स्मार्टफ़ोन बनाने वाली कंपनी वीवो के कर्मचारियों की गिरफ्तारी पर क्या बोला चीनी मीडिया

 वीवो के प्रोडक्ट

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    • Author, पद्मजा वेंकटरामन और साइस्ता फारूकी
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी वीवो के कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद चीनी मीडिया और विशेषज्ञों ने भारत में चीनी कंपनियों के उत्पीड़न की आलोचना की है.

वहीं, भारतीय मीडिया की कई रिपोर्टों में ये कहा गया है कि आर्थिक अपराधों की जांच करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले हफ्ते मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान वीवो-इंडिया के तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया था.

बीजिंग से निकलने वाली बिजनेस पत्रिका 'कैक्सिन' ने 26 दिसंबर को इसकी रिपोर्ट दी थी.

पत्रिका के मुताबिक हालिया गिरफ्तारियां ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में टेक कंपनी वीवो की संलिप्तता की जांच की दौरान एक चीनी नागरिक समेत चार अधिकारियों को हिरासत में लेने के दो महीने बाद हुई है.

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने 25 दिसंबर को एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि भारत में चीनी दूतावास और वाणिज्य दूतावास संबंधित व्यक्तियों को कांसुलर सुरक्षा और सहायता प्रदान करना जारी रखेगा. उन्होंने कहा था कि चीनी सरकार चीनी कंपनियों के वैध अधिकारों और कारोबारी हितों का पूरा समर्थन करती है.

भारत में कैसा है विदेशी कंपनियों के लिए माहौल?

चीनी मीडिया ने भारत पर आर्थिक मुद्दों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है.

चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने 24 दिसंबर को चीनी और अंग्रेजी भाषा के संस्करणों में इस विषय पर संपादकीय लिखा.

अखबार का कहना है कि हालिया गिरफ्तारियों से सबसे आसान बात जो पता चलती है, वह यह है कि भारत कुछ विशिष्ट कंपनियों का अंतहीन उत्पीड़न कर रहा है.

अखबार लिखता है, इससे इस धारणा की पुष्टि हुई है कि भारत विदेशी कंपनियों के लिए कब्रिस्तान बनता जा रहा है.

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अखबार कहता है कि वीवो के अलावा कई कंपनियों को या तो सुरक्षा चिंताओं के नाम पर राजनीति से जोड़ा गया और उनपर छापे डाले गए और जांच की गई या उन पर बेतुके कारणों से जुर्माना लगाया गया.

उसी दिन 'ग्लोबल टाइम्स' के अंग्रेजी संस्करण ने अपनी एक रिपोर्ट में शिनहुआ विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय रणनीति संस्थान में अनुसंधान निदेशक कियान फेंग के हवाले से भारत पर आर्थिक मुद्दों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया.

कियान फेंग ने कहा है, "चीनी उद्यमों पर भारत की अंतहीन कार्रवाई न केवल द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को कमजोर करेगी, बल्कि उस अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण को रेखांकित करेगी कि भारत विदेशी कंपनियों के लिए कब्रिस्तान बनता जा रहा है."

'ग्लोबल टाइम्स' ने क्या लिखा है?

अंतरराष्ट्रीय पाठकों को ध्यान में रखकर छपने वाले इस सरकारी दैनिक अख़बार ने 25 दिसंबर को भी एक संपादकीय लिखा.

इस कहा गया था कि भारत हाल के सालों में अपने खराब कारोबारी माहौल के लिए कुख्यात रहा है.

अखबार ने लिखा कि यह अपारदर्शी बाजार नियमों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा मनमाने तरीके से विदेशी कंपनियों को खासकर चीनी व्यवसायों को निशाना बनाया जाता है.

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मई, 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच हुई झड़पों का जिक्र करते हुए अखबार ने सीमा पर झड़प को व्यापार के मोर्चे तक लाने के लिए भारत की आलोचना की है.

संपादकीय में सीमा पर झड़प के बाद भारत के फैसले की भी आलोचना की गई है. भारत ने चीनी वीडियो एप्लिकेशन टिकटॉक समेत दर्जनों चीनी ऐप पर पाबंदी लगा दी थी. भारत की ओर से तब ये कहा गया था कि "वे भारत की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करते हैं."

इस बीच, 28 दिसंबर को सरकार से जुड़े राष्ट्रवादी मीडिया आउटलेट 'गुंचा' ने कुछ अज्ञात अमेरिकी मीडिया संस्थानों का हवाला देते हुए बताया कि भारत में अभियोग पक्ष के वकीलों ने न्यायाधीश को एक सीलबंद पत्र सौंपा था, इसमें कहा गया था कि केवल न्यायाधीश को ही इसे पढ़ने की इजाजत दी जाए.

'गुंचा' का कहना है कि बचाव पक्ष के वकीलों ने अभियोजन पक्ष के वकीलों द्वारा पत्र देने पर कड़ी आपत्ति जताई थी.

भारती मीडिया में 'ग्लोबल टाइम्स' की आलोचना

वीवो का लोगो

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वहीं भारतीय मीडिया ने 25 दिसंबर को वीवो के तीन हाई-प्रोफाइल कर्मचारियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ इस मुद्दे पर चीनी विदेश मंत्रालय की टिप्पणियों को प्रमुखता से जगह दी.

इस घटनाक्रम को मुख्यधारा के भारतीय मीडिया संस्थानों ने बड़े पैमाने पर तथ्यात्मक कवरेज की.

अंग्रेजी अखबार 'हिंदुस्तान टाइम्स' की 27 दिसंबर की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पिछले हफ्ते दायर आरोप पत्र में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने भारत के कई कानूनों का उल्लंघन किया है.

अखबार का कहना है कि कंपनी की तलाशी और उसके अधिकारियों को समन जारी किए जाने के बाद कंपनी से जुड़े सात चीनी नागरिक भारत से भाग गए हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यूजर्स के एक वर्ग ने इस मुद्दे पर 'ग्लोबल टाइम्स' में भारत की आलोचना को नोट करते हुए इसे भारत की आर्थिक वृद्धि पर चीन की चिंताओं से जोड़ा.

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सरकार समर्थक माने जाने वाले मीडिया आउटलेट 'फर्स्ट पोस्ट' की पत्रकार पालकी शर्मा के शो 'वैंटेज' में वीवो के शीर्ष अधिकारियों की गिरफ्तारी और चीन की प्रतिक्रिया का जिक्र किया गया.

उन्होंने चीन पर दोहरी रणनीति अपनाने का आरोप लगाया. शो का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया गया.

इसमें कहा गया है कि चीन आधिकारिक तौर पर भारत सरकार से चीन-भारत के आर्थिक और व्यापार सहयोग से होने वाले आपसी फायदे को समझने की अपील कर रहा था. ठीक उसी समय वह अनौपचारिक रूप से 'ग्लोबल टाइम्स' में लेखों के जरिए लगातार भारत के निवेश परिदृश्य की आलोचना का अभियान चला रहा था. इस आलोचना का लक्ष्य निवेशकों को भारत से दूर करना है.

शो की प्रजेंटर ने कहा, "ये समाचार लेख नहीं हैं, बल्कि ये चीन की असुरक्षा और शत्रुता को उजागर करने वाले लेख हैं."

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