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आर्थिक सहायता को लेकर तकरार जारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी वित्त मंत्री हेनरी पॉलसन ने वित्तीय क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को डूबने से बचाने के लिए दी जा रही 700 अरब डॉलर की सहायता को कारगर बताया है. उन्होंने अमरीकी संसद की एक विशेष समिति की सामने कहा है कि यह सबसे समझदारी भरा फ़ैसला था लेकिन उनके आलोचकों का कहना है कि यह सहायता कंपनियों को नहीं बल्कि आर्थिक मंदी से जूझ रहे आम लोगों को दी जानी चाहिए थी. पॉलसन ने कहा कि यह आर्थिक पैकेज कोई जादू की छड़ी नहीं है कि मंदी को पल में दूर भगा दिया जाए, उन्होंने कहा, "वित्तीय संस्थानों और व्यवस्था को संभलने में समय लगेगा." उन्होंने अमरीकी संसद की वित्तीय मामलों की विशेष समिति को बताने की कोशिश की कि उनकी योजनाएँ कितनी असरदार रही हैं लेकिन वहाँ उनके कड़े सवालों का सामना करना पड़ा. वाहन उद्योग फ़ोर्ड, जनरल मोटर्स और क्राइसलर के प्रमुखों ने अमरीकी संसद से अपील की है कि उन्हें जल्द से जल्द 25 अरब डॉलर की सहायता दी जाए.
इन शीर्ष मैनेजरों ने अमरीकी संसद को बताया कि अगर उन्हें मदद नहीं मिली तो ये कंपनियाँ बंद हो सकती हैं और अमरीकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है. मंदी की मार की वजह से कारों की बिक्री में भारी कमी आई है और इन कंपनियों को भारी नुक़सान उठाना पड़ा है, हज़ारों लोगों को नौकरियों से हटाने की घोषणाएँ पहले ही हो चुकी हैं. इस बात पर बहस जारी है कि वाहन निर्माता कंपनियों को 700 अरब डॉलर के पैकेज में से हिस्सा दिया जाए या फिर उनके लिए अलग रक़म हो. इस बहस पर अंतिम फ़ैसला नव-निर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा ही कर सकते हैं जो जनवरी में शपथ लेंगे लेकिन इन कंपनियों का कहना है कि अगर कुछ सप्ताह के भीतर फ़ैसला नहीं हुआ तो वे तबाह हो जाएँगी. माज़्दा आर्थिक मंदी की मार से बचने के लिए धन जुटाने के वास्ते फ़ोर्ड मोटर्स ने जापानी कार निर्माता कंपनी माज़्दा के अपने शेयर बेचने की घोषणा की थी, फ़ोर्ड की माज़्दा में 34 प्रतिशत की हिस्सेदारी है लेकिन अब वह अपने 20 प्रतिशत शेयर बेचना चाहता है.
इस बिक्री के बाद फ़ोर्ड के पास माज़्दा के 14 प्रतिशत शेयर रह जाएंगे, माज़्दा ने अपने सात प्रतिशत शेयर ख़रीदने की इच्छा जताई है. माज़्दा की इस घोषणा के बाद उसके शेयरों की क़ीमत में तेज़ गिरावट आई जिससे बाज़ार में खलबली मच गई. इससे पहले जनरल मोटर्स ने भी सूज़ुकी के अपने तीन प्रतिशत शेयर बेचकर कुछ धन जुटाने की घोषणा की थी. ओपेक ओपेके के अध्यक्ष चाकिब ख़लील ने कहा है कि तेल की क़ीमतों में गिरावट से तेल निर्यातक देशों को 700 अरब डॉलर का नुक़सान हो चुका है.
तेल की क़ीमतों में पिछले कुछ महीनों में 60 प्रतिशत की गिरावट आई है, कच्चे तेल की क़ीमतें 147 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 55 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि तेल क़ीमतों को बढ़ाने के लिए तेल निर्यातक देशों का संगठन उत्पादन में कटौती कर सकता है लेकिन ख़लील ने कहा कि इस मामले पर इस महीने कोई फ़ैसला नहीं होने वाला है. माना जा रहा है कि 17 दिसंबर को ओपेक की एक अहम बैठक होगी जिसमें उत्पादन घटाने के बारे में फ़ैसला किया जाएगा. ओपेक दुनिया भर में तेल के कुल कारोबार का 40 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करता है और उसने पिछले ही महीने उत्पादन में 15 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती करने का फ़ैसला किया था. 'नक़दी संकट टला' वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध कराने वाली जापान की सबसे बड़ी कंपनी नोमुरा होल्डिंग्स के प्रमुख का कहना है कि विश्व स्तर पर नकदी की कमी का संकट समाप्त हो गया है.
नोमुरा के प्रमुख केनिची वातानाबे ने कहा है कि अब ये देखना है कि दुनिया के देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं को किस तरह उबारते हैं. उन्होंने कहा, "अगला बड़ा मुद्दा है यह है कि आर्थिक सहायता को किस तरह इस्तेमाल किया जाता है." वानाताबे ने कहा कि येन काफ़ी मज़बूत है लेकिन यह जापानी अर्थव्यवस्था के लिए बुरी ख़बर नहीं है क्योंकि वे विदेशी कंपनियों को ख़रीद सकते हैं. एचपी मंदी के इस दौर में कंप्यूटर में बनाने वाली बड़ी कंपनी एचपी से एक अच्छी ख़बर आई है.
कंपनी ने उम्मीद से बेहतर मुनाफ़े की घोषणा की है, इसके बाद उसके शेयरों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. एचपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क हर्ड ने कहा है कि कड़ी स्पर्धा के बावजूद उनकी कंपनी ने अपनी बिक्री बढ़ाने में कामयाबी हासिल की है. एचपी की बिक्री में इस वर्ष 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, इस वर्ष कंपनी ने कुल 33 अरब डॉलर का कारोबार किया. |
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