You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
टी 20 वर्ल्ड कप के लिए भारत की टीम: किसी को धूप, किसी को छांव
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
जी हां, अगर जून में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप को लेकर टीम इंडिया के चयन के फैसले पर गौर करें तो यही बात उभरकर सामने आती है.
ये सच है कि चयनकर्ताओं ने मौजूदा आईपीएल को चयन का सख्त पैमाना नहीं बनाया, नहीं तो ओपनर के तौर पर अभिषेक शर्मा, मिड्ल ऑर्डर में रियान पराग और तेज़ गेंदबाज़ी में मंयक यादव जैसे नाम सिर्फ सोशल मीडिया की सुर्खियों तक ही नहीं सिमट पाते.
लेकिन, सिक्के का दूसरा पहलू ये है कि मौजूदा आईपीएल में शानदार और निरंतरता वाले खेल ने उन खिलाड़ियों के चयन में अहम भूमिका निभायी जो हाल के महीनों में टीम इंडिया का हिस्सा रह चुके हैं.
रिंकू सिंह का चयन का नहीं होना आईपीएल में उनके साधारण खेल से सीधा जुड़ा है. आख़िर छोटे से करियर में रिंकू ने फिनिशर के तौर पर लगभग 90 की औसत और 176 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए थे.
मीडियम पेस गेंदबाज़ी
आईपीएल शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश के इस खिलाड़ी का 15 सदस्यीय दल में चयन एकदम से तय था. लेकिन, यहां पर बाज़ी मार जाते हैं शिवम दुबे.
चेन्नई सुपर किंग्स के लिए स्पिन-हिटर के तौर पर इस बल्लेबाज़ का बल्ला आग उगल रहा है तो मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी में भी ऑलराउंडर के तौर पर इनका खेल सराहनीय रहा है.
चूंकि, दुबे ज़रूरत पड़ने पर कुछ ओवर की मीडियम पेस गेंदबाज़ी का भी विकल्प दे सकते हैं इसलिए चयनकर्ताओं ने उनके नाम को बेहतर समझा.
एक वजह ये भी हो सकती है उप-कप्तान हार्दिक पंड्या अगर मौजूदा आईपीएल की तरह गेंद और बल्ले दोनों से संघर्ष करते रहे तो कुछ मैचों में उनकी जगह दुबे को ही प्लेइंग इलेवन में अहमियत देने का विकल्प भी मौजूद है.
संजू सैमसन को भी आईपीएल में शानदार खेल दिखाने का लाभ मिला है जैसा कि एक और विकेटकीपर बल्लेबाज़ ऋषभ पंत को मिला.
संजू सैमसन की ज़िद
पंत यूं तो 2021 और 2022 के टी-20 वर्ल्ड कप टीम का भी हिस्सा थे लेकिन दिसंबर 2022 के बाद से उन्होंने एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है.
पंत ने इस आईपीएल के दौरान सक्रिय क्रिकेट में वापसी की और बल्ले और दस्ताने दोनों से ये साबित किया कार दुर्घटना के चलते क्रिकेट से दूर रहने के बावजूद उनके कौशल और ज़ज्बे पर कोई असर नहीं पड़ा है.
वहीं, संजू सैमसन आख़िरकार अपने करियर में पहली बार वर्ल्ड कप टीम में चुन ही लिए गए.
सैमसन के बारे में अक्सर ये कहा जाता रहा है कि टी-20 वर्ल्ड कप वाले साल में उन्हें वन-डे क्रिकेट में दूसरे विकेटकपीर बल्लेबाज़ का विकल्प बना दिया जाता है और वन-डे वर्ल्ड कप वाले साल में टी-20 टीम का.
लेकिन, इस बार सैमसन ने मानो ज़िद ठान ली थी कि हर हाल में उन्हें अमेरिका और वेस्टइंडीज़ का टिकट लेना ही है. और इसलिए ना सिर्फ कप्तान के तौर पर वो अपनी टीम राजस्थान रॉयल्स को प्ले-ऑफ की दहलीज़ पर ला चुके हैं बल्कि एक विकेटकीपर-बल्लेबाज़ के तर पर भी धाकड़ लय में दिख रहें हैं.
आईसीसी की टी-20 रैंकिग
संजू के ही साथी खिलाड़ी युज़वेंद्र चहल ने भी मौजूदा आईपीएल में शानदार खेल के चलते आख़िरी लम्हों में रवि बिश्नोई को मात देते हुए अपना वीज़ा भी पक्का करा लिया.
आपको बिश्नोई के साथ सहानूभूति हो सकती है क्योंकि पिछले दो साल से उन्हें लेग स्पिनर के विकल्प के तौर पर टीम इंडिया में लगातार मौके मिल रहे थे और वो अभी भी आईसीसी की टी-20 रैंकिग में दुनिया के छठे नंबर के गेंदबाज़ हैं और कुछ महीने पहले वो नंबर 1 के पायदान पर भी रह चुके हैं.
लेकिन, चहल ना सिर्फ भारतीय क्रिकेट के टी-20 इतिहास में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ है बल्कि आईपीएल के इतिहास में भी वो यही रुतबा बरकरार रखते हैं.
सैमसन की तरह चहल के साथ भी बहुत सारे पूर्व खिलाड़ियों और फैंस की ये राय रही थी कि उनके साथ अक्सर वर्ल्ड कप के दौरान नाइंसाफी होती रही है.
साल 2021 में आख़िरी मौके पर वरुण चक्रवर्ती सिर्फ आईपीएल के दम पर दुंबई में टी-20 वर्ल्ड कप खेलने चले गए थे तो 2022 में ऑस्ट्रेलिया में हरियाणा के इस शानदार गेंदबाज़ को एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला था.
कानपुर का चाइनामैन
घर में हुए वन-डे वर्ल्ड कप के दौरान भी चहल को मायूसी झेलनी पड़ी थी. चहल के साथी कुलदीप यादव भी टीम में शामिल हैं और ये कानपुर के चाइनामैन के लिए उनके करियर का पहला टी-20 वर्ल्ड कप होगा.
रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल भले ही एक ही तरह के बायें हाथ के स्पिन बॉलिंग ऑलराउंडर हैं. जडेजा जहां निचले क्रम में हिटर की भूमिका निभाते हैं, वहीं, पटेल तीसरे नंबर पर भी बल्लेबाज़ी कर सकते हैं. अहमदाबाद के अक्षर पिछले साल आखिरी लम्हों में कोलंबों में खेले जा रहे एशिया कप के दौरान चोटिल होने के चलते वन-डे वर्ल्ड कप की टीम से बाहर हो गए थे.
तेज़ गेंदबाज़ों में जसप्रीत बुमराह का टीम में शामिल होना वैसी ही औपचारकिता रही जैसा कि टॉप ऑर्डर के लिए कप्तान रोहित शर्मा, यशस्वी जायसवाल, विराट कोहली और सूर्यकुमार यादव का चयन रहा.
बुमराह के साथी गेंदबाज़ के तौर पर अर्शदीप सिंह को लेफ्ट ऑर्म पेसर होने का फायदा मिला है तो ये बात भी उनके पक्ष में गई है कि वो पिछले दो सालों से टी-20 टीम का नियमित हिस्सा रहें है.
मोहम्मद सिराज के साथ भी यही बात लागू होती है और इन दो गेंदबाज़ों के 2024 आईपीएल में संघर्ष को भारतीय चयनकर्ताओं ने नज़रअंदाज़ किया है.
उन्हें लगता है कि टीम इंडिया के साथ ये जोड़ी अलग रूप में नज़र आएगी.
कुल मिलाकर देखा जाए तो चयनकर्ताओं ने कप्तान रोहित शर्मा और कोच राहुल द्रविड़ को ये विकल्प दिया है कि अलग-अलग पिचों पर तेंज़ गेंदबाज़ी के लिहाज़ से चार पेसर भी खिला सकते हैं तो स्पिन वाले विकेट पर चार स्पिनर भी.
ज़्यादातर मौकों पर टीम के पास प्लेइंग इलेवन में तीन ऑलराउंडर को खिलाने का विकल्प भी रहेगा जो किसी भी कप्तान को सूकून दे सकता है.
लेकिन, बल्लेबाज़ी क्रम के बारे में क्या कहा जा सकता है?
इसे महज़ इत्तेफाक तो नहीं कहा जा सकता है 2021 वाले टॉप 7 और 2027 के संभावित टॉप 7 की शक्ल लगभग एक जैसी है जिसमें सिर्फ केएल राहुल की जगह जायसवाल की एंट्री हुई है.
बाक़ी रोहित, विराट, सूर्या, पंत, हार्दिक और जडेजा भी दुबई वाली टीम का हिस्सा थे जो पहले राउंड में चारों खाने चित्त होकर वापस लौट आई थी.
उम्मीद है टीम इंडिया को बेहतर गेंदबाज़ी आक्रमण के चलते ऐसी मनहूसियत से नहीं गुज़रना पड़ेगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)