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आईपीएल के प्लेऑफ़ में राजस्थान रॉयल्स को कैसे पहुंचा हुआ माना जा रहा है?
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
जितना ये मुकाबला राजस्थान रॉयल्स बनाम लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच था उतनी ही बड़ी टक्कर दोनों टीमों के कप्तानों के बीच भी थी.
अगर संजू सैमसन और केएल राहुल मौजूदा आईपीएल में अपनी-अपनी टीमों के कप्तान होने के साथ-साथ विकेटकीपर भी हैं तो दोनों अगले जून के महीने वेस्टइंडीज़ और अमेरिका में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप के लिए चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचने में लगे हुए हैं.
इस लिस्ट में ऋषभ पंत भी हैं जो अपनी टीम दिल्ल कैपिटल्स के कप्तान होने के साथ-साथ विकेटकीपर-बल्लेबाज़ के तौर पर भारतीय चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने की जद्दोजेहद में भी जुटे हुए हैं.
एक तरह से देखा जाए तो चयनकर्ताओं की बैठक से ठीक पहले सैमसन ने एक निर्णायक और मैच जिताने वाली पारी खेलकर शायद अमेरिका और वेस्टइंडीज़ के लिए अपना टिकट पक्का कर लिया हो.
ज़्यादा आक्रामक कौन?
राहुल (78) ने इस मैच में सैमसन (71) से रन थोड़े ज़्यादा ज़रूर बनाये हों लेकिन वर्ल्ड कप का चयन रन और औसत की बजाए इस बात से होना तय होगा कि दोनों में से ज़्यादा आक्रामक बल्लेबाज़ कौन है.
सैमसन इस मामले में 215 से ज़्यादा की स्ट्राइक रेट के चलते काफी बेहतर दिखे. सिर्फ 33 गेंद पर उन्होंने 7 चौके और 4 छक्के जड़ डाले.
तुलना के लिहाज़ से राहुल ने 48 गेंदों पर 8 चौके और 2 छक्के लगाये और उनका स्ट्राइक रेट 158.33 का रहा. पिछले दो टी-20 वर्ल्ड कप में राहुल टीम इंडिया का हिस्सा रह चुके हैं और उनकी स्ट्राइक रेट का मुद्दा मीडिया में पूर्व खिलाड़ियों के लिए बहस का विषय बना था.
यहां तक कि वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ राहुल की बल्लेबाज़ी शैली आलोचनाओं के घेरे में आयी थी. ऐसे में क्या ये कहा जा सकता है कि सैमसन ने शायद मौके पर चौका लगा दिया है?
एक तरह से देखा जाए तो खिलाड़ी और कप्तान के तौर पर पहले 5 हफ्ते के आईपीएल में सैमसन से जो भी हो सकता था वो उन्होंने कर दिखाया है.
आज तक कभी भी आईपीएल के इतिहास में उन्होंने एक सीज़न में 4 अर्धशतक नहीं लगाये थे जबकि अभी आधा टूर्नामेंट ही बीता है कि उनके चार अर्धशतक आ चुके हैं.
राजस्थान रॉयल्स के पास अभी ही हैं 16 पॉइंट्स
यहां तक कि कप्तानी के दम पर सैमसन ने अपनी टीम राजस्थान रॉयल्स की इस 7 विकेट की जीत के साथ अंक तालिक में 16 अंक भी दिलवा दिए हैं.
इस वजह से टीम न केवल टॉप पर है बल्कि अब वो अनौपचारिक तरीके से प्ले-ऑफ में पहुंचने वाली इस सीज़न की पहली टीम भी बन चुकी है. इतिहास गवाह है कि आज तक कभी भी 16 अंक हासिल करने के बावजूद कोई टीम अंतिम चार में पहुंचने में नाकाम नहीं रही है.
इसका मतलब है कि इस मैच के बाद अगर राजस्थान रॉयल्स अपने बचे हुए 5 मैच भी हार जाये तो उनकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. अंकों के लिहाज़ से फिलहाल प्वाइंट्स टेबल पर 10 अंक हासिल करने वाली एक नहीं बल्कि चार टीमों की भीड़ हैं.
बहरहाल, राजस्थान के लिए इस जीत का शानदार आधार तय करने में उनके तेज़ गेंदबाज़ों का भी ज़बरदस्त योगदार रहा.
अगर ट्रैंट बोल्ट ने चिर-परिचत अंदाज़ में विरोधी टीम के ख़तरनाक बल्लेबाज़ (क्विंटन डि कॉक) को सस्ते में पवेलियन भेजने का सिलसिला बरकरा रखा तो वहीं संदीप शर्मा ने भी सबसे कसी हुई गेंदबाज़ी की.
जिस मैच में रविचंद्रन अश्विन और युज़वेंद्र चहल जैसे वर्ल्ड क्लास जोड़ी को 8 ओवर में 80 रन पड़ गये हों वहां संदीप ने 4 ओवर में 31 रन देकर 2 विकेट लिये.
हाल के दिनों में आईपीएल में 200 या 250 से ज़्यादा का लक्ष्य आसानी से बनते भी दिखा है और टीमें बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए अमूमन बहुत दबाव में नहीं दिखी हैं.
राजस्थान के लिए 20 ओवर में 197 रनों की चुनौती बहुत मुश्किल शायद नहीं लगी हो ख़ासकर जिस तरीके से उनके ओपनर यशस्वी जायसवाल और जोस बटलर की जोड़ी ने ताबड़तोड़ अंदाज़ में पहले 6 ओवर में ही 60 रन ठोक दिये.
लेकिन 9वें ओवर पहुंचते पहुंचते सिर्फ और 18 रन जोड़ते हुए मेहमान टीम ने 3 विकेट खो दिये और दबाव पूरी तरह से सैमसन और ध्रुव जुरैल पर आ गया जिनके लिए ये सीज़न बहुत अच्छा नहीं रहा था.
इन दोनों खिलाड़ियों के बीच 121 रनों की साझेदारी ने 9 मैच में राज्सथान को 8वीं जीत दिला दी.
2008 में जब पहली और आखिरी बार राजस्थान चैंपियन बना था उन्होंने लक्ष्य का पीछा करते हुए उस सीज़न 9 मैच जीते थे (90 फीसदी मैचों में कामयाबी) और इस बार राजस्थान ने लक्ष्य का पीछा करते हुए अब तक हर मैच (6) में जीत हासिल की. उनका रिकॉर्ड इस मामले में 100 फीसदी कामयाबी का है.
साल 2021 में सिर्फ चेन्नई ने एक सीज़न में 100 फीसदी कामयाबी (6 मैचों में जीत) लक्ष्य का पीछा करते हुए हासिल की थी.
कहां चूकी लखनऊ टीम
तो लखनऊ से आखिर चूक कहां हुई? कप्तान राहुल को शायद ये एहसास होगा कि आखिरी 5 ओवर में उनके बल्लेबाज़ों ने एक भी छक्का नहीं लगाया और तो और सिर्फ 2 चौके ही लगा पाये.
ये कहना ग़लत ना हो कि सैमसन-जुरैल की साझेदारी के अलावा राजस्थान को खेल के इसी फेज़ ने जीत दिलाने में अहम भूमिका निभायी.
इसे महज़ इत्तेफ़ाक ही कहा जा सकता है कि पावर-प्ले यानि की पहले 6 ओवर और डेथ ओवर्स यानि कि आखिरी के 5 ओवर में लखनऊ ने दो-दो विकेट खोकर 46-46 रन ही बनाये.
वहीं तुलना के लिहाज़ से राजस्थान ने 60 रन और 50 रन बनाये. इसलिए मिडिल ओवर्स (7वें ओवर से 15वें ओवर तक) के दौरान 20 रनों के अंतर से पिछड़ने के बावजूद मैच के नतीजे को जीत में तब्दील करने में सैमसन और उनके साथियों को कोई परेशानी नहीं हुई.
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