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मंदी से निपटने की कार्ययोजना बनेगी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जी-20 की बैठक में मंदी से निपटने के लिए कार्य योजना बनाने पर सहमति बनी है. हालाँकि साझा योजना पर सहमति नहीं बन पाई. सभी देश अपने घरेलू हालात के मुताबिक उचित क़दम उठाएंगे ताकि अर्थव्यवस्था की सुस्ती को ख़त्म किया जा सके. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के नियमन और निगरानी के लिए 31 मार्च तक सुझाव पेश करने की डेडलाइन तय की गई. उन वित्तीय कंपनियों की सूची जारी करने पर भी सहमति बनी जिनके डूबने से वैश्विक वित्त व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है. बीसों सदस्य देश अगले साल अप्रैल में एक बार फिर बैठक करेंगे और आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे. अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने कहा कि वो बैठक से संतुष्ट हैं. उन्होंने कहा, "अगले साल मैं तो राष्ट्रपति नहीं रहूंगा लेकिन ओबामा आपसे मुखातिब होंगे." भारत की दलील भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि वैश्विक आर्थिक मंदी के लिए विकासशील देश ज़िम्मेदार नहीं हैं बल्कि वे भुक्तभोगी हैं. ख़ुद अर्थव्यवस्था के जानकार भारतीय प्रधानमंत्री ने वाशिंगटन में आयोजित शिखर सम्मेलन में कहा, "मंदी से विकासशील देशों का निर्यात प्रभावित होगा और उन्हें कर्ज़ मिलने में भी दिक्कत होगी. विदेशी निवेश तो कम होगा ही. इन सबका असर विकास दर में कमी के रुप में सामने आएगा." मनमोहन सिंह ने कहा कि विकासशील देशों में विकास दर में कमी का मतलब होगा लाखों लोगों को ग़रीबी की ओर धकेल देना. उन्होंने चेतावनी भरे लहज़े में कहा कि मंदी का असर स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी पड़ सकता है. इससे बचने का सुझाव देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, "सक्षम देशों की ओर से समन्वित वित्तीय मदद मंदी के असर को कम करने और इसकी अवधि घटाने में सहायक हो सकता है." साझा ढाँचे की ज़रूरत उन्होंने कहा कि जो भी नया ढ़ाँचा बनाया जाए उसमें बहुपक्षीय निगरानी की विश्वसनीय व्यवस्था की जाए. भारतीय प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि धनी देशों के संगठन जी-7 के सदस्य अकेले मौजूदा चुनौती से निपटने में विफल साबित होंगे. ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला ड सिल्वा ने कहा कि मंदी से बचने का सबसे बेहतर ऊपाय ये है कि धनी देश अपने गिरेबाँ में झाँकें और अपनी समस्या दूर करें. उन्होंने कहा कि ब्राज़ील में स्थानीय माँग बढ़ाने की कोशिश हो रही है ताकि निर्यात पर निर्भरता कम हो. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि जी-20 में आर्थिक मंदी को लेकर हुई प्रगति से वे संतुष्ट हैं. दुनिया के बीस प्रमुख विकसित और विकासशील देशों के संगठन जी-20 की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने आगाह किया कि 'संरक्षणवाद' समस्या का समाधान नहीं है. उन्होंने कहा, "ऐसी परिस्थितियों में इस बात का ख़तरा रहता है कि सरकारें संरक्षणवादी नीतियाँ अपनाने लगती हैं." उन्होंने कहा कि खुले बाज़ार और व्यापार की नीति ही जारी रहनी चाहिए. |
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