इसराइल ग़ज़ा से हमास को क्या पूरी तरह से मिटा पाएगा?

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- Author, डालिया हैदर और नताली मेरजोगुई
- पदनाम, बीबीसी अरबी
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ग़ज़ा में इसराइल का उद्देश्य हमास की शासन और सैन्य क्षमताओं को ख़त्म करना है.
नेतन्याहू बार-बार हमास को ख़त्म करने के अपने लक्ष्य को दोहराते रहे हैं.
ग़ज़ा में हमास की ओर से चलाए जा रहे स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक पाँच महीने की लड़ाई में क़रीब 30,000 फ़लस्तीनी मारे गए हैं.
इसराइल ने कहा है कि ग़ज़ा में उसने महत्वपूर्ण बढ़त हासिल की है, वो पूरी तरह से जीत हासिल करने के लिए आगे बढ़ेगा.
लेकिन हमास सैन्य क्षमताओं से कहीं अधिक क्षमता वाला संगठन है. हमास एक राजनीतिक, वैचारिक और सामाजिक आंदोलन भी है. ऐसे में इसराइल का हमास को पूरी तरह ख़त्म करने का लक्ष्य क्या संभव है?
ज़मीन पर क्या हो रहा है?

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इसराइल का दावा है कि उसने ग़ज़ा में हमास की 24 बटालियनों में से 18 को ख़त्म कर दिया है.
उसका दावा है कि उसने उत्तर ग़ज़ा पट्टी में हमास के सैन्य ढांचे को तबाह करने का काम पूरा कर लिया है.
इसराइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) का कहना है कि हमास ने 7 अक्टूबर को जब इसराइल पर हमला किया था, तब उसके पास करीब 30,000 लड़ाके थे. इस हमले में करीब 1,200 इसराइली मारे गए थो और हमास ने क़रीब 250 को लोगों को बंधक बना लिया था.
आईडीएफ का दावा है कि उसने 13,000 लड़ाकों को मार डाला है. वहीं नेतन्याहू ने फ़रवरी की शुरुआत में कहा था कि इसराइली बलों ने 20,000 से अधिक चरमपंथियों को या तो मार डाला है या घायल कर दिया है या पकड़ लिया है.
यह संख्या हमास के लड़ाकों के आधे से अधिक है. बीबीसी इन आँकड़ों की पुष्टि नहीं कर सकता है. आईडीएफ से जब इसका विवरण देने का अनुरोध किया गया, तो उसने अभी कोई जवाब नहीं दिया है.
स्पष्ट है कि इसराइल और ग़ज़ा के आँकड़ों में विरोधाभास है. ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक़ मरने वालों में क़रीब 9,000 वयस्क पुरुष हैं.

बीबीसी से बातचीत में हमास के राजनीतिक कार्यालय ने कहा कि वे इसराइल के दावों को ख़ारिज करते हैं. उनका कहना था कि उनकी सैन्य शाखा ग़ज़ा के सभी क्षेत्रों और ताक़त के साथ काम कर रही है.
इस बीच, इसराइली अखबार 'हारेत्ज़' की एक ख़बर के मुताबिक़ हमास ने अपनी कुछ बटालियनों को बहाल करना शुरू कर दिया है.
जेन्स डिफेंस वीकली के मध्य पूर्व संपादक जेरेमी बिन्नी कहते हैं, "हमास बहुत आसानी से नए लड़ाकों की भर्ती कर सकता है.''
इसराइली सेना के रिटायर्ड कर्नल कर्नल मिरी आइसिन इसराइल की रीचमैन यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर काउंटर टेररिज्म में पढ़ाती हैं. वो कहती हैं कि इसराइली सुरक्षा बलों ने हमास के कई कमांडरों को मार डाला है, उसके हथियारों के जखीरे का पता लगाया है और उसके सुरंगों के नेटवर्क तबाह कर रहे हैं.

वहीं बिन्नी कहते हैं कि हमास की सुरंग प्रणाली पहले के अनुमान से बहुत बड़ी है. उनका मानना है कि इसे नष्ट करने में इसराइलियों को अभी लंबा रास्ता तय करना है, क्योंकि वहां बंधकों के रखे होने का खतरा है.
उनका यह भी कहना है कि उत्तर ग़ज़ा में इसराइल का अभियान पूरी तरह ख़ात्मे की जगह उत्पीड़न की एक खुली प्रक्रिया लग रहा है.
इसराइल पर अंतरराष्ट्रीय क़ानून तोड़ने के आरोप लग रहे हैं. वहीं इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने भी नरसंहार के आरोपों पर विचार किया है, जिसे इसराइल ने गंभीर रूप से विकृत बताया है.
इसके बाद भी नेतन्याहू का कहना है कि इसराइल को अपना अभियान जारी रखना चाहिए और हमास की बाक़ी बची बटालियनों से निपटना चाहिए.
क्या आप विचारधारा को मिटा सकते हैं?

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पश्चिम के अधिकांश देश हमास को एक चरमपंथी समूह के रूप में देखते हैं. कई लोगों का कहना है कि हमास के नेता अब भी इसराइल के विनाश की अपील करते हैं.
लेकिन अरब जगत के कुछ हिस्सों में इसे एक प्रतिरोध आंदोलन के रूप में देखा जाता है.
साल 2006 में चुनाव जीतने और अपने विरोधी फतह को हिंसक तरीक़े से बाहर करने के बाद से हमास 2007 से ग़ज़ा पट्टी पर शासन कर रहा है.
इसके बाद से ही इसराइल और कुछ हद तक मिस्र ने भी ग़ज़ा पट्टी को अवरुद्ध कर दिया है. इन दोनों देशों का कहना है कि वे ये सुरक्षा के लिए कर रहे हैं.
फलस्तीनी गुटों ने पिछले दो दशक में ग़ज़ा से इसराइल पर हज़ारों रॉकेट दागे हैं, उन्होंने ऐसा कभी-कभी वेस्ट बैंक या पूर्वी यरूशलम में इसराइली सुरक्षा बलों से जुड़ी हिंसा और विवाद के जवाब में किया है.
यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के एक वरिष्ठ फेलो और मध्य-पूर्व मामलों के विशेषज्ञ ह्यू लोवेट कहते हैं, "यह केवल एक सैन्य आंदोलन नहीं है, न ही यह सिर्फ़ एक राजनीतिक आंदोलन है, यह एक विचारधारा है."
वो कहते हैं, ''उस विचारधारा को ख़त्म नहीं किया जा सकता, निश्चित तौर पर इसराइली हथियारों के ज़रिए नहीं.''
डॉक्टर अमजद अबू एल एज वेस्ट बैंक स्थित अरब अमेरिकी विश्वविद्यालय में इंटरनेशनल रिलेशन पढ़ाते हैं. वो कहते हैं कि कई फ़लस्तीनी हमास का समर्थन करते हैं, क्योंकि उन्हें अपना कोई भविष्य नज़र नहीं आता है."
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने करियर का अधिकांश हिस्सा फलस्तीनी देश के निर्माण के विरोध में बिताया है. वह इस स्थिति के लिए सुरक्षा चिंताओं और इसराइल को मान्यता देने में हमास की विफलता का हवाला देते हैं, लेकिन उनकी पार्टी लिकुड और उनकी सरकार में धुर दक्षिणपंथी सहयोगियों में से कई लोग मानते हैं कि वेस्ट बैंक और ग़ज़ा पट्टी इसराइल का है.
इसराइली कार्यकर्ताओं के समूह पीस नाउ के मुताबिक़ पिछले साल इसराइली सरकार ने वेस्ट बैंक में इसराइली बस्तियां बसाने के लिए रिकॉर्ड संख्या में घरों को मंजूरी दी.

साल 2023 में इसराइली सेना और इसराइल के निवासियों ने वेस्ट बैंक में कम से कम 507 फ़लस्तीनियों की हत्या कर दी थी. मरने वालों में क़रीब 81 बच्चे भी थे.
मानवीय मामलों के समन्वय के लिए बने संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (ओसीएचए) ने मौतों का रिकॉर्ड रखने का काम 2005 में शुरू किया था, उसके बाद से 2023 फ़लस्तीनियों के लिए सबसे घातक साल बन गया.
संयुक्त राष्ट्र ने वेस्ट बैंक से फ़लस्तीनियों के हमलों में 36 इसराइलियों की मौतों को भी दर्ज किया है.
फलस्तीनी प्राधिकरण (पीए) के प्रति भी गहरी निराशा है. पीए पर फतह का प्रभुत्व है. वह वेस्ट बैंक के कुछ हिस्सों पर शासन करता है. कई फलस्तीनी पीए को इसराइली कब्जे के सामने भ्रष्ट और कमज़ोर मानते हैं.
डॉक्टर अबू एल एज कहते हैं कि सात अक्टूबर से पहले, फ़लस्तीनी नाकेबंदी के तहत ग़ज़ा में रहते थे, उन्हें लगता था कि वे एक बड़ी जेल में रह रहे हैं. वो कहते हैं कि वेस्ट बैंक में रहने वाले लोग यहूदी लोगों के हमलों, ज़मीनों पर कब्जे और नौकरियों की कमी से नाराज़ थे.
वो बताते हैं कि फ़लस्तीनी समाज में युवाओं का अनुपात अधिक है. शांति प्रक्रिया के अभाव में दूसरी पार्टियों के पास ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे वे फलस्तीनी युवाओं को बढ़ावा दे सकें.
वो कहते हैं, "जब तक वहां कब्जा रहेगा, जब तक वहां अत्याचार होगा, जब तक हत्याएं होती रहेंगी, तब तक बहुत से लोग निश्चित रूप से उसका पालन करेंगे जो हमास कह रहा है, क्योंकि वे उम्मीद की तलाश में हैं.
हमास का समर्थन घट रहा है या बढ़ रहा है?

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सात अक्टूबर की घटना के बाद ग़ज़ा में फ़लस्तीनियों को भारी क़ीमत चुकानी पड़ रही है.
साल 2023 के अंत में कराए गए एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि फलस्तीनियों के बीच हमास के लिए समर्थन बढ़ा है.
वेस्ट बैंक में 750 फलस्तीनियों और ग़ज़ा में 481 फलस्तीनियों के बीच कराए गए सर्वेक्षण के मुताबिक़ वेस्ट बैंक में हमास के लिए समर्थन सितंबर में 12 फ़ीसद से बढ़कर दिसंबर में 42 फ़ीसद हो गया.
वेस्ट बैंक स्थित फ़लस्तीन सेंटर फॉर पॉलिसी एंड सर्वे रिसर्च के डॉक्टर खलील शिकाकी कहते हैं कि लड़ाई के दौरान आमतौर पर हमास के लिए समर्थन बढ़ जाता है, लेकिन यह वृद्धि 'नाटकीय' थी.
उन्होंने यह बात देखी कि नवंबर में जब सर्वेक्षण किया गया था, तब हमास और इसराइल के बीच संघर्ष विराम के दौरान फ़लस्तीनी महिलाओं और बच्चों को इसराइली जेलों से छोड़ा जा रहा था.
उनका कहना है कि इसे कुछ लोगों ने फलस्तीनी लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में हमास के हिंसा के प्रयोग को अत्यधिक प्रभावी रूप में देखा.
डॉक्टर शिकाकी कहते हैं, इसराइली नागरिकों के हमलों और युद्ध को लेकर पीए की प्रतिक्रिया से पैदा हुई निराशा के कारण भी हमास को समर्थन मिला.
हालांकि, ग़ज़ा में तस्वीर अलग थी, जहाँ हमास के लिए समर्थन में मामूली वृद्धि देखी गई, 38 फीसदी से 42 फीसदी तक, यह सर्वेक्षण में त्रुटि की सीमा के भीतर थी.
ग़ज़ा में कम लोगों को ऐसा लगा कि हमास का सात अक्टूबर का हमला सही था, 57 समर्थन ने हमले का समर्थन किया जबकि वेस्ट बैंक में यह 82 फ़ीसदी था.
डॉक्टर शिकाकी कहते हैं, "यह स्पष्ट रूप से बताता है कि जो लोग हमास के फ़ैसलों का परिणाम के युद्ध को झेल रहे थे, वे हमास के बड़े आलोचक थे."
फ़रवरी की शुरुआत तक ग़ज़ा से रिपोर्टिंग कर रहे बीबीसी के पत्रकारों ने हाल के महीनों में हमास के प्रति बढ़ते असंतोष और निराशा के संकेत नजर आए हैं.
उन्होंने कुछ ग़ज़ावासियों से बात की. उन लोगों ने हमास के ख़िलाफ़ ग़ुस्से का कारण प्रियजनों की मौत, इसराइली सुरक्षा बलों की ओर घरों को नष्ट करना और भूख को बताया.
उन्होंने यह भी बताया कि ग़ज़ावासी अक्सर हमास की सार्वजनिक आलोचना करने को लेकर चिंतित रहते हैं.
लड़ाकों की नई पीढ़ी

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डॉक्टर अबू एल एज का मानना है कि ग़ज़ा में बहुत से युवा अब इसराइल और उसके कब्जे के ख़िलाफ़ नफ़रत से भरे हुए हैं.
वो कहते हैं, "मुझे लगता है कि आने वाली पीढ़ियां बदला लेने के लिए इन सैन्य समूहों में शामिल होंगी, क्योंकि उन्होंने अपने परिवारों को खो दिया है, उन्होंने बच्चों, अपनी मांओं और अपने बेटों...अपने भाई-बहनों को खो दिया है."
लेकिन कर्नल आइसिन कहती हैं कि हमास के लिए और अधिक समर्थन पैदा करने की चिंताओं से सैन्य लक्ष्यों में कमी नहीं आनी चाहिए.
वो सात अक्टूबर को हुए सबसे बड़े, भयानक और नृशंस हमलों को ध्यान में रखते हुए कहती हैं, "वे पहले से ही इतने कट्टरपंथी हैं.''
वो कहती हैं, यह उस विचारधारा को उससे बदतर नहीं बनाएगा, वो पहले से ही बदतर है.
हालांकि, डॉक्टर शिकाकी कहते हैं, "यह ज़रूरी नहीं है कि एक बड़े युद्ध के कारण युवा हथियार उठाएं, अगर इसके बाद शांति आ जाए."
कल के बाद क्या होगा?

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नेतन्याहू ने युद्ध के बाद की एक योजना की रूपरेखा तैयार की है. इसके मुताबिक़ इसराइल अनिश्चित काल के लिए हमास से ख़ाली कराए गए ग़ज़ा में सुरक्षा नियंत्रित करेगा.
योजना के मुताबिक़ ऐसे फ़लस्तीनी जिनका इसराइल से दुश्मनी रखने वाले समूहों से कोई संबंध नहीं है, वे इस क्षेत्र को चलाएंगे.
कर्नल आइसीन का कहना है कि हमास हमेशा कुछ न कुछ दिखाता रहता है, लेकिन उनका मानना है कि इसराइल उनमें से अधिकांश और उनके ख़तरे को ख़त्म करने में सक्षम होगा.
लोवेट कहते हैं, "अगर कोई सच में हमास को हाशिए पर धकेलना और कमज़ोर करना चाहता है, तो उसके लिए ऐसा करने का एकमात्र ज़रिया एक व्यावहारिक राजनीतिक ट्रैक बनाना ही है."
लेकिन दो देशों वाले समाधान की दिशा में संभावनाएं अब भी धूमिल बनी हुई हैं.
नेतन्याहू ने हाल ही में एक्स पर कहा था कि वे जॉर्डन के पश्चिम के पूरे इलाक़े पर पूरी तरह से इसराइली सुरक्षा नियंत्रण पर समझौता नहीं करेंगे, यह फ़लस्तीनी राज्य के उलट है.
यह इसराइल के मुख्य सहयोगी अमेरिका का विरोधाभास है, जो कहता है कि इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्ष का स्थायी समाधान केवल एक क्षेत्रीय दृष्टिकोण से आ सकता है, जिसमें फलस्तीनी राज्य का रास्ता भी शामिल है.
जो बाइडन प्रशासन ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि इसराइल को ग़ज़ा पर अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं रखना चाहिए. यथास्थिति बनाए रखने के विकल्प के बिना, वहां भविष्य में हिंसा बढ़ने का जोखिम है.
बिन्नी कहते हैं, ''मैं इसराइलियों के लिए कोई विजय दिवस नहीं देख सकता.''
वो कहते हैं, "वे बड़े पैमाने पर हमास को नीचा दिखा सकते हैं, लेकिन बड़ी बात यह है कि इसके बाद आप हमास को दोबारा उभरने से कैसे रोकेंगे?"
(इस खबर के लिए हीदर शार्प ने भी रिपोर्टिंग की.)
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