कोरोना वायरस से टूट रही बॉलीवुड की कमर

सिनेमाघर

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    • Author, प्रदीप सरदाना
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार और फ़िल्म समीक्षक

साल 2019 में बॉलीवुड में बॉक्स ऑफिस पर जिस तरह धन दौलत की झमाझम हुई उससे पूरी फ़िल्म इंडस्ट्री सातवें आसमान पर थी. यह पहला मौका था जब 2019 में एक बरस में ही 17 फिल्मों ने 100 करोड़ रुपए के क्लब का हिस्सा बनके सफलता का एक नया रिकॉर्ड बना दिया था.

जबकि इन 17 फिल्मों में से एक ऋतिक रोशन की 'वार' ने तो 318 करोड़ रुपए का नेट बिजनेस किया था और 'उरी,' 'कबीर सिंह', 'हाउसफुल-4', 'मिशन मंगल', 'दबंग-3' और 'भारत' जैसी 6 फिल्मों ने 200 करोड़ रुपए और उससे ज्यादा का कलेक्शन करके भी एक नया इतिहास रच दिया था. इन 17 फिल्मों के साथ तीन फिल्में ऐसी थीं जो 100 करोड़ रुपए के आंकड़े को छूने से बस दो चार कदम ही पीछे रह गयी थीं.

इसलिए जब साल 2020 की शुरुआत हुई तो बॉलीवुड का जोश देखते ही बनता था. उम्मीद थी कि हिन्दी सिनेमा को इस साल पिछली बार से भी ज्यादा कमाई होगी और नए नए और भी बड़े रिकॉर्ड बनेंगे. लेकिन इस साल की पहली तिमाही में ही पहुँचने पर ही बॉलीवुड ग्रहण के अंधकार में उलझ गया है. एक ऐसा ग्रहण कि उससे कब मुक्ति मिलेगी, उस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता.

असल में सन 2020 के पहले दो महीने में कुल 40 फिल्में प्रदर्शित हुईं. लेकिन उनमें से सिर्फ एक ही फिल्म अजय देवगन की 'तानाजी' ही करीब 280 करोड़ रुपए का नेट बिजनेस करके हिट का तमगा पहन पाई है. अन्यथा बाकी लगभग सभी फिल्में फ्लॉप हो गईं.

फिल्मों के इस ठंडे बाज़ार में बॉलीवुड इस आस में बैठा था कि मार्च 2020 में बॉक्स ऑफिस पर जरूर सफलता का डंका बजेगा. लेकिन पिछले कई दिनों से दुनिया भर में घूमते हुए कोरोना वायरस के अब भारत में भी पाँव पसारने से सारे समीकरण ध्वस्त हो गए हैं. कोरोना का कहर इतना खतरनाक हो जाएगा ऐसा अंदाज़ नहीं था.

आमिर ख़ान

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लगातार बंद हो रहे हैं सिनेमाघर

कोरोना के कारण यूं तो पहले ही काफी लोगों ने थिएटर में जाकर फिल्में देखना कुछ कम कर दिया था. लेकिन अब कोरोना से सुरक्षा के चलते फिल्मों की शूटिंग बंद होने के साथ, देश के कई राज्यों में सिनेमाघर बंद होने से तो फिल्म व्यवसाय पूरी तरह चौपट हो गया है.

अभी तक जम्मू, कश्मीर, केरल, दिल्ली, कर्नाटक, ओड़ीसा, बिहार, हरियाणा, पंजाब, असम, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के साथ फिल्म नगरी मुंबई और महाराष्ट्र के पुणे, नागपुर सहित कुछ और शहरों में भी थिएटर्स को बंद कर दिया गया है. संभावना है कि जल्द ही कुछ और शहरों में भी सिनेमाघरों को बंद किया जा सकता है.

कपिल देव फ़िल्म

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ओवरसीज बिज़नेस तो पहले ही ख़त्म हो गया था

हालांकि कोरोना जिस तरह विश्व के दूसरे सबसे बड़े फिल्म बाज़ार चीन में, लगातार लोगों को अपनी चपेट में लेकर, विश्व के सबसे बड़े फिल्म बाज़ार अमेरिका तक पहुँच गया. तब लगा कि कोरोना हॉलीवुड फिल्मों के साथ साथ चीन के विशाल फिल्म बाज़ार के भी हाथ पाँव बुरी तरह तोड़ देगा. इस सबसे भारतीय फिल्मों के ओवरसीज बिजनेस तो पहले ही खत्म हो गया था. लेकिन अब कोरोना के भारत में फैलते कहर ने बॉलीवुड की कमर ही तोड़ दी है.

चीन पिछले कुछ बरसों में हॉलीवुड के साथ साथ भारतीय फिल्मों के सबसे बड़े बाज़ार के रूप में उभरा था. जहां चीन में प्रदर्शित होने वाली हिन्दी फिल्मों का बिजनेस अकल्पनीय शिखर पर पहुँच गया था.

आमिर खान की फिल्म 'दंगल' ने जहां भारत में कुल करीब 387 करोड़ रुपए का कारोबार किया. वहाँ ओवरसीज मार्किट में अकेले चीन में ही 'दंगल' ने करीब 1200 करोड़ रुपए का बहुत बड़ा कारोबार कर सभी को चौंका दिया.

ऐसे ही आमिर खान की 'सीक्रेट सुपर स्टार' जो देश में 80 करोड़ रुपए का बिजनेस बड़ी मुश्किल से कर पाई थी, उस फिल्म ने चीन में सिर्फ 4 दिन में 190 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया तो सभी के होश उड़ गए. बाद में तो इस फिल्म ने चीन में कुल 760 करोड़ रुपए एकत्र कर सफलता की बड़ी तस्वीर पेश कर दी.

'सीक्रेट सुपरस्टार', 'दंगल' और 'बजरंगी भाईजान' जैसी फिल्मों ने अपने देश से कहीं ज्यादा अकेले चीन में बिजनेस करके जता दिया कि चीन का फिल्म बाज़ार हिन्दी फिल्मों का एक नया स्वप्न लोक, नया मायालोक है.

सारा अली खान और वरुण धवन

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70 हज़ार फिल्म स्क्रीन्स हैं चीन में

भारतीय फिल्मों को चीन में आश्चर्यजनक सफलता मिलने से तो बड़ा फायदा हुआ ही. उधर चीन के लिए भी यह सफलता किसी वरदान से कम नहीं थी. चीन में भारतीय फिल्मों की जबर्दस्त लोकप्रियता के चलते वहाँ नए सिनेमाघरों की बाढ़ आ गयी.

चीन में जहां 2011 में कुल 9 हज़ार स्क्रीन्स थीं वहाँ अब यह संख्या 70 हज़ार स्क्रीन्स तक पहुँच गयी है. लेकिन कोरोना के कारण पिछले करीब डेढ़ महीने से ये स्क्रीन्स बंद पड़ी हैं.

इससे जहां चीन के फिल्म बाज़ार की अर्थव्यवस्था तो धराशाई हो ही गयी वहाँ हॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों के फिल्म बाज़ार पर इससे बहुत बुरा असर पड़ा है. कोरोना के चलते अमेरिका, इटली, जापान, फ्रांस और कोरिया जैसे कई देशों में भी थिएटर्स को ताले लग गए हैं. इससे विश्व सिनेमा उद्योग ही एक बेहद नाजुक मोड पर आकर ठहर गया है.

मुंबई के प्रसिद्द फिल्म ट्रेड जरनल 'कंप्लीट सिनेमा' के संपादक अतुल मोहन बताते हैं -" दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े फिल्म मार्किट के सिनेमाघर बंद होने से ही फिल्म उद्योग को सीधे औसतन 75 से 90 करोड़ रुपए का नुकसान प्रति सप्ताह होगा. जबकि सिनेमा से जुड़े रेस्टोरेन्ट और पार्किंग आदि का नुकसान इससे अलग है. इसमें कोई शक नहीं कि इसके चलते बहुत से लोगों का रोजगार छिन जाएगा. लेकिन उम्मीद करते हैं कि परिस्थितियाँ जल्द नियंत्रण में होंगी."

हाउसफुल 3

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कोरोना की पहली शिकार 'अँग्रेजी मीडियम'

इसमें कोई शक नहीं कि कोरोना के कारण इंडियन सिनेमा की अर्थव्यवस्था ही नहीं व्यवस्था भी बुरी तरह चरमरा जाएगी. केपीएमजी मीडिया एंड एंटरटेनमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल लगभग 9600 स्क्रीन्स हैं. इनमें 2950 मल्टीफ़्लेक्स में हैं.

माना जा रहा है अभी तक भारत में सिनेमाघर बंद होने से करीब करीब 70 प्रतिशत स्क्रीन्स प्रभावित हो गयी हैं. इससे सबसे बड़ा पहला नुकसान दो फिल्मों 'अँग्रेजी मीडियम' और 'बागी-3' को हुआ है.

थिएटर्स बंद होने से इरफान खान, करीना कपूर और राधिका मदान की फिल्म 'अँग्रेजी मीडियम' तो कोरोना का पहला बड़ा शिकार बन गयी है. यह फिल्म पहले तीन दिन में में बस करीब 10 करोड़ रुपए का बिजनेस ही कर सकी .

उधर सोमवार 16 मार्च को तो 'अँग्रेजी मीडियम' बस 45 लाख रुपए का ही बिजनेस कर पायी. इससे यह फिल्म अब 12 करोड़ रुपए का कारोबार भी मुश्किल से कर सकेगी. जबकि इस फिल्म का बजट ही 40 करोड़ रुपए बताया जा रहा है.

दूसरी ओर टाइगर श्राफ और श्रद्दा कपूर की 'बागी-3' अब जैसे तैसे 97 करोड़ के बिजनेस तक तो पहुँच गयी है. क्योंकि यह फिल्म सिनेमाघर बंद होने के सिलसिले से कुछ पहले 6 मार्च को ही रिलीज हो गयी थी. लेकिन आगे अब इस फिल्म को 100 करोड़ तक का सफर करने के लिए भी हाँफना पड़ेगा. जबकि पहले संभावना थी कि यह फिल्म 200 करोड़ का बिजनेस कर लेगी.

अकेले दिल्ली को ही देखें तो तो दिल्ली में कुल करीब 100 स्क्रीन्स हैं. किसी भी फिल्म का कुल बिजनेस का 10 से 15 प्रतिशत अकेले दिल्ली से आता है. यहाँ के डिलाइट सिनेमा के महाप्रबंधक राज कुमार मल्होत्रा के अनुसार- "दिल्ली के थिएटर्स यदि 31 मार्च तक ही बंद रहते हैं तो इन दिनों में ही यहाँ करीब 100 करोड़ रुपए का सीधा नुकसान तो साफ साफ देखा जा सकता है."

तान्हाजी

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फ़िल्मों के प्रदर्शन टलने से हिलेगी व्यवस्था

सिनेमाघर बंद होने से कुछ फ़िल्मकारों ने मार्च में रिलीज होने वाली अपनी फिल्मों को आगे के लिए टाल दिया है. इन फिल्मों में 20 मार्च को लगने वाली यशराज फिल्म्स की 'संदीप और पिंकी फरार' के साथ 24 मार्च को प्रदर्शित होने जा रही अक्षय कुमार, कटरीना कैफ स्टारर, निर्देशक रोहित शेट्टी की 'सूर्यवंशी' के प्रदर्शन को तो अनिश्चित काल के लिए टाला जा चुका है.

इससे अब 10 अप्रैल को रिलीज होने वाली फिल्म '83' के प्रदर्शन टलने की संभावनाएं भी बढ़ गयी हैं. यह फिल्म सन 1983 में भारत द्वारा जीते विश्व क्रिकेट कप और क्रिकेटर कपिल देव की ज़िंदगी पर आधारित है. जिसमें रणबीर सिंह प्रमुख भूमिका में हैं.

इसी के साथ अप्रैल में रिलीज होने वाली अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना की चर्चित फिल्म 'गुलाबो सिताबो', अभिषेक बच्चन की 'लूडो' और जाहन्वी कपूर की 'गुंजन सक्सेना -द कारगिल गर्ल' फिल्मों के प्रदर्शन पर भी सवालिया निशान लग गए हैं.

उधर ईद पर 22 मई को प्रदर्शन के लिए निर्धारित सलमान खान की 'राधे' की कोरोना के चलते विदेश की शूटिंग टलने से और देश में भी खतरों को देखते हुए शूटिंग की संभावनाएं क्षीण होने से, इस फिल्म का प्रदर्शन भी ईद पर मुश्किल लग रहा है.

इन भारतीय फिल्मों के साथ हॉलीवुड की जेम्स बॉन्ड सीरीज की बड़ी फिल्म 'नो टाइम टू डाई' का अप्रैल में होने वाला विश्वव्यापी प्रदर्शन भी नवंबर के लिए खिसका दिया गया है. लेकिन बड़ी फिल्मों की रिलीज पोस्टपोन होने से आने वाली फिल्मों की व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हो जाती है. क्योंकि आने वाली तारीखों में पहले ही अन्य फिल्मों का प्रदर्शन तय है.

फिर यदि ये फिल्में किसी अन्य बड़ी फिल्म के साथ प्रदर्शित होती हैं तो उससे फिल्मों में टकराव होता है. उससे बिजनेस भी प्रभावित होता है. यूं भी प्रदर्शन के लिए तैयार फिल्म की रिलीज टलने से उस फिल्म का बजट भी बढ़ जाता है. निर्माता को लागत पर ब्याज के साथ प्रचार पर भी फिर से खर्च करने का अतिरिक्त बोझ आ जाता है.

अंग्रेज़ी मीडियम

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देश में सिनेमा बंद होने से बड़ा नुकसान भारत के थिएटर्स की एक बड़ी श्रंखला पीवीआर का भी है. पीवीआर समूह के पास भारत के 22 राज्यों में कुल 850 स्क्रीन्स हैं. जिसमें अकेले दिल्ली में ही उनकी 68 स्क्रीन्स हैं. पीवीआर के सीईओ गौतम दत्ता बातचीत में बताते हैं -" फिल्मों के प्रदर्शन टलने और थिएटर बंद होने से फिल्म उद्योग को बड़ा नुकसान तो है और वह कितना नुकसान है उसका अभी आकलन नहीं किया जा सकता. सिनेमा के बंद होने के नुकसान का दुख तो है लेकिन अभी हम और बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं. कोरोना वायरस से बचाव और लोगों की सुरक्षा ज्यादा अहम है."

दत्ता कहते हैं -"इस मुहिम में हम सरकार के साथ हैं. इस समय ऐसे नुकसान की चिंता से कहीं ज्यादा सभी की सेहत की है. क्योंकि दो तीन हफ्तों में जैसे ही स्थितियाँ सामान्य होंगी, थिएटर खुलेंगे, फिल्में आएंगी तो दर्शक भी फिर से लौट आएंगे. अभी तक हमारी करीब 500 से भी अधिक स्क्रीन्स बंद हो गयी हैं. उम्मीद है जब सब कुछ ठीक होने पर, साल के आने वाले महीनों में फिल्में रिलीज होंगी तो वे अच्छा बिजनेस करेंगी."

उधर रिलायन्स एंटरटेनमेंट जिनकी 'सूर्यवंशी' फिल्म पोस्टपोन हो गयी है और उनकी एक और फिल्म '83' की रिलीज भी निर्धारित 10 अप्रैल को मुश्किल लग रही है.

इस पर रिलायंस एंटरटेनमेंट के सीईओ शिबाशीष सरकार का कहना है - "अभी '83' की आगामी रिलीज को लेकर हमने कोई नयी घोषणा नहीं की है. हम हालात पर नज़र रखे हुए हैं यदि सब जल्द ठीक हो जाता है तो '83' निर्धारित 10 अप्रैल को रिलीज हो भी सकती है. अन्यथा '83' की रिलीज को टालना ही पड़ेगा."

"अपनी फिल्मों की रिलीज पोस्टपोन होने से हमको क्या नुकसान होगा, इसका हिसाब हमने नहीं लगाया है. हम अभी यह सब देख भी नहीं रहे हैं. क्योंकि फिलहाल हम यही चाहते हैं कि कोरोना वायरस आगे न फैले,इस पर जल्द काबू पा लिया जाये."

सूर्यवंशी

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फ़िल्मों और सीरियल की शूटिंग रुक गई तो

कोरोना को लेकर जिस तरह नए नए मामले सामने आ रहे हैं. उसे देखते हुए सभी फिल्मों के साथ सीरियल की शूटिंग भी पूरी तरह रोक दी गई है. फ़िल्मकारों की संस्था 'इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन' के अध्यक्ष टीपी अग्रवाल बताते हैं- "इसमें कोई शक नहीं कि कोरोना की वजह से फिल्म इंडस्ट्री को भारी नुकसान हो रहा है.

"थिएटर के बंद होने और फिल्मों के प्रदर्शन से बिजनेस को तो बहुत बड़ा नुकसान है ही जिसकी भरपाई जल्द मुमकिन नहीं. साथ ही फिल्मों से जुड़े करीब 5 लाख कर्मचारियों की रोजी रोटी भी खतरे में हैं. फिर भी मेरा यह मानना है कि लोगों की सुरक्षा सबसे पहले है."

अग्रवाल यह भी कहते हैं-" कोरोना को देखते हुए फिल्म से जुड़ी लगभग सभी संस्थाओं ने मिलकर 19 से 31 मार्च तक सभी फिल्मों और सीरियल की शूटिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है. क्योंकि शूटिंग के दौरान कलाकार मास्क लगाकर न अभिनय कर सकते हैं और न संवाद बोल सकते हैं. इसलिए उनका बचाव तभी संभव है जब शूटिंग रुक जाये. बस लक्ष्य ये है कि इस बिग लॉस को सहते हुए कोरोना के खतरों से बचा जा सके."

अधिकांश राज्यों में थिएटर्स बंद होने के बाद अब फिल्मों, सीरियल और वेब सीरीज की शूटिंग रुकने तो फिल्म के साथ टीवी इंडस्ट्री भी एक बड़े घाटे की ओर चली गयी है. टीवी पर सीरियल्स के नए एपिसोड नहीं आएंगे और उनकी जगह पुराने एपिसोड प्रसारित करना सभी चैनल्स की मजबूरी बन जाएगा. ऐसे में चैनल्स का प्रसारण व्यय तो वही रहेगा लेकिन विज्ञापन मिलने बहुत कम हो जाएँगे. जिससे मनोरंजन चैनल्स को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ेगा.

हालांकि यह सच है कि कोरोना को लेकर जो बड़े खतरे पनप रहे हैं उनके सामने फिल्मों की शूटिंग और सिनेमाघरों को बंद करना सही कदम है. क्योंकि सिनेमा उद्योग की टूटी कमर तो देर सवेर सही हो जाएगी. लेकिन यदि कोरोना की महामारी और भी ज्यादा फैल गयी तो उससे तबाह हुई ज़िंदगियों की भरपाई नहीं हो सकेगी.

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