कन्हैया कुमार क्या दिल्ली से लड़ेंगे चुनाव, कांग्रेस में किन नामों की है चर्चा - प्रेस रिव्यू

कन्हैया कुमार

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जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार को, कांग्रेस पार्टी दिल्ली से अपना लोकसभा उम्मीदवार बनाने पर विचार कर रही है.

आम आदमी पार्टी के साथ सीट साझेदारी में कांग्रेस को तीन सीटें मिली हैं और इस पर उम्मीदवारों का चयन अंतिम चरण में पहुंच गया था लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी ने उम्मीदवार चयन को लेकर कांग्रेस को असमंजस में डाल दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के अनुसार, कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि चांदनी चौक और उत्तर पूर्वी दिल्ली सीटों पर उम्मीदवारों के चयन पर इंटर्नल सर्वे किए जाएंगे.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि तीन उम्मीदवारों के चयन पर अंतिम सहमति लगभग बन गई थी और शुक्रवार को नामों की घोषणा होने वाली थी लेकिन इसे चंद मिनट पहले ही टाल दिया गया.

सूत्रों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी के बाद लोगों में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के प्रति सहानुभूति का रुझान दिखाई देने के बाद अब तीन लोकसभा सीटों पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नामों की भी चर्चा होने लगी है, जिसमें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली का नाम भी शामिल है.

पहले बताया जा रहा था कि लवली ने चुनाव न लड़ने का संकेत दिया था.

पार्टी के एक नेता ने कहा, “दिल्ली के कई वरिष्ठ नेताओं ने आप के साथ गठबंधन से पहले चुनाव लड़ने की इच्छा ज़ाहिर की थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपने अपने कारणों से नाम वापस ले लिया. उसी समय पहली बार पश्चिमी दिल्ली सीट से संभावित उम्मीदवार के रूप में कन्हैया कुमार का नाम सामने आया था.''

उन्होंने कहा, “केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद सर्वेक्षणों में जनता की सहानुभूति देखकर जिन नेताओं ने चुनाव न लड़ने का विकल्प चुना था, उन्हें लग रहा है कि उनके पास एक मौका है.''

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि उत्तर पश्चिमी दिल्ली से इस समय पूर्व बीजेपी सांसद उदित राज का नाम आगे चल रहा है.

उत्तर पूर्वी दिल्ली से लवली और कन्हैया कुमार का नाम संभावितों में है जबकि चांदनी चौक से संदीप दीक्षित और जय प्रकाश अग्रवाल का नाम अभी चल रहा है.

मुख़्तार अंसारी के परिवार से अखिलेश के मिलने का मतलब

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इमेज कैप्शन, मुख़्तार अंसारी के भाई सिबगतुल्लाह के साथ सपा प्रमुख अखिलेश यादव, तस्वीर 2021 की.
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समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रविवार को बाहुबली नेता मुख़्तार अंसारी के परिवार से मिलने उनके घर ग़ाज़ीपुर जाएंगे.

द हिंदू की ख़बर के अनुसार, पार्टी के अंदर इस मुलाक़ात को निजी से अधिक मुस्लिम समुदाय के बीच पार्टी के भरोसे को कायम करने के रूप में देखा जा रहा है.

न्यायिक हिरासत में रहते हुए मुख़्तार अंसारी की मौत का आधिकारिक कारण दिल का दौरा पड़ना बताया गया था. हालांकि उनके परिवार को संदेह है कि ज़हर के कारण मौत हुई है.

पार्टी के अंदर एक हिस्से का मानना है कि अखिलेश यादव का दौरा बीजेपी के हिंदुत्व एजेंडे के बरक्स जवाबी ध्रुवीकरण पैदा कर सकता है और मनमाने शासन के ख़िलाफ़ असंतुष्ट लोग एकजुट हो सकते हैं.

हालांकि पार्टी में कुछ लोगों का मत है कि इससे बीजेपी के विभाजनकारी एजेंडा को और मदद मिलेगी.

पार्टी प्रवक्ता अमीक जामेई ने कहा कि पार्टी परिवार के उस आरोप का समर्थन करती है कि अंसारी को जेल में ज़हर दिया गया था.

एक और एसपी नेता ने कहा कि मुख़्तार की रहस्यमय मौत से सरकार प्रायोजित हत्या का संदेह पैदा होता है और अपने प्रचार अभियान में पार्टी सरकार के आलोचक विचाराधीन कैदियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाना जारी रखेगी.

सीएए नियम दोहरी नागरिकता की इजाज़त देते हैं?

सुप्रीम कोर्ट

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नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं के याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस क़ानून के तहत विदेशी नागरिकों को अपने मूल देश की नागरिकता छोड़ने की ज़रूरत नहीं है और इससे दोहरी नागरिकता की संभावना पैदा होती है और यह नागरिकता अधिनियम का उल्लंघन है.

द हिंदू ने सीएए को लेकर एक स्टोरी को अपने पहले पन्ने पर जगह दी है.

सुप्रीम कोर्ट में सीएए पर रोक लगाने कि मांग को लेकर 9 अप्रैल को होने वाली सुनवाई से पहले याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च अदालत में इस आशंका के बारे में लिखित दलील दायर की है.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 9 और संविधान के अनुच्छेद 9 में स्पष्ट रूप से दोहरी नागरिकता को प्रतिबंधित किया गया है.

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर आवेदक किसी और देश का नागरिक है तो उसे भारतीय नागरिकता देने के लिए पहले मूल देश की नागरिकता छोड़ना ज़रूरी है.

याचिकाकर्ताओं ने देश में आने वाले चुनिंदा समूहों को नागरिकता दिए जाने पर भी सवाल खड़े किए हैं. साथ ही धर्म के आधार पर नागरिकता देने के मामले में भी याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया है.

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