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शुक्रवार, 02 जनवरी, 2009 को 14:39 GMT तक के समाचार
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रिज़र्व बैंक ने एक और पैकेज दिया
भारतीय रिज़र्व बैंक
बैंकों पर अपनी ऋण व्यवस्था पर निगरानी की सलाह दी गई है
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग व्यवस्था में जान फूँकने के लिए कई अहम फ़ैसले किए हैं.

बाज़ार में नक़दी की उपलब्धता बनी रहे, इसके लिए रिज़र्व बैंक ने कैश रिजर्व रेश्यो (सीआरआर) में कटौती की है, रेपो और रिवर्स रेपो रेट में भी कमी की है.

रिज़र्व बैंक को उम्मीद है कि उसके इस फ़ैसले से बाज़ार में 20 हज़ार करोड़ रुपए की राशि आएगी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक मंदी के कारण अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर में भी रिज़र्व बैंक ने कुछ अहम दरों में कमी की थी.

रिज़र्व बैंक ने सीआरआर में 0.50 फ़ीसदी कटौती की है और अब यह पाँच फ़ीसदी के स्तर पर आ गया है. सीआरआर वो राशि है जो वाणिज्यिक बैंकों को रिज़र्व बैंक के खज़ाने में रखनी पड़ती है.

घोषणा

नई घोषणा के तहत रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में 100 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई है. इस फ़ैसले के बाद अब रेपो रेट 5.5 फ़ीसदी और रिवर्स रेपो रेट चार फ़ीसदी हो गया है.

रेपो रेट के तहत रिज़र्व बैंक बैंकों को पैसा देता है और रिवर्स रेपो रेट के तहत बैंकों से पैसा लेता है.

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कमी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है जबकि सीआरआर में हुई कटौती 17 जनवरी की मध्यरात्रि से लागू होगी.

रिज़र्व बैंक का कहना है कि इस फ़ैसले से बैंक उचित ब्याज दर पर क़र्ज़ दे पाएँगे. रिज़र्व बैंक का ये भी कहना है कि वह बाज़ार में नक़दी की उपलब्धता बहाल करने की कोशिश करेगा.

हालाँकि रिज़र्व बैंक ने वाणिज्यिक बैंकों से अपील की है कि वे क़र्ज़ देने की व्यवस्था पर नज़र रखें और जहाँ ज़रूरी है, वहाँ ऋण भुगतान की शर्तों को फिर से तय करे.

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