साल 2021 में बीबीसी हिंदी पर सबसे अधिक पढ़ी गईं 10 ग्राउंड रिपोर्टें

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उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण लड़की से शादी करने वाले दलित पंचायत अधिकारी की दिन दहाडे़ हत्या -ग्राउंड रिपोर्ट
ब्राह्मण लड़की से प्रेम विवाह करने वाले दलित युवक अनीश कुमार चौधरी की 24 जुलाई को हत्या कर दी गई थी. परिजनों का आरोप है कि इसके पीछे अनीश के ससुराल वालों का हाथ है.
उनका कहना है कि अनीश की पत्नी दीप्ति मिश्र के परिजन इस शादी से खुश नहीं थे. वहीं, दीप्ति की मां का कहना है कि अनीश की हत्या में उनके परिवार का हाथ नहीं है.
अनीश की हत्या के मामले में 17 लोग अभियुक्त बनाए गए हैं, जिनमें से चार लोगों को स्थानीय पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है.
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नेपाल के मुसलमान किस हाल में हैं? हिन्दू राष्ट्र ख़त्म होना कैसा रहा
नेपाल की राजधानी काठमांडू के सुंधारा इलाक़े में साल 2020 के अक्तूबर महीने में कुछ लोगों ने जेसीबी मशीन से एक मस्जिद की दीवार गिरा दी. इस मस्जिद की ज़मीन के मालिकाना हक़ को लेकर विवाद था.
इस वाक़ये को लोगों ने किसी आपराधिक मामले की तरह लिया. पुलिस में शिकायत की गई और मस्जिद तोड़ने वाले को पकड़ लिया गया. सरकार ने फिर से मस्जिद बनाने की अनुमति दे दी.
यह मामला किसी भी तरह से हिंदू बनाम मुसलमान नहीं हुआ और न ही किसी ने ऐसा करने के लिए हवा दी. जब यह मस्जिद की दीवार गिराई गई, तब भी वहाँ कोई सांप्रदायिक भीड़ नहीं थी.
नेपाल में 2018 में मुसलामानों के हितों को ध्यान में रखते हुए केपी शर्मा ओली की सरकार ने मुस्लिम कमिशन का गठन किया था.
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उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में मस्जिद गिराने का क्या है पूरा मामला
मई के महीने में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी ज़िले में प्रशासन की ओर से गिराई गई जिस मस्जिद को ज़िला प्रशासन अवैध निर्माण बता रहा है, सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के दस्तावेज़ों में वो पिछले छह दशक से 'तहसील वाली मस्जिद' के तौर पर दर्ज है.
मस्जिद के प्रबंधकों का दावा है कि मस्जिद इससे कहीं ज़्यादा पुरानी है.
उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड ने हाई कोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद प्रशासन की इस कार्रवाई को अवैध बताया है और इसे हाई कोर्ट में चुनौती देने का फ़ैसला किया है.
बाराबंकी ज़िले के रामसनेही घाट में तहसील परिसर में मौजूद ग़रीब नवाज़ मस्जिद, जिसे तहसील वाली मस्जिद भी कहा जाता है, को ज़िला प्रशासन ने 'अवैध निर्माण' बताते हुए एक रात बुलडोज़र से गिरा दिया.
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'बाबा जेल में हैं पर मुझे रोज़ दिखते हैं'; कश्मीरी बेटियों ने मोदी से की गुहार
प्रमुख कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की छोटी बेटी सहर शब्बीर शाह ने जून, 2021 में बीबीसी से एक बातचीत में कहा कि वह अपने पिता की गिरफ़्तारी के बाद उदास और तनाव में रहती हैं.
चार साल पहले जांच एजेंसी एनआईए ने चरमपंथियों को फंडिंग करने के मामले में दर्जनों अलगाववादी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ शब्बीर शाह को भी गिरफ्तार कर दिल्ली की तिहाड़ जेल में क़ैद कर दिया था.
इनमें पूर्व विधायक इंजीनियर रशीद और महबूबा मुफ्ती की पीडीपी के युवा नेता वहीद-उर-रहमान पर्रा भी शामिल हैं.
सहर शब्बीर शाह इस दौरान मानसिक तनाव का शिकार हो गईं. वो लंबे समय तक समझ नहीं पाईं कि उनके पिता जेल में क्यों हैं.
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'पाकिस्तान में हमें काफ़िर कहते हैं और भारत में पाकिस्तानी': ग्राउंड रिपोर्ट
एक तरफ़ केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार नागरिकता संशोधन क़ानून के ज़रिए विदेशों में रह रहे हिंदुओं को नागरिकता देने का दावा कर रही है वहीं दूसरी ओर अकेले राजस्थान में 22 हज़ार से ज़्यादा हिंदू रह रहे हैं, जो पाकिस्तान से यहां आए हैं और कई सालों से उन्हें नागरिकता का इंतज़ार है.
नागरिकता के अभाव में वे मामूली सुविधाएं तक नहीं जुटा पा रहे हैं. राजस्थान सरकार खुद मानती है कि इनमें से आठ हज़ार के क़रीब लोग नागरिकता की पात्रता पूरी करते हैं हालांकि इन लोगों को भी नागरिकता नहीं मिली है.
जोधपुर शहर की आबादी की प्यास बुझाने वाले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से बिल्कुल सटी हुई 250 परिवारों की एक बस्ती है, जो बिल्कुल प्यासी है. यह प्यार, सम्मान, सुविधाएं और पहचान की प्यास है.
एक उम्मीद और विश्वास लिए कई साल पहले हिंदू परिवार पाकिस्तान से विस्थापित हो कर भारत आए. अब इनकी उम्मीदें धुंधली होती जा रही हैं.
यह हाल केवल इस बस्ती या जोधपुर ज़िले तक ही सीमित नहीं है. बल्कि राजस्थान में रह रहे 22,146 पाकिस्तान से आए विस्थापित लोगों की उम्मीदें धुंधलाती जा रही हैं.
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#MentalHealth: बायपोलर से पीड़ित लड़की कैसे कर रही है दूसरों की मदद?
बायपोलर एक ऐसी बीमारी है जिससे पीड़ित लोग कुछ हफ़्ते तक खुश रहते है और कुछ हफ़्ते निराश रहते हैं.
दीप्ति आहूजा को भी इसी बीमारी का सामना करना पड़ा है.
लेकिन वह अब दूसरे लोगों को मेंटल हेल्थ के बारे में जागरूक कर रही हैं.
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भारत में अरबों डॉलर के निवेश का विज्ञापन, दफ़्तर का पता नहीं - बीबीसी पड़ताल
आर्थिक मामलों पर जानकारी देने वाले भारत के सबसे बड़े अख़बार 'द इकोनॉमिक टाइम्स' और जानेमाने अख़बार 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' में मई के महीने में पहले पन्ने पर छपा एक ग़ैर-मामूली इश्तेहार कई तरह से सनसनीखेज़ और चौंकाने वाला था.
विज्ञापन सीधे देश के प्रधानमंत्री को संबोधित था जिसमें विज्ञापन देने वाली कंपनी ने कहा कि वह भारत में 500 अरब डॉलर का निवेश करना चाहती है. 500 अरब डॉलर यानी तक़रीबन 36 लाख करोड़ रुपए.
यह रकम कितनी बड़ी है इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि भारत में पिछले साल अमेरिका से कुल पूंजी निवेश सात अरब डॉलर था, यानी अकेली कंपनी जिसका नाम पहले कभी नहीं सुना गया वह भारत में कुल अमेरिकी निवेश से 71 गुना अधिक इनवेस्टमेंट अकेले करने की बात कर रही थी.
पहले पन्ने पर लाखों रुपये ख़र्च करके विज्ञापन देने वाली कंपनी का नाम था--लैंडमस रिएलिटी वेंचर इंक. इस विज्ञापन के साथ लैंडमस ग्रुप के चेयरमैन प्रदीप कुमार एस का नाम दिया गया था.
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उत्तराखंड की नैनी झील कैसे तबाही की झील में तब्दील हुई
अक्टूबर के महीने में उत्तराखंड में हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने ख़ासतौर पर कुमाऊँ क्षेत्र में तबाही मचा दी. बारिश का सबसे ज़्यादा असर तालों के लिए मशहूर और टूरिस्ट स्पॉट नैनीताल पर दिखा.
कोसी, गौला, रामगंगा, महाकाली के साथ ही इलाक़े की सभी नदियां और जल धाराएँ उफ़ान पर थीं और सैकड़ों भूस्खलनों के चलते कई मकान ज़मींदोज़ हो गए और अधिकतर सड़कें बाधित हो गईं.
कुमाऊँ के डीआईजी नीलेश भरणे ने बीबीसी से बातचीत में 46 लोगों की मौत की पुष्टि की.
मौसम विज्ञान केंद्र, उत्तराखंड की ओर से दर्ज आँकड़ों के मुताबिक यह उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में बीते 124 सालों में अब तक हुई सबसे ज़्यादा बारिश थी.
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मुस्लिम लड़की-हिंदू लड़के की वो प्रेम कहानी जिन्हें एड्स भी नहीं रोक पाया
गुजरात के बनासकांठा के एक छोटे से गांव के मानूजी ठाकोर का.
इन्होंने अपने प्यार की ख़ातिर दुनिया की एक नहीं सुनी और एचआईवी संक्रमित पत्नी को साथ ही रखा.
मानूजी बहुत पढ़े लिखे नहीं हैं. वो बचपन से ही राजमिस्त्री के तौर पर काम करते हैं और उनके पास बहुत पैसा भी नहीं है.
गांवों में दूसरे लोगों के घर बनाने के अलावा मानूजी अपने भाइयों की खेती में मदद भी करते हैं. घर बनाने के काम के सिलसिले में उन्हें उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम परिवार के लिए घर बनाने का मौका मिला.
उस घर को बनाने के दौरान मानूजी की मुलाकात उस मुस्लिम परिवार की 16 साल की बेटी रुख़साना से हुई और यहीं से उनकी कहानी शुरू हुई.
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तीरा कामत: 16 करोड़ रुपये के इंजेक्शन से ठीक होगी बीमारी
जन्म के बाद तीरा घर आ गई और सब कुछ ठीक था. लेकिन जल्दी ही स्थिति बदलने लगी.
मां का दूध पीते वक़्त तीरा का दम घुटने लगता था. शरीर में पानी की कमी होने लगती थी. एक बार तो कुछ सेकेंड के लिए उसकी साँस थम गई थी.
इसके बाद टीकाकरण के दो बूंदों के वक़्त भी तीरा का दम जब घुटने लगा तब माता-पिता को ख़तरे का अंदाज़ा हुआ. डॉक्टरों ने बच्ची को न्यूरोलॉजिस्ट से दिखाने को कहा. न्यूरोलॉजिस्ट ने पाया कि बच्ची एसएमए टाइप 1 से पीड़ित है.
नाम से अंदाज़ा नहीं लगता है कि बीमारी कितनी ख़तरनाक है.
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