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काबुल के रंगमंच पर शेक्सपियर के रंग | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में इन दिनों दर्शक शेक्सपियर के नाटक का आनंद ले रहे हैं. शेक्सपियर के नाटक लव्स लेबर लॉस्ट का दरी भाषा में अनुवाद किया गया है और इसका रूपांतर करके इसे अफ़ग़ानिस्तान की कहानी बना दिया गया है. यह 2001 में तालेबान के पतन के बाद देश में मंचित होने वाले पहले नाटकों में से एक है. नाटककार अज़ीज़ इलियास ने कहा, "थिएटर तो टेलीविज़न से भी ज़्यादा लोकप्रिय है लेकिन तालेबान के ज़माने में इसकी अनुमति नहीं थी. दर्शकों की भारी भीड़ के बीच नाटक का लगातार पाँच रातों तक मंचन किया गया और ब्रिटिश काउंसिल ने इसे प्रायोजित किया था. ब्रिटिश काउंसिल के प्रतिनिधि मैल्कम जॉर्डिन ने कहा, "यह कहानी कठिन परिस्थितियों में प्रेम के टिके रहने की है, ख़ास तौर पर अफ़ग़ानिस्तान जैसे देश में यह और प्रासंगिक हो जाता है." अज़ीज़ का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में थिएटर की वापसी हो रही है, काबुल थिएटर फेस्टिवल में अज़ीज़ के नाटक 'तारीख़ गवाह' को सर्वश्रेष्ठ नाटक चुना गया. वे कहते हैं, "अब नाटकों के अधिक से अधिक शो हो रहे हैं, यह बहुत अच्छी बात है." चुनाव अमरीका के अंतरराष्ट्रीय विकास विभाग ने कलाकारों के दलों को गाँव-गाँव में ले जाना शुरू किया है ताकि लोगों को आगामी चुनाव के बारे में बताया जा सके. नाटक में भाग लेने वाली महिला कलाकारों ने बुर्क़ा नहीं पहना था और उन्होंने नाटक के प्रेम प्रसंगों को भी बिना किसी झिझक के मंचित किया जो अफ़ग़ानिस्तान में बहुत बड़ी बात है. शेक्सपियर के मूल नाटक में पृष्ठभूमि फ्रांस की है लेकिन इस नाटक में उसे बदलकर अफ़ग़ानिस्तान कर दिया गया है और पात्रों को भी अफ़ग़ान दिखाया गया है. नाटक का रूपांतर करने वाले स्टीवन लैंडरिंगन कहते हैं, "शेक्सपियर के नाटकों का रूपांतरण बहुत आसान है क्योंकि वे सार्वभौमिक मानवीय संवेदना की बात करते हैं." |
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