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आईएमएफ़ ने भारत की विकास दर घटाई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने 2009 में भारत की विकास दर 5.1 फ़ीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया है. जबकि चीन की विकास दर 6.75 फ़ीसदी रहने का अनुमान है. आईएमएफ़ की आर्थिक पूर्वानुमान संबंधी रिपोर्ट के अनुसार पिछले नवंबर से भारत की विकास दर में 1.2 फ़ीसदी कमी का आकलन किया किया है, लेकिन उसका कहना है कि 2010 में ये 6.5 फ़ीसदी के स्तर तक पहुँच सकती है. दूसरी ओर चीन की विकास दर में 1.8 फ़ीसदी की कमी का आकलन किया गया है और इसके 6.5 फ़ीसदी रहने का अनुमान है. आईएमएफ़ ने चीन की विकास दर 2010 में 8 फ़ीसदी के स्तर तक पहुँच जाने की उम्मीद जताई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे ख़राब स्थिति का सामना करना पड़ सकता है. आईएमएफ़ का कहना है कि दुनिया भर में आर्थिक विकास की दर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक के सबसे निचले स्तर पर है. रिपोर्ट के अनुसार कारोबार और उत्पादन में गिरावट के कारण इस वर्ष दुनिया भर में आर्थिक विकास की दर गिरकर 0.5 प्रतिशत रह जाएगी. मुद्रा कोष के मुख्य अर्थशास्त्री ऑलिवर ब्लैंचर्ड ने कहा, " दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि बिल्कुल रुक जाएगी. अब तक जितने क़दम उठाए गए हैं उनका कोई ख़ास असर होता नहीं दिख रहा है." आईएमएफ़ का कहना है कि यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था में तो दो प्रतिशत तक का संकुचन आएगा जबकि अमरीका में यह आंकड़ा 1.6 प्रतिशत होगा. दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) का कहना है कि आर्थिक मंदी की वजह से इस वर्ष पाँच करोड़ से अधिक लोगों को नौकरी गँवानी पड़ सकती है. इस संगठन का कहना है कि इसकी वजह से दुनिया भर में बेरोज़गारी का आंकड़ा सात प्रतिशत तक पहुँच जाएगा जबकि इस समय यह छह प्रतिशत के करीब है. आईएलओ का कहना है नौकरियों में होने वाली कटौतियों का सबसे बुरा असर विकासशील देशों पर पड़ेगा. |
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