क्या कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाये जाने के बाद की है ये तस्वीर? फ़ैक्ट चेक

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- Author, फ़ैक्ट चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
हाथ और सिर पर पट्टी बांधे खड़े कुछ बच्चों की तस्वीरें बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के हवाले से सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही हैं.
इन तस्वीरों के साथ दावा किया गया है कि 'कश्मीर में आर्टिकल-370 हटने के बाद 42 लोग पैलेट गन का शिकार हो चुके हैं. इनमें से अधिकतर अपनी आँखें गंवा चुके हैं'.
यह सूचना और दोनों तस्वीरें, सोशल मीडिया पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को सोर्स बताकर शेयर की जा रही हैं जो कि ग़लत है. बीबीसी आधिकारिक तौर पर इसका खंडन करता है.
5 अगस्त 2019 को आर्टिकल-370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी किये जाने के बाद भारत प्रशासित कश्मीर हो या पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर, दोनों तरफ़ से बीबीसी की न्यूज़ रिपोर्टिंग लगातार जारी है.
इस कवरेज में कहीं भी सोशल मीडिया पर शेयर हो रहीं बच्चों की ये दो तस्वीरें इस्तेमाल नहीं की गई हैं.

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तस्वीरों की जाँच
रिवर्स इमेज सर्च से पता चलता है कि ये दोनों तस्वीरें फ़रवरी 2019 से इंटरनेट पर मौजूद हैं.
19 फ़रवरी 2019 को 'द जय हिंद' नाम की एक वेबसाइट ने इस तस्वीर का इस्तेमाल किया था.

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सोशल मीडिया पर भी 18 फ़रवरी 2019 के कुछ पोस्ट हमें मिले जिनमें इन दो तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है.
यानी जम्मू-कश्मीर की मौजूदा तनावपूर्ण स्थिति से इन तस्वीरों का कोई संबंध नहीं है.
यह बात अलग है कि कुछ भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन समय-समय पर भारतीय फ़ौज द्वारा भारत प्रशासित कश्मीर के लोगों पर पैलेट गन के इस्तेमाल की आलोचना करते रहे हैं.
साल 2016 में गृह मंत्रालय के एक पैनल ने भारत प्रशासित कश्मीर में पैलेट गन के विकल्प के तौर पर कम घातक माने जाने वाले मिर्च पाउडर के गोले इस्तेमाल करने की सलाह दी थी.
तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस समिति के गठन की मंजूरी दी थी जिसे पैलेट गन का विकल्प तलाशने के लिए बनाया गया था.

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संवैधानिक स्वायत्तता ख़त्म करने के सरकार के फ़ैसले के बाद भारत प्रशासित कश्मीर में तैनात सुरक्षाबलों पर पिटाई और प्रताड़ना के आरोप लग रहे हैं. लेकिन भारतीय सेना ने इन आरोपों को 'आधारहीन और अप्रमाणित' बताया है.
बीबीसी ने भारत प्रशासित कश्मीर के दक्षिणी ज़िलों के कुछ गाँवों का दौरा करने के बाद शुक्रवार को एक रिपोर्ट पब्लिश की है.
इससे पहले भी श्रीनगर से सटे सौरा में जुमे की नमाज़ के बाद हुई हिंसा पर बीबीसी ने एक ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की थी.
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