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'अमरीकी मंदी 2010 तक चल सकती है' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व के प्रमुख बेन बरनानकि ने कांग्रेस को चेतावनी दी है कि यदि उचित नीतियाँ नहीं अपनाई गईं तो अमरीकी मंदी 2010 तक जारी रह सकती है. उनका कहना था कि ओबामा प्रशासन और फ़ेडरल रिज़र्व ने कई क़दम उठाए हैं और वे सफल रहे तो इस साल के अंत तक अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सकती है. फ़ेडरल रिज़र्व के प्रमुख ने ये बात सीनेट की बैंकिंग समिति के सामने कही. अर्थव्यवस्था को संकट से उबारने के लिए फ़ेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरों को लगभग शून्य कर दिया है. दूसरी ओर ओबामा प्रशासन ने हाल ही में 787 अरब डॉलर के पैकेज पर हस्ताक्षर किए हैं. अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व के प्रमुख बेन बरनानकि ने सांसदों को आश्वासन दिया कि वो अर्थव्यवस्था और बाज़ार को संकट से उबारने के लिए सभी संभव उपाए करेंगे. साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाकारों का कहना है कि अर्थव्यवस्था को मौजूदा मंदी से उबरने में दो से तीन साल लगेंगे. बढ़ता घाटा दूसरी ओर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस बात की पुष्टि की है कि अपने कार्यकाल के अंत तक वे अमरीका के बजट घाटे को आधा करने चाहते हैं. उनका कहना था कि उन्हें कुछ आपात क़दम उठाने पड़े हैं जिनके कारण कुछ समय के लिए घाटा बढ़ा है. लेकिन उनका कहना था कि वे आने वाली पीढ़ियों पर ऐसा कर्ज़ नहीं चढ़ाना चाहते जो वे अदा न कर पाएँ. इधर अमरीकी केंद्रीय नियामक संस्था ने कहा है कि यदि ज़रूरी हुआ तो वित्तीय मंदी झेल रहे बैंकों को मदद दी जाएगी. ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमरीकी सरकार बड़े अमरीकी बैंक सिटीग्रुप में निवेश बढ़ाने पर विचार कर रही है. दूसरी ओर बीमा संस्था एआईजी घाटे होने की घोषणा कर सकती है और उसे भी सरकार की मदद की ज़रूरत पड़ सकती है. |
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