2021 रहा इन बॉलीवुड नायिकाओं के नाम जो कभी ख़ूंख़ार थी तो कभी शेरनी

कृति सेनन, विद्या बालन, तापसी पन्नू और सैमंथा प्रभू

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    • Author, मधु पाल
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी के लिए

साल 2021 फ़िल्मों के लिए अविश्वसनीय रूप से चुनौतीपूर्ण रहा. कोरोना महमारी के कारण इस साल लम्बे इंतज़ार के बाद थिएटर खुले और सलमान ख़ान, अक्षय कुमार, रणवीर सिंह और आयुष्मान खुराना जैसे कलाकारों की फ़िल्मों ने सिनेमाघरों में दस्तक भी दी.

कुछ फ़िल्में सफल रहीं तो कुछ नहीं. लेकिन अगर पूरे साल का लेखा-जोखा देखा जाए तो हम कह सकते हैं कि ये साल अभिनेत्रियों का रहा. जहाँ एक-दो नहीं बल्कि कई दमदार अभिनेत्रियों ने अपने अभिनय की छाप छोड़ी.

इस साल हुमा कुरैशी और विद्या बालन से लेकर ओटीटी पर डेब्यू करने वाली दक्षिण भारतीय सुपरस्टार सैमंथा, रवीना टंडन और लारा दत्ता ने ओटीटी प्लेटफ़ार्म पर अपने अभिनय का लोहा मनवाया.

कृति सेनन

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कृति की 'मिमी'

कोरोना काल के संक्रमण के मामले कम होने पर सिनेमा हॉल दोबारा खुले, लेकिन उसका इंतज़ार किए बिना महिला प्रधान तमाम फ़िल्में इनके निर्माताओं ने सीधे ओटीटी पर बेच दीं.

इन सभी फ़िल्मों में नायिकाओं ने ख़ूब सुर्ख़ियां बटोरी. ओटीटी पर सीधे रिलीज़ होने वाली फ़िल्मों में साल की शुरुआत हुई 'मिमी' से.

फ़िल्म समीक्षकों की मानें तो इस फ़िल्म में कृति सैनन ने अपने करियर का सबसे असरदार रोल किया है. वो इसमें 'परम सुंदरी' गाने की लोकप्रियता से लेकर सरोगेट मां की भूमिका निभाती नज़र आईं.

फ़िल्म की पूरी ज़िम्मेदारी अपने हाथों में लेते हुए कृति सरोगेसी जैसे एक बेहद संवेदनशील कॉन्सेप्ट को भी शानदार तरीके से निभाती नज़र आईं.

नुसरत भरुचा की 'छोरी'

'अजीब दास्तां' वेब शो के साथ नुसरत भरुचा के लिए यह साल काफ़ी अच्छा रहा है. इस फ़िल्म के साथ साथ उन्हें बुसान इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल में एशियन कॉन्टेंट अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की श्रेणी में नामांकित किया गया था.

फ़िल्म उनके करियर में एक टर्निंग पॉइंट साबित हुई क्योंकि उन्होंने अपने कम्फ़र्ट ज़ोन से बाहर क़दम रखा और फ़िल्म को एक महत्वपूर्ण संदेश के साथ आगे बढ़ाया.

'छोरी' फ़िल्म का सन्देश था कन्या भ्रूण हत्या को लेकर था. यह फ़िल्म नुसरत के प्रति लोगों की राय बदलने में कामयाब रही.

विद्या बालन

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शेरनी बनकर आई विद्या बालन

पिछले साल विद्या की फ़िल्म 'शकुंतला देवी' को ओटीटी पर दर्शकों का बेइंतेहा प्यार मिला. इस साल भी अमेज़ॉन प्राइम पर विद्या बालन की फ़िल्म शेरनी को ख़ूब सराहा गया.

यह फ़िल्म जंगली जानवरों के संरक्षण को लेकर एक बड़ा सन्देश देती है. विद्या उन अभिनेत्रियों में से हैं जिन्होंने कई स्त्री प्रधान फ़िल्मों को दर्शकों तक ना केवल पहुंचाया है बल्कि सफलता की ऊंचाई तक ले गई हैं.

बॉलीवुड में महिलाओं के संघर्ष पर बात करते हुए विद्या बालन कहती हैं, "हम कहीं भी हों, चाहे घर संभाल रही हों, कॉरपोरेट जॉब में हों, मीडिया में हों, एक्टर हों या पॉलिटिशियन हों - हम अपना रास्ता ढूंढ ही लेती हैं."

वो कहती हैं, "कभी बहुत मुश्किलें आती हैं, कभी हम निराश भी हो जाते हैं. कभी मायूस भी हो जाते हैं. फिर भी किसी ना किसी तरह औरत सब कुछ संभाल लेती है."

शेरनी की कामयाबी के बारे में विद्या कहती हैं, "लोग जो भी कहें मैंने कभी सोचा नहीं है कि मुझे कोई मुकाम हासिल करना है, या उसे किस तरह से मेंटेन करना है. मैं सिर्फ वक़्त के साथ चलना चाहती हूँ. मैं सच्चाई के साथ जीने की कोशिश करती हूं और काम करती हूं. मैं मानती हूं कि कामयाबी और नाकामयाबी ज़िंदगी का हिस्सा है. कामयाबी के बाद भी आगे बढ़ना है और विफलता के बाद भी आगे बढ़ना है."

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'हर बात पर हमको आंका जाता है'

विद्या कहती हैं, "हम औरतों की काबिलियत पर बहुत सारे सवाल उठाए जाते हैं, प्रोफ़ेशनल लाइफ़ में ही नहीं बल्कि निजी ज़िन्दगी में भी. हमें आंका जाता है कि हम कितनी अच्छी बेटी हैं, कितनी अच्छी बीवी हैं या कितनी अच्छी मां हैं. हमें लगता है कि हर भूमिका पर हमें खरा उतरना है. इस चक्कर में हम भूल जाते हैं कि हम भी इंसान हैं. मैंने अपने तज़ुर्बे से सीखा है- कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना; छोड़ो बेकार की बातें कहीं बीत न जाए रैना.''

स्त्री प्रधान फ़िल्मों के ओटीटी पर रिलीज़ को लेकर विद्या कहती हैं, "अभी कई लोग यही कर रहे हैं. आपको नहीं लगता कि बहुत सारे थिएटर बंद हो रहे हैं? शायद जब थिएटर खुलेंगे तो महिला प्रधान फिल्में ज़्यादातर ओटीटी पर देखी जाएंगी. आप कह सकते हैं कि हीरो सेंट्रिक फ़िल्में ओटीटी पर कोई नहीं देखना चाहता. लेकिन मुझे नहीं लगता कि ऐसा है. फ़िल्में अच्छी होंगी तो अभिनेता की हो या अभिनेत्री की, थिएटर में भी चलेंगी और लोग ज़रूर फ़िल्म देखने जाएंगे.''

तापसी पन्नू

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रॉकेट की तरह दौड़ा तापसी का करियर

दर्शकों का दिल जितने में कामयाब रही अभिनेत्री तापसी पन्नू की फ़िल्म 'रश्मि रॉकेट' इस साल रिलीज़ हुई. 'हसीन दिलरुबा' के बाद ये उनकी दूसरी ओटीटी फ़िल्म थी जो इस साल रिलीज़ हुई.

ये फ़िल्म हमें भारत की तेज़ धाविका दुती चांद की याद दिलाती है जिन्हें जेंडर टेस्ट में फ़ेल होने के बाद एशियन गेम्स में खेलने का मौक़ा नहीं मिला था.

फ़िल्म में तापसी का किरदार कुछ ऐसा ही दिखाया गया है कि लोग उसे छोरी कम और छोरा ज़्यादा समझते हैं.

फ़िल्म में वह रॉकेट की तरह उड़ने वाली धाविका हैं. ज़िन्दगी के उतार-चढ़ाव के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में शामिल होने का मौक़ा मिलता है.

तापसी की इस फ़िल्म ने उन्हें बेहतरीन अभिनेत्रियों की सूची में शामिल कर दिया है.

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लारा की 'हिकअप्स एंड हुकअप्स'

इस साल रिलीज़ हुई फ़िल्म 'बेल बॉटम' में अभिनेत्री लारा दत्ता ने इंदिरा गांधी का किरदार निभाकर सबको चौंका दिया था और फिर इसी साल वो ओटीटी पर डेब्यू करती नज़र आईं शो 'हिकअप्स एंड हुकअप्स' के साथ.

इस शो में लारा दत्ता ने 40 साल की सिंगल मदर वसु का किरदार निभाया है जिसे जीवनसाथी की तलाश है.

कहानी में ये दिखाया गया है कि ये परिवार सेक्सुअल एनकाउंटर्स से लेकर हर छोटी-बड़ी बात पर चर्चा करता है. कॉमेडी से भरी इस सिरीज़ में लारा का काम दर्शकों और आलोचकों - दोनों को पसंद आया.

लारा ने कई साल के लिए फ़िल्मों से दूरी बना ली थी. लेकिन अब लारा एक बार फिर एक्टिंग की तरफ़ ध्यान देती नज़र आ रही हैं. लारा कहती हैं, "अब मैं जिस उम्र में हूं उसने मुझे आज़ाद कर दिया है. मुझे अब न किसी इमेज में बंधना नहीं है, ना अब मुझे इसकी परवाह है कि लोग क्या सोचेंगे. शायद तज़ुर्बा है, मुझे लगता है कि अब मैं ख़ुद को बेहतर समझती हूं."

"मुझे ऐसे लगता है कि बहुत कम ऐसे अवसर मिलते हैं जहाँ 40 साल की उम्र की महिला के लिए किरदार लिखे जाते हैं. ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म के आने से बहुत सी ऐसी कहानियां लिखी जा रही हैं जहां मेरे लिए भी काम है. अभी इस मौक़े का फ़ायदा नहीं उठाऊंगी तो कब उठाऊंगी."

सैमंथा प्रभू

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ख़ूंख़ार अंदाज़ में नज़र आई सैमंथा रुथ प्रभु

सैमंथा रुथ प्रभु ने मनोज बाजपेयी के साथ ओटीटी की वेब सिरीज़ 'फैमिली मैन' सीज़न 2 में दमदार भूमिका निभाई है.

उन्होंने इस सिरीज़ के साथ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर डेब्यू किया और पहली बार में ही वो दर्शकों की चहेती बन गई हैं.

'फ़ैमिली मैन' सीज़न 2 की कहानी में सैमंथा 'राजी' नाम की एक महिला का किरदार निभाती हैं जो कि आतंकवादियों के साथ काम करती है.

राजी के रोल में सैमंथा बहुत ख़ूंख़ार दिखती हैं. वो पुलिसवालों को लंबे समय तक चकमा देकर एक फ़ैक्ट्री में काम करती हैं और बाद में क़त्ल कर फ़रार हो जाती हैं.

उनका ये किरदार सबको उनके अभिनय का कायल बना देता है. उन्हें फ़ैमिली मैन सीज़न 2 के लिए फ़िल्मफेयर ओटीटी अवॉर्ड में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के सम्मान से नवाज़ा गया है.

रवीना टंडन

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रवीना टंडन की 'अरण्यक'

बॉलीवुड फ़िल्मों में अपना लोहा मनवा चुकी अभिनेत्री रवीना टंडन ने नेटफ़्लिक्स के शो 'अरण्यक' के साथ अपना डिजिटल डेब्यू किया. रवीना के इस क्राइम-थ्रिलर को दर्शकों ने ख़ूब सराहा.

'अरण्यक' की कहानी रवीना के किरदार कस्तूरी डोगरा के ईद-गिर्द घूमती है जो एक मां भी हैं और पुलिस अफ़सर भी. वो दोनों ज़िम्मेदारियों का बख़ूबी निर्वाह करती हुई नज़र आती हैं .

समस्याओं का सामना करते हुए वो किस तरह अपने जीवन में संघर्ष करती हैं, 'अरण्यक' उसी की कहानी है. काफ़ी सालों के इंतज़ार के बाद रवीना को इस अंदाज़ में देखना लोगों को पसंद आया.

रवीना कहती हैं "ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म की वजह से अब हर किसी के पास बहुत काम है. लेकिन मैं जब फ़िल्मों में आई थी तब अभिनेत्रियों को कई फ़िल्में करने के बाद ही कुछ अलग किरदार या फ़िल्में चुनने का मौक़ा मिलता था. आज जब मैं आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण को देखती हूँ तो उन्हें देख कर ख़ुशी होती है कि उन्हें अपने मनपसंद किरदार को चुनने के लिए लंबा इंतज़ार नहीं करना पड़ा."

वो कहती हैं, "आज अभिनेत्री को महिला प्रधान फ़िल्में करने का ना केवल मौक़ा मिलता है बल्कि उन्हें उनके किरदार के लिए दर्शकों से भरपूर प्यार भी मिलता है."

सुष्मिता सेन

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आर्या 2 में धमाकेदार क्शन के साथ सुष्मिता सेन

पिछले साल हॉटस्टार पर रिलीज़ हुई सुष्मिता सेन की वेब सिरीज़ 'आर्या' को ख़ूब सराहा गया. उसके बाद आई 'आर्या 2' की दर्शकों ने जमकर तारीफ़ की.

सुष्मिता सेन ने अपने स्टाइल, एक्टिंग और स्वैग से एक बार फिर से अपने फ़ैन्स का दिल जीत लिया है.

सुष्मिता के कुछ डायलॉग ज़बर्दस्त भी साबित हुए, जैसे कि 'कमज़ोर हम नहीं, वक़्त होता है'. इसके अलावा 'मैं डॉन नहीं हूं, मैं बस वर्किंग मदर हूं'.

आर्या 2 में सुष्मिता दमदार स्टंट्स भी करती नज़र आती हैं. पिछले साल की तरह अभिनय के लिहाज़ से ये सुष्मिता का यादगार साल रहा.

हुमा क़ुरैशी

हुमा क़ुरैशी बनी महारानी

बॉलीवुड अभिनेत्री हुमा क़ुरैशी की वेब सिरीज़ 'महारानी' ने भी इस साल ख़ूब चर्चा बटोरी.

'महारानी' में उनकी भूमिका एक साधारण गृहिणी से लेकर राजनीति की दुनिया में क़दम रखने तक की दिखाई गई है.

शो में उनका नाम भारती है जो अपने बच्चों के साथ बिहार के एक गांव में रहती हैं. उनकी ज़िन्दगी में इस क़दर उथल-पुथल होती है कि वो बिहार की मुख्यमंत्री बन जाती हैं.

शो को देखने के बाद कई लोगों का कहना था कि ये बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से प्रेरित है. हुमा क़ुरैशी इन दिनों अपने इसी शो के दूसरे सीज़न की शूटिंग में व्यस्त हैं.

वीडियो कैप्शन, ड्रीम गर्ल्स: ''बॉलीवुड में महिलाओं के साथ ज़्यादा सख़्ती''

सुप्रिया पाठक की'टब्बर' और कोंकणा की 'गीली पुच्ची'

बॉलीवुड की जानीमानी अदाकारा सुप्रिया पाठक हर किरदार में ढल जाने के लिए जानी जाती हैं, चाहे वो कॉमेडी वाली भूमिका में हो या फिर दबंग महिला की.

ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म सोनी लिव के शो 'टब्बर' में सुप्रिया पाठक ने सरगुन का किरदार निभाया है जो अपने बेटे की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकती है.

वहीं एम एक्स प्लेयर के शो 'कार्टेल' में उन्होंने रानी माई की भूमिका निभाई है जो माफ़िया परिवार चलाती है. दोनों ही शो में उनकी भूमिका की जमकर तारीफ़ की जा रही है.

वहीं अमेज़ॉन प्राइम के वेब शो 'मुंबई डायरीज़ 26/11' और नेटफ़्लिक्स की फ़िल्म 'गीली पुच्ची' में कोंकणा सेन के अभिनय को भी ख़ूब सराहना मिली है.

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