सूखा हर साल आता है, मीडिया इस साल पहुंचा!

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    • Author, आयुष देशपांडे
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

"सूखा हर साल आता है और हर साल लोग भी इन इलाकों से शहर की ओर आते हैं, लेकिन इस बार ख़बरें बहुत बन रही हैं."

मुंबई में सूखाग्रस्त किसानों के आसपास मीडिया को देखकर एक मुंबई निवासी की टिप्पणी.

मुंबई के पश्चिमी घाटकोपर में मौजूद एक मैदानी इलाक़े भातवाड़ी में महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाक़ों से आए कई परेशान परिवार पिछले तीन महीने से जमे हुए हैं.

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600 से ज़्यादा की तादाद में मौजूद इन लोगों में अधिकतर किसान परिवार हैं या किसी तरह से खेती से जुड़े हैं.

ये नांदेड़, लातूर, वड़गांव जैसे इलाक़ों से यहां पलायन कर गए हैं क्योंकि इन इलाक़ों में भारी सूखा पड़ा है.

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वड़गांव से आए 32 वर्षीय शेख हनीब, ज्वार की खेती करते हैं, पर सूखे की वजह से उनके खेतों में इस साल फ़सल नहीं आई.

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वे कहते हैं, "हमारे गांव में हर वर्ष सूखा पड़ता है. इससे हमारी फ़सल पूरी तरह बर्बाद हो जाती है. ऐसे में खेतों में काम न होने से रोज़ी की तलाश में हमें मुंबई या पुणे जैसे शहरों में आना पड़ता है."

हनीब बताते हैं कि वह और उनके जैसे कई परिवार हर साल मुंबई आते हैं और बारिश शुरू होने के बाद अपने गांव लौट जाते हैं.

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नांदेड़ से आई सुनिता सकाराम पिछले तीन महीने से मुंबई में हैं और दिहाड़ी पर मज़दूरी कर रही हैं.

अपने ज़िले के हालात बयां करते हुए वे कहती हैं, "पानी न होने से हमें खेतों में काम नहीं मिलता और इसके चलते घर में पैसे भी नहीं आते. अब खाना खाने के लिए पैसे तो लगते ही हैं. इसी वजह से हम सब यहां आ गए हैं."

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इसी इलाक़े की बस्ती में रह रहे नीलेश मुंबई के ही हैं और उनके मुताबिक़ ये किसान हर साल यहां आते हैं.

"मैं पिछले आठ-नौ सालों से इन लोगों को यहां आते देख रहा हूँ और हर साल इनकी तादाद बढ़ती दिख रही है."

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मुंबई के घाटकोपर इलाक़े में पानी की समस्या पर वे बताते हैं, "हमारे यहां भी पानी की काफ़ी समस्या है और अब हर गर्मियों में बाहर से आने वाले लोगों की वजह से पानी कम पड़ रहा है. यह सच है कि हमें भी पानी अब ख़रीदना पड़ रहा है."

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मुंबई पुलिस और नगर निगम की मदद से यहां मौजूद लोगों को पानी और रहने की व्यवस्था कराई गई है पर बीतते दिनों के साथ जिस तरह इन किसानों की तादाद बढ़ रही है, उससे यह व्यवस्था नाकाफ़ी नज़र आती है.

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घाटकोपर के डीसीपी विनय कुमार राठोड़ ने बीबीसी को बताया, "हम हर साल गर्मियों में ऐसे हालात के लिए तैयार रहते हैं क्योंकि ये किसान अपने ज़िले में सूखे के चलते हर साल यहां आते हैं और यह हमारा फ़र्ज़ है कि हम उनकी मदद करें."

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हाल ही में मीडिया में कुछ स्थानीय लोगों द्वारा इन किसान परिवारों से हफ़्ता वसूली करने की घटनाओं की जानकारी भी उन्होंने दी.

विनय के अनुसार, "हमें कुछ समय पहले पता चला था कि किसानों को कुछ स्थानीय लोग परेशान कर रहे हैं और उनसे रहने का पैसा वसूल रहे हैं जो ग़ैरक़ानूनी है और ऐसी किसी भी हरकत पर हम सख़्ती से कार्रवाई कर रहे हैं."

किसानों के आने के बाद राजनीतिक दल भी कूद पड़े हैं और बीते दो दिन में वहां महाराष्ट्र के क़रीब हर दल का प्रतिनिधि किसानों की मदद करने पहुँच चुका है.

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वहां पहुँचे भाजपा सांसद किरीट सोमैय्या ने बीबीसी से कहा, "सरकार इन किसानों की हर मुमकिन मदद कर रही है. बीते कई साल से लोग यहां आ रहे हैं. हालांकि इस साल इनकी तादाद काफ़ी बढ़ी है, पर राज्य सरकार ही नहीं बल्कि भारत सरकार भी इनकी हर मुमकिन मदद कर रही है."

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हालांकि मीडिया, पुलिस और राजनेताओं के इस जमावड़े को देख स्थानीय लोगों को कुछ हैरानी भी हुई.

यहीं रहने वाले प्रकाश आंबरे कहते हैं, "ये किसान गर्मी का मौसम शुरू होते ही मुंबई का रुख करने लगते हैं और मॉनसून शुरू होते-होते गांव लौट जाते हैं पर कभी इतना ज़्यादा जमावड़ा हमने नहीं देखा."

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