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मंदी पर चर्चा के लिए पहुँचे मनमोहन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विकसित और विकासशील देशों के समूह जी-20 की बैठक में हिस्सा लेने अमरीका पहुँच गए हैं. इस बैठक में वैश्विक आर्थिक मंदी और इससे निपटने के उपायों पर चर्चा होगी. बैठक ऐसे समय में हो रही है जब यूरोपीय संघ के वैसे देश मंदी की चपेट में आ चुके हैं जहाँ यूरो साझा मुद्रा के रुप में स्वीकार्य है. भारतीय समयानुसार रविवार से शुरु हो रहे दो दिवसीय बैठक में भारत को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया है. माना जा रहा है कि भारत विकासशील देशों की ओर से अपनी बात रखेगा. लेकिन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने स्पष्ट किया है कि मंदी से निपटने के लिए पश्चिमी देशों की संरक्षणवादी कारगर साबित नहीं होगी. उन्होंने मंदी से जूझ रही कंपनियों को सरकारी संरक्षण देने की बज़ाए वस्तुओं, सेवाओं और पूँजी के मुक्त प्रवाह को बढ़ावा देने पर बल दिया. भारतीय प्रधानमंत्री इस राय से अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के प्रतिनिधियों को अवगत कराएंगे. भारतीय वित्त मंत्री का कहना है कि संरक्षण देने की रणनीति मौजूदा संकट से निपटने का सबसे ख़राब तरीका साबित होगी. उन्होंने कहा, "अगर हम साझा नियामक मानकों पर सहमत हो जाएँ और सदस्य देश इस पर अमल करें तो ये एक दूरदर्शी क़दम होगा." चिदंबरम ने कहा कि भारत समेत विकासशील देशों को और संसाधन उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि वो विकास दर को जारी रख सकें और दूसरे देशों को भी अपने साथ-साथ विकास करने में मदद कर सकें. |
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