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अर्थव्यवस्था में जान फूँकने के लिए पैकेज | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आर्थिक मंदी के दौर को देखते हुए भारत सरकार ने अर्थव्यवस्था में जान फूँकने के लिए एक और पैकेज की घोषणा की है. रिज़र्व बैंक ने भी कुछ अहम दरों मे कमी की है. सरकार ने उद्योग जगत को विदेशों से और पैसा लेने की सहूलियत दी है तो विदेशी संस्थागत निवेशकों को देश में और पैसा लगाने की अनुमति भी दी गई है. सरकार ने जनता में व्यय शक्ति को बढ़ावा देने की कोशिशें भी तेज़ करने का फ़ैसला किया है. सरकार के इस फ़ैसले के साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक ने भी अहम फ़ैसले में कैश रिजर्व रेश्यो, रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कमी करने की घोषणा की है. अहम फ़ैसले नई दिल्ली में योजना आयोग के उपाध्यक्ष मांटेक सिंह अहलूवालिया ने यह घोषणा की है. इस घोषणा के मुताबिक़ अब राज्य अतिरिक्त ख़र्च के लिए बाज़ार से 30 हज़ार करोड़ रुपए तक का ऋण ले सकते हैं. पैकेज के तहत विदेशों से वाणिज्यिक ऋण लेने की शर्तों में भी ढील दी गई है. जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए निवेश की सीमा भी बढ़ा दी गई है. अब यह सीमा छह अरब डॉलर से बढ़ाकर 15 अरब डॉलर कर दी गई है. इस पैकेज के तहत सिमेंट, टीएसटी स्टील बार के प्रतिभार शुल्क में छूट को वापस ले लिया गया है. मुद्रा स्फ़ीति पर काबू करने के लिए ये छूट दी गई थी. मांटेक सिंह अहलूवालिया ने पैकेज की घोषणा करते हुए बताया कि आवास क्षेत्र, दीर्घ और लघु उद्योगों और बुनियादी क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें रिज़र्व बैंक ने एक और पैकेज दिया02 जनवरी, 2009 | कारोबार और सस्ती होगी हवाई यात्रा01 जनवरी, 2009 | कारोबार तेल शोधन के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी26 दिसंबर, 2008 | कारोबार टोयोटा को हो सकता है घाटा22 दिसंबर, 2008 | कारोबार 'सरकारी निवेश और बढ़ाने की ज़रूरत'21 दिसंबर, 2008 | कारोबार 'पैकेज के स्वागत के साथ चेतावनी भी'20 दिसंबर, 2008 | कारोबार चंदा आईसीआईसीआई की नई सीईओ19 दिसंबर, 2008 | कारोबार 'बेकार' नहीं होंगी कार कंपनियाँ19 दिसंबर, 2008 | कारोबार इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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