अमेरिका को क्यों सता रहा चीन में बनी क्रेन का डर, बाइडन ने किया अहम फ़ैसला

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शुक्रवार को अपने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में चीन के विदेश मंत्रालय ने देश में बनी क्रेनों को लेकर अमेरिकी सरकार के ताज़ा फ़ैसले की आलोचना की और अमेरिका के लगाए आरोपों को 'बेबुनियाद' बताया है.
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने एक सवाल के जवाब में कहा, "अमेरिका का ये दावा कि चीन में बनी क्रेनों से सुरक्षा ख़तरा हो सकता है, पूरी तरह से निराधार है."
इससे दो दिन पहले अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने कहा था कि सरकार आने वाले पांच सालों में अमेरिका में क्रेन बनाने के लिए 20 अरब डॉलर खर्च करेगी.
साथ ही सरकार ने कहा कि चीन में बने क्रेन को लेकर साइबर ख़तरे को देखते हुए अमेरिकी कोस्ट गार्ड भी नए निर्देश जारी करेगी.
क्रेन खास तरह की भारी मशीनें होती हैं जिनका इस्तेमाल इमारतों के निर्माण कार्य, बंदरगाहों में कंटेनर्स को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने और जहाज़ों पर कंटेनर रखने-उतारने जैसे कामों में किया जाता है. इन्हें टावर क्रेन भी कहा जाता है.
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में काम में तेज़ी लाने के लिए इस तरह की विशालकाय क्रेनों की जगह अहम है. हाल के वक्त में ऑटोमेटेड क्रेनों का भी निर्माण किया जा रहा है जो तेज़ी से अपने काम को अंजाम देती हैं.
स्टेटिस्टा की रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 में वैश्विक मार्केट में चीन, क्रेन का सबसे बड़ा निर्यातक था. इसके बाद दूसरे पायदान पर जर्मनी और तीसरे पर स्पेन था.
चीन ने क्या कहा?

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शुक्रवार को चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने एक सवाल के उत्तर में कहा था कि चीन में बनी क्रेनों को सुरक्षा के लिए ख़तरा बताने वाले आरोप 'निराधार' हैं.
उन्होंने कहा, "अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहा है और वो सत्ता की ताकत का इस्तेमाल चीन के उत्पाद और कंपनियों को परेशान करने के लिए कर रहा है. हम इसका कड़ा विरोध करते हैं."
"हथियार के रूप में आर्थिक और व्यापार से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल करना वैश्विक स्तर पर उद्योग और सप्लाई चेन के लिए जोखिम भरा हो सकता है और इसका विपरीत असर पड़ना लगभग तय है. अमेरिका को बाज़ार आधारित अर्थव्यवस्था और निष्पक्ष प्रतिद्वंद्विता का सम्मान करते हुए चीनी कंपनियों को निष्पक्ष, न्यायोचित और गैर-भेदभावपूर्ण माहौल में काम करने देना चाहिए."
माओ निंग ने कहा, "चीन मज़बूती से देश की कंपनियों के हित में उनके वैध क़ानूनी अधिकारों की रक्षा करना जारी रखेगा."
संवाददाता सम्मेलन में ब्लूमबर्ग के पत्रकार ने माओ निंग से पोर्ट ऑफ़ एजेल्स के कार्यकारी निदेशक जेने सेरोका के एक फ़ैसले को लेकर चीन की प्रतिक्रिया मांगी थी. जेने सेरोका ने कहा था कि चीन में बने क्रेन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा हो सकते हैं.
हालांकि विशाल क्रेन बनाने वाले मुल्कों में चीन सबसे आगे है, ऐसे में चीनी क्रेन के इस्तेमाल को रोकने का सीधा असर वैश्विक व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
क्या है मामला?
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बीते दिनों वॉल स्ट्रीट जनरल ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि बाइडन प्रशासन देश के भीतर क्रेन बनाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश करने के लिए तैयार है.
इसी सप्ताह 21 फरवरी को बाइडन प्रशासन ने अमेरिकी बंदरगाहों में साइबर सिक्योरिटी बढ़ाने के लिए एक मुहिम की घोषणा की. सरकार ने कहा कि अगले पांच सालों तक सरकार अमेरिकी बंदरगाहों के ढांचागत विकास के लिए 20 अरब डॉलर का निवेश करेगी.
व्हाइट हाउस ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका में रणनीतिक तौर पर अहम कमर्शियल बंदरगाहों में सामान की ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले चीन में बने क्रेन से जुड़ी साइबर सुरक्षा को लेकर अमेरिकी कोस्ट गार्ड समुद्री सुरक्षा को लेकर निर्देश जारी करेगी.
बयान में कहा गया, "इन क्रेनों को चलाने वालों या फिर इनके मालिकों को इन निर्देशों का पालन करना होगा और क्रेन में इस्तेमाल होने वाली तकनीक को लेकर कदम उठाने होंगे. हमारे समुद्री बुनियादी ढांचे के डिजिटल इकोसिस्टम की सुरक्षा की दिशा में ये एक महत्वपूर्ण कदम है."
क्रेन को लेकर चिंता क्यों?

चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि अमेरिका चीन में बनी क्रेन की जगह देश में बनी क्रेन का इस्तेमाल करना चाहता है क्योंकि उसका दावा है कि "इनमें आधुनिक सॉफ्टवेयर लगे हैं जिनसे कथित तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा हो सकता है."
अख़बार ने लिखा था कि इस साल जनवरी में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा था कि अमेरिका के राजनेता चीन से ख़तरे की बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं "लेकिन असल में वो अपना सही उद्देश्य दिखा रहे हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर चीन की विकास की गाड़ी को धीमा करना है."
ग्लोबल टाइम्स ने मार्च 2023 में वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और पेंटागन के कुछ अधिकारियों ने शंघाई ज़ेनहुआ हेवी इंडस्ट्रीज़ (ज़ेडपीएमसी) के बनाए क्रेन की तुलना ट्रोजन हॉर्स से की है और कहा है कि इनमें ऐसे जटिल सॉफ्टवेयर लगे हैं जो कंटेनर की आवाजाही को ट्रैक कर सकते हैं.
ज़ेडपीएमसी दुनिया की सबसे बड़ी क्रेन बनाने वाले कंपनी है जो बंदरगाहों के लिए क्रेन बनाती है. चीन की ये कंपनी स्विस कंपनी एबीबी के साथ मिलकर काम करती है. ये अमेरिका भेजे जाने वाले क्रेन में एबीबी के उपकरण लगाती है.
लेकिन ये करार शक़ के दायरे में है. अमेरिकी कांग्रेस की दो समितियां बनाई गई हैं जो इन दोनों कंपनियों के काम की सुरक्षा जांच कर रही हैं.
सीट्रेड मैरीटाइम न्यूज़ के अनुसार एबीबी का कहना है कि वो कई मुल्कों को क्रेन के लिए सॉफ्टवेयर सप्लाई करती है जो चीन समेत दुनिया के कई देशों की कंपनियां अपने क्रेनों में लगाती हैं. कंपनी का कहना था कि उसका ये काम सभी के लिए एक जैसा है.

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बीते साल जुलाई में जापान के सबसे बड़े नागोया बंदरगाह पर रैनसमवेयर साइबर हमला हुआ जिसके कारण बंदरगाह का कामकाज 48 घंटों तक ठप रहा. एक साल में क़रीब 20 लाख कंटेनर इस बंदरगाह से होकर गुज़रते हैं.
इस साइबर हमले के बाद समुद्र की सुरक्षा से जुड़े जानकारों ने इस इंटस्ट्री को लेकर चिंता जताई थी और कहा था कि साइबर हमले की सूरत में ये इंडस्ट्री पूरी तरह तैयार नहीं है.
एक कार्यक्रम में एनपीआर की साइबर सिक्योरिटी मामलों की संवाददाता जेना मैकलॉलिन कहती हैं व्हाइट हाउस के अनुसार देश में क़रीब 200 क्रेन हैं जो चीन में बने हैं. ये देश में कुल क्रेनों का 80 फ़ीसदी है.
कोस्ट गार्ड साइबर सिक्योरिटी कमांड के प्रमुख एडमिरल जे वैन के अनुसार इनकी सुरक्षा को लेकर संदेह जताया जा रहा है क्योंकि इन्हें रिमोट ऑपरेट किया जा सकता है. कोस्ट गार्ड इनकी सुरक्षा जांच कर रही है और चाहती है कि इन्हें लेकर कुछ नियम बनाए जाएं.
सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार इसी साल अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी एफ़बीआई के निदेशक क्रिस्टोफ़र रे ने अमेरिकी संसद की एक समिति से कहा था कि "चीनी हैकर्स अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर पर पकड़ बना रहे हैं ताकि तबाही मचा सकें और चीन के इशारे पर अमेरिकी नागरिकों को नुक़सान पहुंचा सकें."
क्रेन का बाज़ार
कोविड महामारी के बाद सप्लाई चेन के सामान्य होने, कंस्ट्रक्शन सेक्टर में आए उछाल और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हो रही बढ़ोतरी के कारण क्रेन की ज़रूरत बढ़ गई.
दुनिया में क्रेन के सबसे बड़े निर्यातकों में जापान, चीन और जर्मनी शामिल हैं.
वहीं 2022 के आंकड़ों के अनुसार क्रेन के आयात के मामले में अमेरिका सबसे आगे है. मज़बूत माइनिंग इंडस्ट्री, बढ़ते शहरीकरण के कारण देश में क्रेन की मांग में उछाल देखा गया है. 2022 में अमेरिका ने 1.5 अरब डॉलर मूल्य के क्रेन खरीदे.
वहीं भारत में 2022 में 70 करोड़ डॉलर और जर्मनी ने 60 करोड़ डॉलर के क्रेन खरीदे.
हालांकि 2021 के आंकड़ों को देखें तो इमसें जर्मनी, स्पेन और दक्षिण कोरिया के बाद ही अमेरिका का नंबर था.
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