BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
रविवार, 16 नवंबर, 2008 को 20:51 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
'भारत में मंदी से ज़्यादा आशंका हावी'

भारत आर्थिक शिखर सम्मेलन

दिल्ली में शुरु हुए आर्थिक सम्मेलन में जहाँ वैश्विक आर्थिक मंदी के और गहराने की आशंका जताई गई वहीं भारत में इसके असर पर अलग-अलग स्वर उभरे.

इस तीनदिवसीय सम्मेलन को जेनेवा स्थित वर्ल्ड ईकनॉमिक फ़ोरम और भारतीय उद्योग परिसंघ सीआईआई ने मिलकर आयोजित किया है और इसमें 35 देशों के प्रतिनिधि आए हैं.

सबके भाषणों में आर्थिक संकट के चलते उपजी चिंता साफ़ दिखी.

सदा मुक्त व्यापार का झंडा उठाने वाले उद्योगपति एक सिरे से कहते दिखे की हालत बुरे हैं और ज़्यादा बुरे हो सकते हैं. इस सबके बावजूद सबने भारत को आशा की किरण के तौर पर पेश किया जहाँ ख़राब हालत के बावजूद विकास दर ने घुटने नहीं टेके हैं.

 गए हफ्ते सीआईआई की राष्ट्रीय काउंसिल की एक बैठक में मैने सवाल रखा कि कितने लोगों ने अपनी परियोजनाएं आर्थिक तंगी के कारण रोक दी हैं. किसी ने भी हाथ नहीं उठाया. मैने सवाल दोहराया तब भी किसी ने भी हाथ नहीं उठाया
केवी कामथ

भारत की वर्तमान स्थिति को बयान करते हुए भारत के सबसे बड़े निजी बैंक के आईसीआईसीआई के प्रबंध निदेशक एमवी कामथ ने कहा की आज की तारीख़ तक भारतीय व्यापारी डरे हुए ज़्यादा हैं फंसे हुए कम.

कामथ ने भारतीय व्यापारियों की हालिया हालात की मिसाल देते हुए बताया " गए हफ्ते सीआईआई की राष्ट्रीय काउंसिल की एक बैठक में मैने सवाल रखा कि कितने लोगों ने अपनी परियोजनाएं आर्थिक तंगी के कारण रोक दी हैं. किसी ने भी हाथ नहीं उठाया. मैने सवाल दोहराया तब भी किसी ने भी हाथ नहीं उठाया".

कामथ ने कहा कि उन्हें लगता है कि व्यापारियों की मनोस्थिति नकारात्मक है पर हालत नहीं, अभी वो स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं.

सरकारों को सुझाव

कामथ का कहना था अगले छह से आठ हफ़्तों में ही साफ़ हो पाएगा कि विश्व की आर्थिक स्थिति का भारत पर कितना प्रभाव पड़ा है औऱ देश को इससे निपटने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए.

दुनिया भर की सरकारों को क्या कदम उठाने चाहिए ताकि उद्योग जगत फलता फूलता रहे इस बात पर कई सुझाव सामने आए. मुख्य बात जो सामने आई वो थी सरकारी मदद की ज़रूरत.

 जहां तक खुले बाज़ार का सवाल है तो इसका मतलब अनियंत्रित बाज़ार कतई नहीं लगाना चाहिए. ऐसी स्थिति में सरकार का काम ये होना चाहिए कि वो बाज़ार पर नियंत्रण रखने के लिए क़ानून बनाए और उसे सही तरीक़े से क्रियान्वित करे
रजत नाग

बजाज ऑटो के अध्यक्ष और राज्य सभा सांसद राहुल बजाज ने कहा सरकार पैसा दे सकती हैं पर बेहतर प्रबंधन नहीं इसलिए सरकारी-निजी क्षेत्र की सहभागिता की ज़रूरत है.

उनका कहना था," आज ज़रूरत है सरकारी पैसे और हमारे प्रबंध कौशल के साथ ही पूरी जवाबदेही की क्योंकि पैसा उनका है."

बजाज ने सुझाव दिया की भारत सरकार को उपभोक्ता मांग बढ़ाने के लिए अप्रत्यक्ष करों में कमी करनी चाहिए.

उन्होंने बैंकों से गुज़ारिश की कि उन्हें उद्योगों के अलावा उपभोक्ताओं को भी कर्ज़ मुहैया करना चाहिए ताकि मांग बढे और आर्थिक तरक्की बनी रहे.

बजाज की बात से एशियाई विकास बैंक के प्रबंध संचालक रजत नाग ने इत्तेफ़ाक जताया.

उन्होंने कहा, "जहां तक खुले बाज़ार का सवाल है तो इसका मतलब अनियंत्रित बाज़ार कतई नहीं लगाना चाहिए. ऐसी स्थिति में सरकार का काम ये होना चाहिए कि वो बाज़ार पर नियंत्रण रखने के लिए क़ानून बनाए और उसे सही तरीक़े से क्रियान्वित करे".

नाग ने ये भी कहा " दूसरी बात ये कि आज जबकि दुनिया की अर्थव्यवस्था का केंद्र पूर्व की ओर स्थापित हो रहा है. मैं जी-20 देशों से कहना चाहूंगा कि वो इस तथ्य को स्वीकार करें इस नई व्यवस्था के साथ मिलकर काम करें".

शेयरशेयरों में सूनामी
भारतीय शेयर बाज़ार पर पड़ी मंदी की मार. एक विशेष प्रस्तुति.
अनाजमहँगाई पर लगाम
भारत में महंगाई की दर घटकर 8.98 फ़ीसदी के स्तर पर आ गई है.
उद्योगऔद्योगिक दर सुधरी
भारत के औद्योगिक विकास की दर थोड़ी संभली है और ये 4.8 फ़ीसदी हो गई है.
बेहाल बाज़ार का हाल
दुनिया को तेज़ी से अपनी गिरफ़्त में लेते आर्थिक संकट का रोज़नामचा.
नौकरियों में कटौती...?
उद्योग संस्था एसोचैम ने भारत में नौकरियों में कटौती होने की संभावना जताई.
एलन ग्रीनस्पैन'ये वित्तीय सूनामी है'
अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व के पूर्व चेयरमैन एलन ग्रीनस्पैन का कहना है कि ऐसा संकट सदी में एक बार आता है.
परेशान मध्यवर्गनकदी का संकट गहराया
वैश्विक मंदी की वजह से भारत में भी नकदी की समस्या गहरा गई है.
इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>