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मंगलवार, 19 जुलाई, 2005 को 12:44 GMT तक के समाचार
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साहित्य और इतिहास की ओर बॉलीवुड

आमिर ख़ान
मंगल पांडे में प्रमुख भूमिका निभाई है आमिर ख़ान ने
‘परिणीता’, ‘पहेली’, ‘पृथ्वीराज’, ‘बनारस 1918’, ‘नेताजी सुभाषचंद्र बोस, दि फॉरगाटेन हीरो’, ‘जोधा अकबर’, ‘मंटो’, ‘ताजमहल’, ‘मंगल पांडे द राइज़िंग’ ........ये नाम है कुछ ऐसी फ़िल्मों के जो हिंदी फ़िल्म के दर्शक या तो देख रहे हैं या जल्द ही देखने वाले हैं.

नयी फ़िल्मों के ये प्राचीन नाम ही बता रहे हैं कि बॉलीवुड में ताज़ा बयार साहित्य और इतिहास की है.

इन फ़िल्मों में से ‘परिणीता’, ‘पहेली’, ‘बनारस 1918’, ‘साहिब बीवी और ग़ुलाम’ और ‘मंटो’ जहाँ साहित्य के प्रति बॉलीवुड के उमड़ते प्रेम का नतीजा है.

वहीं ‘मंगल पांडे दि राइज़िंग’, ‘पृथ्वीराज’, ‘जोधा अकबर’, ‘बोस....’, ‘ताजमहल’, ‘उमराव जान’ जैसे नाम बताते हैं कि मुंबई की फ़िल्म इंडस्ट्री के नामी गिरामी निर्माता और निर्देशकों को अचानक अपना इतिहास बड़ी शिद्दत से याद आने लगा है.

हाल में ही रिलीज़ हुई ‘परिणीता’ बांग्ला के मशहूर उपन्यासकार शरतचंद्र के उपन्यास पर आधारित है.

इसके निर्माता विधू विनोद चोपड़ा और निर्देशक विज्ञापन फ़िल्मों के जाने माने नाम प्रदीप सरकार हैं. सैफ अली ख़ान और संजय दत्त जैसे सितारों वाली ये फ़िल्म पसंद भी की जा रही है.

चर्चित

हिंदी के साहित्यकार विजयदान देथा की कहानी दुविधा पर बनी ‘पहेली’ के निर्माता अभिनेता शाहरुख़ ख़ान हैं और निर्देशक लीक से हटकर फ़िल्में बनाने के लिए चर्चित अमोल पालेकर.

अब ये बात दीगर है कि अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ ख़ान, रानी मुखर्जी, सुनील शेट्टी और जूही चावला जैसे कलाकारों के बावजूद पहेली लोगों की समझ में नहीं आ रही और सिनेमा के परदों से उतरने लगी है.

‘बनारस 1918’ मुशी प्रेमचंद के उपन्यास बाज़ारे हुस्न (उर्दू) या सेवासदन पर आधारित है. अजय मेहरा की इस फिल्म में ओमपुरी और पूर्व मिस इंडिया रेशमी घोष प्रमुख कलाकारों में हैं.

लेकिन ये फ़िल्म अभी रिलीज़ नहीं हुई है. इसी तरह मक़बूल वाले विशाल भारद्वाज इन दिनों रस्किन बॉंड के उपन्यास ब्लू अम्ब्रेला पर फ़िल्म बना रहे हैं.

 लोगों को नये विषय चाहिए इसलिए पुरानी कहानियों की तरफ जा रहे हैं. साहित्य और इतिहास की ये कहानियाँ ज़्यादातर आज़मायी हुई हैं और किरदार जाने पहचाने हैं
प्रकाश झा

वैसे चाहे शरतबाबू की परिणीता हो चाहे विजयदान देथा की दुविधा, फिल्में दोनो पर पहले भी बन चुकी हैं.

वैसे ही जैसे देवदास या साहिब बीवी और गुलाम या उमराव जान पर पहले भी हाथ आज़माया जा चुका है.

जाने माने फ़िल्मकार प्रकाश झा कहते हैं, "लोगों को नये विषय चाहिए इसलिए पुरानी कहानियों की तरफ जा रहे हैं. साहित्य और इतिहास की ये कहानियाँ ज़्यादातर आज़मायी हुई हैं और किरदार जाने पहचाने हैं."

इतिहास की बात की जाए तो श्याम बेनेगल की ‘बोस...’ तो रिलीज़ हो चुकी है. अब ‘मंगलपांडे दि राइज़िंग’ और ‘ताजमहल’ रिलीज़ के लिए लगभग तैयार हैं.

योजना

सबको मालूम है कि केतन मेहता जैसे निर्देशक की काफ़ी महत्वाकांक्षी और महंगी फ़िल्म ‘मंगल पांडे दि राइज़िंग’ में कई साल बाद आमिर ख़ान एक बार फिर परदे पर दिखेंगे.

तो फ़िरोज़ और संजय ख़ान के छोटे भाई अकबर ख़ान की फ़िल्म ‘ताजमहल’ में भी भारी रकम और काफ़ी समय लगा है. ख़ास बात ये कि इसके संगीतकार नौशाद हैं.

फ़िल्म पत्रकार और पटकथा लेखक पम्मी सोमल कहती हैं, "असल में शहीद भगत सिंह और संजयलीला भंसाली की देवदास के बाद ऐतिहासिक चरित्रों और साहित्य की तरफ लोगों का रुझान बढ़ता देखा जा रहा है.

लेकिन ये इंडस्ट्री तो भेड़चाल के लिए मशहूर है. अब बोस... और पहेली के बाद कुछ लोग क़दम वापस भी खींच सकते हैं.”

इतिहास या साहित्यिक कृतियों पर बनी इन फ़िल्मों पर अक्सर ये इल्ज़ाम लगता है कि मूल चरित्र या कृति के साथ अन्याय किया गया है.

लेकिन प्रकाश झा कहते हैं, "ये अलग-अलग लोगों की सोच और सृजनशीलता पर निर्भर करता है कि वो चाहे इतिहास हो या साहित्य, विषय से कितनी सिनेमाई आज़ादी ले सकता है."

‘पृथ्वीराज’, ‘जोधा अकबर’, और ‘मंटो’ पर इन दिनों काम चल रहा है. वैसे तो फ़िल्मों की ये फ़ेहरिस्त रोज़ लंबी होती जा रही है.

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परिणीता शरतचंद्र के उपन्यास पर आधारित है

लेकिन ये ऐसी फ़िल्में हैं जिन पर काम शुरु हो चुका है और इनके साथ बड़े नाम और बड़ा पैसा दोनों जुड़े हुए हैं. ‘जोधा अकबर’ ‘लगान’ और ‘स्वदेस’ वाले आशुतोष गोवारीकर की.

लेकिन ‘पृथ्वीराज चौहान’ का क़िस्सा ज़्यादा ही दिलचस्प है. दिल्ली के इस आख़िरी हिंदू राजा के प्रेम और शौर्य को दो-दो बड़े फिल्मकार सेल्यूलॉयड पर उतारने की ठाने हुए हैं.

इनमें से एक हैं डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी और दूसरे राजकुमार संतोषी. ‘मंटो’ के जीवन को भी परदे तक पहुँचाने का काम डॉक्टर चंद्रप्रकाश ही कर रहे हैं.

इसके अलावा जेपी दत्ता ‘उमराव जान’ बनाने में जुटे हैं तो प्रीतीश नंदी ‘साहिब बीवी और ग़ुलाम’. इन दोनों में हीरोइन बनने के लिए ऐश्वर्या रॉय और प्रियंका चोपड़ा में होड़ लगी है.

तो इतिहास की जानकारी और साहित्य का रस लेने के लिए फिलहाल बस, टिकट खरीदिए और देखते रहिए हिंदी फ़िल्में.

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