आज से शुरू हो रहा है संसद का शीतकालीन सत्र, जानिए क्या है एजेंडा

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संसद का शीत सत्र आज से शुरू हो रहा है और विपक्ष ने जाहिर कर दिया है कि इस बार भी हंगामा होने के आसार हैं.
सरकार तीन विवादित कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा पहले ही कर चुकी है. सत्र के पहले ही दिन सरकार इन्हें वापस लेने का विधेयक जारी कर सकती है. इससे पहले शीत-सत्र की पूर्व संध्या सरकार की बुलाई सर्व-दलीय बैठक में किसानों का मुद्दा ही हावी रहा.
हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बैठक में शामिल नहीं हुए. वहीं आम आदमी पार्टी ने बैठक का बहिष्कार किया. विपक्ष के अलावा बीजेपी के साथ दिखने वाली कई पार्टियों ने भी किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग का समर्थन किया है.
सर्वदलीय बैठक में कई दलों ने महिला आरक्षण विधेयक को जल्द पेश किए जाने की मांग भी की है. शीत्र सत्र से ठीक पहले हुई इस बैठक में वामपंथी दलों ने बैठक में प्रधानमंत्री के न शामिल होने का मुद्दा उठाया.
वहीं तृणमूल कांग्रेस और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने फ़ायदा कमा रही सार्वजनिक कंपनियों को ना बेचने की अपील की. विपक्षी दलों ने इस बैठक में महंगाई, बेरोजगारी, पेगासस, महिला आरक्षण बिल, बीएसएफ का क्षेत्र विस्तार के मुद्दों को भी ज़ोर शोर से उठाया.
भारत सरकार ने इस सत्र के लिए कुल 26 विधेयक सूचीबद्ध किए हैं. इनमें क्रिप्टोकरेंसी एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन बिल भी शामिल है. इस विधेयक के ज़रिए भारत सरकार देश में क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल को नियमित करना चाहती है.
एनडीपीएस (नार्कोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस ) में संशोधन का विधेयक भी शीत सत्र के दौरान लाया जा सकता है. नर्सिंग क्षेत्र को नियमित करने का विधेयक भी सरकार के एजेंडे पर रहेगा.

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इसके अलावा सरकार इमिग्रेशन बिल, 2021 को भी ला सकती है. इसका मक़सद 1983 के इमिग्रेशन एक्ट की जगह लेना है.
सरकार का कहना है कि वह इमिग्रेशन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लाने के लिए ये नया विधेयक ला रही है.
दो सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण से जुड़ा विधेयक भी शीत सत्र के दौरान पेश किया जा सकता है.
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के वेतन में वृद्धि को लेकर भी विधेयक भी लाया जा सकता है.

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पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल, 2019 पर संसद की संयुक्ति समिति की रिपोर्ट भी सदन में पेश की जा सकती है.
लोगों के निजी डाटा की सुरक्षा के मक़सद से साल 2019 में संसद में विधेयक लाया गया था जिसे संसदीय समिति के पास भेज दिया गया था.
उत्तर प्रदेश में एससी-एसटी समुदायों की सूची में बदलाव से जुड़ा विधेयक भी सदन में लाया जा सकता है. उत्तर प्रदेश में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में ये विधेयक महत्वपूर्ण है.
संसदीय कार्यों की सूची में दिवाला और दिवालियापन संहिता (दूसरा संशोधन) विधेयक और पेंशन फंड नियामक विकास प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक भी है.
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इसके अलावा मानव तस्करी रोकने के लिए भी एक विधेयक लाया जा रहा है. तस्करी (रोकथाम, संरक्षण और पुनर्वास) विधेयक का मक़सद ख़ासतौर पर महिलाओं और बच्चों की तस्करी की रोकथाम करना है.
बीजेपी और विपक्ष की मुख्य पार्टी कांग्रेस ने शीत सत्र के पहले दिन अपने सांसदों को उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी की है.
किसान आंदोलन का दिखेगा असर?

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तीन विवादित कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ हज़ारों किसान एक साल से दिल्ली की सरहदों पर धरना दे रहे हैं. सरकार ने कुछ दिन पहले तीनों क़ानूनों को वापस लेने का ऐलान किया है और अब संसद में इन्हें वापस लेने का विधेयक पेश किया जा रहा है.
हालांकि सरकार ने विधेयक में कहा है, 'हालांकि किसानों का एक छोटा समूह ही इनका विरोध कर रहा है लेकिन समय की ज़रूरत ये है कि समावेशी विकास के लिए सभी को साथ लेकर चला जाए.'
किसानों के आंदोलन के चलते तीनों क़ानून वापस लेने का फ़ैसला बीते साल साल में मोदी सरकार के सबसे बड़े फ़ैसलों में से एक है. प्रधानमंत्री मोदी हमेशा से इन क़ानूनों की वकालत करते रहे थे और सरकार कहती रही थी कि इनमें बदलाव तो हो सकता है लेकिन इन्हें वापस नहीं लिया जाएगा.
लेकिन अब सरकार पीछे हट गई है. बावजूद इसके किसान अभी आंदोलन से पीछे नहीं हटे हैं. किसान संगठनों का कहना हैकि वो न्यूनतम समर्थन मूल्य की अपनी मांग जारी रखेंगे.
किसान तो अड़े ही हैं, विपक्ष भी संसद में किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरना का कोई मौका नहीं छोड़ेगा.
कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि संसद में आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि दी जाए.
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