ग़ज़ा में राहत सामग्री का इंतज़ार कर रहे 100 से अधिक लोगों की कैसे हुई मौत?

अस्पताल पहुंचे घायल

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इमेज कैप्शन, घटना में घायल हुए कुछ लोग जो अल-शिफ़ा अस्पताल पहुंचे
    • Author, पॉल ब्राउन
    • पदनाम, बीबीसी वेरिफ़ाई

ग़ज़ा में हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि गुरुवार सवेरे राहत सामग्री से भरे ट्रकों के आसपास मदद का इंतज़ार कर रहे लोगों की बड़ी भीड़ उमड़ने से कम से कम 112 फ़लस्तीनियों की मौत हो गई.

मंत्रालय का कहना है कि इस हादसे में क़रीब 760 लोग घायल हैं.

ग़ज़ा शहर में हुई इस घटना में गुरुवार सवेरे जिस वक्त राहत सामग्री से लदे ट्रक आ रहे थे, सैकड़ों की संख्या में लोग ट्रकों के आसपास इकट्ठा हो गए थे. उस वक्त वहां पर इसराइली सेना भी मौजूद थी.

ये घटना कैसे हुई, इतनी बड़ी संख्या में राहत सामग्री लेने आए लोगों की मौत के लिए कौन ज़िम्मेदार है, इसे लेकर अलग-अलग तरह के दावे किए जा रहे हैं.

बीबीसी वेरिफ़ाई ने इस घटना से जुड़े अहम तथ्यों की पड़ताल की और ये जानने की कोशिश की कि ये घटना कहां, कैसे और कब हुई.

इसके लिए बीबीसी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो, सैटेलाइट से मिली तस्वीरें और इसराइली सेना के जारी किए गए ड्रोन फुटेज की जांच की है, और ये जानने की कोशिश की है कि जो हुआ उसके बारे में अब तक हमें क्या पता है, और क्या नहीं.

सैकड़ों कर रहे थे राहत सामग्री का इंतज़ार

इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए एक वीडियो का स्क्रीनशॉट

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28 फरवरी को स्थानीय समयानुसार रात के साढ़े ग्यारह बजे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए एक वीडियो के अनुसार ग़ज़ा में सैकड़ों लोग राहत सामग्री का इंतज़ार कर रहे थे. ये लोग जगह-जगह आग जलाकर उसके आसपास घेरा बना कर बैठे थे और मानवीय मदद लेकर आने वाली गाड़ियों का इंतज़ार कर रहे थे.

संयुक्त राष्ट्र ने पहले ही चेतावनी दी है कि उत्तरी ग़ज़ा में लोगों पर भुखमरी का संकट मंडरा रहा है. एक अनुमान के अनुसार ग़ज़ा के इस हिस्से में तीन लाख के आसपास लोग हैं जिनके पास खाने और पीने के पानी की कमी है. बीते दिनों में इस इलाक़े में कम राहत सामग्री पहुंच पाई है.

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि ग़ज़ा शहर के दक्षिण-पश्चिम की तरफ़ अल-राशिद मार्ग पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे. ये सड़क भूमध्यसागर के तट से सटती हुई ग़ज़ा के उत्तर में ग़ज़ा शहर से होकर दक्षिण में मिस्र की तरफ चलती है.

हाल के दिनों में ग़ज़ा में पहुंच रही राहत सामग्री के वितरण के लिए इसी इलाक़े को इस्तेमाल किया जा रहा है.

बीबीसी ने कुछ दिनों पहले भी एक वीडियो की जांच की थी जिसमें देखा गया था कि इस इलाक़े में लोग राहत सामग्री की बोरियां लेने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं.

इस जगह पर मौजूद एक पत्रकार महमूद अवादेया ने बीबीसी को बताया था, "यहां पर बड़ी संख्या में ऐसे लोग इकट्ठा हुए थे जो खाने का कुछ सामान या फिर आटे की एक बोरी लेने की उम्मीद से आए थे."

राहत सामग्री से भरी गाड़ियां पहुंची

गुरुवार 29 फरवरी को स्थानीय समयानुसार सवेरे चार बजे मिस्र की तरफ से राहत सामग्री से लदी गाड़ियों ने इसराइली सेना के बनाए नाके को पार किया. जांच के बाद गाड़ियों का ये काफिला अल-राशिद मार्ग पर आगे उत्तर की तरफ बढ़ने लगा.

इसराइली सेना का कहना है कि ये राहत सामग्री से लदे 30 ट्रकों का काफिला था. वहीं एक प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी को बताया कि काफिले में 18 गाड़ियां- या फिर उससे थोड़ी कम गाड़ियां थीं. ये काफिला सड़क पर कुछ सौ मीटर तक की जगह घेरे हुए चल रहा था.

इसराइली सेना के प्रवक्ता रियर एडमिरल डेनियल हगारी ने कहा कि सवेरे क़रीब चार बजकर 45 मिनट पर जब राहत सामग्री से भरे ट्रकों का काफिला नाबुल्सी चौराहे की तरफ बढ़ा तो लोगों की भीड़ ने गाड़ियों को घेर लिया था.

ट्रकों को भीड़ ने घेरा

इसराइली सेना के जारी किए ड्रोन फउटेज का स्क्रीनशॉट

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इसराइली सेना ने एक इन्फ्रा रेड ड्रोन फुटेज जारी किया है. ये फुटेज एक पूरा सीक्वेंस नहीं है बल्कि इसमें चार हिस्सों को एडिट कर जोड़ा गया है.

इसमें दो जगहों में हुई घटनाओं को दिखाया गया है. इन दोनों जगहों को बीबीसी वेरिफ़ाई ने जियो लोकेट किया है.

वीडियो के पहले दो हिस्सों में देखा जा सकता है कि नाबुल्सी चौराहे के दक्षिण की तरफ दो या उससे अधिक गाड़ियों को लोगों ने घेर लिया है.

काफिले के आसपास क्या हुआ

इसराइल का जारी किया फुटेज

वीडियो के दूसरे दो हिस्सों में इससे पांच सौ मीटर दूर दक्षिण की तरफ की तस्वीर दिखाई गई है.

इसमें चार गाड़ियां हैं जो एक जगह पर खड़ी हैं. यहां भी लोगों की भीड़ गाड़ियों के आसपास दिखती है. कुछ लोग गाड़ियों के आसपास चलते-फिरते दिखते हैं लेकिन इसमें कई लोग निष्क्रिय भी देखे जा सकते हैं, वो ज़मीन पर पड़े दिखते हैं.

ऊपर दी गई तस्वीर इसराइली सेना के जारी किए वीडियो फुटेज में से ली गई है. इसमें लाल घेरे में जो दिख रहा है वो ज़मीन पर पड़े लोग हैं.

तस्वीर में लोगों के पास इसराइली सेना की गीड़ियों को भी देखा जा सकता है.

बीबीसी वेरिफ़ाई ने इसराइली सेना से गुज़ारिश की है कि वो इस घटना की पूरी ड्रोन फुटेज मुहैया कराए.

गोली चलाने को लेकर किए जा रहे दावे

अल जज़ीरा टेलिविज़न के एक्सक्लूसिव वीडियो फुटेज का स्क्रीनशॉट

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इमेज कैप्शन, अल जज़ीरा टेलीविज़न के एक्सक्लूसिव वीडियो फुटेज का स्क्रीनशॉट

बीबीसी ने अल जज़ीरा टेलीविज़न के एक एक्सक्लूसिव वीडियो फुटेज की पड़ताल की है जिसे दूसरी जगह के पास फिल्माया गया है. ये दूसरी जगह राहत सामग्री से लदे ट्रकों के पीछे की जगह है जो नाबुल्सी चौराहे से क़रीब 500 मीटर की दूरी पर दक्षिण की तरफ है.

इस वीडियो में गोलियां चलने की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं और देखा जा सकता है कि लोग गाड़ियों के ऊपर चढ़ रहे हैं या उसके पीछे छिप रहे हैं. आसमान में लाल रंग के ट्रेसर भी देखे जा सकते हैं.

पत्रकार महमूद अवादेया ने बीबीसी को बताया कि राहत सामग्री पहुंचने के बाद इसराइली गाड़ियों ने लोगों की तरफ गोलियां चलानी शुरू कर दीं.

उन्होंने बताया, "इसराइलियों ने जानबूझकर लोगों पर गोलियां चलाईं.... लोग उन गाड़ियों तक पहुंचना चाहते थे जिन पर आटा लदा हुआ था. वो सीधे लोगों पर गोलियां चला रहे थे और जो लोग मारे जा रहे हैं उन्हें उनके पास आने से रोक रहे थे."

फिर क्या हुआ?

घटना में मारे गए लोगों के परिजन

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बीबीसी ने इसके अलावा जहां गोलियां चलीं उस इलाक़े से जुड़े कुछ और वीडियो फुटेज की भी जांच की है जिनमें देखा जा सकता है कि लाशों को गाड़ियों में लादकर नाबुल्सी चौराहे से उत्तर की तरफ ले जाया जा रहा है.

इसके अलावा बड़ी संख्या में घायलों को अस्पतालों में पहुंचाए जाने की भी ख़बरें हैं.

हताहतों को नज़दीक के अल-अव्दा अस्पताल लाया गया. यहां कि अंतरिम अस्पताल मैनेजर डॉक्टर मोहम्मद सलहा ने बीबीसी को बताया, "अल-अव्दा अस्पताल में क़रीब 176 घायल लाए गए थे... इनमें से 142 मामलों में मरीज़ के शरीर पर गोली के घाव थे. इसके अलावा कुछ मामलों में भगदड़ और धक्का-मुक्की के कारण कुछ लोगों के हाथ और पैर टूट गए थे."

इसराइल का जवाब

इसराइली सेना के प्रवक्ता डेनियल हगारी

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समाप्त

गुरुवार को स्थानीय समयानुसार क़रीब 13 बजकर 6 मिनट (एक बजकर 6 मिनट) पर इसराइली सेना ने अपने आधिकारिक टेलिग्राम चैनल पर एक बयान पोस्ट किया.

सेना ने लिखा, "आज सवेरे उत्तरी ग़ज़ा पट्टी की तरफ जब राहत सामग्री से भरे ट्रक आ रहे थे, उस वक्त ग़ज़ा के लोगों ने ट्रकों को घेर लिया. उन्होंने वितरण के लिए आए सामान को लूटा. इस दौरान हुई धक्कामुक्की और भगदड़ के कारण ग़ज़ा के दर्जनों लोग घायल हुए."

इसके बाद 15.35 बजे (दोपहर तीन बज कर 35 मिनट पर) सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक और बयान पोस्ट किया. इसमें सेना ने घटना के बारे में पहले दी गई जानकारी को दोहराया.

इसके बाद इसी मामले को लेकर इसराइली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेन्ट कर्नल पीटर लर्नर ने यूके के चैनल 4 न्यूज़ से बात की. उन्होंने कहा, "इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ गाड़ियों के पास आ गई कि काफिला आगे नहीं बढ़ पाया."

"काफिले को सुरक्षित लाने के लिए इसराइली सेना के जिन टैंकों को वहां तैनात किया गया था उन्होंने देखा कि लोगों में भगदड़ मच गई है और उन्होंने सावधानी के साथ भीड़ को तितर-बितर करने के लिए चेतावनी देने के लिए कुछ गोलियां चलाईं."

इसके बाद इसराइली सेना के प्रवक्ता डेनियल हगारी का एक वीडियो बयान रात 22.35 बजे (10 बज कर 35 मिनट पर) सेना के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया गया. इसमें उन्होंने दावा किया, "सौ का आंकड़ा जल्द हज़ारों में बदल गया और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई."

उन्होंने कहा कि टैंक कमांडर ने फ़ैसला किया कि आम लोगों को अधिक नुक़सान न पहुंचे इसके लिए वो पीछे हटेंगे. उन्होंने कहा, "सेना सावधानी से पीछे हटने लगी, उन्होंने भीड़ पर गोलियां नहीं चलाईं."

इससे पहले शाम के 6 से 7 बजे के बीच इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के विशेष सलाहकार मार्क रेगेव ने सीएनएन को एक इंटरव्यू दिया था.

उन्होंने कहा कि न तो इसराइल सीधे तौर पर किसी तरह से शामिल है और न ही वो ज़मीन पर मौजूद है.

उन्होंने दावा किया कि इसराइली सेना ने दूसरे मामलों में गोलियां चलाई हैं लेकिन वो राहत सामग्री से जुड़े मामले नहीं थे. हालांकि उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिए.

मार्क रेगेव ने कहा, "भीड़ के ट्रक को घेरने वाले मामले में गोलियां चलाई गई थीं, लेकिन वो फ़लस्तीनी सशस्त्र गुटों ने चलाई थीं. हमें नहीं पता कि वो हमास था या फिर कोई और समूह था."

हमास की प्रतिक्रिया

हमास ने इसराइली सेना के इस बयान को ये कहते हुए खारिज कर दिया है कि इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि आम लोगों पर सीधे गोलियां चलाई गई हैं.

हमास ने चेतावनी दी है कि इसके बाद युद्धविराम और इसराइली बंधकों को छुड़ाने को लेकर क़तर में चल रही चर्चा ख़तरे में पड़ सकती है.

दुनियाभर के नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और घटना कैसे हुई, क्या हुआ ये जानने के लिए जांच की मांग की है.

इससे पहले मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी थी कि ग़ज़ा पट्टी पर 5 लाख से अधिक लोगों के सामने खाने के सामान की गंभीर तंगी की समस्या खड़ी हो गई है. इसके बाद ग़ज़ा में मानवीय स्थिति को लेकर चिंता जताई जाने लगी थी.

(एलेक्स मुर्रे, कुमार मल्होत्रा, मर्लिन थॉमस और बीबीसी अरबी सेवा के संवाददाताओं की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ)

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