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शुक्रवार, 30 जनवरी, 2009 को 12:15 GMT तक के समाचार
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'भारतीय अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ती रहेगी'
दावोस में कमलनाथ ने भारतीय अर्थव्यस्था को पुख़्ता बताया है
दुनिया भर में आर्थिक मंदी के निराशाजनक दौर में भारत के वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने कहा है कि भारत की विकास दर 'तेज़ रफ़्तार' से चलती रहेगी.

वर्ल्ड इकॉनॉमिक फ़ोरम (डब्ल्यूईएफ़) में स्विट्ज़रलैंड के शहर दावोस में उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि हमारी विकास दर सात से साढ़े सात प्रतिशत के बीच रहेगी."

उनका कहना है कि भारत के विकास दर में कमी ज़रूर आ रही है लेकिन वह नाटकीय ढंग से गिरने वाली नहीं है.

कमलनाथ ने कहा कि अगर निर्यात में कमी आती है तो भी घरेलू माँग की वजह से अर्थव्यवस्था चलती रहेगी. उन्होंने कहा, "जो अर्थव्यवस्थाएँ निर्यात पर अधिक निर्भर हैं उनके लिए यह बहुत बुरा दौर है लेकिन हमारी अर्थव्यवस्था में निर्यात का हिस्सा सिर्फ़ 15-16 प्रतिशत है."

भारत से होने वाले निर्यात को पहले ही भारी झटका लगा है, वर्ष 2007-08 में भारत ने 162 अरब डॉलर का निर्यात किया था और इस वर्ष के लिए 200 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा गया था.

भारतीय निर्यातकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में माँग इतनी गिर चुकी है कि पिछले वर्ष के बराबर भी पहुँचना संभव नहीं है, नए लक्ष्य की बात तो दूर रही.

 जो अर्थव्यवस्थाएँ निर्यात पर अधिक निर्भर हैं उनके लिए यह बहुत बुरा दौर है लेकिन हमारी अर्थव्यवस्था में निर्यात का हिस्सा सिर्फ़ 15-16 प्रतिशत है
कमलनाथ, वाणिज्य मंत्री

भारतीय वाणिज्य मंत्री ने कहा कि निर्यात पर आधारित क्षेत्रों को माँग में भारी कमी से जूझना पड़ रहा है, वस्त्र, आभूषण और सॉफ़्टवेयर जैसे क्षेत्र ख़ासे प्रभावित हुए हैं.

कमलनाथ ने दावोस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "दुनिया के ग्यारह में से दस हीरे भारत में तराशे जाते हैं, इसमें ढेर सारे लोगों को रोज़गार मिला हुआ है."

उन्होंने माना कि निर्यात से जुड़े उद्योगों को नुक़सान हुआ है जिसकी वजह से लगभग पाँच लाख लोगों को नौकरियाँ गँवानी पड़ सकती हैं लेकिन उन्होंने कहा कि तेज़ी से बढ़ रहे उपभोक्ता बाज़ार और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में नए रोज़गार पैदा हो रहे हैं जो स्थिति को बिगड़ने से बचा लेंगे.

कमलनाथ ने कहा कि सरकारी व्यय में वृद्धि हो रही है जिससे घरेलू माँग बनी रहेगी.

वाणिज्य मंत्री का कहना था, "बुनियादी स्तर पर हमने कोई ग़लती नहीं की है, बाज़ार की तेज़ी ज़रूर चली गई है लेकिन हमारा आत्मविश्वास और अर्थव्यवस्था की बुनियाद बिल्कुल पुख़्ता है."

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