रमज़ान के महीने में यरूशलम में किस बात की है आशंका?

अल अक्सा मस्जिद
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    • Author, योलांडे नेल
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, यरूशलम

इस्लामिक कैलेंडर का पवित्र महीना रमज़ान आज से मध्य पूर्व में शुरू हो चुका है. इस दौरान फ़लस्तीन में हिंसा फैलने की आशंका है, ख़ासकर यरूशलम में, क्योंकि संघर्ष विराम को लेकर स्थिति अभी भी साफ़ नहीं हुई है.

हमास ने फ़लस्तीनियों से अल-अक़्सा मस्जिद की यात्रा करने की अपील एक बार फिर दोहराई है.

वहीं इसराइल ने हमास पर रमज़ान के दौरान इलाक़े में आग भड़काने का प्रयास करने का आरोप लगाया है.

यरूशलम इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थान है.

यरूशलम यहूदी धर्म का भी सबसे पवित्र स्थान है. उसे टेम्पल माउंट के नाम से जाना जाता है. इसराइल-फ़लस्तीन विवाद में इसको लेकर अक्सर विवाद भी होता रहता है.

अल-अक़्सा मस्जिद का परिसर

अबु नादर
इमेज कैप्शन, अबु नादर का मानना है कि इस साल रमज़ान काफ़ी कठिन होगा

इस हफ़्ते जब मैं यरूशलम गई तो अल-अक़्सा का परिसर शांत था, लेकिन फ़लस्तीनी श्रद्धालुओं का मन युद्ध पर लगा हुआ था.

आयत नाम की एक महिला ने दुखी होकर कहा, "लोगों का मन रमज़ान की नियमित परंपराओं का जश्न मनाने और उनका आनंद लेने का नहीं है." उन्होंने कहा, "इस साल, ग़ज़ा में जो हो रहा है, उसकी वजह से वो उस तरह से रमज़ान नहीं मनाएंगे."

रमज़ान की शुरुआत तक 40 दिन के युद्धविराम के प्रभावी होने की उम्मीद है.

इसराइल ने शनिवार को कहा कि उसके ख़ुफ़िया विभाग के प्रमुख ने अपने अमेरिकी समकक्ष से मुलाक़ात की थी, क्योंकि उन्होंने दर्जनों बंधकों को छुड़ाने के प्रयासों को जारी रखा.

इसके बाद इसराइली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि हमास अपनी स्थिति पर कायम है, जैसे उसे किसी समझौते में कोई दिलचस्पी ही नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र ने ग़ज़ा में अकाल की चेतावनी दी है. इस बीच एक योजना की रूपरेखा पर चर्चा चल रही है. इसमें हमास की ओर से सात अक्टूबर के हमले में बंधक बनाए गए कुछ इसराइली बंधकों को फ़लस्तीनी क़ैदियों के बदले में रिहा किया जाएगा और मानवीय मदद को बढ़ाया जाएगा.

अबू नादेर नाम के एक स्कूटर सवार ने कहा, "इस बार का रमज़ान बहुत कठिन होगा. जब हम ग़ज़ा में अपने हमवतनों के बारे में सोचेंगे तो हम अपना रोज़ा कैसे तोड़ेंगे और खाएंगे."

उन्होंने कहा, "हम ईश्वर से अच्छे समय की प्रार्थना करते हैं."

फ़लस्तीनी संघर्ष का प्रतीक

रमज़ान की शुरुआत से पहले रविवार को अल अक्सा मस्जिद पहुंचे लोग

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इसराइल की पुलिस हमेशा अल-अक़्सा मस्जिद के विशाल परिसर के आसपास तैनात रहती है. उसके हर गेट पर अधिकारी मौजूद रहते हैं. ये अधिकारी वहां लोगों की पहुंच को नियंत्रित करते हैं.

इसराइल ने 1967 के मध्य पूर्व युद्ध में जॉर्डन से छीन कर पुराने शहर के इस हिस्से सहित पूर्वी यरुशलम पर कब्ज़ा जमाकर उसे हड़प लिया था. यह जगह फ़लस्तीनी संघर्ष का एक प्रमुख प्रतीक बन गई है.

साल 2000 में, इसराइल के तत्कालीन विपक्षी नेता एरियल शेरोन की पवित्र पहाड़ी की यात्रा को दूसरे फ़लस्तीनी विद्रोह के उकसावे के रूप में देखा गया था. इसे फ़लस्तीनी 'अल-अक़्सा इंतिफ़ादा' बताते हैं.

यहां इसराइली सुरक्षा बलों और फ़लस्तीनी श्रद्धालुओं के बीच अक्सर झड़पें होती रहती हैं, खासकर रमज़ान में.

शहर में होने वाले इसराइली राष्ट्रवादियों के मार्च और धुर दक्षिणपंथियों की अत्यधिक संवेदनशील धार्मिक यथास्थिति नियमों में बदलाव की मांग से तनाव बढ़ जाता है. इस नियम के तहत वहां इसराइली जा तो सकते हैं, लेकिन पूजा-पाठ नहीं कर सकते हैं.

मई 2021 में, यरूशलम में तनाव बढ़ने से अल-अक़्सा में हिंसा भड़क उठी थी. इसके बाद हमास ने यरूशलम पर रॉकेट दागे. इससे ग़ज़ा में एक छोटा सा युद्ध हो गया. इससे यहूदी और अरब इसराइलियों में तनाव फैल गया.

पिछले साल, जब रमज़ान और यहूदी फसह की छुट्टियां एक साथ आ गईं. इसके बाद ख़बर फैल गई कि यहूदी चरमपंथियों ने टैंपल माउंट पर एक बकरे की बलि देने की योजना बनाई है.

बकरे की बली को रोकने के लिए मुसलमानों ने इसराइली पुलिस पर भरोसा नहीं किया. अल-अक़्सा में सैकड़ों मुसलमान जमा हो गए. उनके ख़िलाफ़ स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया.

ग़ज़ा की घटनाओं का होगा असर

रविवार को ग़ज़ा में एयरड्राप की जा रही राहत सामग्री

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इस साल रमज़ान के दौरान कोई भी प्रमुख यहूदी छुट्टी नहीं हो रही है.

ऐसे में रमज़ान के दौरान मुसलमान ग़ज़ा में होने वाली घटनाओं और इसराइली पाबंदियों पर निर्भर रहेंगे.

इसराइल के धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामर बेन-गविर ने इसराइली मुसलमान नागरिकों के अल-अक़्सा तक पहुंचने पर कड़ी पाबंदी लगाने की अपील की. उनका कहना है कि यह हमास को जीत का जश्न मनाने से रोकने के लिए था, ऐसे समय में जब इसराइली बंधक ग़ज़ा में बंदी बने हुए हैं.

हालांकि इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने इस योजना को ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने कहा है कि श्रद्धालुओं को रमज़ान के पहले हफ्ते में मस्जिद में जाने की इजाज़त दी जाएगी, जैसा कि उन्हें पहले मिलता रहा है. उन्होंने कहा है कि हर हफ्ते सुरक्षा हालाता मूल्यांकन किया जाएगा.

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितने लोगों को वहां जाने की इजाज़त दी जाएगी.

ग़ज़ा युद्ध के दौरान इसराइल ने वेस्ट बैंक से फ़लस्तीनियों के यरूशलम प्रवेश पर रोक लगा दी थी. आमतौर पर रमज़ान के दौरान जुमे की नमाज़ में शामिल होने के लिए हज़ारों लोग इसराइली सैन्य चौकियों से होकर जाएंगे.

पूजा-पाठ की स्वतंत्रता की रक्षा करेगा इसराइल?

डॉक्टर इमाम मुस्तफा अबू स्वे
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इसराइली सरकार के प्रवक्ता एलोन लेवी ने ज़ोर देकर कहा है कि पूजा-पाठ की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए इस तरह के फ़ैसले लिए जाएंगे.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "रमज़ान अक्सर ऐसा मौका होता है जब चरमपंथी तत्व हिंसा को भड़काने की कोशिश करते हैं. हम इसे रोकने के लिए काम कर रहे हैं."

उन्होंने कहा, "हम पिछले सालों की तरह पूजा के लिए टेम्पल माउंट तक जाने की सुविधा जारी रखेंगे, यह साफ कर दें कि यह हमारी नीति है और शांति भंग करने वालों के ख़िलाफ़ निश्चित तौर पर कार्रवाई करेंगे."

सोने की परत चढ़े डोम ऑफ द रॉक के बगल में मेरी मुलाक़ात इस्लामिक वक्फ काउंसिल के सदस्य डॉक्टर इमाम मुस्तफा अबू स्वे से हुई. वो अल-अक़्सा मस्जिद या हरम अल-शरीफ का प्रबंधन करते हैं.

उन्होंने कहा, "कुछ साल पहले, इसराइल ने वेस्ट बैंक से आने वाले हर व्यक्ति को आने की इजाज़त दी थी. इस दौरान एक भी घटना नहीं हुई थी."

वो कहते हैं, "लोग प्रार्थना करने आते हैं. वे शांति भंग करने नहीं आते हैं. अगर इसराइली पुलिस और सुरक्षा बल उन्हें अकेला छोड़ दें, तो उम्मीद है कि सब कुछ ठीक होगा."

इस साल दुनिया अपेक्षा से अधिक इस बात का पता लगाएगी कि यरूशलम में हो क्या रहा है.

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