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एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था पर चिंता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अध्यक्ष ने आगाह किया है कि एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था तक नहीं संभलेगी जब तक उन विकसित देशों की अर्थव्यवस्था नहीं संभलती जिन्हें एशियाई देश विभिन्न उत्पाद निर्यात करते हैं. वाशिंगटन से एक वेबचैट में आईएमएफ़ अध्यक्ष डॉमिनिक स्ट्रॉस ने कहा कि ताज़ा आर्थिक संकट का असर एशिया पर इसलिए पड़ा है कि क्योंकि ये देश पारंपरिक रूप से निर्यात पर निर्भर हैं और पश्चिमी देशों में अभी माँग नहीं है. पर साथ ही उन्होंने कहा कि जब अमरीकी और यूरोपीय अर्थव्यवस्थाएँ संभलने लगेंगी, तब एशियाई देशों में सुधार हो सकता है. मंदी आईएमएफ़ ने 2009 में भारत की विकास दर 5.1 फ़ीसदी रहने का अनुमान जताया है. जबकि चीन की विकास दर 6.75 फ़ीसदी रहने का अनुमान है. आईएमएफ़ का कहना है कि दुनिया भर में आर्थिक विकास की दर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक के सबसे निचले स्तर पर है. कोष के मुताबिक इस वर्ष दुनिया भर में आर्थिक विकास की दर गिरकर 0.5 प्रतिशत रह जाएगी. आईएमएफ़ की रिपोर्ट के अनुसार विकासशील देशों में थोड़ा-बहुत विकास होता रहेगा लेकिन भारत और चीन जैसे देश दुनिया भर से मिलने वाले ऑर्डरों की कमी की वजह से बुरी हालत में जा पहुँचेंगे. हालांकि कुछ दिन पहले दावोस में हुए वर्ल्ड इकॉनॉमिक फ़ोरम में भारत के वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने कहा था कि भारत की विकास दर 'तेज़ रफ़्तार' से चलती रहेगी. उनका कहना था कि भारत के विकास दर में कमी ज़रूर आ रही है लेकिन वह नाटकीय ढंग से गिरने वाली नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें कई और बैंक डूब सकते हैं: ओबामा02 फ़रवरी, 2009 | कारोबार 'भारतीय अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ती रहेगी'30 जनवरी, 2009 | कारोबार आईएमएफ़ ने भारत की विकास दर घटाई29 जनवरी, 2009 | कारोबार 'पाँच करोड़ लोग बेरोज़गार हो जाएँगे'28 जनवरी, 2009 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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