हिमाचल प्रदेश: बारिश और भूस्खलन ने जो ज़ख़्म दिए हैं उन्हें भरने में...

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- Author, पंकज शर्मा
- पदनाम, शिमला से, बीबीसी हिंदी के लिए
हिमाचल प्रदेश में तीन दिन तक चली लगातार बारिश ने पूरे प्रदेश में क़रीब 70 लोगों की ज़िंदगियाँ छीन ली.
शिमला ज़िले में एक के बाद एक हुई दुर्घटनाओं ने कई परिवारों को बचने का मौक़ा ही नहीं दिया.
इस बारिश में सबसे बड़ा दर्दनाक हादसा, शिमला के समरहिल स्थित शिवमंदिर के पास हुआ.
सोमवार, 14 अगस्त को यहाँ अचानक बादल फटने से भूस्खलन हुआ जिसमें करीब 21 लोग दब गए.
अब तक 14 शव बरामद किए जा चुके हैं जबकि सात लोगों का पता नहीं चल सका है.

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कभी ना भूलने वाला ग़म
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर डॉक्टर मानसी शर्मा अपने पति हरीश शर्मा के साथ शिव मंदिर में जल चढ़ाने गई थीं.
मानसी अपने घर में अपनी बेटी के पास मोबाइल छोड़कर यह कहकर गई थीं कि वो लोग मंदिर जा रहे हैं. लेकिन फिर वो लौट ना सकीं.
अचानक हुए इस हादसे ने सबको हिला दिया है.
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में कार्यरत रोहित शर्मा कहते हैं, "मेरी मानसी शर्मा से रोज़ मुलाक़ात होती थी. उनका ऐसे चले जाना हम सब के लिए इतना बड़ा झटका है जिससे उबरने के लिए पूरा जीवन भी कम है."
मॉनसून की बारिश ने यहां के लोगों को जो ज़ख़्म दिए हैं उन्हें भरने में बहुत वक़्त लगेगा.

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समरहिल में ही कारोबारी अमन शर्मा का परिवार रहता था.
वो अपने माता-पिता, पत्नी अर्चना शर्मा और अपनी बेटियों के साथ शिव मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन अचानक आए भूस्खलन ने पूरे परिवार को संभलने का मौक़ा ही नहीं दिया. पूरा परिवार इसकी चपेट में आ गया.
ऐसा ही एक परिवार हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के गणित विभाग में तैनात प्रोफ़ेसर पीएल शर्मा का था.
वो अपनी पत्नी और बेटे के साथ शिव मंदिर दर्शन के लिए गए थे जो लौट ना सकें.
पिछले 40 सालों से यहां रहने वाले इंद्रजीत ठाकुर कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में इतना बड़ा हादसा आज तक नहीं देखा है.
इस हादसे की चपेट में उनके भी तीन भतीजे आ गए जिनमें दो के शव मिल चुके हैं जबकि एक अभी भी लापता है.

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एक आवाज़ जो ख़ामोश हो गई...
उसी दिन शिमला के फागली में आए एक दूसरे भूस्खलन ने आकाशवाणी शिमला में आरजे के तौर पर काम करने वाले सल्लाउद्दीन बाबर की आवाज़ को ख़ामोश कर दिया.
बाबर भूस्खलन में फंसे अपने भाई को बचाने गए. उसी क्रम में उन्हें दूसरों की चीख पुकार भी सुनाई पड़ी. वो अपने भाई और दूसरों की मदद करने गए लेकिन ख़ुद भी मलबे में फंस गए.
उनकी और उनके भाई दोनों की ही इस हादसे में मौत हो गई. सोशल मीडिया पर उनकी बहादुरी की काफ़ी चर्चा हो रही है.
उनके साथ काम करने वाले संजय कुमार कहते हैं, "बाबर एक ज़िंदादिल इंसान थे. मुसलमान होने के बावजूद उनकी शिव भगवान पर बहुत आस्था थी. वो हिमाचल में किन्नर कैलाश और श्रीखंड महादेव की यात्रा भी कर चुके थे. दूसरों को बचाने की कोशिश में उनकी जान चली गई लेकिन उनकी आवाज़ हमेशा हम सभी के दिलों में गूंजती रहेगी."
ये बारिश कई लोगों को जो घाव दे गई है वो शायद ही कभी भर सकें.

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हिमाचल में भारी बारिश से तबाही
बीबीसी के सहयोगी पत्रकार आदर्श राठौर के अनुसार, पहाड़ी इलाक़ों में भारी बारिश होना कोई असामान्य बात नहीं है. मगर हिमाचल प्रदेश में एक वाक्य जो इन दिनों खूब बोला गया, वह है, "ऐसी बारिश पहले कभी नहीं देखी."
बड़े-बुज़ुर्ग कह रहे हैं कि ऐसी बारिश उनके बचपन में हुआ करती थी मगर तब भी जान-माल का ऐसा नुक़सान नहीं होता था. इस मॉनसून सीज़न में, 24 जून से लेकर 14 अगस्त तक, 270 से अधिक लोग भारी बारिश के कारण जान गंवा चुके हैं.
कुछ की जान अचानक आई बाढ़ में बहने से हुई, कुछ भूस्खलन की चपेट में आए, कुछ के मकान ढह गए तो कुछ सड़क हादसों की चपेट में आ गए. प्रदेश भर में कई निजी और सरकारी इमारतें, सड़कें, पुल और अन्य ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए हैं.
अमूमन पहाड़ों में बारिश की वजह से होने वाले नुक़सान के दो मुख्य कारण होते हैं- लंबे समय तक लगातार होने वाली बारिश, जिससे भूस्खलन का ख़तरा बढ़ जाता है. दूसरा कारण होता है बादल फटना.
बादल फटने का अर्थ है- अचानक एक ही स्थान पर सामान्य से बहुत अधिक वर्षा होना. इसी कारण तुरंत बाढ़ आने (फ़्लैश फ़्लड) और भूस्खलन जैसी घटनाएं होती हैं.

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मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने 11 अगस्त को आठ ज़िलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया था. यह अलर्ट तब जारी किया जाता है जब भारी से भी ज़्यादा बारिश होने का अनुमान हो.
12 अगस्त को मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेंद्र पॉल ने बताया था कि अगले 24 घंटों में शिमला, सोलन, कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी और कुल्लू में भारी बारिश हो सकती है.
इसी आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने भी लोगों से अपील की थी कि वे घरों पर ही रहें और बहुत ज़रूरी होने पर ही बाहर निकलें.
यह चेतावनी सही साबित हुई और पिछले दो दिन से लगातार बारिश हो रही है. इस कारण भूस्खलन और फ़्लैश फ़्लड की घटनाएं तो हुई हीं, कुछ इलाक़ों में जलभराव की भी समस्या हो गई.
मंडी की बल्ह घाटी हिमाचल प्रदेश का सबसे उपजाऊ क्षेत्र माना जाता है. यहां इतनी बारिश हुई कि घाटी से पानी निकालने वाली सुकेती खड्ड उस पानी की निकासी नहीं कर पाई. नतीजा यह हुआ कि एक बड़ा इलाक़ा और वहां उगाई गई सब्ज़ियों के खेत डूब गए.

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तबाही का कारण क्या है?
मौसम विभाग की ओर से जारी बारिश के आंकड़ों पर नज़र डालें तो पता चल जाता है कि इस तबाही का कारण क्या है. जिन ज़िलों के लिए बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया था, वहां 14 अगस्त को सामान्य से आठ गुना ज़्यादा तक बारिश दर्ज की गई है.
सोलन में सामान्य से तीन, मंडी में पांच और शिमला में क़रीब सात गुना ज़्यादा बारिश हुई. सबसे अधिक बारिश हमीरपुर में दर्ज की गई जो सामान्य से क़रीब आठ गुना ज़्यादा थी.
जिस तरह का नुक़सान 13 और 14 अगस्त को हुआ है, वैसा ही एक माह पहले जुलाई के दूसरे सप्ताह में हुआ था. तब मनाली, कुल्लू और मंडी में ब्यास नदी के किनारे बसे इलाक़ों में इस तरह की तबाही हुई थी.
तब नवनिर्मित फ़ोर लेन हाईवे का बड़ा हिस्सा नदी में बह गया था. बहुत से निजी और सरकारी भवन जलमग्न हो गए थे और कई पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा था.
इसके बाद हुए नुक़सान का जायज़ा लेने के लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी हिमाचल आए थे, जिसके बाद केंद्र सरकार से मदद भी मिली थी. हालांकि, प्रदेश सरकार का कहना है कि यह मदद नाकाफ़ी है क्योंकि नुक़सान बहुत ज़्यादा हुआ है.
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