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ब्रिटेनः दो दशक में सबसे भारी मंदी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन आधिकारिक तौर पर मंदी की चपेट में आ गया है. 1991 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि ब्रिटेन को मंदी का सामना करना पड़ रहा है. पिछले वर्ष के आख़िरी तीन महीनों में ब्रिटेन में सकल घरेलू उत्पाद में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि उसके पहले वाली तिमाही में 0.6 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई थी. मंदी की एक परिभाषा ये भी है कि लगातार दो तिमाहियों में आर्थिक विकास की दर ऋणात्मक हो जाए तो उस स्थिति को मंदी मान लिया जाता है. 1980 के दशक से ब्रिटेन में यह आर्थिक विकास की दर में सबसे बड़ी गिरावट है. डॉलर के मुक़ाबले पाउंड की क़ीमत में भी लगातार गिरावट आ रही है, पाउंड डॉलर के मुक़ाबले 24 वर्षों के अपने न्यूनतम स्तर पर जा पहुँचा है. इस बीच ब्रिटेन का अहम शेयर इंडेक्स फुट्सी भी दो प्रतिशत नीचे गिर गया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ निर्माण क्षेत्र में सबसे अधिक गिरावट आई है, ब्रिटेन का कुल औद्योगिक उत्पाद 4.6 प्रतिशत नीचे गिर गया है. ब्रितानी अर्थशास्त्री स्टेफ़नी फ्लैंडर्स का कहना है कि यह गिरावट आशंका से कहीं अधिक बुरी है, वे कहती हैं, "आंकड़ों से तो लगता है कि इस वर्ष के अंत तक भी स्थिति सुधरने वाली नहीं है." ब्रितानी वित्त मंत्री एलेस्टर डार्लिंग ने कहा है कि आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार के सामने कितनी बड़ी चुनौती है, उन्होंने कहा, "यह ब्रिटेन के लोगों के लिए कठिन समय है, हमें समस्या के समाधान के लिए हर प्रयास करने होंगे." गहरी आशंका ब्रिटेन में बेरोज़गारी तेज़ी से बढ़ रही है, लगभग बीस लाख लोग बेरोज़गार हैं. मकानों की क़ीमतें लगातार गिर रही हैं. प्रतिष्ठित एकाउंटिंग कंपनी केपीएमजी के प्रमुख अर्थशास्त्री एंड्रू स्मिथ कहते हैं, "इस बात के आसार नहीं दिख रहे हैं कि निकट भविष्य में स्थितियों में सुधार होगा. सुधार के कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं." ब्रिटेन में मंदी का दौर गुज़रने में अक्सर साल-सवा साल का समय लगता है इसलिए विश्लेषक कह रहे हैं कि 2010 से सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती. आशंका व्यक्त की जा रही है कि ब्रितानी अर्थव्यवस्था से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का विश्वास उठ रहा है इसलिए सरकार अधिक से अधिक रियायतें दे रही है ताकि विदेशी निवेश बना रहे. बैंक ऑफ़ इंग्लैंड ने ब्याज दर में भारी कटौती करके इसे 1.5 प्रतिशत तक पहुँचा दिया है और बैंकों से कहा गया है कि वे कर्ज़ देने से पीछे न हटें. इसके अलावा वैट में भी ढाई प्रतिशत की कटौती की गई है. जर्मनी और स्पेन सहित ज्यादातर यूरोपीय देश पहले ही मंदी की चपेट में हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें वित्तीय संकट पर शिखर सम्मेलन19 अक्तूबर, 2008 | कारोबार 'और वित्तीय क़दम उठाए जाने की ज़रूरत'20 अक्तूबर, 2008 | कारोबार भारत समेत कई शेयर बाज़ारों में खलबली23 अक्तूबर, 2008 | कारोबार 'मौजूदा वित्तीय संकट सूनामी जैसा है'23 अक्तूबर, 2008 | कारोबार शेयर बाज़ारों में हाहाकार24 अक्तूबर, 2008 | कारोबार दुनिया भर में शेयर बाज़ार संभले28 अक्तूबर, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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