सऊदी अरब में क़ैद शख़्स को सज़ा-ए-मौत से बचाने के लिए 34 करोड़ की 'ब्लड मनी' कैसे इकट्ठा की गई?

इमेज स्रोत, INDIA TODAY
बीते दिनों 'द केरला स्टोरी' नाम की फ़िल्म को दूरदर्शन पर दिखाए जाने को लेकर विवाद हुआ. कुछ लोगों का कहना था कि ये सांप्रदायिक तनाव भड़का सकती है.
लेकिन इसी विवाद के बीच केरल के सोशल मीडिया पर 'द रियल केरला स्टोरी' शीर्षक के साथ कुछ ख़बरें देखी जाने लगीं.
एक में केरल की धर्मनिरपेक्ष संस्कृति की झलक मिलती है, तो दूसरे को मानवता की बड़ी मिसाल कहा जा रहा है.
पहले में जहां कांग्रेस नेता शशि थरूर के एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा शुरू हुई, वहीं दूसरे मामले में सऊदी अरब में मौत की सज़ा पाए एक शख़्स को बचाने के लिए 34 करोड़ रुपये जमा किए गए.
'द केरला स्टोरी' विवाद क्या है?
सुदिप्तो सेन निर्देशित फ़िल्म 'द केरला स्टोरी' रिलीज़ होने से पहले ही चर्चा में आ गई थी. बीती पांच अप्रैल को उसे एक बार फिर दूरदर्शन पर दिखाया गया.
फ़िल्म की कहानी केरल की चार लड़कियों की कहानी है और धर्मांतरण पर आधारित है, जिसके चलते कइयों ने इसे फिर से रिलीज़ करने का विरोध किया था. लेकिन आख़िरकार फ़िल्म सिनेमाघरों तक पहुंच गई, हालांकि अभी भी इसे लेकर चल रहा विवाद ख़त्म नहीं हुआ.
जब फ़िल्म को दूरदर्शन पर दिखाने का फ़ैसला किया गया था तो प्रदेश के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सोशल मीडिया साइट 'एक्स' पर इसका विरोध किया.
उन्होंने कहा था कि ''नेशनल टेलीविज़न को यह फ़िल्म दिखाकर बीजेपी के प्रोपोगैंडा का हथकंडा नहीं बनना चाहिए क्योंकि ये चुनाव से पहले सांप्रदायिक तनाव का कारण बन सकता है.''
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
'द रियल केरला स्टोरी'
फ़िल्म को लेकर चल रहे विवाद के बीच पिछले दिनों 'द रियल केरला स्टोरी' के शीर्षक से मीडिया में दो तरह की ख़बरें चल रही थी.
पहला मामला कांग्रेस के सांसद शशि थरूर के एक ट्वीट से जुड़ा है.
इसमें उन्होंने केरल के 400 साल पुराने दुर्गा मंदिर की तस्वीर डालकर लिखा, "यह रियल केरला स्टोरी की एक और मिसाल है जिसमें हिंदुओं और मुसलमानों ने मिलकर 400 साल पुराने दुर्गा मंदिर का नवनिर्माण और सौंदर्यीकरण किया."
उनके इस ट्वीट को एक लाख से अधिक बार देखा गया.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
अब्दुल रहीम की मदद के लिए मुहिम की तारीफ
सोशल मीडिया पर 'द रियल केरला स्टोरी' के नाम से कई तरह की चीज़ें पेश की जा रही हैं. लेकिन शनिवार को एक ऐसी ख़बर सामने आई जिसे कई लोग 'द रियल केरला स्टोरी' कह रहे हैं.
यह कहानी दुनिया भर में फैले केरल के लोगों के आपसी सहयोग की कहानी है जिसमें उन्होंने अब्दुल रहीम नाम के एक शख़्स की जान बचाने के लिए केवल 40 दिनों में 34 करोड़ रुपये इकट्ठा किए.
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अब्दुल रहीम को बचाने की मुहिम की तारीफ की.
उन्होंने फ़ेसबुक पर लिखा, "मानवता की कहानियों के ज़रिए केरल के लोग अपनी पहचान बढ़ा रहे हैं, जबकि नफ़रत फैलाने वाले झूठी कहानियां फैला रहे हैं. दुनियाभर में फैले केरल के लोग सऊदी अरब में मौत की सज़ा का सामना कर रहे कोझीकोड निवासी अब्दुल रहीम की रिहाई के लिए 34 करोड़ रुपए जमा करने के लिए एकजुट हुए."
"एक इंसान की जान बचाने के लिए और एक परिवार के आंसू पोंछने के लिए केरल ने मोहब्बत की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है. यह इस बात का सबूत है कि केरल भाईचारे का गढ़ है जिसे सांप्रदायिकता ध्वस्त नहीं कर सकती. यह केरल की असल कहानी है."

इमेज स्रोत, RAMESH PATHANIA/MINT VIA GETTY IMAGES
वहीं केरल कांग्रेस ने अब्दुल रहीम की कहानी के बारे में 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए इसे 'द रियल केरला स्टोरी' बताया.
पार्टी ने लिखा, "केरल की असल तस्वीर! लगातार नफ़रत की मुहिम का सामना करने के बावजूद केरल में मलयालियों की अदम्य जीवटता और सहानुभूति सबसे ऊपर है."
"रियाद में 18 साल से क़ैद और मौत की सज़ा का सामना करने वाले अब्दुल रहीम की रिहाई के लिए लगभग 34 करोड़ रुपए जमा किए गए. हज़ारों लोग उस मां की मदद के लिए एकजुट हुए जो अपने बेटे की ज़िंदगी बचाने के लिए पैसे जमा करने की कोशिश में लगी थीं. उन सभी लोगों का शुक्रिया जिन्होंने इस मानवीय कोशिश में मदद की."
अब्दुल रहीम की कहानी
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 3
कोलकाता के अंग्रेज़ी अख़बार 'द टेलीग्राफ़' के मुताबिक़ कोझीकोड के 41 साल के अब्दुल रहीम पहले ऑटो रिक्शा चलाते थे. 'इंडिया टुडे' की वेबसाइट के अनुसार वह 2006 में हाउस ड्राइविंग वीज़ा पर रियाद पहुंचे थे. वहां ड्राइविंग के अलावा उन्हें एक विकलांग बच्चे की निगरानी का काम मिला.
एक दिन एक दुर्घटना में उस बच्चे की मौत हो गई. इस वजह से 2012 में उन्हें सऊदी अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई. पिछले 18 साल से जेल वो में हैं.
इस दौरान केरल के मलयाली समुदाय ने उनके लिए क़ानूनी मदद की कोशिश शुरू की और उनके परिजनों को 'देत' यानी 'ब्लड मनी' पर राज़ी कर लिया.
इससे पहले अब्दुल रहीम की मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ अपील भी की गई थी. लेकिन ट्रायल कोर्ट ने (2017 और 2022) में उन्हें दी गई फांसी की सज़ा को बरक़रार रखा.
'द टेलीग्राफ़' की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब में रहने वाले केरल के व्यापारी अशरफ वेंकट ने शुक्रवार को उन्हें बताया कि कई सालों तक माफ़ी देने से इनकार करने के बाद हादसे में जान गंवाने वाले बच्चे का परिवार 2023 में 15 मिलियन रियाल की ब्लड मनी के बदले अब्दुल रहीम की जान बख़्शने को तैयार हुआ.
अशरफ कहते हैं, "ब्लड मनी के बदले माफ़ी देने के लिए 16 अक्टूबर 2023 को परिवार ने समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस लिखित वादे के मद्देनज़र छह महीने के लिए फांसी के आदेश को स्थगित किया गया."
'द हिंदुस्तान टाइम्स' के अनुसार इसकी पहल अब्दुल रहीम की रिहाई के लिए 2021 में बनी अब्दुल रहीम क़ानूनी एक्शन कमेटी ने की.

इमेज स्रोत, @pinarayivijayan/X
कैसे शुरू हुई अब्दुल रहीम को बचाने की मुहिम
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग से जुड़े 'केरल मुस्लिम कल्चरल सेंटर' की सऊदी यूनिट के जनरल सेक्रेटरी अशरफ़ वेंकट हाल ही में केरल में भाजपा समेत सभी राजनीतिक दलों की मदद से चंदा के अभियान को आगे बढ़ाने के लिए कोझीकोड पहुंचे थे.
वेंकट कहते हैं, ''रहीम की जान बचाने के लिए बनाई गई कमेटी में हिंदू, मुसलमान और भाजपा समेत सभी राजनीतिक दलों के सदस्य शामिल हैं.''
शुक्रवार को उन्होंने कहा, ''हम उनकी रिहाई के लिए ज़रूरी 34 करोड़ रुपए के लक्ष्य तक पहुंच गए हैं. कृपया और पैसे न भेजें. हमारे पास 34.45 करोड़ रुपए इकट्ठा हो गए हैं. ज़रूरत से ज़्यादा आई रक़म का ऑडिट किया जाएगा और अच्छे मक़सद के लिए इसका इस्तेमाल किया जाएगा.''
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट अब रियाद में भारतीय दूतावास से संपर्क कर समझौते को आगे बढ़ाने और अब्दुल रहीम की रिहाई सुनिश्चित करने का काम करेगा.
वेंकट कहते हैं, ''रक़म जमा करने की 15 अप्रैल की आख़िरी तारीख से कुछ दिन पहले अब्दुल रहीम को माफ़ कराने के लिए प्रभावित परिवार को 'ब्लड मनी' के तौर पर रक़म दी जाएगी.''
अब्दुल रहीम को अपने स्पॉन्सर के 15 साल के विकलांग बेटे की मौत का ज़िम्मेदार बताकर मुजरिम ठहराया गया था.
अब्दुल रहीम का काम लड़के की देखभाल करना और उसे गाड़ी से लाना-ले जाना करना था. लेकिन रहीम ने ग़लती से लड़के की गर्दन से जुड़ी उस मेडिकल डिवाइस को नीचे गिरा दिया, जिससे उसे सांस लेने में मदद मिलती थी. इसकी वजह से उसकी मौत हो गई.
अब्दुल रहीम की मां ने क्या कहा?

इमेज स्रोत, SOCIAL MEDIA
अब्दुल रहीम को बचाने में जहां सऊदी अरब में केरल के रहने वालों के संगठन ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की, वहीं सुरेश नाम के व्यक्ति ने भी काफ़ी मदद की.
सुरेश क़ानूनी सहायता कमेटी के अध्यक्ष हैं. उन्होंने 3 मार्च को कोझीकोड में 'सेव अब्दुल रहीम' मोबाइल ऐप लॉन्च किया.
34 करोड़ रुपए जमा करने की मुहिम में उस समय से तेज़ी आई जब व्यापारी और ब्लॉगर्स इसके प्रचार-प्रसार में शामिल हुए.
'द टेलीग्राफ़' के अनुसार अब्दुल रहीम की मां पथुम्मा ने कहा है कि अपनी ख़ुशी को बयान करने के लिए उनके पास शब्द नहीं हैं.
उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ''यहां के लोगों की मदद से इतनी जल्दी इतनी बड़ी रक़म जमा हो सकी. मैं सभी का शुक्रिया अदा करती हूं.''
इस बारे में अशरफ वेंकट ने कहा कि रियाद में भारतीय दूतावास को रक़म भेजने का काम शुरू हो गया है. रकम एक वक़्फ़ और अदालत की निगरानी वाले बैंक खाते में भेजी जाएगी.
वेंकट ने कहा कि रक़म ट्रांसफ़र करने के बाद हम अब्दुल रहीम की रिहाई की उम्मीद कर सकते हैं हालांकि हम नहीं जानते कि इसमें और कितना समय लगेगा.
(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















