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अफ़ग़ानिस्तान ने चुना पहला 'आइडल' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में बेहद चर्चित और विवादास्पद रहे संगीत प्रतिभा चयन कार्यक्रम का फ़ाइनल समाप्त हो गया है और देश ने अपना पहला 'आइडल' चुन लिया है. हालांकि यह कार्यक्रम विवाद में इसलिए आया था कि इसके अंतिम तीन प्रतियोगियों में से एक लड़की थी लेकिन आख़िरकार वह विजेता नहीं बन पाईं और रफ़ाई नाबज़ादा को 'अफ़ग़ान स्टार' चुना गया. 19 साल के रफ़ाई नाबज़ादा ने 21 साल के हमीद साखीज़ादा को पछाड़कर यह प्रतियोगिता जीती. अंतिम तीन में पहुँचने वाली लड़की लिमा सहर पिछले हफ़्ते ही प्रतियोगिता से बाहर हो गईं थीं. अमरीका के पॉप आइडल की तर्ज़ पर बना इस कार्यक्रम को कोई एक करोड़ दस लाख लोग देख रहे थे यानी कि अफ़ग़ानिस्तान की एक तिहाई जनता इसकी दर्शक थी. बीबीसी के अफ़ग़ानिस्तान संवाददाता एलेस्टेयर लीथहेड का कहना है कि प्रतियोगियों को नामा (पैसा) मिले न मिले उन्होंने नाम तो भरपूर कमाया है. रुढ़िवादी समाज और विवाद इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए कोई दो हज़ार लोगों ने आवेदन किया था. बाद में पूरे देश से 12 लोगों का चयन किया गया. हालांकि अफ़ग़ान समाज अभी भी एक रुढ़िवादी समाज है लेकिन अंतिम तीन स्थान पर पहुँचने वाले प्रतियोगियों में कंधार की एक लड़की भी थी.
यह कार्यक्रम अफ़ग़ानिस्तान के टोला टीवी पर प्रसारित हो रहा था. साब मुसैनी टोला टीवी के संस्थापकों में से एक हैं. वे मानते हैं कि कार्यक्रम ख़ासे विवाद में भी रहा, "इस्लामिक विद्वानों की परिषद उलेमा काउंसिल ने खुलेआम इस कार्यक्रम का विरोध किया." मुसैनी का कहना है, "सरकारी ख़र्च से चलने वाली इस संस्था का विरोध राजनीतिक ज़्यादा था क्योंकि यह कार्यक्रम बेहद लोकप्रिय था." टीवी कंपनी के संचालक जो भी कहें यह विरोध और विवाद दिखाता है कि अफ़ग़ान समाज अभी भी कितना रुढ़िवादी और परंपरावादी है. काबुल में कभी तालेबान कमांडरों का जमावड़ा होता था, लेकिन उसी काबुल के इंटरकॉन्टिनेंटल होटल के बॉलरुम में इस कार्यक्रम के फ़ाइनल के लिए भारी-भरकम व्यवस्था थी. एक बड़ा स्टेज था और भड़कीली डिस्को लाइटें थीं. आख़िर परिणाम घोषित हुआ तो रफ़ाई नाबज़ादा विजेता घोषित किए गए. अंतिम तीन में पहुँचने वाली अकेली लड़की और अकेली पश्तून लिमा सहर प्रतियोगिता से पहले ही बाहर हो गईं थीं. |
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