सीरिया में असद के पतन और इसराइली हमले पर क्या कह रहे हैं अरब देश

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इसराइल ने बशर अल-असद की सरकार के पतन के बाद सीरिया में हवाई हमले शुरू कर दिए हैं.
सीरियाई ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक़ बशर अल-असद की सत्ता के ख़ात्मे बाद इसराइल ने अब तक सीरियाई इलाकों में 310 हवाई हमले किए हैं.
इसराइली हवाई हमलों में सीरिया की हथियार फैक्ट्रियों, हथियार और गोला-बारूद डिपो, हवाईअड्डों और वैज्ञानिक शोध संस्थानों को निशाना बनाया गया है. ये हमले दमिश्क के बाहरी और सुदूर इलाकों में किए गए हैं.
इसराइल ने कहा है कि सीरिया में असद सरकार के पतन के बाद वहां के हथियार ''अतिवादियों के हाथ में न पड़ जाए'' इसलिए वो वहां हमले कर रहा है.

लेकिन सऊदी अरब, क़तर, ईरान, इराक़ समेत कई अरब देशों ने इसराइल के इस कदम की आलोचना है.
आइए, जानते हैं, सीरिया में असद सरकार के पतन और वहां किए जा रहे इसराइली हमले पर ये देश क्या कह रहे हैं.
सऊदी अरब

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सऊदी अरब ने इसराइली हमलों की निंदा की है. सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इसराइल की ओर से गोलन हाइट्स के बफ़र ज़ोन पर उसका कब्ज़ा और सीरियाई इलाकों पर ताज़ा हमले इस बात की पुष्टि करते हैं कि इसराइल लगातार अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन कर रहा है.
सऊदी अरब ने कहा है कि इसराइल सीरिया में सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय अखंडता को ध्वस्त करने पर अड़ा हुआ है.
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसराइल की इस कार्रवाई की निंदा करनी चाहिए और सीरिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा पर ज़ोर देना चाहिए.
इससे पहले, सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि सऊदी अरब सीरिया के घटनाक्रम पर करीबी नज़र बनाए हुए है.
सऊदी अरब ने सीरिया के लोगों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों और रक्तपात रोकने के उपायों पर संतोष जाहिर किया था.
ईरान

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ईरान ने कहा है कि सीरिया का भविष्य और इस देश का अगला कदम क्या होगा ये तय करना पूरी तरह सीरियाई लोगों का अधिकार है.
विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है, ''ईरान सीरिया की एकता, संप्रभुता और इसकी क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है. ईरान चाहता है कि सीरिया में बगैर किसी बाहरी हस्तक्षेप के इसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा होनी चाहिए.''
गौरतलब है कि ईरान देश से भाग चुके पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन का समर्थक रहा है और विद्रोहियों के ख़िलाफ़ उनकी सरकार को सैन्य मदद देता रहा है.
अब ईरान ने सीरिया के मौजूदा हालात को मंज़ूर कर लिया है, लेकिन वहां इसराइली हमलों की निंदा की है. उसने कहा है कि ये हमले यूएन चार्टर का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन हैं.
ईरान के विदेश मंत्री इस्माइल बागेई ने एक बयान जारी कर कहा है कि सीरिया में इसराइल के हवाई हमले अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़ने वाले हैं.
ईरान और इसराइल के बीच भारी तनाव है. हाल में दोनों एक-दूसरे पर मिसाइल हमले कर चुके हैं.
इराक़

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इराक़ ने असद सरकार के पतन के साथ ही सीरिया से लगी अपनी अल-कायम सीमा बंद कर दी है.
सीरिया से लगे इराक़ के अनबार प्रांत के अल-कायम ज़िले में मौजूद ये सीमा दोनों देशों के बीच लोगों और सामान की आवाजाही का प्रमुख रास्ता है.
इराक के सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल याह्या रसूल ने कहा कि इराक-सीरिया सीमा पर हालात पूरी तरह इराक़ी सेना के नियंत्रण में है. इराक़ और सीरिया दोनों सीमा का एक बड़ा हिस्सा साझा करते हैं.
इराक़ ने भी सीरिया पर इसराइली हमले की निंदा की है और वहां की संप्रुभता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की अपील की है. उसने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अपनी ज़िम्मेदारियों को समझते हुए सीरिया पर इसराइल के हमले की निंदा करनी चाहिए.
क़तर

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क़तर ने सोमवार को असद के तख्तापलट को अंजाम देने वाले प्रमुख विद्रोही गुट हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) से संपर्क किया है. क़तर के राजनयिकों ने इस गुट के शीर्ष नेताओं से बात की है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ क़तर हयात तहरीर अल-शाम के नेता मोहम्मद अल-बशीर से मंगलवार को बात कर सकता है. बशीर फिलहाल सीरिया में अस्थायी सत्ता प्रबंधन की अगुआई कर रहे हैं.
क़तर के अधिकारियों का कहना है कि इस समय उनका पूरा जोर इस बात पर है एचटीएस और दूसरे विद्रोही गुट सीरिया में शांति बनाए रखें और देश के सार्वजनिक संस्थानों को नुक़सान न पहुंचाएं.
क़तर के विदेश राज्य मंंत्री मोहम्मद अल-खुलैफी ने सोमवार को देर शाम कहा कि अरब देश सीरिया में सक्रिय अलग-अलग गुटों से बातचीत में लगे हैं.
क़तर ने भी सीरिया पर इसराइली हमले पर चिंता जताई है. क़तर के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह सीरिया पर इसराइली हमले को ख़तरनाक घटनाक्रम मानता है.
ये सीरिया की संप्रभुता और एकता पर एक घातक हमला है और साथ ही ये अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का भी उल्लंघन है.
तुर्की

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तुर्की ने कहा है सीरिया में नई सरकार समावेशी होनी चाहिए क्योंकि वहां के लोग अपना भविष्य खुद तय करेंगे.
तुर्की के विदेश मंंत्री हकान फिदान ने कहा है कि तुर्की के लोग इस स्थिति में नहीं हैं कि वो अपने बूते इस देश का पुनर्निर्माण कर सकें.
लिहाजा अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय ताकतों को मिल कर वहां कदम उठाने होंगे ताकि सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता बरकरार रहे.
सीरिया तुर्की में कुर्द और शरणार्थियों को लेकर चिंतित है. तुर्की में कुर्द अलगाववादी समूह सक्रिय हैं. तुर्की का मानना है कि पूर्वी सीरिया में कुर्द लोगों की अच्छी-ख़ासी आबादी है और ये तुर्की के अलगाववादी कुर्दों के समर्थक हैं.
तुर्की में लगभग चालीस लाख सीरियाई शरणार्थी हैं जो सीरिया से भागकर वहां पहुंचे हैं. तुर्की के राष्ट्रपति चाहेंगे कि सीरियाई लोग जल्द से जल्द अपने देश लौट जाएं.
तुर्की की सेना ने पिछले सप्ताह उत्तरी सीरिया में अमेरिका समर्थित कुर्द फौजों पर हमला किया था.
हिज़्बुल्लाह

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लेबनान में सक्रिय चरमपंथी संगठन हिज़्बुल्लाह ने सीरिया के हालात को ख़तरनाक माना है.
हिज़्बुल्लाह ने सीरिया में वर्षों तक असद का समर्थन किया. इसराइल से लड़ाई में उलझने से पहले इसने सीरिया में बशर अल-असद के शासन को भरपूर समर्थन दिया.
हिज़्बुल्लाह के एक नेता हसल फदल्लाह ने एक बयान जारी कर कहा, ''सीरिया में जो हो रहा है वो ख़तरनाक और भारी बदलाव लिए हुए है. सीरिया में ये बदलाव क्यों और कैसे हुआ, उसके मूल्यांकन की ज़रूरत है."
सीरिया में असद के पतन से हिज़्बुल्लाह को लेबनान के पूर्वी इलाके में एक अहम सहयोगी को खोना पड़ा है. सीरिया में लंबे समय से असद के शासन की वजह से हिज़्बुल्लाह तक ईरान से सप्लाई होने वाले हथियार आसानी से पहुंच जाते थे.
ओमान ने सीरिया के लोगों के इच्छा का सम्मान करने की बात कही है. ओमान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "हिंसा के दौर को पीछे छोड़कर सीरिया के लोगों को राष्ट्रीय पुनर्निर्माण की तरफ बढ़ना चाहिए ताकि सुरक्षा, स्थिरता, विकास और समृद्धि के लक्ष्यों को हासिल किया जा सके."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित












