छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा पर राजनीति तेज़, अजीत पवार ने मांगी माफ़ी, विपक्ष के प्रदर्शन की तैयारी

नारायण राण (बाएं) और उद्धव ठाकरे समर्थकों के बीच झड़प हुई

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सिंधुदुर्ग ज़िले के राजकोट क़िले में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है.

आज इसी क़िले पर बीजेपी नेता नारायण राणे और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई.

सत्तारुढ़ महायुती और विपक्षी महा विकास अघाड़ी दोनों में प्रतिमा को लेकर खींचतान देखने को मिल रही है और इस बार कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाज़ी की.

इस घटना के मद्देनज़र महाविकास अघाड़ी ने रविवार, 1 सितंबर को मुंबई में गेटवे ऑफ़ इंडिया के पास शिवाजी महाराज की प्रतिमा के पास सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है.

उप-मुख्यमंत्री ने मांगी माफ़ी

अजीत पवार ने एक जनसभा के दौरान जनता से प्रतिमा गिरने के लिए माफ़ी मांगी

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इस प्रतिमा का अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते साल 4 दिसंबर को नौसेना दिवस के अवसर पर किया था.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बताया था कि प्रतिमा नौसेना ने बनवाई थी और हवा के कारण गिर गई. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि जल्द से जल्द एक नई प्रतिमा स्थापित की जाएगी.

वहीं बुधवार को महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार ने प्रतिमा गिरने के लिए माफ़ी मांगी. उन्होंने लातूर ज़िले में एक जनसभा के दौरान कहा कि वो ‘महाराष्ट्र की 13 करोड़ जनता से माफ़ी मांगते हैं. छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे देवता हैं और एक साल के भीतर उनकी प्रतिमा का इस तरह गिरना हम सबके लिए धक्का है.’

हालाँकि, छत्रपति शिवाजी महाराज की यह प्रतिमा महज़ आठ महीने में ढह जाने के बाद से काम की गुणवत्ता और इस प्रतिमा के अनावरण की जल्दबाज़ी को लेकर राज्य सरकार विपक्ष के निशाने पर है.

इसके तहत आज शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता आदित्य ठाकरे ने इस क़िले का दौरा किया और वहां विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश की.

आदित्य ठाकरे के साथ अंबादास दानवे, वैभव नाइक और एनसीपी (शरद पवार) नेता जयंत पाटिल भी थे.

इस आंदोलन के जवाब में नारायण राणे के समर्थकों ने भी नारेबाज़ी कर विरोध जताने की कोशिश की. उनके साथ नीलेश राणे भी थे.

'मूर्ति नहीं, गौरव गिरा है'

पीएम मोदी ने बीते साल शिवाजी की प्रतिमा का अनावरण किया था

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पुलिस की ओर से दोनों गुटों से बातचीत कर हंगामा रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली.

इस समय भ्रम की स्थिति से बचने और मध्यस्थता के ज़रिए रास्ता निकालने के लिए शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल भी नीलेश राणे से चर्चा करते नज़र आए.

बाद में पत्रकारों से बात करते हुए जयंत पाटिल ने कहा, "राजकोट क़िले पर छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति, जो केवल आठ महीने पहले बनाई गई थी, गिर गई है. यह मूर्ति नहीं गिरी है, बल्कि महाराष्ट्र का गौरव गिरा है."

जयंत पाटिल ने कहा, "मुख्यमंत्री कहते हैं कि हवा तेज़ गति से चल रही थी. इसलिए मूर्ति गिरी. अगर ऐसा होता तो दो या तीन पेड़ गिर जाते, लेकिन उसकी जगह मूर्ति ही गिरी."

“इसका मतलब है कि मूर्ति का काम दोषपूर्ण था. एक अपरिपक्व आदमी को मूर्ति का काम दिया गया था. एक आदमी जिसने डेढ़ से दो फुट की प्रतिमा बनाई थी उसे 35 फुट की प्रतिमा का काम दिया गया था."

"सरकार का कहना है कि मूर्ति नौसेना ने बनाई है लेकिन सरकार इसके लिए ज़िम्मेदार है. नौसेना के लोगों ने केवल मूर्ति वहां स्थापित की थी. नौसेना को उसकी जानकारी किसने दी. प्रतिमा के लिए टेंडर नहीं निकाला गया फिर उन्हें ये ठेका कैसे मिला, इसकी जांच होनी चाहिए.''

महाविकास अघाड़ी की प्रेस कॉन्फ्रेंस

प्रतिमा गिरने के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करते शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता
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इस बीच, इन सभी घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि में, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के प्रमुख शरद पवार, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रमुख नाना पटोले ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की.

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे ने जानकारी दी कि वह रविवार को सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करेंगे. यह विरोध प्रदर्शन मुंबई के गेटवे ऑफ़ इंडिया इलाक़े में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के पास किया जाएगा.

इस दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा, "महाराष्ट्र में महिलाओं के ख़िलाफ़ अत्याचार और भ्रष्टाचार बढ़ रहा है. महायुति सरकार का भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है और प्रशासन ख़राब है. इसके विरोध में दो दिन पहले महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया गया जिसके ख़िलाफ़ न्यायालय की ओर से प्रतिबंध भी लगा दिया गया था.”

उप-मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया था.

इस बारे में बात करते हुए शरद पवार ने कहा, "इसमें राजनीति क्या है? शिवाजी महाराज के शासनकाल के दौरान, एक लड़की के साथ बलात्कार के बाद शिवाजी ने बलात्कारी के हाथ और पैर कटवा दिए थे. उन्होंने लोगों के सामने इतना सख़्त रुख़ अपनाया था. जिस व्यक्ति ने ऐसा फ़ैसला लिया था आज उसकी प्रतिमा बनाने में ऐसा भ्रष्टाचार हुआ.”

उन्होंने आगे कहा, "जहां प्रधानमंत्री ख़ुद गए वहां प्रतिमा गिरी है. इससे पता चलता है कि भ्रष्टाचार किस हद तक पहुंच गया है. आख़िरकार लोगों की मज़बूत भावना व्यक्त होनी चाहिए इसलिए हम तीनों ने महाराष्ट्र के लोगों से अपील करने और विरोध प्रदर्शन करने का फ़ैसला किया है.''

कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि ''प्रतिमा के अनावरण के मौक़े पर ख़ुद नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री मौजूद थे. हालांकि, प्रतिमा लगाने की सभी प्रक्रियाएं पूरी नहीं की गईं. जब तक संस्कृति मंत्रालय प्रतिमा को प्रमाणित नहीं करता तब तक प्रधानमंत्री को इस प्रतिमा का अनावरण नहीं करना चाहिए था. यह सब यह दिखाने के लिए किया गया था कि चुनाव के मामले में हम कितने बड़े शिवाजी प्रेमी हैं.”

चुनाव सामने हैं इसलिए राजनीति- राणे

नारायण राणे

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इमेज कैप्शन, नारायण राणे का कहना है कि चुनाव की वजह से विपक्ष इसे मुद्दा बना रहा है

इसके बाद बीजेपी सांसद नारायण राणे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महाविकास अघाड़ी की कड़ी आलोचना की है.

उन्होंने कहा, ''प्रतिमा गिरने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. बारिश के सीज़न में ख़राब मौसम से पैदा हुई परिस्थितियों के कारण प्रतिमा ढही है. किसी पर आरोप लगाने के बजाय मैं और जनता चाहते हैं कि इस प्रतिमा को बनाने वालों की जांच होनी चाहिए और यह मूर्ति क्यों गिरी इसका सटीक कारण सामने आना चाहिए."

राणे ने कहा, "जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, विपक्ष इसको मुद्दा बना रहा है. चूंकि इस ज़िले में भाजपा की आलोचना करने का कोई कारण नहीं है, इसलिए इस घटना की आलोचना करने के लिए सभी शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) गुट और कांग्रेस सभी एक साथ आ रहे हैं.”

उद्धव ठाकरे की आलोचना करते हुए नारायण राणे ने कहा, ''उन्होंने हमारी शिवाजी का ग़द्दार कहकर आलोचना की है. हालांकि, शिवसेना के जन्म के बाद से ही उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज और हिंदुत्व के दो मुद्दों को ही आजीविका का साधन बनाया है. उन्होंने इससे पैसा कमाया है. क्या उन्होंने कभी एक भी प्रतिमा छत्रपति शिवाजी महाराज की लगाई? महाराष्ट्र सरकार के ख़र्चे पर एक प्रतिमा उनके पिता की लगाई गई. इसलिए इस मामले पर बोलने का उन्हें कोई नैतिक अधिकार नहीं है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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