संविधान दिवसः परिवारवाद और भ्रष्टाचार पर पीएम मोदी का सवाल और विपक्ष का पलटवार

नरेंद्र मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर राजनीति में परिवारवाद और भ्रष्टाचार के लिए सज़ा पा चुके लोगों को दोबारा से राजनीतिक गलियारे में उठने-बैठने की अनुमति दिए जाने पर तमाम विपक्षी पार्टियों को निशाने पर लिया.

प्रधानमंत्री ने किसी राजनीतिक पार्टी या व्यक्ति का नाम लिए बग़ैर कहा कि अगर कोई पार्टी एक ही परिवार के ज़रिए कई पीढ़ियों तक चलाई जाती है, तो यह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है.

प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि भ्रष्टाचार के लिए सज़ा हो चुकी हो उनकी फिर से राजनीति में प्राण प्रतिष्ठा करने की प्रतिस्पर्धा चल पड़ी है. इससे चिंतित होने की ज़रूरत है.

संविधान दिवस

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आज़ादी के अमृत महोत्सव के मद्देनज़र शुक्रवार को संविधान दिवस मनाया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी अवसर पर संसद के सेंट्रल हॉल में बग़ैर किसी का नाम लिए ये बातें कहीं.

उन्होंने नाम तो किसी का नहीं लिया लेकिन घेरे में गांधी परिवार, यूपी-बिहार के यादव परिवार, कश्मीर के मुफ़्ती और अब्दुल्ला परिवार सभी आ गए.

इस कार्यक्रम का कांग्रेस समेत कई अन्य पार्टियों ने बहिष्कार किया और इसमें शामिल नहीं हुए.

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न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कांग्रेस के अलावा इस कार्यक्रम का समाजवादी पार्टी (सपा), आम आदमी पार्टी (आप), सीपीआई, सीपीएम, डीएमके, शिरोमणि अकाली दल, शिवसेना, एनसीपी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने भी बहिष्कार किया.

सत्ताधारी पार्टी के कई नेताओं ने इस पर भी तंज कसा और इसे संविधान का अपमान बताया. वहीं कांग्रेस समेत कई अन्य दलों ने भी इसके जवाब में अपनी बातें रखीं और बताया कि क्यों उन्होंने इस समारोह का बहिष्कार किया. साथ ही उन्होंने केंद्र की बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार से ही कई सवाल पूछे.

नरेंद्र मोदी

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परिवारवाद पर क्या बोले मोदी?

प्रधानमंत्री मोदी राजनीति में वंशवाद को लेकर फिर बोले. उन्होंने सवाल उठाया कि लोकतांत्रिक कैरेक्टर खो चुके दल लोकतंत्र की रक्षा कैसे कर सकते हैं?

उन्होंने कहा, "भारत संवैधानिक लोकतांत्रिक परंपरा है. राजनीतिक दलों का अपना एक अहम महत्व है. और राजनीतिक दल भी हमारे संविधान की भावनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रमुख माध्यम हैं. लेकिन संविधान की भावना को भी चोट पहुंची है. संविधान के एक एक धारा को भी चोट पहुंची है. जब राजनीतिक दल अपने आप में अपना लोकतांत्रिक कैरेक्टर खो देते हैं. जो दल स्वयं लोकतांत्रिक कैरेक्टर खो चुके हों, वो लोकतंत्र की रक्षा कैसे कर सकते हैं?"

"आज देश में कश्मीर से कन्याकुमारी, हिंदुस्तान के हर कोने में जाइए, भारत एक ऐसे संकट की तरफ बढ़ रहा है जो संविधान को समर्पित लोगों के लिए चिंता का विषय है. लोकतंत्र के प्रति आस्था रखने वालों के लिए चिंता का विषय है. और वो है पारिवारिक पार्टियां. राजनीतिक दल, पार्टी फॉर द फैमिली, पार्टी बाइ द फैमिली... "

"कश्मीर से कन्याकुमारी, राजनीतिक दलों की तरफ देखिए. ये लोकतंत्र की भावना के ख़िलाफ़ है. संविधान जो कहता है, उसके विपरीत है."

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हालांकि पीएम मोदी ने ये भी किया कि उनके कहने का ये मतलब नहीं है कि एक परिवार से एक से अधिक लोग राजनीति में न आएं.

उन्होंने कहा, "जब मैं ये कहता हूं कि पारिवारिक पार्टियां, इसका मतलब मैं ये नहीं करता हूं कि एक परिवार में से एक से अधिक लोग राजनीति में न आएं. जी नहीं. योग्यता के आधार पर, जनता के आर्शीवाद से किसी परिवार से एक से अधिक लोग राजनीति में जाएं. इससे पार्टी परिवारवादी नहीं बन जाती है."

"लेकिन जो पार्टी, पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार चलाता रहे. जिस पार्टी की सारी व्यवस्था परिवारों के पास रहे, वो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा संकट रहती हैं. और संविधान के दिवस पर संविधान में विश्वास करने वाले, संविधान को समझने वाले, संविधान को समर्पित सभी देशवासियों से मैं आग्रह करूंगा कि देश में एक जागरूकता लाने की आवश्यकता है."

इसके बाद उन्होंने जापान का उदाहरण दिया.

उन्होंने कहा, "जापान में एक प्रयोग हुआ था. जापान में देखा गया कि कुछ ही राजनीतिक परिवार व्यवस्था में चल रहे हैं. तो किसी ने बीड़ा उठाया था कि वो नागरिकों को तैयार करेंगे जिससे राजनीतिक परिवार के बाहर के लोग निर्णय प्रक्रिया में आ सकें. ये सफल रहा. 30-40 साल लगे लेकिन करना पड़ा."

"लोकतंत्र को समृद्ध करने के लिए हमें भी हमारे देश में ऐसी चीज़ों की ओर जाने की आवश्यकता है, चिंता करने की आवश्यकता है, देशवासियों को जगाने की आवश्यकता है."

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भ्रष्टाचार पर क्या बोले पीएम मोदी?

इसके बाद पीएम मोदी ने भ्रष्टाचार के लिए सज़ा पा चुके लोगों के दोबारा राजनीति में उतरने पर चिंता जताई.

उन्होंने बग़ैर किसी का नाम लिए कहा, "उसी तरह से हमारे यहां है भ्रष्टाचार. क्या हमारा संविधान भ्रष्टाचार को अनुमति देता है. क़ानून है, नियम हैं, सब है. लेकिन चिंता तब होती है कि जब न्यायपालिका ने स्वयं ने किसी को अगर भ्रष्टाचार के लिए घोषित कर दिया हो. भ्रष्टाचार के लिए सज़ा हो चुकी हो. लेकिन राजनीतिक स्वार्थ के लिए कारण उसका भी महिमामंडन चलता रहे."

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"भ्रष्टाचार को नज़रअंदाज करके, सिद्ध हुई हक़ीकतों के बावजूद भी, जब राजनीतिक लाभ के लिए सारी मर्यादाओं को तोड़ कर, लोकलाज को तोड़ कर के, उनके साथ उठना बैठना शुरू हो जाता है तो देश के नौजवान के मन में लगता है कि अगर इस प्रकार से राजनीति के क्षेत्र में नेतृत्व करने वाले लोग भ्रष्टाचार में डूबे हुए लोगों की प्राणप्रतिष्ठा कर रहे हैं, मतलब उनको भी वो रास्ता मिल जाता है कि भ्रष्टाचार के रास्ते पर चलना बुरा नहीं है, दो चार साल के बाद लोग स्वीकार कर लेते हैं. क्या हमें ऐसी समाज व्यवस्था खड़ी करनी है."

"हां, भ्रष्टाचार के कारण अगर कोई गुनाह सिद्ध हो चुका है तो सुधरने के लिए मौक़ा दिया जाए. लेकिन सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठा देने की जो स्पर्धा चल पड़ी है. ये अपने आप में नए लोगों को लूटने के रास्ते पर जाने के लिए मजबूर करती है और इसलिए हमें इससे चिंतित होने की ज़रूरत है."

राहुल गांधी

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कांग्रेस ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बाद कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने भी अपनी अपनी बातें रखीं. कुछ पीएम मोदी के समर्थन में बोले तो कुछ ने तंज करते हुए केंद्र सरकार के काम काज पर ही सवाल उठाए.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया, "न्याय व अधिकार सबके लिए एक समान होने चाहिएं ताकि संविधान सिर्फ़ काग़ज़ ना बन जाए- ये हम सबकी ज़िम्मेदारी है."

कांग्रेस ने बाकायदा इस पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की और बताया कि संविधान दिवस को मनाने के कार्यक्रम में वो शामिल क्यों नहीं हुई.

जिसमें वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने बताया कि कांग्रेस क्यों इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुई, साथ ही उन्होंने सरकार के सामने कुछ सवाल भी रखे.

उन्होंने कहा, "बीजेपी की सरकार संवैधानिक संस्थाओं पर चोट पहुंचा रही है. संवैधानिक नियमों का उल्लंघन हो रहा है. संसदीय प्रजातंत्र में प्रतिपक्ष की भूमिका रहती है. ये बात स्पष्ट है कि सत्ताधारी दल के साथ प्रतिपक्ष अनिवार्य है. दो बरस पहले भी यही विषय उठा था. एक सरकारी कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसमें विपक्ष की कोई भूमिका नहीं थी. हमारी ऐसी अपेक्षा थी कि उस दिन जो हुआ और विपक्ष ने जो अपना विरोध प्रकट किया उससे सरकार भविष्य में सचेत हो जाएगी और ऐसे अवसर पर विपक्ष को सम्मान देगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ."

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"हम संविधान का सम्मान का करते हुए यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यही हमें संविधान दिवस के आयोजन में, कार्यक्रम के आयोजन में, और जब हम प्रजातंत्र को संविधान का जश्न मनाएं उसमें शामिल न किया जाना, केवल एक औपचारिक निमंत्रण, वो भी समारोह में बैठने का, ये स्वीकार्य नहीं है."

"माननीय प्रधानमंत्री जी और बीजेपी के नेतृत्व की ओर से विपक्ष की इस तरह से आलोचना इस विषय पर, सही नहीं है, उसका कोई औचित्य नहीं है.

सरकार को ये स्पष्ट करना चाहिए कि किस तरह से देश का शासन और प्रशासन चल रहा है. ये सरकार कोई मौका नहीं छोड़ती, जब संविधान और संविधान की परंपराओं को दबाकर निर्णय न लिए जाएं."

मल्लिकार्जुन खड़गे

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मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन चौधरी क्या बोले?

उधर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सवाल किया कि संविधान दिवस मनाने वाले संविधान के तहत क्यों नहीं चल रहे.

उन्होंने कहा, "संविधान दिवस के दिन हमें ये चर्चा करनी होगी कि क्या ये ​सरकार संविधान के तहत चल रही है? ये हमारे बुनियादी हक़ों को छीन रहे हैं, अल्पसंख्यकों की लींचिग कर रहे हैं और किसानों को कुचल रहे हैं. ये संविधान दिवस मनाने वाले संविधान के तहत क्यों नहीं चल रहे हैं?"

कांग्रेस के सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि अंग्रेज़ी हुकूमत की मदद करने वालों के मुंह से राम का नाम अच्छा नहीं लगता.

उन्होंने कहा, "इन्होंने आज़ादी के लिए क्या किया? अंग्रेजी हुकूमत की मदद की थी, जिससे आज़ाद हिंदुस्तान न बन पाए. आज उन्हीं के द्वारा अंबेडकर की बात सुनी जा रही है. यह भूत के मुंह से राम का नाम अच्छा नहीं लगता."

नीतीश कुमार

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नीतीश, ममता, मायावती और संजय राउत

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बाद कहा, "पारिवारिक पार्टियों का कुछ मतलब है क्या? लेकिन आज कई दल इस पर चल रहे हैं. भले ही ये दल कुछ दिनों के लिए बच जाएं लेकिन कुछ समय बाद उनका बचे रहना संभव नहीं है."

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बसपा प्रमुख मायावती ने बताया कि उनकी पार्टी ने राज्य और केंद्र सरकार के संविधान दिवस मनाने के कार्यक्रम में क्यों हिस्सा नहीं लिया.

वे बोलीं, "केंद्र और राज्य सरकारें इस बात की गहन समीक्षा करें कि क्या ये पार्टियां संविधान का सही से पालन कर रही हैं? अर्थात नहीं कर रही हैं इसलिए हमारी पार्टी ने केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संविधान दिवस मनाने के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेने का फ़ैसला किया है."

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य और केंद्र सरकार को संविधान दिवस मनाने का हक़ नहीं है.

उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा, "SC/ST, OBC वर्गों का ज़्यादातर विभागों में आरक्षण का कोटा अधूरा पड़ा है. इनके लिए निजी क्षेत्र में आरक्षण की व्यवस्था नहीं की गई है. केंद्र और राज्य सरकारे इस मामले में क़ानून बनाने के लिए तैयार नहीं है. ऐसी सरकारों को संविधान दिवस मनाने का अधिकार नहीं है."

संजय राउत

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शिवसेना के संजय राउत ने कहा, "संविधान का देश में महत्व है. डॉ. बाबा साहब आंबेडकर के नेतृत्व में जनता को अधिकार दिए गए लेकिन आज राज्य, जनता को कुचल दिया जाता है, तो संविधान का मतलब क्या होता है? कहां है संविधान? हमारी सरकार बहुमत में है फिर भी हमारे पीछे कभी जांच एजेंसी, कभी राजभवन लग जाते हैं."

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने संविधान दिवस की शुभकामनाएं देते और संविधान को बनाने वाले महान नेताओं को याद करते हुए ट्वीट किया कि "बतौर एक देश, हमें इसकी पवित्रता की रक्षा करने का प्रयास करना चाहिए. इसके मूल्यों और सिद्धांतों को कायम रखने के अपने प्रयासों से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए."

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कॉपीः अभिजीत श्रीवास्तव

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