गीता चंद्रनः नृत्य और संगीत की साधक
- Author, प्रीति मान
- पदनाम, फ़ोटो पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
पद्मश्री गीता चंद्रन भरतनाट्यम का जाना-माना नाम है. गीता न सिर्फ शास्त्रीय नृत्य में पारंगत हैं, बल्कि कर्नाटक संगीत पर भी उनकी मज़बूत पकड़ है.

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विभिन्न कलाओं में माहिर गीता ने पांच वर्ष की छोटी उम्र से ही भरतनाट्यम का प्रशिक्षण लेना आरंभ कर दिया था.

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उनकी पहली गुरु स्वर्णा सरस्वती थीं. उनकी दूसरी गुरु केएन दक्षिणामूर्ति ने उन्हें नृत्य सिखाया.
गीता जब आठ साल की थीं, तब उन्होंने मीरा शेषाद्रि से कर्नाटक संगीत सीखना शुरू किया.

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उनका मानना है कि एक नृत्यांगना को संगीत का भी ज्ञान होना चाहिए.
गीता कहती हैं कि नृत्य और संगीत एक दूसरे के पूरक हैं इन्हें अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता.

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गीता एक रुढ़िवादी तमिल ब्राह्मण परिवार से थीं, जहां शिक्षा को अत्यधिक महत्व दिया जाता था.
इसलिए उन्होंने नृत्य प्रशिक्षण व कर्नाटक संगीत की शिक्षा के साथ-साथ अपना शिक्षण भी जारी रखा.

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उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से गणित में ऑनर्स किया और बाद में आईआईएमसी से एडवरटाइज़िंग की पढ़ाई की.
वो भरतनाट्यम को करियर के तौर पर नहीं देख रहीं थी, सो उन्होंने एक मीडिया कंपनी में नौकरी शुरू कर दी. बाद में उन्होंने खुद को शास्त्रीय नृत्य के लिए समर्पित कर दिया.

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गीता कहती हैं, "मैंने नृत्य और संगीत सीखा क्योंकि मुझे नृत्य और संगीत से प्रेम है और यह बचपन से मेरे जीवन का हिस्सा रहा है. इसे पूरी तरह करियर के रूप में अपनाना है, यह बहुत बाद में तय हुआ."

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गीता शास्त्रीय नृत्य को एक कदम आगे ले गई हैं, कंटेम्पररी आर्ट फ़ॉर्म से जोड़ते हुए समाज में हो रहे अनैतिक अपराधों के ख़िलाफ़ अपना विरोध भी प्रकट करती हैं.
गीता ने 'सो मेनी जर्नीज़' नाम से एक किताब भी लिखी है.

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वो कहती हैं, "भरतनाट्यम पर अब तक कई किताबें लिखी गई हैं. पर अब तक कोई भी ऐसी किताब नहीं हैं जिसमें फॉर्म्स को स्टेप्स में लिखा गया हो."

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चंद्रन अपने छात्रों के लिए एक किताब लिखना चाहती थीं, जिससे उन्हें सीखने में मदद मिले.

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गीता की डांस कंपनी 'नाट्य वृक्ष' में लगभग 100 से अधिक छात्र भरतनाट्यम का प्रशिक्षण ले रहे हैं.

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गीता चंद्रन मानती हैं, "नृत्य सीखने के लिए उम्र कोई बाधा नहीं होती, अगर सच्ची लगन और अभ्यास किया जाए तो किसी भी उम्र में इस विधा में पारंगत हुआ जा सकता है."
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