अमेरिका के एनएसए का चीन दौरा क्या संकेत देता है, राष्ट्रपति चुनाव से पहले क्यों है अहम

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- Author, लौरा बिकर और टॉम बेटमैन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, बीजिंग और वॉशिंगटन
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन चीन के दौरे पर हैं. यह उनका पहला चीन दौरा है.
सुलिवन यहां चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाक़ात कर दोनों देशों के संबंधों को स्थिर करने की कोशिश करेंगे.
सुलिवन और वांग यी एक दूसरे से पिछले 16 महीने में चार बार मिल चुके हैं. दोनों की मुलाक़ात वियना, माल्टा, वॉशिंगटन डीसी और बैंकॉक में हो चुकी है.
जनवरी में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और जो बाइडन के बीच मुलाकात हुई थी. इसके बाद सुलिवन और वांग यी भी मिले थे.
बाइडन और जिनपिंग ने संबंधों को फिर से शुरू करने की बात कही थी.
अमेरिका जैक सुलिवन के चीन दौरे को राष्ट्रपति चुनाव के साथ नहीं जोड़ना चाहता लेकिन ये ऐसे समय पर हो रहा है कि इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.
सुलिवन की चीन यात्रा से अगर बाइडन और शी जिनपिंग के बीच फिर से बातचीत की संभावनाएं बढ़ीं तो ये अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों और संबंधों के लिए अहम हो सकती है.

चीन के लिए क्या मायने?
अमेरिका और चीन के राजनयिक हमेशा से मानते हैं कि बात करने के लिए कई मुद्दे हैं, मगर दोनों देशों के बीच बातचीत कभी आसान नहीं रहती.
अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव से बाइडन के पीछे हटने और उनका कमला हैरिस को आगे करना काफ़ी दिलचस्प है. ऐसे में चीन अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव पर नज़र बनाए हुए है.
वहीं, रिपब्लिकन पार्टी की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप पहले ही साफ़ कर चुके हैं कि वो चीनी सामान पर टैरिफ और बढ़ाएंगे. इससे 2019 में अमेरिका और चीन के बीच शुरू हुई ट्रेड वॉर बढ़ सकती है.
बाइडन प्रशासन ने भी डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति रहने के दौरान लगाए गए टैरिफ को नहीं हटाया. बाइडन ने तो मई में चीनी इलेक्ट्रिक कार, सोलर पैनल और स्टील पर टैरिफ बढ़ा दिया था.
साथ ही जो बाइडन ने चीन का प्रभाव कम करने के लिए एशिया के देशों के साथ पहले से ज्यादा संबंध मजबूत किए हैं और सैन्य उपस्थिति भी बढ़ाई है.
अभी तक कुछ भी साफ नहीं है क्योंकि कमला हैरिस के चुनावी अभियान के दौरान चीन के साथ संबंधों को लेकर कुछ भी स्पष्ट तौर पर बोला नहीं गया है.
हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से साफ कहा गया है कि सुलिवन का चीन दौरा अगले राष्ट्रपति के लिए माहौल तय करने की बजाय बाइडन प्रशासन के काम को जारी रखने को लेकर है.

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चीन क्या चाहेगा
चीन सुलिवन के दौरे का इस्तेमाल अपनी प्राथमिकता को स्पष्ट करने के लिए करेगा.
चीन के विदेश मंत्रालय ने सुलिवन की यात्रा को दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया है.
दूसरी ओर चीन के लिए हमेशा से ताइवान काफी अहम रहा है.
बीजिंग ताइवान पर दावा करते हुए कहता रहा है- हम ऐसे किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेंगे जिसमें अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता की बात करता हो.
अमेरिकी कांग्रेस की तत्कालीन स्पीकर नैंसी पेलोसी 2022 में ताइवान दौरे पर गई थीं. इसे लेकर काफी विवाद हुआ था.
चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक़- चीन अमेरिका के सामने अपनी चिंताओं को रखेगा और वो ताइवान के मामले को लेकर भी अपनी बात रख सकता है.
इसके अलावा चीन सुलिवन से अपने सामान पर लगाए गए टैरिफ को लेकर भी बात कर सकता है. इससे पहले बीजिंग कह चुका है कि ये टैरिफ बिना कारण लगाए गए हैं.
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जो बाइडन क्या चाहते हैं?
जो बाइडन चीन के साथ संबंधों को एक समान स्तर पर लाना चाहते थे, लेकिन ऐसी कई घटनाएं हुईं कि ऐसा हो नहीं सका.
अमेरिका और चीन के बीच पिछले साल तब विवाद बढ़ गया था, जब अमेरिका ने कथित चीनी स्पाई बैलून को साउथ कैरिलिना समुद्र तट के पास गिरा दिया था.
अप्रैल में बीजिंग दौरे के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने चीन को चेतावनी दी थी. इसके बाद यूक्रेन रूस युद्ध ने भी इस तनाव को बढ़ाया.
ब्लिंकन ने कहा था, "अमेरिका चीन के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर सकता है. अगर वो (चीन) यूक्रेन के ख़िलाफ़ हमले के लिए इस्तेमाल हो रहे रूस के हथियारों को बनाने के लिए मददगार माइक्रोचिप और मशीन देना बंद नहीं करता है."
ब्लिंकन ने चीन पर शीत युद्ध के बाद से यूरोपीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरे को बढ़ावा देने में मदद करने का आरोप भी लगाया था.
ब्लिंकन की चेतावनी के बाद रूसी सेना का समर्थन करने के मामले को लेकर चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया.
ऐसे में ये पेचीदा विषय है जिसे चीन टालने की कोशिश करता रहा है. अमेरिका की ओर से इसे जैक सुलिवन उठा सकते हैं.
इसके अलावा एक और मुद्दा है.
चीन में बने प्रीकर्सर केमिकल से सिंथेटिक ओपिओइड जैसे कि फेंटेनाइल की ओवरडोज के कारण अमेरिका में पहले से अधिक लोगों की जान गई है.

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लक्ष्य क्या है?
बाइडन और शी जिनपिंग के बीच पिछले साल सैन फ्रांसिस्को में बातचीत हुई थी.
इस बातचीत का लक्ष्य था कि दोनों देशों के बीच जिन मुद्दों पर टकराव हो सकता है, उन मसलों को सुलझाया जाए.
इसके बाद से चीन और अमेरिका दोनों ही अपने मतभेदों को स्वीकार करते हैं. ये ही कारण है कि फेंटेनाइल उत्पादन पर रोक लगाने की ख़बर एक अच्छा संकेत है.
अप्रैल में बीबीसी टीम जब अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के शंघाई और बीजिंग यात्रा के दौरान साथ में गई थी, तो हमें ब्लिंकन के चीनी अधिकारियों के साथ हुई बैठक के दौरान मजबूत गतिरोध महसूस हुआ.
ये चीन और अमेरिका के लोगों के लिए कूटनीतिक ताकत का प्रदर्शन करने के तौर पर देखा गया था.
जैक सुलिवन का दौरा भी इसका ही एक हिस्सा है. ऐसा इसलिए क्योंकि सुलिवन बाइडन के कार्यकाल के अंतिम महीनों में ऐसा कर रहे हैं.
ऐसा लगता है कि जैक सुलिवन की वांग यी की पिछली बैठक ने अमेरिका और चीन के लिए 'स्थिर संबंध स्थापित' करने की नींव रखी थी.
वाशिंगटन में काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में हाल ही में सुलिवन ने कहा था कि वह और वांग बातचीत के बिंदुओं को अलग रखकर रणनीतिक बात करने के लिए तैयार हैं.
सुलिवन ने कहा था, "हमें यह महसूस हुआ कि हर बात पर हम एक-दूसरे से सहमत नहीं हैं, लेकिन आगे बढ़ने के लिए बहुत काम करना रह गया है."
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