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रविवार, 18 मई, 2008 को 21:35 GMT तक के समाचार
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अफ़गानिस्तान में समकालीन कला
कार्यशाला में भाग लेता एक कलाकार
अफ़गानिस्तान में तालिबान शासन के दौरान वहाँ की कला को काफ़ी नुकसान पहुँचा था

अफ़गानिस्तान की 14 साल की सारा नबील एक आम चित्रकार नहीं हैं. वह अपने कलाकृतियों में अफ़गानिस्तान के सामाजिक जीवन में आए उतार–चढ़ाव को दिखाती हैं.

उनके बनाए सुनहरे रंग वाले एक कटोरे में बनी पट्टियाँ वैवाहिक संस्था की त्रुटियों का प्रतीक हैं.

सारा कहती है कि जब आप कटोरे का ढक्कन उठाते हैं तो आप देखते हैं कि इसका अंतिम सिरा जला हुआ है और वहाँ टूटे शीशे और चूड़ियों के टुकड़े पड़े हुए हैं.

वह पूछती हैं, एक अफ़गान महिला का जीवन इस तरह क्यों हो गया है.

सारा कहती हैं, "जब एक महिला शादी के बाद अपने पति के घर में प्रवेश करती है तो उसकी ज़िंदगी तबाह हो जाती है, उसका दिल टूट जाता है और धीरे-धीरे वह बेकार हो जाती है."

पहला पुरस्कार

सारा नबील की कलाकृति अफ़गानिस्तान के पहले समकालीन कला पुरस्कार के लिए नामित की गई है.

इस पुरस्कार को टरकोस माउंटेन और एक स्थानीय व्यवसायी ने प्रायोजित किया है. यह संस्था अफ़गानिस्तान में कला को बढ़ावा देती है.

चुने गए कलाकारों के लिए एक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया

दो हज़ार डालर की राशि वाले इस पुरस्कार के लिए पूरे अफ़गानिस्तान से 70 लोगों ने अपनी प्रविष्टियाँ भेजी थीं. इनमें से 10 लोगों को छाँटा गया है जिसमें सारा नबील का नाम भी शामिल है.

इसके आयोजकों में से एक जमाइमा मॉन्टागू कहते हैं,'' कला किसी भी समाज में होने वाली गतिविधियों को दिखाने वाला एक प्रमुख माध्यम है. महत्वपूर्ण यह है कि अफ़गानिस्तान सिर्फ़ एक ऐसी जगह नहीं है जहाँ हादसे होते हैं बल्कि किसी भी अन्य शहर की तरह है जहाँ सांस्कृतिक जीवन भी चल सकता है. "

33 वर्षीय मोहम्मद इस्माइल जादरान ने जब रेडियो पर इस पुरस्कार का विज्ञापन सुना तो वह अपने आप को रोक नहीं पाए. वह किराए की टैक्सी में अपनी 200 कलाकृतियों को लादकर चल पड़े.

अफ़गानिस्तान के उत्तरी-पूर्वी प्रदेश खोश्त के एक रुढ़िवादी गाँव के वह अकेले कलाकार हैं.

उन्होंने बताया, "आठ घंटे की इस कठिन यात्रा में लकड़ी से बनी मेरी तीन कलाकृतियाँ नष्ट हो गईं, लेकिन यह एक ऐसा अवसर था जिसे मैं गंवाना नहीं चाहता था. "

समकालीन कला का जन्म अफ़गानिस्तान में उस समय हुआ जब सोवियत संघ ने वहाँ पर अपना कब्ज़ा जमाया हुआ था.

तालिबान शासन और कला

आर्टिस्ट यूनियन ऑफ़ अफ़गानिस्तान के पूर्व अध्यक्ष तिमोर हकमियार कहते हैं कि अधिकांश अफ़गान लोगों के लिए समकालीन कला को समझ पाना संभव नहीं है. लेकिन लोगों में जागरूकता लाने के लिए यह एक अच्छा प्रयास है.

युद्ध प्रभावित अफ़गानिस्तान में तालेबान शासन के दौरान सभी तरह की कलाओं का नुकसान हुआ था.

पुरस्कार के लिए नामित सभी 10 कलाकार दो सप्ताह की एक कार्यशाला में भी शामिल हुए. जिसका उद्देश्य समकालीन कला में नई संभावनाएं तलाशना था.

इस कार्यशाला में बोलने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय कलाकारों को आमंत्रित किया गया था.

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