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चीन में भी नौकरियों पर चिंता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया में मंदी की मार से अब तक काफ़ी हद तक बचे रहे चीन पर भी उसकी गहरी छाया दिखने लगी है. चीन ने कहा है कि अगले वर्ष निर्यात के ऑर्डर कम होने की वजह से बहुत सारी कंपनियों में बड़े पैमाने पर छँटनियाँ हो सकती हैं. चीन के मानव संसाधन मामलों के मंत्री यिन वेमिन का कहना है कि चीन में रोज़गार के बाज़ार की हालत निराशाजनक है. जानकारों का कहना है कि चीन का नेतृत्व संकट में घिर सकता है क्योंकि उसकी कामयाबी का आधार जीवन स्तर में सुधार का वादा है. चीन ने आर्थिक मंदी की मार से उबरने के लिए एक बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा की है और कहा जाता रहा है कि उस पर यूरोपीय देशों या अमरीका की तरह मार नहीं पड़ेगी लेकिन असर अब बढ़ता दिख रहा है. प्यूजो-सिट्रन अमरीका के वाहन निर्माताओं के बाद अब कार बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी प्यूजो-सिट्रन 2700 लोगों को नौकरी से हटाने का ऐलान किया है.
कंपनी का कहना है कि यूरोपीय बाज़ार में कारों की माँग में कमी की वजह से ये फ़ैसला किया गया है. प्यूजो-सिट्रन का कहना है कि कामगारों, मैनेजरों और ऑफ़िस स्टाफ पर इस छंटनी का असर होगा. कुछ ही सप्ताह पहले कंपनी ने कहा था कि उसके मुनाफ़े में भारी कमी आने वाली है और उत्पादन में भी बड़ी कमी की जाएगी. कंपनी दो दिसंबर को अपने कर्मचारियों के सामने अपनी छंटनी योजना पेश करेगी. रॉल्स रॉयस महंगी कारें और हवाई जहाज़ों का इंजन बनाने वाली कंपनी रॉल्स रॉयस अगले वर्ष अपने लगभग दो हज़ार कर्मचारियों को नौकरी से हटाने जा रहा है.
दुनिया भर में 39 हज़ार लोग रॉल्स रॉयस की नौकरी में है, सबसे अधिकारी 60 प्रतिशत कर्मचारी ब्रिटेन में हैं. कंपनी ने अभी तक नहीं बताया है कि छँटनी से प्रभावित कर्मचारी कहाँ के होंगे. रॉल्स रॉयस का कहना है कि कर्मचारियों को हटाए जाने की वजह एयरबस और बोइंग से ऑर्डर का न मिलना है. आस्ट्राज़ेनसा ब्रिटिश-स्वीडिश दवा कंपनी आस्ट्राज़ेनसा अपनी यूरोपीय फैक़्ट्रियों में 1400 लोगों को नौकरी से हटा रहा है.
कंपनी स्पेन, बेल्जियम और स्वीडन में अपनी कई फ़ैक्ट्रियाँ बंद कर रही है, ब्रिटेन में भी कुछ नौकरियाँ जाएँगी. बुधवार को कंपनी ने आगाह किया था कि उसका मुनाफ़ा तेज़ी से कम होने वाला है. आस्ट्राज़ेनसा यूरोप की सबसे बड़ी दवा कंपनियों में से एक है और मंदी के दौर में किसी दवा कंपनी से छँटनी की यह पहली ख़बर है. तेल के दाम कच्चे तेल के दाम पिछले तीन वर्षों के रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर पहुँच गया है.
मई 2005 के बाद से यह पहला मौक़ा है जब तेल की क़ीमते 50 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुँच गई हैं. तेल की क़ीमतें इसी वर्ष जुलाई में 147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई थीं लेकिन मंदी की वजह से क़ीमतें लगातार गिर रही हैं. तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक की बैठक इस महीने के अंत में होने वाली है जिसमें तेल के उत्पादन में कटौती का फ़ैसला किया जा सकता है, ओपेक का कहना है कि उसके सदस्य देशों को 700 अरब डॉलर का नुक़सान हो चुका है. आइसलैंड अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने उत्तरी यूरोपीय देश आइसलैंड को दो अरब डॉलर का कर्ज़ देने का फ़ैसला किया है. अक्तूबर में आइसलैंड की बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह तबाह हो गई थी. आईएमएफ़ ने कहा है कि इस कर्ज़ का उद्देश्य आइसलैंड को अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने का मौक़ा देना है. 1976 के बाद से यह पहला मौक़ा है जब किसी पश्चिमी यूरोपीय देश ने आईएमएफ़ से सहायता ली है. |
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