अजय देवगन बोले, ''असल इतिहास दबा दिया गया था, सामने लाना ज़रूरी"

अजय देवगन

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    • Author, सुप्रिया सोगले
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी के लिए

'सिंघम' स्टार अजय देवगन पिछले साल फ़िल्म 'तानाजी' लेकर आए थे और अब 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध पर बनी उनकी फ़िल्म 'भुज: द प्राइड ऑफ़ इंडिया' ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ हुई है.

अजय देवगन का मानना है कि भारत का असल इतिहास सामने लाना बहुत ज़रूरी है क्योंकि उनके मुताबिक़ इसे दबा दिया गया था और मौजूदा पीढ़ी को जानना ज़रूरी है कि देश किनके बलिदानों पर खड़ा है.

बीबीसी से रूबरू हुए अजय देवगन ने भारत के इतिहास पर टिप्पणी करते हुए कहा, "भारत के नौजवानों को ये सारी कहानियाँ बताना बहुत ज़रूरी है क्योंकि हमारा इतिहास वैसे भी दबा दिया गया था."

"इतने साल अंग्रेज़ रहे, उन्होंने इतिहास दबाया. लोगों को पता चल जाता कि इतने लोगों ने बलिदान दिया है तो वो बग़ावत पर उतर आते. उनसे पहले मुग़लों का प्रभाव था. मुग़ल से पहले के हमारे राजाओं ने जो किया था, उसे भी दबा दिया गया था."

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अजय देवगन कहते हैं, "स्वाभाविक है कि जो शासक आएगा इतिहास उसी तरह का होगा. आज हमारी इतिहास की किताबों में हमारे इतिहास से ज़्यादा विदेशी इतिहास है."

"हमारे समय में तानाजी पर सिर्फ़ आधा पन्ना लिखा था और आज की पीढ़ी को तो तानाजी के बारे में पता ही नहीं क्योंकि किताबों में ही नहीं है."

अजय देवगन कहते हैं, "मुझे लगता है कि हमें इस पर बात करनी चाहिए. क्योंकि देश की बात करें तो देश तब बदलेगा जब सब बदलेंगे और इस पीढ़ी को पता ही नहीं कि कितने लोगों की मेहनत और निस्वार्थ बलिदान पर ये देश खड़ा हुआ है. जब आप को पता चलेगा कि कितनी मुश्किल से आज़ादी हासिल हुई है तब उसकी क़दर होगी."

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स्क्वाड्रन लीडर विजय कार्णिक का किरदार

अजय देवगन फ़िल्म 'भुज: द प्राइड ऑफ़ इंडिया' में भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रन लीडर विजय कार्णिक का किरदार निभा रहे हैं.

फ़िल्म में अपने रोल के बारे में अजय देवगन कहते हैं कि इस बात का एक दबाव रहता है कि जो किरदार वो निभा रहे हैं, उसमें कोई नकारात्मकता न जुड़े क्योंकि इन्होंने असल ज़िंदगी में बहुत बड़ा काम किया है.

अजय देवगन के अनुसार ये देखना बहुत ज़रूरी होता है कि आप जिसका किरदार निभा रहे हैं, उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा कहानी में और आपके परफ़ॉर्मेंस में बरक़रार रहे.

अजय देवगन को इस बात का थोड़ा अफ़सोस ज़रूर है कि उनकी फ़िल्म ओटीटी पर रिलीज़ हो रही है लेकिन वो ओटीटी को भी एक बेहतरीन प्लेटफ़ॉर्म मानते हैं.

उनका मानना है कि हर कलाकार ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचना चाहता है और ओटीटी के आने से फ़िल्म इंडस्ट्री में एक संतुलन की उम्मीद की जा रही है.

आज कल कई बड़े स्टार ओटीटी पर अपने आप को आज़मा रहे हैं और अजय देवगन भी इस प्लेटफ़ॉर्म का फ़ायदा उठाना चाहते हैं. अजय देवगन जल्द ही ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म की एक सिरीज़ 'रूद्र' में अभिनय करते नज़र आएंगे.

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'ट्रोलिंग की आदत सी पड़ गई है'

ओटीटी जहां एक तरफ़ कलाकारों को एक नया प्लेटफ़ॉर्म दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ इसी डिजिटल संसार में ट्रोलिंग भी ख़ूब हो रही है. कई कलाकारों ने तो यहां तक शिकायत की है कि ट्रोलिंग के कारण उनके मानसिक स्वास्थ पर गहरा असर पड़ रहा है.

अजय देवगन ने भी इस बारे में बात की. उनका कहना है कि उन्हें तो अब ट्रोलिंग की आदत सी पड़ गई है. उन्होंने बताया कि उनके फ़ोन में न ट्विटर है, न इंस्टाग्राम है.

उनका मानना है कि उन्हें जो कुछ कहना होता है वो कह देते हैं और उन्हें इस बात से फ़र्क़ नहीं पड़ता कि दूसरे क्या कह रहे हैं. हाल ही में आमिर ख़ान ने भी सोशल मीडिया को अलविदा कह दिया है.

अजय देवगन ने सोशल मीडिया को पूरी तरह से अलविदा तो नहीं कहा, लेकिन वो अपने आप को इससे दूर ही रखते हैं. उनके मुताबिक़ उनकी पत्नी काजोल और उनके दोनों बच्चे भी इससे दूर ही रहना पसंद करते हैं.

वीडियो कैप्शन, पिछले साल रिलीज़ हुई 'गोलमाल अगेन' के बाद 'रेड' अजय देवगन की इस बरस की पहली फ़िल्म है.

"जब तक ज़िंदा हैं, काम करते रहना चाहिए"

अजय का मानना है कि सोशल मीडिया में जो होता है उसमें विश्वसनीयता की कमी होती है. उनका मंत्र यही है कि सोशल मीडिया से दूर रहें और अपने काम पर ध्यान केंद्रित रखें.

अजय देवगन 52 साल के हो गए हैं और उनका मानना है कि जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ रही है, उन्हें काम करने में मज़ा आ रहा है. वो कहते हैं कि इस उम्र में अब वो अपने क्राफ्ट से प्यार करने लगे हैं.

उनका कहना है कि आप जब तक ज़िंदा हैं, आपको काम करते रहना चाहिए वरना जहाँ बैठ गए, वहां दिमाग़ ख़त्म और बीमारियां आ जाएंगी. वो कहते हैं, "मशीन चलती रही तो ठीक है. जहाँ रुक गई वहां ज़ंग लग जाएगा."

उन्होंने इस बात को भी माना कि उन्हें बढ़ती उम्र का अहसास होने लगा है. उनके अनुसार पहले वो हर छोटी-छोटी बात पर भी नाराज़ हो जाते थे, लेकिन अब उन्हें कोई कुछ भी कह दे उन्हें फ़र्क़ नहीं पड़ता है.

उनका कहना है कि वो पिछले तीस साल से फ़िल्म इंडस्ट्री में अपने हिसाब से काम कर रहे हैं और आगे भी अपने हिसाब से काम करते रहेंगे.

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'फ़िल्म इंडस्ट्री का रूप बदल रहा है'

फ़िल्म इंडस्ट्री में हीरो का रूप बदल रहा है.

इस बारे में अजय कहते हैं, "इन पाँच सात सालों में आप देखेंगे कि हॉलीवुड और यहाँ भी अधिकतर किरदार प्रौढ़ अभिनेताओं के लिए लिखे जा रहे हैं जिसमे बहुत गहराई होती है."

"गहराई वाली कहानी प्रौढ़ता के बाद ही आती है. यह बहुत ही अच्छा हुआ है क्योंकि दर्शक ऐसी ही कहानियां देखना चाहते हैं."

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'फ़िल्में ही संदेश हैं'

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशवासियों के लिए कोई संदेश देना चाहेंगे, इसपर अजय देवगन का कहना था कि अभिनेताओं के कहने से कुछ होता नहीं है.

उनका कहना था कि वो देशवाशियों को जो भी कहना चाहते हैं वो अपनी फ़िल्मों के ज़रिए ही कहते हैं.

अजय का मानना है कि अगर हर देशवासी देश के बारे में पांच फ़ीसदी भी सोचे तो यह देश महान बन सकता है.

अभिषेक दुधैया के निर्देशन में बनी फ़िल्म 'भुज: द प्राइड ऑफ़ इंडिया' में अजय देवगन के साथ संजय दत्त, सोनाक्षी सिन्हा, शरद केलकर, एमी विर्क और नोरा फ़तेही अहम भूमिका में हैं.

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