, ANI

दिल्ली का हाल

दिल्ली सरकार ज़ोर दे रही है कि ज़्यादातर कोरोना संक्रमित घर पर ही रहकर इलाज करवाएं.

सरकार का कहना है कि जिन कोरोना मरीज़ों में कोई लक्षण नहीं है या मामूली लक्षण हैं, वो अपने-अपने घर पर ही ठीक हो सकते हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत नहीं है.

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 1

दिल्ली सरकार चाहती है कि 80 प्रतिशत कोरोना संक्रमितों का इलाज घर में हो. इसके लिए शुक्रवार के अख़बारों में होम आइसोलेशन की विस्तृत गाइडलाइन वाले विज्ञापन भी दिए गए. जिसपर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए. कयास लगाए गए कि दिल्ली के अस्पतालों में बेड की कमी पड़ रही है, इसलिए सरकार लोगों को अस्पतालों में लाना नहीं चाहती.

साथ ही विपक्ष ये भी आरोप लगा रहा है दिल्ली की केजरीवाल सरकार कोरोना से हुई मौतों के सही आंकड़े नहीं बता रही है. शुक्रवार को ट्वीटर पर #kejriwalliedpeopledied हैशटैग ट्रेंड करता रहा है.

गुरुवार को दिल्ली में कोरोना से 82 मौतों की ख़बर आई तो दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर सवाल उठा. लेकिन दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने साफ किया कि ये मौतों एक दिन में नहीं हुई हैं, बल्कि इनमें से 13 पिछले 24 घंटे में हुईं, बाकि 69 बीते 34 घंटे में हुई थीं, जिनका डेटा आने में वक्त लग गया.

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 2

इससे पहले गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने शवों को लेकर आ रही कुछ मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लिया था.

इन रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दिल्ली के लोक नायक अस्पताल के शवगृह में 108 शव हैं और वहां सभी 80 स्टोरेज रैक भर चुकी हैं और 28 शवों को एक के ऊपर एक ज़मीन पर रखा गया है. एक रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि 26 मई को निगम बोध घाट ने आठ शवों को लौटा दिया, क्योंकि ये फेसेलिटी और शवों को लेने की स्थिति में नहीं थी, क्योंकि वहां छह में से सिर्फ दो भट्टी ही काम कर रही हैं. रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि पांच दिन पहले मर चुके व्यक्ति के शव का भी अबतक अंतिम संस्कार नहीं किया गया है.

दक्षिण और पूर्वी एशिया में भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले सबसे अधिक हैं. . .

इसपर शुक्रवार को दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को जानकारी दी कि वो इस मामले में तुंरत कदम ले रहे हैं. इसके लिए शवदाहगृह के काम के घंटों को बढ़ा दिया गया है. वहीं एलएनजेपी अस्पताल से कहा गया है कि वो शवों को निगम बोध घाट के अलावा पंचकुइया और पंजाब बाग के शवदाहगृहों में भी भेजें.

दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि गुरुवार को 28 ऐसे शवों का दाह संस्कार किया गया और 25 का शनिवार को किया जाएगा. वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के ज़रिए सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डी एन पटेल और जस्टिस संगीता ढिंगरा की बेंच ने सख्ती से कहा कि ये सब दोबारा नहीं होना चाहिए.

छोड़िए X पोस्ट, 3
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 3

दिल्ली में कितने कोविड बेड, कितनी तैयारी

24 मई को दिल्ली सरकार ने 50 और उससे ज़्यादा बेड की क्षमता वाले निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स को 20 प्रतिशत बेड कोविड-19 के मरीज़ों के लिए आरक्षित रखने का निर्देश दिया था. दिल्ली में ऐसे निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स की संख्या 117 है.

दिल्ली डायलॉग कमिशन के वाइस चेयरमैन जैस्मीन शाह ने बीबीसी को बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में तकरीबन 700 कोविड19 बेड हैं, जिनमें इस हफ्ते की शुरुआत तक 530 में मरीज़ भर्ती थे. वहीं सरकारी अस्पतालों में कुल बेड में से केवल आधे में कोविड19 मरीज़ भर्ती हैं.

वहीं अगर सिर्फ दिल्ली के वेंटिलेटर वाले आईसीयू बेड की बात करें तो ताज़ा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़,

- एम्स नई दिल्ली के सभी आईसीयू में कुल 42 बेड हैं. जिनमें से 31 भरे हुए हैं और सिर्फ 11 खाली हैं.

- राम मनोहर लोहिया अस्पताल के सभी आईसीयू में कुल 67 बेड हैं, जिनमें से 53 भरे हुए हैं और सिर्फ 14 खाली हैं.

- लेडी हार्डिंग अस्पताल में कुल 29 वेंटिलेटर वाले बेड हैं. जिनमें से 20 भरे हुए हैं और महज़ 9 खाली हैं.

- वहीं सफदरजंग अस्पताल में वेंटिलेटर के साथ वाले 67 आईसीयू बेड हैं. जिनमें से 42 भरे हुए हैं और करीब 20 बेड खाली हैं.

- वल्लभ भाई चेस्ट इंस्टिट्यूट में कुल 6 आईसीयू बेड हैं, जिनमें से एक भरा हुआ है और पांच खाली हैं.

आंकड़ों को देखकर समझा जा सकता है कि दिल्ली में भी सीमित आईसीयू बेड और वेंटिलेटर हैं. हालांकि दिल्ली सरकार लगातार कह रही है कि उसने हर स्थिति के लिए तैयारी की हुई है.

छोड़िए YouTube पोस्ट
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त

मुंबई का हाल

एक बेड पर दो-दो कोरोना मरीज़, जिन्हें बेड नहीं मिले वो ज़मीन पर ही लेट गए, दो मरीज़ों की नली एक ही ऑक्सिजन टैंक से जुड़ी दिखी. मुंबई के एक सरकारी अस्पताल का वीडियो वायरल हुआ तो वहां के इमरजेंसी वॉर्ड की ये बदहाल तस्वीरें सभी ने देखीं.

लेकिन इस अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में भीड़ का होना लंबे वक्त से समस्या बनी हुई है, लेकिन कोरोना वायरस ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है. इससे पहले भी मुंबई से हिला देने वाले तस्वीरें आई थीं, जब डेड बॉडी के पास ही कोरोना मरीज़ों का इलाज किया जा रहा था.

जिस वक्त हम सोशल डिस्टेंसिंग की बात कर रहे हैं, उस वक्त कोरोना मरीज़ों का ये हाल देखकर मुंबई की स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल उठे. महाराष्ट्र सरकार भी इन हालातों से इनकार नहीं कर रही है.

सत्ताधारी शिवसेना के सांसद अरविंद सांवत ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि वो मानते हैं कि मुंबई की हालत गंभीर है. हालांकि उन्होंने कहा कि मुंबई की डेमोग्राफी इस समस्या की सबसे बड़ी वजह है. कम जगह में बड़ी आबादी, घनी बस्तियां और कॉमन टॉयलेट की वजह से मुंबई में आज ये हालात हैं.

हालांकि वो ये दावा भी करते हैं कि मुंबई इन स्थितियों से निपटने के लिए दूसरों से ज़्यादा कोशिश भी कर रही है. "भारत में और कोई दूसरा राज्य नहीं है, जहां 15 दिन में 1000 बेड का अस्पताल खुला. आप बांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स में जाकर देख लो, बांद्रा में जाकर देख लो, गोरोगांव में देख लोग वहां 2000 बेड का अस्पताल खुला. एक स्टेडियम में 700 से 800 बेड लगा दिए गए. हमारा काम प्रयास करना है. लेकिन बात ये है कि दुश्मन अदृश्य है इसलिए लड़ाई मुश्किल है."

भारत में कोरोनावायरस के मामले

यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.

राज्य या केंद्र शासित प्रदेश कुल मामले जो स्वस्थ हुए मौतें
महाराष्ट्र 1351153 1049947 35751
आंध्र प्रदेश 681161 612300 5745
तमिलनाडु 586397 530708 9383
कर्नाटक 582458 469750 8641
उत्तराखंड 390875 331270 5652
गोवा 273098 240703 5272
पश्चिम बंगाल 250580 219844 4837
ओडिशा 212609 177585 866
तेलंगाना 189283 158690 1116
बिहार 180032 166188 892
केरल 179923 121264 698
असम 173629 142297 667
हरियाणा 134623 114576 3431
राजस्थान 130971 109472 1456
हिमाचल प्रदेश 125412 108411 1331
मध्य प्रदेश 124166 100012 2242
पंजाब 111375 90345 3284
छत्तीसगढ़ 108458 74537 877
झारखंड 81417 68603 688
उत्तर प्रदेश 47502 36646 580
गुजरात 32396 27072 407
पुडुचेरी 26685 21156 515
जम्मू और कश्मीर 14457 10607 175
चंडीगढ़ 11678 9325 153
मणिपुर 10477 7982 64
लद्दाख 4152 3064 58
अंडमान निकोबार द्वीप समूह 3803 3582 53
दिल्ली 3015 2836 2
मिज़ोरम 1958 1459 0

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

मुंबई में कितने कोविड बेड, कितनी तैयारी

एक सरकारी रिपोर्ट के मताबिक़, मुंबई में 70 सरकारी अस्पताल हैं, जहां 20,700 बेड की क्षमता है और 1500 प्राइवेट फेसेलिटी हैं, जहां 20,000 बेड की क्षमता है. शहर में मौटे तौर पर 3,000 मरीज़ों के लिए एक बेड है, जबकि डब्ल्यूएचओ कहता है कि 550 लोगों पर एक बेड होना चाहिए.

बीबीसी मराठी सेवा के मयंक भागवत के मुताबिक़, फिलहाल प्राइवेट अस्पतालों के सभी आईसीयू बेड को भी सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया है और ये बेड सरकारी रेट पर लोगों को मुहैया कराए जा रहे हैं. 33 प्राइवेट अस्पतालों के 417 आईसीयू बेड आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग और मध्यम वर्ग के लिए रखे गए हैं.

इसके अलावा माइल्ड और बिना लक्षण वाले मरीज़ों के लिए कोविड केयर सेंटर में 30 हज़ार बेड तैयार किए जा रहे हैं. वहीं डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल और कोविड-19 सेंटर में 14000 बेड तैयार किए जा रहे हैं. ये दोनों ही 31 मई तक तैयार कर लेने की योजना है.

नक्शे पर

दुनिया भर में पुष्ट मामले

Group 4

पूरा इंटरैक्टिव देखने के लिए अपने ब्राउज़र को अपग्रेड करें

स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST

'पीक आना अभी बाकी'

लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ बार-बार कह रहे हैं कि भारत में अभी पीक आना बाकी है. ऐसे में मुंबई-दिल्ली के डॉक्टरों की चिंता बढ़ी हुई है.

दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल के क्रिटिकल केयर सेक्शन के डायरेक्टर अरुण दीवान ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा, "रोज़ाना हमारे पास आने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है. लोग भी बढ़ रहे हैं और गंभीर होते मरीज़ों की संख्या भी बढ़ रही है."

अपने 25 साल के करियर में डॉ दीवान ने ऐसे हालात नहीं देखे. वो कहते हैं कि हर दिन एक संघर्ष की तरह है और उन्हें डर है कि सबसे बुरे हालात आना अभी बाकी है. उनका कहना है कि सबसे बड़ी चुनौती मैनपावर की होगी, क्योंकि इस मामले पर हम लिमिट पर पहुंच चुके हैं.

हालांकि दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के पीआरओ दिनेश नारायण बीबीसी से कहते हैं कि सफदरजंग में ना तो बेड की कमी है और ना ही कोई और दिक़्क़त.

लेकिन दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कोरोना वार्ड में काम कर चुके एक डॉक्टर ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि आरएमएल में भी जितनी मौतों हो रही हैं उससे कम ही रिपोर्ट की जा रही हैं और स्वास्थ्य कर्मी मुश्किल स्थितियों में काम कर रहे हैं.

इसके लिए जावा स्क्रिप्ट की सुविधा वाले एक अपडेट ब्राउज़र और इंटरनेट की ज़रूरत है

भारत की चिंता

लगातार चिंता जताई जा रही है कि 1.3 अरब आबादी वाला एक देश, जिसके हेल्थकेयर सिस्टम पर पहले ही बहुत बोझ है, वो कोरोना के इस बढ़ते प्रकोप को कैसे संभाल पाएगा, क्योंकि इस हफ्ते मोटे तौर पर हर दिन 6 हज़ार मामले सामने आए हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने एक निजी चैनल से कहा है कि मामलों की बढ़ती संख्या से जनता को घबराने की ज़रूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि अच्छी बात ये है डब्लिंग रेट कम हुआ है और रिकवरी रेट बढ़ा है.

आगे की तैयारियों के बारे में अश्विनी चैबे ने कहा, "राज्यों को कुछ चीज़ों के लिए स्वतंत्र फैसले लेने की इजाज़त दी है. हमने सभी राज्यों के सहयोग से तैयारी की हुई है."

"सभी राज्यों में मिलाकर साढ़े तीन लाख से भी ज़्यादा आइसोलेशन बेड हैं. जिनमें से कुछ हज़ारों में वेंटिलेटर की भी सुविधा है, आईसीयू की सुविधा है. साथ ही रेल मंत्रालय के सहयोग से 30 हज़ार बोगी में लगभग साढ़े तीन लाख बेड तैयार हुए हैं आइसोलेशन के, इसमें आईसीयू इत्यादि सब प्रकार का है."

कृपया ब्राउज़र अपग्रेड करें

कोरोना वायरस ट्रांसलेटर

इन सभी शब्दों का क्या मतलब है?

मुुख्य कहानी पर जाएं
  • एंटीबॉडीज टेस्ट

    ऐसा मेडिकल टेस्ट जिससे साबित हो सके कि किसी शख्स को कोरोना वायरस था और अब उसमें कुछ इम्युनिटी आ गई है. यह टेस्ट खून में एंटीबॉडीज का पता लगाता है, जिन्हें बीमारी से लड़ने के लिए शरीर पैदा करता है.

  • बिना लक्षण वाले

    ऐसा शख्स जिसे बीमारी हुई मगर उसमें कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए. कुछ स्टडीज से पता चला है कि कोरोना वायरस का शिकार हुए कुछ लोगों में तेज़ बुखार या कफ़ जैसे आम लक्षण नहीं नज़र आए.

  • कोरोना वायरस

    वायरस समूह में से एक वायरस जिससे मनुष्यों या जानवरों में गंभीर या हल्की बीमारी हो सकती है. पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस से कोविड-19 बीमारी हो रही है. सामान्य सर्दी या इंफ्लूएंजा (फ़्लू) फैलाने वाले दूसरे तरह के कोरोना वायरस हैं.

  • कोविड-19

    कोरोना वायरस की वजह से फैल रही बीमारी का सबसे पहले पता 2019 के अंत में चीन के वुहान में लगा. यह मूलरूप में फ़ेफ़ड़ों पर असर डालता है.

  • संक्रमण की तेज़ी को रोकना

    ट्रांसमिशन की दर को कम करना ताकि चार्ट पर प्रदर्शित किए जाने पर मामलों की संख्या के आधार पर पीक को फ्लैट कर कर्व को नीचे लाया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके.

  • फ़्लू

    इंफ्लूएंजा का संक्षिप्त नाम. एक वायरस जो कि सीजनल बीमारियों में मनुष्यों और जानवरों में फैलता है.

  • सामुदायिक प्रतिरोधक क्षमता

    एक बड़ी आबादी तक पहुंचने के बाद किस तरह से एक बीमारी का फैलाव सुस्त पड़ता है.

  • लड़ने में सक्षम

    ऐसा शख्स जिसका शरीर किसी बीमारी के सामने टिक सके या उसे रोक दे वह इससे इम्यून कहा जाता है. एक बार जब कोई शख्स कोरोना वायरस से उबर जाता है तो ऐसा माना जाता है कि वह एक निश्चित अवधि तक इस बीमारी का फिर से शिकार नहीं हो सकता.

  • वायरस के असर करने की अवधि

    किसी बीमारी का शिकार होने और उसका लक्षण दिखाई देना शुरू होने के बीच की अवधि

  • लॉकडाउन

    आवाजाही या रोज़ाना की ज़िंदगी पर पाबंदियां, जिनमें सार्वजनिक इमारतें बंद हैं और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए कहा गया है. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई देशों में लॉकडाउन को कड़े उपायों के तौर पर लागू किया गया है."

  • शुरुआत

    किसी क्लस्टर या अलग-अलग इलाकों में तेज रफ्तार से बीमारी के कई मामले सामने आना.

  • महामारी

    किसी गंभीर बीमारी का कई देशों में एकसाथ तेजी से फैलना महामारी कहलाता है.

  • एकांतवास

    किसी संक्रामक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए इसकी जद में आए लोगों को अलग रखना.

  • सार्स

    सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम एक कोरोना वायरस का ही प्रकार है जो कि एशिया में 2003 में शुरू हुआ था.

  • सेल्फ-आइसोलेशन

    घर पर ही रहना और अन्य लोगों से सभी तरह के संपर्क से बचना ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके.

  • सामाजिक दूरी

    अन्य लोगों से दूर रहना ताकि बीमारी के ट्रांसमिशन की रफ्तार कम की जा सके. सरकार की सलाह है कि अपने साथ रह रहे लोगों के अलावा दोस्तों और रिश्तेदारों से न मिलें. साथ ही सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से भी बचें.

  • आपातकालीन स्थिति

    किसी संकट के वक्त सरकार द्वारा रोज़ाना की जिंदगी पर पाबंदी लगाने के मकसद से उठाए गए कदम. इसमें स्कूलों और दफ्तरों को बंद करना, लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाना और यहां तक कि सैन्य बलों को तैनात करना ताकि रेगुलर इमर्जेंसी सेवाओं को सपोर्ट किया जा सके."

  • लक्षण

    संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर की कोशिश के तौर पर इम्यून सिस्टम से किसी बीमारी के संकेत. कोरोना वायरस का मुख्य लक्षण बुखार, सूखी खांसी और सांस लेने में दिक्कत होना है."

  • टीका

    ऐसा इलाज जिससे शरीर एंटीबॉडीज पैदा करता है, जो कि बीमारी से लड़ता है और आगे के संक्रमण से लड़ने की इम्युनिटी देता है."

  • वेंटीलेटर

    ऐसी मशीन जो कि ऐसे वक्त पर शरीर के लिए सांस लेने का काम करती है जब फ़ेफ़ड़े काम करना बंद करने लगते हैं.

  • विषाणु

    एक छोटा सा एजेंट जो कि किसी जीवित सेल के भीतर अपनी कॉपी बना लेता है. वायरस की वजह से ये सेल मरने लगती हैं और शरीर की सामान्य केमिकल प्रक्रियाओं को अवरुद्ध कर देती हैं जिससे बीमारी हो जाती है.

मुख्य कहानी नीचे जारी है
कोरोना वायरस के बारे में जानकारी
लाइन
हेल्पलाइन
कोरोना वायरस के बारे में जानकारी

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)