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एक मुलाक़ात हिमेश रेशमिया के साथ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते हैं. बीबीसी एक मुलाक़ात में इस बार हैं संगीतकार के रूप में अपना करियर शुरू करने और गायकी में धमाल मचाने के बाद अब अभिनय की दुनिया में तहलका मचाने की इरादा रखे वाले हिमेश रेशमिया. संगीतकार, पार्श्वगायक से लेकर अभिनय तक का आपका शानदार सफ़र रहा है. आपके शब्दों में कैसा रहा ये सफ़र? ये सफ़र परंपरा से हटकर रहा. मैं ये नहीं मानता कि ये मैंने अपने दम पर ही किया है. ये लोगों की दुआ और कोई चमत्कारिक शक्ति है, जिसके बूते मैं रोज़ाना 18-19 घंटे काम कर सका. अब तो बॉलीवुड की पाँच फ़िल्में मेरे पास हैं. मैं तो यही कहूँगा कि ये सब कुछ ईश्वर के आशीर्वाद से ही संभव हुआ है. जब आपने संगीतकार के रूप में अपना सफर शुरू किया था, तो क्या आपको पता था कि ये सब होगा? नहीं. वाकई मुझे पता नहीं था. संगीतकार बनना चाहता था. गायक बनूँगा, ऐसा नहीं सोचा था. हाँ, गाता अच्छा था. इसलिए प्रोड्यूसर, डायरेक्टर मुझसे कहते थे कि तुम्हे हमारे लिए गाना चाहिए. मैंने अब्बास-मस्तान से कहा भी था कि मैं उनके लिए ज़रूर गाऊँगा. फिर ‘आशिक बनाया आपने’ में आदित्य दत्त ने जो गाना रिकॉर्ड किया, उसने सब कुछ बदल दिया. मैं अब फ़िल्में भी कर रहा हूँ जिसमें मैं एक्टर, गायक और संगीतकार हूँ. इसके तहत मुझे साल भर में क़रीब 40 गाने करने होंगे. काफ़ी मेहनत का काम है. परंपरा से हटकर है. मेरी बहन रूपा मेरे स्टाइल पर काम कर रही है. तो मैं तो ये कहूँगा ये लोगों की दुआएँ ही हैं, वरना ऐसा होता कहाँ है. आपका पहला बड़ा कामयाब गाना कौन सा था? मुझे सलमान भाई की वजह से बड़ा ब्रेक मिला. मेरा पहला ही गाना फ़िल्म ‘प्यार किया तो डरना क्या’ का ‘ओढली चुनरिया तेरे नाम की’ था. इसके बाद हमराज, तेरे नाम, क्या दिल ने कहा, जस्ट चिल, काफ़ी मशहूर हुए. इसके बाद हाई पिच और कैप का सिलसिला शुरू हुआ. अब नये लुक के साथ एक्टिंग का सिलसिला. मैं पाँच फ़िल्में कर रहा हूँ क़र्ज, कजरारे, अ न्यू लव ईशटोरी, मुड़ मुड़ के न देख और हे गुज्जू. इन फ़िल्मों में मैं जॉन मैथ्यू, सतीश कौशिक, महेश भट्ट, पूजा भट्ट के साथ काम कर रहा हूँ. तो मैं तो यही कहूँगा कि आशीर्वाद से ही ‘गुजराती ढोकला ब्वॉय’ अभिनय के क्षेत्र में आ सका. कर्ज़ में मोंटी की भूमिका की. हालाँकि मैं कहूँगा कि असली मोंटी ऋषि कपूर ही है. लेकिन मैं साफ़ कहूँगा कि मैंने किसी को नक़ल करने की कोशिश नहीं की है. आप कह रहे थे ‘गुजराती ढोकला ब्वॉय’. ये क्या कहानी है? मैं 16 साल की उम्र में जब सीरियल प्रोड्यूसर बना था तो मुझे ढोकला बहुत पसंद था. गुजराती हूँ इसलिए ढोकला घर में बनता था. संगीत मेरे खून में था, अपने पिता से संगीत सीखा था. ज़ी टीवी के लिए कुछ सीरियल प्रोड्यूस कर रहा था, उनके लिए टाइटल संगीत भी देता था. फिर सलमान भाई मिले, उन्होंने कुछ गाने सुने और मुझे ब्रेक दिया. तो आप मानेंगे कि सलमान ख़ान ‘गोल्डन हार्टेड मैन’ हैं? हाँ. बिल्कुल वो गोल्डन हार्टेड मैन हैं. क्योंकि आज के जमाने में नये लोगों को मौका देना बहुत बड़ी बात है. और ये आशिक बनाया आपने, आपका सुरूर. ये सब कैसे बने, कैसे धुन आपके दिमाग में आई. आखिर क्या चलता था आपके दिमाग में? मैं हर गाने से पहले ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ. सुर हवा में हैं और आपको उन्हें जोड़कर गाना बनाना होता है. सामने समीरजी बैठे होते हैं. जुगलबंदी होती है. वो कुछ हूक छेड़ते हैं, मुखड़ा छेड़ते हैं. मैं कंपोज करता हूँ.
मैं चाहता था कि अलग शब्द, आवाज़ इस्तेमाल करूँ. ये बहुत ज़रूरी है कि इससे पहले कि लोग परंपरागत गानों से बोर हों कुछ अलग किया जाए. यही वजह थी कि तेरे नाम में मैंने ढोलक का इस्तेमाल किया. आशिक बनाया में मैंने हाई पिच में गाया. हालाँकि मेरी असली आवाज़ मिडिल ऑक्टेव में है, जिसमें मैंने ‘एक हसीना थी’ गाया. मैं अपने अंदाज़ को हाई पिच बोलता रहा, लोग कहते रहे कि मैं नाक से गाता हूँ. मैं कहता रहा कि सुरों की कुछ श्रुतियां हाई पिच में हो जाती हैं और आरडी बर्मन भी हाईपिच में गाते थे. उस पर आशाजी नाराज़ हो गईं. मैंने माफ़ी मांगी और उन्होंने मुझे माफ़ भी कर दिया. तो इन दो वर्षों में बहुत कुछ हो गया और लोगों ने मुझे स्वीकार किया. मैं ये कार्यक्रम लगभग दो साल से कर रहा हूँ. इस बीच में आपको कार्यक्रम में लाने की बहुत फरमाइश हुई. लड़कियाँ आपकी ज़बर्दस्त दीवानी हैं. तो आप उन्हें कैसे संभालते हैं? मुझे लगता है कि अगर आदमी ये सोचने लग जाए कि उसने कुछ पा लिया है तो उसकी तरक्की रुक जाती है और वो कामयाबी का आनंद उठाने लगता है. मैं ऐसा नहीं करता हूँ. प्रशंसकों के लिए आपका कर्ज़ यही है कि उनके लिए कुछ नया करें. जब आपके पीछे इतने प्रशंसक होते हैं तो डर भी लगता है कि उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए बहुत कुछ करना पड़ेगा. आपकी सबसे क्रेज़ी प्रशंसक कौन है? मेरी दो साल की भाँजी है. उसे मुझे मामा कहना चाहिए, लेकिन वो मुझे सुरूर अंकल ही कहती है. अभिनय शुरू करने से पहले आपने एक्टिंग क्लासेज़ ली थी क्या नहीं. एक्टिंग क्लासेज़ तो नहीं ली. लेकिन सतीश कौशिक ने अभिनय में मेरी काफ़ी मदद की. ऋषि कपूर आपको कैसे लगते थे? सुपर स्टार. द बेस्ट लुकिंग मैन. वाकई शानदार अभिनेता हैं. मुझे खुशी है कि उन्होंने कर्ज़ का संगीत पसंद किया और फ़िल्म का मुहूर्त भी किया. आप कई खूबसूरत अभिनेत्रियों के साथ नज़र आ रहे हैं. उर्मिला मातोंडकर, मल्लिका शहरावत. क्या मामला है? मामला कुछ भी नहीं है. आपका सुरूर में मल्लिकाजी की भूमिका बहुत अच्छी थी. कर्ज़ में उर्मिलाजी की भूमिका तो काफ़ी सशक्त है. मुझे लगता है कि उर्मिलाजी ने ये भूमिका स्वीकार कर मुझे बड़ा कर्ज़ दिया है. वैसे मैं कहूँगा कि अभिनेता बनना आसान नहीं रहा. इसके लिए मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी. वजन घटाना पड़ा, तमाम स्टाइल, खाने-पीने पर नियंत्रण. अब देखना ये है कि ये मेहनत कितना रंग लाती है. बहुत लोग आपकी ट्रेडमार्क टोपी ढूँढ रहे हैं. कहाँ गईं आपकी टोपी मेरे घर में दो हज़ार टोपियाँ हैं. इनमें से 1,999 टोपियाँ मैं अपने प्रशंसकों को देने वाला हूँ. एक टोपी ही अपने पास रखूँगा. दरअसल, हर दो साल में मैंने कुछ नया करने की कोशिश की है. टोपी के साथ सफलता पाने के बाद मेरे लिए ज़रूरी था कि अब कुछ नया करूँ. तो क्या आपने सोचा था कि टोपी के साथ आप अपना अलग अंदाज़ बनाएँगे?
नहीं. ऐसा नहीं है. दरअसल, मेरे बाल उड़ गए थे. मेरी बहन रूपा ने दाढ़ी रखने के साथ टोपी पहनने को कहा. भूषण कुमार ने मुझसे कहा कि ‘आशिक बनाया आपने’ का वीडियो बनाना होगा. तो चूँकि वीडियो में आना था तो अच्छा दिखने के लिए टोपी, दाढ़ी रखी और ये स्टाइल बन गया. गाना कंपोज करना, गाने गाना और एक्टिंग करना. आपके दिल के नजदीक क्या है? बेशक संगीत मेरे दिल के सबसे नजदीक है, मेरी ज़िंदगी है. और अभिनय में कामयाबी पाना मेरा ख़्वाब है. अब रियलिटी टीवी शो में भी आ रहे हैं. उसमें कई लोग आपको सुनने के लिए ये शो देखते हैं. कई लोग नापसंद भी करते हैं कि ये आदमी इतना क्यों बोलता है? ज़रूर. मेरा मानना है कि 90 फ़ीसदी लोग मुझे पसंद करते हैं. दस फ़ीसदी लोग मेरे ख़िलाफ़ रहते हैं. उनको इसका हक़ भी है. मेरी कोशिश उनका दिल जीतने की है और मैं ये कोशिश करता रहूँगा. वैसे भी मैं इन शो में जो कुछ भी बोलता हूँ वो अपने लिए नहीं, बल्कि शो में हिस्सा ले रहे प्रतिभागियों के लिए बोलता हूँ. आप प्रतिभागियों को बहुत प्रोत्साहित करते हैं. तो क्या आप सच में मन से बोलते हैं? मैं एक ही बात मानता हूँ. जब आप गुरू की कुर्सी पर बैठे हैं तो आपको मार्गदर्शन करना चाहिए और मैं वही करता हूँ. मैं प्रतिभागी को साफ कहता हूँ कि अगर तुम किसी की नक़ल करते हो तो वो चलेगा नहीं. मैं उस दौर से गुज़र चुका हूँ. इसलिए मैं उनका मार्गदर्शन करता हूँ. और जो ये नाक से गाने वाला विवाद था. तो क्या अब ये खत्म हो गया है? नहीं. लेकिन मैंने अब ये मान लिया है कि अगर ये कहने से किसी का दिल दुखता है कि मैं हाई पिच गाता हूँ और वो ये मानते हैं कि मैं नाक से गाता हूँ, तो मैं स्वीकार करता हूँ कि मैं नाक से गाता हूँ. तो क्या कर्ज़ में सभी गाने वही हैं जो पुरानी फ़िल्म में थे? नहीं. इसमें सिर्फ़ दो गाने पुरानी फ़िल्म के हैं. ‘एक हसीना’, ‘सोणिए जी तेरे नाल’. बाकी सभी गाने नए हैं. दूसरे समकालीन गायकों में आपके पसंदीदा? सोनू निगम मुझे बहुत पसंद हैं. वो बहुत प्रतिभावान हैं. मेरी नज़र में वो देश के सबसे अच्छे गायक हैं. उनके अलावा केके, शान, आतिफ़, प्रीतम, शंकर अहसान, आदेशजी, रहमान बहुत अच्छे संगीतकार और गायक हैं. आप समकालीन गायकों की तारीफ़ में भी पीछे नहीं रहते? इसकी वजह ये है कि मेरे माता-पिता ने ये सिखाया है कि अपनी कामयाबी के लिए भगवान से जो भी मांगों, दूसरों के लिए भी अच्छा मांगो. जबसे ये कोशिश रही तब से अच्छा हो रहा है. दूसरी बात ये है कि साथी गायकों संगीतकार से कहीं न कहीं मुलाक़ात हो रही है, हम पास आ रहे हैं, तालमेल बन रहा है. सोनू निगम का कोई गाना जो आपको बहुत पसंद हो? मेरे लिए बतौर संगीतकार सोनू जी ने लगभग 50 गाने गाये हैं. ‘अपने तो अपने होते हैं’ मेरा और उनका पसंदीदा गाना है. आपका पसंदीदा अभिनेता?
शाहरूख ख़ान, सलमान ख़ान, आमिर ख़ान, अक्षय कुमार, अमिताभ बच्चन, ऋतिक रोशन. ये छह अभिनेता मुझे बहुत पसंद हैं. और पसंदीदा अभिनेत्री? एक ही नाम बताऊँगा तो मुश्किल हो जाएगी. फिर भी अगर एक अभिनेत्री बतानी पड़ी तो काजोल का नाम लेना चाहूँगा. आपने निजी ज़िदगी पर पर्दा डाला हुआ है. ऐसा क्यों? नहीं. ऐसा नहीं है. पर्दा नहीं डाला है. मेरा परिवार मीडिया में आने पर थोड़ा शर्माता है. मेरी पत्नी का नाम कोमल है. मेरा बेटा स्वयं 10 साल का है. मैं कर्ज़ सबसे पहले अपने बेटे को दिखाना चाहता हूँ. वो फ़िल्मों की अच्छी परख रखता है. मेरे माता-पिता हैं. मेरा एक बड़ा भाई था जिनका 22 साल की उम्र में निधन हो गया था, जब मैं महज 13 साल का था. यही मेरे परिवार की कहानी है. ऐसा ख़्वाब जो आप पूरा करना चाहें? मैं चाहता हूँ कि जो एक फ़ीसदी लोग मुझे नापसंद करते हैं, उन्हें भी खुद से जोड़ लूँ. मैं उनका भी दिल जीत सकूँ. ईश्वर ने चाहा तो मैं ऐसा करने में कामयाब रहूँगा. तो आप चाहते हैं कि हिमेश के जादू से कोई बचा न रहे? नहीं. ऐसा नहीं है. मैं चाहता हूँ कि सभी लोग मेरे काम को पसंद करें. जब मैंने एलबम ‘बनारस’ किया तो ये एक फ़ीसदी लोग मेरे साथ थे. लेकिन ये एलबम बुरी तरह फ्लॉप रहा और मैं फिर ऐसा संगीत देने की हिम्मत नहीं जुटा सका. तो मैं वो ब्लैंड ढूंढ रहा हूँ जिसमें सभी खुश रहें. भविष्य में किस तरह की फ़िल्में करना चाहेंगे? अभी मैं ‘हे गुज्जू’, ‘कजरारे’, ‘मुड़-मुड़ कर न देख’ कर रहा हूँ. आगे भी बॉलीवुड की परंपरागत फ़िल्में करना चाहूँगा. कुछ रीयल सिनेमा भी करना चाहूँगा. हर किस्म का किरदार करना चाहूँगा. संगीत के अलावा आपके शौक क्या हैं? दोस्तों से मिलना, डीवीडी देखना, रेस्टोरेंट में खाना खाना. ईश्वर का आशीर्वाद है कि मेरा काम ही मेरी हॉबी है. आपको गाने के लिए बहुत अभ्यास करना पड़ता होगा. इसके लिए क्या करते हैं? गाते रहना बहुत ज़रूरी है. जितना अभ्यास करेंगे, उतना अच्छा गाएँगे. नौजवान और प्रतिभाशाली गायकों को क्या संदेश देंगे? मैं ये कहना चाहूँगा कि माता-पिता का साथ कभी न छोड़ें. अच्छा आदमी बनने की कोशिश करें. कुछ भी असंभव नहीं है. मेहनत करें. इनसे सबसे बढ़कर सबसे पहले ये जाँच लें कि आपके भीतर वो जज्बा या वो योग्यता है भी कि नहीं, जिस क्षेत्र में आप जाना चाहते हैं. हर आदमी में कुछ न कुछ खूबी ज़रूर होती है, कोई ‘एक्स फैक्टर’. ज़रूरत इसको पहचानने की है. आपकी ये ख़ास खूबी क्या है? मेरी ग़ैर पारंपरिक आवाज़. कुछ अलग संगीत. और जो दूसरे लोग सोचते हैं, उससे कुछ अलग हटकर सोचना और करना. मैं समझता हूँ कि यही मेरी सबसे बड़ी खूबी है. आने वाले समय में आपके प्रशंसक किस तरह के हिमेश रेशमिया को देखेंगे? संगीतकार, गायक, अभिनेता के रूप में. अच्छे, अलग और ताजे़ संगीत और अभिनय के साथ. |
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