नगीना सीट पर कितनी मज़बूत है चंद्रशेखर आज़ाद की दावेदारी - ग्राउंड रिपोर्ट

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- Author, शहबाज़ अनवर
- पदनाम, नगीना से बीबीसी हिंदी के लिए
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट के चुनाव पर इसलिए सबकी नज़रें हैं क्योंकि यहां से युवा दलित नेता चंद्रशेखर आज़ाद चुनावी मैदान में हैं.
दिलचस्प यह है कि वे यहां से अपनी पार्टी आज़ाद समाज पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं और विपक्ष के गठबंधन के उम्मीदवार नहीं हैं.
लेकिन वे चुनाव के केंद्र में हैं और उनके यहां होने की वजह से मुक़ाबला दिलचस्प हो गया है.
बीते छह अप्रैल को नगीना लोकसभा क्षेत्र के नगीना क़स्बे में बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने कहा, "वह हमारे लोगों को उतारकर लड़ाई लड़ने की बात करते हैं, लेकिन अपना मुकद्दर बनाने के बाद लोगों को छोड़कर चले जाते हैं."
आकाश आनंद ने भले ही अपने संबोधन में आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद का नाम नहीं लिया, लेकिन लोग समझ गए थे कि उनका इशारा किधर है. बात यहीं नहीं थमती, 14 अप्रैल को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी नगीना लोकसभा क्षेत्र के नहटौर इलाक़े में एक जनसभा में चंद्रशेखर पर निशाना साधा, उन्होंने चंद्रशेखर पर इंडिया गठबंधन के नेताओं को लुभाने का आरोप लगाया.
ये दो मामले थे जो एक के बाद एक चंद्रशेखर के ख़िलाफ सुनाई दिए, हालांकि चंद्रशेखर अपनी तमाम जनसभाओं में इन दोनों नेताओं के ख़िलाफ़ कुछ भी बोलने से परहेज़ करते दिख रहे हैं, पर ऐसा क्या हुआ कि वे इन दोनों नेताओं के निशाने पर आ गए?
आकाश आनंद और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा की गई टिप्पणियों पर चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा, "देखिए हर आदमी के अपने-अपने संस्कार होते हैं, वह अपने-अपने हिसाब से बात बोलता है, अगर आदमी लिखी हुई बात बोल रहा है तो उसे बात किसी ने लिख कर दी है और जब अपने मन से बोलता है तो वह वो बोलता है जो उसके संस्कार होते हैं. इस तरह की भाषा का प्रयोग जो कर रहा है वह उसके संस्कार हो सकते हैं, मैं किसी की बुराई नहीं कर रहा हूं, मैं सभी की मंगलकामना करता हूं."
हालांकि वह आगे ये भी कहते हैं कि नगीना सीट पर उनकी लड़ाई भाजपा से है. बहुजन समाज पार्टी से दो बार विधायक रहे मोहम्मद ग़ाज़ी आज़ाद समाज पार्टी से जुड़े हैं और चंद्रशेखर आज़ाद के समर्थन में हैं.
वह इन नेताओं की टिप्पणियों को चंद्रशेखर आज़ाद के बढ़ते क़द से आंकते हैं. उन्होंने कहा, "मुख़ालफ़त किसकी होती है? आप गाली किसे देते हैं, जिसको अपना कॉम्पटिटर मानते हैं, तो ये काम वो कर रहे हैं, उन्हें लग रहा है कि दुकानें बंद होने जा रही हैं."
क्या वाकई ख़ास बन रहे हैं चंद्रशेखर?

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नगीना लोकसभा क्षेत्र में चंद्रशेखर आज़ाद एक बाहरी प्रत्याशी हैं, लेकिन क्या यहां वह वाक़ई ख़ास बन रहे हैं?
इस बारे में उनके समर्थक और ज़िला पंचायत सदस्य विवेक सेन कहते हैं, "अगर आज प्रदेश की सारी पार्टियों के हेलिकॉप्टर यहां उतर रहे हैं तो यह चंद्रशेखर की वजह है, उन्हें ये भी मालूम है कि यदि चंद्रशेखर यहां से जीते तो जैसे सभी नेताओं के गढ़ हैं, उसी तरह बिजनौर भी चंद्रशेखर आज़ाद का गढ़ होगा."
हालांकि भारतीय जनता पार्टी के नगीना लोकसभा संयोजक महेंद्र धनोरिया इस बात से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते हैं, चंद्रशेखर के 'ख़ास' वाले सवाल पर वह कहते हैं, "अगर चंद्रशेखर बड़ा चेहरा होते, ख़ास होते तो हाल ही में पांच राज्यों के चुनाव हुए हैं, दो राज्यों में उन्होंने अपने प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन नतीजे क्या हुए सभी को मालूम है."
क्या है नगीना सीट की स्थिति?

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बिजनौर की नगीना लोकसभा सीट पर तकरीबन 16 लाख मतदाता हैं जिसमें लगभग 46 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं जबकि 21 प्रतिशत दलित मतदाता हैं. इस लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र पड़ते हैं जिनमें नहटौर, नजीबाबाद, नगीना, धामपुर और नूरपुर शामिल हैं.
तक़रीबन 70 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम और दलित हैं, लेकिन शेष 30 प्रतिशत मतदाताओं में चौहान, सैनी और कुछ अन्य पिछड़ा वर्ग मतदाता हैं.
भारतीय जनता पार्टी की ओर से यहां नहटौर विधायक ओम कुमार मैदान में हैं तो इंडिया गठबंधन की ओर से पूर्व जज मनोज कुमार हैं, वही आज़ाद समाज पार्टी की ओर से चंद्रशेखर आज़ाद हैं जबकि बहुजन समाज पार्टी की ओर से सुरेंद्र पाल प्रत्याशी हैं.
किधर है दलित समाज का रुझान?

यूं तो नगीना लोकसभा सीट रिज़र्व है और सभी पार्टियों के प्रत्याशी दलित वर्ग से ही हैं. हालांकि दलित मतदाताओं को बहुजन समाज पार्टी का एक परंपरागत वोट माना जाता है, पर इस बार ग्राउंड पर हालात अलग दिख रहे हैं.
नगीना क़स्बे से तकरीबन 20 किलोमीटर दूर कुछ महिला पुरुष एक धर्मशाला के पास एकत्रित दिखे. ये इलाका दलित बहुल है.
एक महिला ने कहा, "हमने बहन जी को जिताया था, अगर वह निकलकर मैदान में आतीं तो चुनाव लड़ाते लेकिन वह काफी समय से दिखाई नहीं दे रही हैं. 10 साल तक मोदी जी को भी जितवाया, पर इस बार हमारे विचार चंद्रशेखर के लिए है, वह यहां आए भी थे. देखते हैं दूसरे लोग क्या कहते हैं."
पास ही एक बुजु़र्ग महिला लीलावती खड़ी हैं. पल्लू मुंह में दबाए कहती हैं, "हम तो वहीं जाएंगे जहां हमारे पास के लोग वोट करेंगे."
दूर से ये सब नज़ारा देख रहे व्यक्ति को हमनें इशारा कर अपने पास बुलाया, उनकी राय ली तो उन्होंने कहा, "हम तो शुरू से मोदी जी से जुड़े हैं. इस बार भी हमारा मत उनके लिए है. भू-माफिया, गुंडे सभी भाग खड़े हुए हैं इस सरकार में, बहन-बेटियों की सुरक्षा हो रही है, इससे ज़्यादा और क्या चाहिए."

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बेरोज़गारी और सुरक्षा के मुद्दे पर क्या बोले लोग?
टीवी मरम्मत की दुकान के भीतर बैठे एक व्यक्ति ने कहा, "हम तो मोदी जी के वोटर हैं. उनकी सरकार में गुंडई ख़त्म है, लोग सुरक्षित हैं."
एक छोटी टीवी मरम्मत की दुकान और उस पर चिप्स, कुरकुरे व टॉफी बेचने के सवाल पर कहते हैं, टीवी का काम मंदा है, "इन सब सामान को बेचकर भी कुछ बचत हो जाती है."
वह कहते हैं, "मोदी सरकार में सब कुछ ठीक रहा पर बेरोज़गारी की समस्या बनी है. मेरे पांच बच्चे हैं, लेकिन किसी के पास रोज़गार नहीं है. राहुल गांधी का एक प्रचार सुन रह रहा हूं जिसमें वह जीएसटी ख़त्म करने की बात कह रहे हैं, यदि ऐसा हुआ तो मैं इस बार अपने वोट पर पुनर्विचार करूंगा."
एक दलित युवक सुमित कुमार हमारी बातचीत के दौरान आगे आकर बोलता है, "मैं स्नातक का छात्र हूं. सरकार वैकेंसी निकालती है, रोज़गार की भी बात करती है, लेकिन पेपर देने के बाद परीक्षाएं रद्द हो रही हैं, हमें ऐसे में अब किसी नए चेहरे की तलाश है."
साथ लगे कंप्यूटर की दुकान पर एक नौजवान नावेद काम कर रहे हैं. वह कहते हैं, "मैं पहली बार लोकसभा के लिए वोट डालूंगा, लेकिन अभी थोड़ा कन्फ्यूज हूं कि युवाओं के विषय पर सोचने वाला कौन सा प्रत्याशी है. हां, वैसे मुझे इंडिया गठबंधन में राहुल गांधी पसंद है."
क्या कहते हैं मुसलमान?

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वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर महागठबंधन से बसपा प्रत्याशी गिरीश चंद्र ने जीत हासिल की थी. उन्होंने यहां 1,67,000 मतों से जीते थे और भाजपा प्रत्याशी डॉक्टर यशवंत सिंह को हराया था. तब समाजवादी पार्टी और बसपा का गठबंधन था जबकि वर्ष 2014 में डॉक्टर यशवंत ने सपा प्रत्याशी यशवीर सिंह को हराया था.
इस बार सपा और बसपा अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं जबकि दलित-मुस्लिम मतदाताओं पर दावेदारी करने वाले चंद्रशेखर भी मैदान में हैं. ऐसे में यहां इन मतदाताओं के ध्रुवीकरण की आशंका लगातार बनी है, जिसका सीधा फायदा भाजपा उठा सकती है.
मुस्लिम मतदाताओं पर दावेदारी में भाजपा भी पीछे नहीं है. भाजपा नेता महेंद्र धनोरिया कहते हैं, "हमारी सरकार ने आयुष्मान कार्ड से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना तक सभी वर्गों को लाभ दिया है, इसमें मुसलमान भी शामिल हैं."
उधर, इंडिया गठबंधन से प्रत्याशी पूर्व जज मनोज कुमार बीबीसी से कहते हैं, "देश में सांप्रदायिकता नहीं चलने दी जाएगी, आज इस ताक़त ने सिर उठा रखा है, जल्द इस ताक़त को उखाड़ फेकेंगे. इसमें हमारे साथ मुस्लिम, दलित और अमन पसंद लोग शामिल हैं."
एक बुज़ुर्ग दर्ज़ी कपड़ा सिलते हुए कहते हैं, "अभी तो चंद्रशेखर का ही नाम ऊपर चल रहा है, गठबंधन से मनोज भी अच्छे व्यक्ति हैं, लेकिन किसे वोट दें, इसके लिए थोड़ा इंतज़ार करेंगे. देखते हैं लोग किधर जाते हैं."
सड़क किनारे ठेला लगाकर प्रेस करने वाले बुज़ुर्ग कहते हैं, "हम तो ऐसे प्रत्याशी को वोट करेंगे जो हम ग़रीबों का दर्द समझे." एक सवाल के जवाब में वह कहते हैं, "चंद्रशेखर के अलावा गठबंधन प्रत्याशी मनोज कुमार, हमारा वोट इनमें से ही किसी एक को होगा."
वहीं, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा से जुड़े युवा नेता बिलाल चौधरी ने कहा, "मुसलमान इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भाजपा को वोट करेगा क्योंकि सरकार ने आयुष्मान कार्ड से लेकर पीएम आवास योजना में सैंकड़ों मुसलमानों के भी घर बनवाए हैं."
क्या हैं प्रत्याशियों के मुद्दे?

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संगठन स्तर पर मुद्दों की बात अलग है, लेकिन स्थानीय स्तर पर प्रत्याशी लोगों के बीच तमाम स्थानीय मुद्दों को लेकर पहुंच रहे हैं.
चंद्रशेखर आज़ाद कहते हैं, "हमें मौक़ा मिला तो नगीना लोकसभा क्षेत्र में एम्स की स्थापना करेंगे, युवाओं और खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम, महिला कॉलेज, रोज़गार सहित कई अन्य मुद्दे हैं."
इंडिया गठबंधन प्रत्याशी मनोज कुमार इस बारे में कहते हैं, "भारत की आम जनता का सबसे बड़ा मुद्दा उसकी अस्मिता, सुरक्षा से संबंधित है. जो सिर्फ़ और सिर्फ़ भारत के संविधान की रक्षा की बात करता है."
मनोज कुमार वैसे तो मूल रूप से चंदौली ज़िले के रहने वाले हैं और पेशे से अपर ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश रह चुके हैं.
45 साल के मनोज ने पिछले वर्ष अक्तूबर 2023 में वीआरएस लिया और राजनीति में आने का विचार बना लिया था. वह वर्तमान में नगीना लोकसभा क्षेत्र में धामपुर क़स्बे में ही रह रहे हैं.

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जबकि भाजपा के उम्मीदवार ओम कुमार नहटौर से विधायक भी हैं. ओम कुमार इससे पहले बसपा में थे, लेकिन बाद में मोदी लहर के दौरान उन्होंने भाजपा जॉइन की थी और 2017 में भाजपा से पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था और जीते थे.
संगठनात्मक स्तर पर राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों को छोड़ दें तो भारतीय जनता पार्टी की तरफ से इस सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए एक साल पहले से ही धामपुर, स्योहारा के रेलवे स्टेशन का जीर्णोद्धार शुरू करा दिया गया था, किरतपुर इलाक़े में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की तैयारी है, कुछ इन्हीं मुद्दों के साथ भाजपा यहां मैदान में है.
जबकि सुरेंद्र पाल सिंह बहुजन समाज पार्टी से इस क्षेत्र से प्रत्याशी हैं. वह मुजफ्फरनगर ज़िले की पुरकाजी विधानसभा क्षेत्र के गांव सिलावर के रहने वाले हैं. सुरेंद्र पाल सिंह पेशे से वकील हैं. वह लंबे समय से बसपा से जुड़े हैं. वो पिछड़ों और दबे कुचलों को ताक़त देने और पश्चिमी यूपी को अलग राज्य बनाने सहित कई अन्य मुद्दों के ज़रिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं.
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