'बदनाम होने से ही तो नाम हुआ है'
- Author, स्वाति बक्शी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उलझे-उलझे से बालों वाले कुछ युवाओं का जमावड़ा, कंप्यूटर पर धंसी उनकी आंखें, कॉफ़ी के मग, किसी नए कॉन्सेप्ट पर होती चर्चा और बीच-बीच में ज़ोर के ठहाके. ये सब किसी नए वीडियो की तैयारी है.
उम्मीद है ये भी पहले के वीडियो की तरह लाखों लोगों को क्लिक करने पर मजबूर करेगा. आख़िर इमेज का सवाल है, ये भारत का नंबर वन यूट्यूब चैनल है- एआईबी.
समाचारों की दुनिया में काम करने वाले लोग इसका पूरा नाम लेने में भी हिचकिचाते हैं.
साढ़े पंद्रह लाख सब्स्क्रिप्शन के साथ भारत में एआईबी, यूट्यूब वीडियो शेयरिंग साइट पर मौजूद चैनलों में सबसे आगे खड़ा है.
इसकी शुरूआत गुरसिमरन खंभा के साथ मिलकर तन्मय भट्ट ने की थी. बाद में आशीष शाक्य और रोहन जोशी इससे जुड़े.

इमेज स्रोत, AIB
स्टैंड अप कॉमेडी की दुनिया के पुराने खिलाड़ी तन्मय एआईबी के नामकरण के सवाल पर कहते हैं कि हमने शुरू में पॉडकास्टिंग की सोची थी. हम रोज़मर्रा की ख़बरों को आम आदमी की नज़र से पेश करना चाहते थे.
ठीक वैसे ही, जैसे हम आम ज़िंदगी में समाचारों पर बात करते हैं. वैसे नहीं जैसा कि ऑल इंडिया रेडियो ख़बरें सुनाता है. एआईबी का नाम दरअसल उस नाम की पैरोडी है.
पिछले साल 'एआईबी रोस्ट' नाम के एक शो में अश्लीलता के आरोपों का सामना करने वाले इस ग्रुप का विवादों से नाता पुराना है.
रोस्ट का ज़िक्र करने पर तन्मय भट्ट और आशीष शाक्य एक सुर में कहते हैं, ''उसी ने तो हमें पॉपुलर बनाया. ये जो कुछ आप आज देख रहे हैं ये सब उसी की वजह से तो है.''

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मुंबई के अंधेरी वेस्ट इलाक़े से काम करने वाले इस ग्रुप का कहना है, ''ये सारी कामयाबी उसी प्लेटफ़ॉर्म की वजह से है जिस पर वो काम कर रहे हैं.''
तन्मय कहते हैं "अगर यह मीडियम नहीं होता तो, हम वहां नहीं होते जहां आज हैं. बस इतना रहा कि हमने जब शुरू किया तब कोई नहीं था. हमने सही वक़्त पर सही जगह पर शुरुआत की."
एआईबी सिर्फ़ कॉमेडी करने वाले कुछ युवा लड़कों का ग्रुप नहीं है. इसकी सफलता, वैसे बहुत से युवाओं को प्रेरित करती है, जो ख़ुद को उतना ही हुनरमंद मानते हैं.
इस ऊंचाई पर पहुंचने के लिए क्या करना पड़ता है? कैसे हासिल होता है इतना बड़ा दर्शक वर्ग?

इस सवाल पर तन्मय कहते हैं, ''शुरुआत में बिल्कुल कुछ नहीं मिलता. आप वीडियो बनाते हैं डालते हैं और देखते हैं कि उसके लिए लोगों का क्या रवैया है. धीरे-धीरे जब अलग-अलग तरह से प्रमोट करके आप नज़रों में आते हैं और वीडियो पर क्लिक बढ़ते हैं, तो यूट्यूब से पैसे मिलते हैं. दूसरा साधन हैं ब्रैंड जो आपके साथ जुड़ना चाहते हैं. उससे काफ़ी पैसे आ सकते हैं.''
एआईबी को इस बात की पूरी ख़बर है कि जब उन्होंने शुरू किया था तब से अब तक तस्वीर बदल चुकी है. कई दूसरे खिलाड़ी मैदान में हैं.
तन्मय भट्ट को लगता है कि एक गली में चाय की कई दुकानें हो सकती हैं. लेकिन बिकेगी वही जिसकी चाय में दम होगा.

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एक वीडियो बनाने में कितना वक़्त लगता होगा?
इस सवाल पर एआईबी के वीडियो एडिटर मिहिर और शाश्वत कहते हैं, ''ये पूरी तरह से एक वीडियो के विषय पर निर्भर है. अगर उसमें ज़्यादा काम करने की गुंजाइश है तो दस-पंद्रह दिन भी लग जाते हैं. लेकिन लगातार काम करना होता है. उसे असरदार बनाने के लिए बहुत कुछ लगाना पड़ता है.''
सबसे अनोखी बात जिसने मुझे चौंकाया वो ये कि इनसे मिलने का वक़्त अगर आप मांगे तो शायद आपको भी वही जवाब मिलेगा जो हमें मिला. आठ बजे के बाद ठीक रहेगा. तभी टीम काम करती है क्योंकि ये लोग रात को सोते नहीं हैं.
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